Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

'पत्रकारिता का बदलता स्वरुप और न्यू मीडिया'. राष्ट्रीय संगोष्ठी (21 मार्च 2012)

  • by
  • Dr Harish Arora
  • मित्रों, दिल्ली विश्वविद्यालय के पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (सांध्य) द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. यह गोष्ठी 21 मार्च 2012 को होगी.

    इस गोष्ठी का विषय है --- 'पत्रकारिता का बदलता स्वरुप और न्यू मीडिया'.

    आप सभी से इस संगोष्ठी के लिए आलेख आमंत्रित हैं. आलेखों का प्रकाशन पुस्तक रूप में किया जायेगा. अध्यापकों के अतिरिक्त शोधार्थी, पत्रकार और ब्लॉगर भी इस संगोष्ठी के लिए अपने आलेख प्रेषित कर सकते हैं. कुछ चयनित आलेखों के सार को संगोष्ठी के दौरान पदने का अवसर भी दिया जायेगा जिसके उपरांत विशेषज्ञ विद्वान अपने विचार रखेंगे. स्वीकृत आलेखों पर लेखकों को आलेख प्रस्तुतिकरण का प्रमाण पत्र भी दिया जायेगा.

    इस संगोष्ठी की सूचना के प्रकाशन के साथ ही हमें न्यूजीलैंड और मोरिशस से कुछ मित्रों के ईमेल प्राप्त हुए है जो अपने आलेख संगोष्ठी के लिए देना चाहते हैं. यह हमारे लिए खुशी की बात है कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का स्वरुप अंतर्राष्ट्रीय हो गया है. यदि विदेश में रहने वाले मित्र इस संगोष्ठी में अपने आगमन की सूचना हमें 10-15 दिनों में दे देते हैं तो हम संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय' के स्थान पर 'अंतर्राष्ट्रीय' स्वरुप प्रदान कर देंगे.

    संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से किसी भी प्रकार का पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जायेगा. प्रतिभागियों को अपने रहने और रात्रि भोजन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी तथा उन्हें किसी भी प्रकार का मार्गव्यय प्रदान नहीं किया जायेगा.

    आपके आलेख drharisharora@gmail.com, davseminar@gmail.com पर भेजे जा सकते हैं. 29 फरवरी, 2012 तक प्राप्त होने वाले आलेखों को पुस्तक में स्थान मिलना संभव हो पायेगा. शेष आलेखों के लिए पुस्तक के पुनर्प्रकाशन पर विचार किया जायेगा.

    अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :-

    drharisharora@gmail.com

    +919811687144

    डॉ हरीश अरोड़ा

    अध्यक्ष, हिंदी विभाग

    पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (सांध्य)

    दिल्ली विश्वविद्यालय

    नेहरु नगर, नयी दिल्ली-११००६५

    Read More...

    mulayam ji kaise juban badalte hain...

  • by
  • devendra ojha
  • Read More...

    बेटी है तो कल है....!!

  • by
  • गिरीश"मुकुल"
  • Read More...

    खुशियों की गिलहरी को यह कौन गुण्‍डा ले उड़ा

  • by
  • अविनाश वाचस्पति

  • आप भी मानेंगे कि भला कोई शरीफ आदमी, किसी को भी गुण्‍डा क्‍यों कहेगा। शरीफ आदमी की तो इतनी भी हैसियत नहीं होती है और न उसमें हिम्‍मत होती है कि वह चोर को चोर कहने का जोखिम चोरी कर सके जबकि चोर के ऐसे तेज पांव होते हैं कि जरा सी आहट पर ही दौड़ अथवा चार  छह मंजिल से कूद लेते हैं। चोर और डर कर भागते पैर के भूत नजर नहीं आते, यह लोक में प्रचलित है जबकि भूत जो खुद ही दिखलाई नहीं देता है तो उसके पैर इत्‍यादि भला कैसे दिखाई देंगे, यह भी विचारणीय है। चोर जब कूदते हैं तो उनके पैर टूटने की घटनाएं सुनी जाती हैं, इससे यह अनुमान लगाया गया है कि उनके पांव काफी तेज लेकिन कमजोर होते हैं इसलिए टूटते भी रहते हैं।
    डकैतों और गुण्‍डों के पैर अब घोड़े भी नहीं होते और वे अब कारों और मोटर साईकिलों में गतिमान रहकर अपने कारनामों को अंजाम देते हैं। उनके हाथों में हथियार होते हैं, न भी हों तो उनके हाथ ही हथियार होते हैं। वे जहां जहां से गुजर जाते हैं, वहां से शरीफ आदमी उनके आने से पहले गुजर चुके  गुण्‍डे से डर नहीं लग रहा हो तो अच्‍छी तरह मिलने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए

    गिलहरी की सच्‍चाई है

    खुशी उसमें समाई है

    दुख की तनिक नहीं

    रोशनाई दी दिखाई है

    इसलिए सबके मन को

    भीतर तक भाई है

    वैसे वह बहन होती है

    गिलहरी होती है

    नहीं होता है गिलहरा

    Read More...

    बता दो आज की तुम्हारे अन्दर कितनी ताकत है ...

  • by
  • devendra ojha
  • Read More...

    जीवन जीने की कला ......!!!!

  • by
  • Vijay Kumar Sappatti
  • प्रिय मित्रो 
    नमस्कार ;
    भोर की किरणों के साथ आपका नए जीवन में स्वागत है . 
    जीवन जीने की कला बहुत ही सहज है . आईये देखे की कैसे : 




    Read More...

    मार्टिन लूथर किंग और गाँधी जी !

  • by
  • रेखा श्रीवास्तव
  • गांधीजी की आकस्मिक हत्या सिर्फ भारत को ही नहीं हिला दिया था बल्कि सम्पूर्ण विश्व इस घटना से स्तब्ध रह गया थामानवता के पुजारी को खो कर सिर्फ हम नहीं रोये बल्कि स्वतंत्रता के और भी सेनानी रो पड़ेउनकी हत्या की खबर पर मार्टिन लूथर किंग ने ये लिखा था -------

    मुझे नहीं मालूम,
    किस धातु का बना था वह,
    टेक, मिसीसिपी, वोल्गा और हंग्हो
    सभी तो लहराती थी.
    उसमें हिमालय ही नहीं,
    अलप्स की ऊँचाई भी समाहित थी
    उनमें हिंद महासागर ही नहीं
    काला सागर, प्रशांत महासागर
    सभी अपनी गहनता लिए बैठे थे
    कैसे थे उनके संघर्ष के हथियार
    नमक सत्याग्रह
    दांडी प्रयाण
    चरखा , खादी, असहयोग
    और अनशन !
    कैसी थी उनकी लड़ाई
    जिसमें विद्वेष - घृणा के लिए
    कोई जगह थी
    हड्डियों के ढांचे से
    परास्त किया
    उन सत्ताधारियों को
    Read More...

    'पत्रकारिता का बदलता स्वरुप और न्यू मीडिया : आलेख सादर आमंत्रित हैं

  • by
  • अविनाश वाचस्पति
  • मित्रों, 


    जल्दी ही दिल्ली विश्वविद्यालय के पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (सांध्य) द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. यह गोष्ठी मार्च के मध्य में होगी. इस गोष्ठी का विषय है --- 'पत्रकारिता का बदलता स्वरुप और न्यू मीडिया'.  आप सभी से इस संगोष्ठी के लिए आलेख आमंत्रित हैं. आलेखों का प्रकाशन पुस्तक रूप में किया जायेगा. अध्यापकों के अतिरिक्त शोधार्थी, पत्रकार और ब्लॉगर भी इस संगोष्ठी के लिए अपने आलेख प्रेषित कर सकते हैं. २-३ दिनों में संगोष्ठी की तिथि तय होते ही नुक्‍कड़ और फेसबुक पर सूचना प्रकाशित कर दी जायेगी. कुछ चयनित आलेखों के सार को संगोष्ठी के दौरान पदने का अवसर भी दिया जायेगा जिसके उपरांत विशेषज्ञ विद्वान अपने विचार रखेंगे. स्वीकृत आलेखों पर लेखकों को आलेख प्रस्तुतिकरण का प्रमाण पत्र भी दिया जायेगा.

    आपके आलेख drharisharora@gmail.comdavseminar@gmail.comपर भेजे जा सकते हैं. २९ फरवरी, २०१२ तक प्राप्त होने वाले आलेखों को पुस्तक में स्थान मिलना संभव हो पायेगा. शेष आलेखों के लिए पुस्तक के पुनर्प्रकाशन पर विचार किया जायेगा. 

    अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :- 
    drharisharora@gmail.com

    डॉ हरीश अरोड़ा 
    अध्यक्ष, हिंदी विभाग 
    पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (सांध्य)
    दिल्ली विश्वविद्यालय 
    नेहरु नगर, नयी दिल्ली-११००६५
    Read More...

    उत्तर प्रदेश की दशा यह है कि मवाली साधू बनने का नाटक करने लगा है ...

  • by
  • devendra ojha
  • Read More...

    शब्‍द विमर्श का फेसबुक महात्‍म्‍य : आप अभी तक इससे दूर क्‍यों हैं

  • by
  • अविनाश वाचस्पति
  • http://www.facebook.com/avinashvachaspati

    फेसबुक की आलोचना करने वालों
    सावधान हो जाओ
    हर चीज में अच्‍छाई और बुराई का संगम होता है
    बुराई अपनाने पर गम होता है
    अच्‍छाई का संग सदा उत्‍तम होता है

    अच्‍छाई का  अगर आप संग करना चाहते हैं
    चाहते हैं फेसबुक पर किए जा रहे
    शब्‍द विमर्श में भागीदार होना
    आपका सहर्ष स्‍वागत है

    बिना एक बार पधारे
    नकारना बहुत आसान होता है
    और आकर नकारना उससे भी आसान
    बशर्ते पसंद न आए अच्‍छाई
    अच्‍छाई जो आपको लग रही हो बुराई

    यह है लिंक 
    आप एक बार इस शब्‍द यज्ञ में
    अपने विचारों की आहुति डालिए
    अपने मन की चंचलता को
    शक्ति बनाईए

    देर किस बात की
    आज बीसवां दिन है
    http://www.facebook.com/avinashvachaspati

    Read More...

    सुर्खियाँ

    Twitter Updates

    Recent Comments

    जी हां दुनिया गोल घूमती है

     
    Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz