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"नियुक्ति"

  • by
  • Sushil
  • कक्कड़ जी पूछ बैठे
    मुझसे आज सुबह
    आजकल आप
    नुक्कड़ की तरफ
    बहुत जाने लगे हैं
    कौन सी ऎसी सीक्रेट
    बात है जो आप
    हमसे इस तरह
    छुपाने भी लगे हैं
    हम तो रोज ही
    जाते हैं नुक्कड़ पर
    जाकर नजरें भी
    घुमा ही लेते हैं
    इधर उधर नीचे ऊपर
    हमें तो कुछ ऎसा
    नुक्कड़ पर नजर
    नहीं है आता
    जो तुम जैसे
    लोगों को ललचाये
    जा रहा हो
    बार बार नुक्कड़
    की तरफ बुलाये
    जा रहा हौ
    हमने कक्कड़ जी
    की तरफ देख कर
    टेढे़ मुंह मुस्कुराया
    नीचे कि होंठों को
    ऊप्पर के दाँतों
    तले दबाया
    फिर उनको
    फुसफुसाते हुवे
    ये बताया
    भैया किसी को ये
    बात मत बताना
    अब हमें दिन में
    कई बार आना
    पड़ेगा नुक्कड़
    की तरफ आना
    महीनें की चार
    बोतलों पर
    सौदा हो गया है
    कांट्रेक्ट पर
    आपका मित्र
    नुक्कड़ का
    कल से चौकीदार
    हो गया है ।
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    "मेरा कंप्यूटर पगला गया"

  • by
  • Sushil
  • दो दिन से तबियत खराब थी
    डाक्टर साहब ने दो दो गोली
    सुबह शाम की दी थी
    कल तक सब ठीक ठाक
    सा ही जा रहा था
    पता नहीं शाम होते ही
    ऎसा महसूस हो रहा था
    कि कोई जबर्दस्ती कुछ
    पिलाये जा रहा था
    गिलास भी कोई कहीं
    नजर नहीं आ रहा था
    मेरा तो जो हुवा सो हुवा
    कंप्यूटर खोला तो वो तो मेरे
    से ज्यादा पगला रहा था
    "उल्लूक टाईम्स" के ब्लाग
    के साथ साथ "नुक्कड़" को
    पता नहीं क्यों दिखा रहा था
    हो सकता हो मेरे कंप्यूटर
    को भी कोई गोली खिला
    कर चकरा रहा था ।

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  • by
  • dr.aalok Dayaram
  • सूखी खांसी (ड्राय कफ़) की कुदरती पदार्थों से चिकित्सा.



    सूखी  और गीली खांसी निवारक सरल उपचार--

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    श्वसन पथ में एकत्र विजातीय तत्वों को बाहर निकालने के लिये खांसी शरीर की नैसर्गिक प्रक्रिया है। खांसी दो प्रकार की होती है। (१) गीली या उत्पादक खांसी जिसमें खांसी होने पर कफ़ या श्लेष्मा निकलती है। (२) सूखी या खोखली खांसी जिसमें कफ़ नहीं निकलता है।
    खांसी का प्राकृतिक पदार्थों से इलाज करना निरापद और शीघ्र प्रभावकारी है। रसायनिक फ़ार्मुलों से इलाज के कई साईड इफ़ेक्ट सामने आते हैं। सैंकडो वर्षों से लाभप्रद साबित हो रहे खांसी के महत्वपूर्ण नुस्खे नीचे दिये जा रहे हैं--

    (१) अदरक का रस ५ मिलि निकालकर १० ग्राम शहद में मिलाएं। दिन में चार बार लेने से खांसी में लाभ होता है।









    २) काली मिर्च और शकर बराबर मात्रा में पीस लें। अब गाय के शुद्ध घी में इस पावडर को मिलाकर गोलियां बनालें। दिन में तीन बार गोली चूसें । खांसी की अच्छी दवा है।








    ३) सूखी खांसी निवारण के लिये २ ग्राम हल्दी पावडर में एक चम्मच शहद मिलाकर चाट लें । दिन में दो बार सेवन करना हितकारी रहता है।





    ४) नींबू का रस ५० मिलि, शहद २०० ग्राम , अदरक रस २० ग्राम मिलाएं । इसमें ५० मिलि गरम पानी मिश्रित करें । खांसी का की दवा तैयार है। शीशी में भर लें। २-२ चम्मच दिन में ३-४ बार कुछ दिन लेने से खांसी ठीक हो जाती है।

    ५) अंगूर में फ़ेफ़डे को शक्ति देने के गुण है। इससे सुरक्छा तंत्र मजबूत होता है। एक गिलास अंगूर का रस कुछ दिन सेवन करना फ़ायदेमंद है। आर्थिक असुविधा न हो तो इसे लंबे समय तक जारी रख सकते हैं।







    ६) काली मिर्च १० नग, शहद के साथ पीस लें। दिन में तीन बार यह नुस्खा बनाकर चाट लेने से सूखी खांसी में आशानुरुप लाभ होता है।

    ७) ग्लीसरीन ३० मिलि,नींबू का रस ३० मिलि,शहद ३० मिलि सबको मिलालें । दवा तैयार है। ५ से १० मिलि दवा दिन में ३ बार लेने से खांसी रोग शीघ्र ही नियंत्रण में आ जाता है।

    ८) काली मिर्च को शकर के साथ चबाकर खाने से सूखी खांसी में राहत मिलती है।

    ९) लहसून खांसी में बेहद लाभप्रद है। ३-४ लहसून की कली चाकू से बारीक काटकर १०० मिलि दूध में उबालकर रात को सोते वक्त लेने से खांसी में लाभ होता है।






    १०) १०-१५ ग्राम गुड को सरसों के तेल मे अच्छी तरह घोटकर दिन में दो-तीन बार चाटने से खांसी काबू में आ जाती है।

    ११) पालक का रस २०० मिलि गाजर का रस ३०० मिलि मिलाकर सुबह के वक्त लेते रहने से खांसी में स्थायी लाभ होता है।

    १२) २-३ ग्राम हल्दी का पावडर ५० मिलि दूध में उबालकर लेने से खांसी ठीक होती है।दिन में दो बार लेना उत्तम है।










    १३) आम को भोभर में भून लें। इस प्रकार भुना हुआ आम दिन में तीन बार खाने से सूखी खांसी का निवारण होता है।


    १४) खारक में फ़ेफ़डे को शक्ति देने के गुण हैं। रात को सोते वक्त ५ नग खारक दूध में उबालकर लेना आशातीत गुणकारी है।




    १५) ताजा अदरक का एक टुकडा चाकू से काट लें उस पर नमक बुरकें और मुहं मे चूसें। बहुत लाभकारी उपाय है।


                                      --डा. दयाराम आलोक
                                                                                             शामगढ (मध्य प्रदेश)
                                                                                             मोबा. ९९२६५२४८५२
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    सुनो रवीन्‍द्र प्रभात : अविनाश वाचस्‍पति को हिंदी ब्‍लॉगिंग के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्‍कार

  • by
  • नुक्‍कड़
  • अरे, नहीं मिला
    क्‍यों कलेजा जला रहे हो
    जिगर अपना फूंक रहे हो
    लीवर को यूं ही घुमा रहे हो

    मालूम है
    बिना काम के काम करने से
    घिस जाता है दिमाग
    दिमाग जो एक जंगल है
    उसमें लग जाती है
    भयानक आग

    आग जो हिन्‍दी ब्‍लॉगों पर
    तेजी से भड़क सकती है
    तब सब कहते हैं
    सक्रियता आ गई है
    हिन्‍दी ब्‍लॉगों पर

    गति हो गई है धीमी
    फेसबुक की
    लेकिन फेसबुक
    द्विभाषी है
    उसमें हिंदी और अंग्रेजी की
    लगी हुई तीली है
    जो माउस लगते ही
    चिंगारी बनके
    सबको भड़काती है

    अच्‍छे विचार वालों को
    आपस में मिलाती है
    बुरे वालों को
    उन्‍हें भी मिलाती है
    बना देती है संगठन
    फिर उभर आते हैं
    उसमें से मठाधीश

    मठ कब्‍जे में कर लिए जाते हैं
    पुरस्‍कार किसी अपने
    अविनाश वाचस्‍पति को
    ज्ञानपीठ दे दिया जाता है

    चिल्‍लाते हैं वे
    जिन्‍हें नहीं मिलते
    ज्ञानपीठ हो गया है
    अज्ञानपीठ
    उसे नहीं मालूम
    हिंदी ब्‍लॉगिंग में
    पुरस्‍कार देना कर्म नहीं है
    हिंदी ब्‍लॉगरों का यह
    धर्म नहीं है

    धर्म है कि कोई कदम बढ़ाए
    तो गर्म हो जाओ
    कदम खींच के उसका
    तुरंत मुंह के बल गिराओ
    उससे भी गर्मागर्म पोस्‍ट लगाओ
    उससे अधिक खौलती हुई
    टिप्‍पणी छापो
    कोई दे तुम्‍हें
    तो चुप लगा जाओ

    नहीं तो मुझे ज्ञानपीठ दो
    का खूब शोर मचाओ
    हिंदी ब्‍लॉगिंग में भी
    होना चाहिए ज्ञानपीठ
    सुनो रवीन्‍द्र प्रभात
    नहीं दिया इस बार मुझे
    तो पुरस्‍कार सारे तुम्‍हारे
    हो जाएंगे औचित्‍यविहीन

    फिर कैसे काटोगे फसल महीन
    पुरस्‍कारों की
    वोटों की
    भाई भतीजावाद की
    इसलिए मत देना
    हिंदी ब्‍लॉगिंग में ज्ञानपीठ
    नहीं तो फिर कैसे दिखाएंगे
    हिंदी ब्‍लॉगर अपनी पीठ
    बिना पुरस्‍कृत हुए
    नहीं दिखाते हैं पीठ
    हिंदी ब्‍लॉगर ढीठ।
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    बढ़े रेट पेट्रोल के, नीलकंठ पी जाँय ।

  • by
  • रविकर फैजाबादी
  • बढ़े रेट पेट्रोल के, नीलकंठ पी जाँय ।
    निगल-उगल सकते नहीं, सारा बदन तपाय ।।

    अभिसार ने अपने ब्लॉग पर टिप्पणी के लिए आमंत्रित किया  ।
    उन के बनाये चित्र और उनके परिचय सहित मेरी टिप्पणी --
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    आपके अपने हिंदी ब्‍लॉगर 'रविकर' दिल्‍ली में अन्‍नाबाबा से मिले : संतोष धन पायो जी

  • by
  • नुक्‍कड़



  • कर दो
    कर लो
    प्रेम
    सबसे
    कर लो

    मन को
    प्रेम से
    पूरा तुम
    भर दो

    कर लो
    संतोष
    मत करो
    संतोष
    धीरज को
    धर लो

    ब्‍लॉगिंग
    का भला
    करो
    बुरे को
    घूरे से
    भर दो

    अच्‍छाईयों को
    सच्‍चाईयों का
    मन दर्पण
    कर दो
    कर लो
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    दक्षिणी दिल्‍ली स्थित संत नगर पेयजल संघर्ष समिति की खबर आज के अखबारों में

  • by
  • नुक्‍कड़
  • आज सोमवार दिनांक 28 मई 2012  विभिन्‍न समाचार पत्रों यथा दैनिक नवभारत टाइम्‍स, दैनिक हरिभूमि, दैनिक जागरण, दैनिक जनसत्‍ता, दैनिक राष्‍ट्रीय सहारा में दक्षिणी दिल्‍ली संत नगर पेयजल संघर्ष समिति के आक्रोश स्‍वरूप प्रदर्शन की सचित्र खबरें प्रकाशित हुई हैं। निवेदन है कि आपके पास भी कुछ ऐसी जानकारी है, चाहे वह अंग्रेजी अथवा अन्‍य किसी भी भाषा के अखबार में प्रकाशित हुई हो, आप उसकी जानकारी पेज नंबर सहित अथवा संभव हो तो स्‍कैन प्रति nukkadh@gmail.com पर भेजकर सहयोग प्रदान करें।

    दैनिक जागरण

    दैनिक हरिभूमि

    दैनिक जनसत्‍ता 

    दैनिक नवभारत टाइम्‍स

    नेशनल दुनिया दैनिक

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    हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की अगर असामयिक मौत होती है तो इसकी जिम्‍मेदार सिर्फ फेसबुक नहीं और भी बहुत से कारण होंगे ?

  • by
  • अविनाश वाचस्पति
  • आजकल फेसबुक से होने वाली हानियों पर सबकी तीखी नजर है। इंसान यह तो चाहता है कि वह तकनीक का पूरा लाभ उठाए लेकिन हिंदी ब्‍लॉगर संतोषी त्रिवेदी कहते हैं कि वह इस विषय पर  होने वाली हानियों से सचेत नहीं रहना चाहता और बुराईयों की गिरफ्त में आ जाता है। अगर वह विवेक का समुचित इस्‍तेमाल करे तो कोई तकनीक कभी भी नुकसानदेह नहीं हो सकती है। 

    फेसबुक से हो‍ने वाले नुकसान से सब परिचित हैं क्‍या जो पाठक इस पोस्‍ट को पढ़ रहे हैं, वे अंतर्जाल और इससे जुड़ी हुई खामियों से परिचित नहीं हैं। ऐसा तो नहीं माना जा सकता कि वे सिर्फ इस माध्‍यम की खूबियां ही जानते हैं और खामियों का उन्‍हें इल्‍म नहीं है। इस विषय पर चौखट ब्‍लॉग के पवन चंदन का मानना है कि फेसबुक हमारा बहुत उपयोगी समय हमसे छीन लेना है। इस मात्र मनोरंजन और समय पास करने का साधन तो माना जा सकता है लेकिन इसमें लगाए गए समय की भरपाई से लिए इससे अभी आय प्राप्ति के कोई विकल्‍प नहीं दिखाई दे रहे हैं। जबकि फेसबुक इससे इसकी प्रत्‍येक एप्‍लीकेशन से भरपूर कमाई के लिए जुटा हुआ है। 

    कमाई किसी भी जरिए से अगर समुचित मानवीय नैतिकताओं को ध्‍यान में रखकर की जाती है तो उसमें कोई बुराई नहीं है। आखिर पैसे की जरूरत कदम दर कदम पड़ती है। ऐसे में अगर कोई माध्‍यम इसकी स्‍वीकृति कानूनों के तहत देता है तो उसे अपनाने में कोई बुराई नहीं है। हिन्‍दी ब्‍लॉगर रवीन्‍द्र प्रभात की राय इसलिए महत्‍व रखती है क्‍योंकि वह इस संबंध में पुरस्‍कारों के जन्‍मदाता है। उनके मन में और कार्य में इसके उदाहरण रोजाना दिखाई दे रहे हैं। 

    इस पर चर्चा करते हुए प्रगतिशील ब्‍लॉग लेखक संघ के मनोज पांडेय का मानना है कि माध्‍यम कोई बुरा नहीं होता बशर्ते कि उपयोगकर्ता सजग रहे और इसकी बुराईयों की ओर खिंचाव महसूस न करे। मनोज हिंदी ब्‍लॉगिंग के उत्‍थान के लिए सहजता के साथ सक्रिय लोगों की टीम को लेकर कार्य कर रहे हैं। 

    हिन्‍दी ब्‍लॉगर और एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन अपने मन की बात बतलाते हुए कहते हैं कि इस माध्‍यम पर सिर्फ टिप्‍पणी में समय बरबाद न करके, रचनात्‍मक कार्यों के करने में जुटना अधिक श्रेयस्‍कर है। सुमन नाइस फेम टिप्‍पणीकर्ता हैं।

    कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि माध्‍यम कोई बुरा नहीं है लेकिन जहां पर रचनाकार दिग्‍भ्रमित हुआ तो उससे साहित्‍य की और माध्‍यम की रचनात्‍मकता को हुए नुकसान की तो भरपाई की जा सकती है और न उसे रोका ही जा सकता है। इसी प्रकार हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में आजकल जो गिरावट का स्‍तर देखने को मिल रहा है, वह ब्‍लॉगिंग में दिखाई दे रहे मतभेद और मनभेद का सबब है। इससे बचने के प्रयास सभी कोअपने-अपने स्‍तर पर करने चाहिएं। 

    आजकल किसी को किसी की अच्‍छी बात भी नहीं सुहाती है और लोकप्रियता पाने के क्रम में ऐसी उलजुलूल बचकानी हरकतें स्‍वाभाविक हैं। जिनकी बानगी फेसबुक पर तो कम, लेकिन हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत की पोस्‍टों में अधिक दिखलाई पड़ रही है। 

    अभी तो हिंदी ब्‍लॉगिंग में लोकप्रियता पाने संबंधी कोई प्रावधान नहीं है फिर भी तुरंत मशहूर होने और जब जगह चर्चित होने के लिए ऐसे उपाय किए जा रहे हैं जो किसी भी तरह से उचित नहीं माने जा सकते। इससे यह साफ जाहिर है कि सच्‍चे रचनाकार इस माध्‍यम से क्‍यों दूर होते जा रहे हैं, जबकि कुछ ने तो इस माध्‍यम को अभी अपनाया ही नहीं है। 

    यदि यही सब रहा तो हिंदी ब्‍लॉगिंग की आकस्मिक मौत के जिम्‍मेदार हम खुद ही होंगे। वह बात अलग है कि मानेंगे नहीं और सामने वाले और उसके कृत्‍यों को ही इसका जिम्‍मेदार ठहराते रहेंगे। वैसे किसी भी नए माध्‍यम के साथ आरंभिक दस बरसों में ऐसी स्थितियों-परिस्थितियों का होना अस्‍वाभाविक नहीं है लेकिन इस कगार से लुढ़कें न और समय रहते संभल जाएं। इसकी बेहद सख्‍त जरूरत है। जिसके लिए अपनी जिम्‍मेदारी का अहसास होना बहुत जरूरी है। 

    इसे अगर आप उपदेश नहीं, अपने मन की आवाज मानेंगे तो अवश्‍य ही इससे बचने का हल खोज ही लेंगे अन्‍यथा इस में खो जाएंगे और फिर कभी स्‍वयं को तलाश भी नहीं पाएंगे। 
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    हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग छोड़ो : फेसबुक पर अन्‍नाबाबा के दारू के गोल गप्‍पों की दुकान पर चलो

  • by
  • Girish Billore

  • हिंदी ब्‍लॉगिंग में वह आनंद नहीं है
    जो आनंद फेसबुक पर मिल रहा है
    दाम तो अभी कहीं नहीं लग रहा है
    जाम फेसबुक पर सरेआम रहा है

    ऊपर की पोस्‍ट पर मिले कमेंट्स का मजा भी लूट लीजिए
    और जो कहना चाहते हैं, तुरंत नीचे टिप्‍पणी में लिखिए
    या फेसबुक पर पधारकर मन के विचार उगल दीजिए।


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    जी हां दुनिया गोल घूमती है

     
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