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नेताजी की दुखी आत्मा, दोपहरी सी तपती है.

देख शहर की जनता को,दिल मे आग भभकती है,

नेताजी की दुखी आत्मा, दोपहरी सी तपती है.


टिकट मिला जिस दिन,मत पूछो मन मे लड्डू फूट रहे,

सपने देखे बड़े बड़े , जैसे कि दौलत लूट रहे,

नित नित रूप बना कर के,ये लगे रिझाने जनता को,

भूल गये सब अपनी करनी,लगे मनाने जनता को,


आज वही सपना जब टूटा,रात न काटे कटती है,

नेताजी की दुखी आत्मा, दोपहरी सी तपती है.


जब से खड़े हुए है,साहिब,इस चुनाव के महासमर मे,

रूपिया खूब लुटाए फिरते,गाँव से लेकर शहर शहर मे,

सोच रहे थे की पैसे से, वोट खरीदा जाता है,

लेकिन चोट मिला इतना की, दर्द नही अब जाता है,


फिर भी देखो मुँह से कितनी मीठी बात टपकती है,

नेता जी की दुखी आत्मा,दोपहरी सी तपती है.


पाँच साल पहले जब जीते,तब तो गायब हुए जनाब,

अब भी चेहरे पर डाले है,सच्चाई का झूठ नकाब,

परख चुकी है जनता इनके, तरकश के सब तीरों को,

इसीलिए तो धूल चटाया ऐसे ,कायर वीरों को,


जीत नही पाए ये लेकिन,अब भी चाह पनपती है,

नेता जी की दुखी आत्मा,दोपहरी सी तपती है.


देख शहर की जनता को,दिल मे आग भभकती है,

नेताजी की दुखी आत्मा, दोपहरी सी तपती है.

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दिल्‍ली ब्‍लॉगर मिलन संगोष्‍ठी 31 मई 2009 रविवार को नहीं हो रही है : असुविधा के लिए खेद है

दिल्‍ली ब्‍लॉगर मिलन संगोष्‍ठी कार्यक्रम का आयोजन अब रविवार दिनांक 31 मई 2009 रविवार को नहीं किया जा रहा है। कुछ महत्‍वपूर्ण ब्‍लॉगर्स के इस दिन दिल्‍ली में न होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्‍त दिल्‍ली से बाहर के कुछ ब्‍लॉगर्स ने भी इसमें आने की इच्‍छा प्रकट की है इसलिए आयोजन से कम से कम 30 दिन पहले ही इसकी विधिवत घोषणा की जाएगी। आप अपने संपर्क के ब्‍लॉगर्स को इस संबंध में अवश्‍य सूचित करने का कष्‍ट करें ताकि किसी को भी असुविधा न हो। वैसे तो इस संबंध में पहले भी एक पोस्‍ट लगाई गई थी और टिप्‍पणी में इसका उल्‍लेख किया गया था परन्‍तु इस पोस्‍ट को इसलिए प्रकाशित किया जा रहा है ताकि अगर किसी कारणवश यह सूचना जानकारी में न आई हो तो अब आ जाये।

वैसे जानकारी मिली है कि गोवा के प्रख्‍यात ब्‍लॉग ममता टी वी की श्रीमती ममता श्रीवास्‍तव कल शनिवार दिनांक 30 मई 2009 को दिल्‍ली पहुंच रही हैं और 3 या 4 दिनों के लिए दिल्‍ली में होंगी। वे इलाहाबाद से कल दिल्‍ली पहुंचेंगी।

वैसे कहा भी गया है कि जो होता है सदा अच्‍छे के लिए होता है।
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यूनिकोड के दौर में “प्रखर देवनागरी लिपिक” एक नवीन सॉफ़्ट्वेयर


अब कंप्यूटर पर साधारण हिन्दी रेमिंगटन टंकण (हिन्दी टाईपिंग) जानने वाले भी यूनिकोड आधारित देवनारी लिपि (हिन्दी,मराठी,संस्कृत) युक्त पाठ्य को एवम् रोमन लिपि (अंग्रेजी) युक्त पाठ्य को अपने मन पसंद की-बोर्ड लेआउट यानि के रेमिंगटन की-बोर्ड लेआउट में संयुक्त रूप से सहजता से टंकण कर सकेंगें।प्रखर देवनागरी लिपिक रेमिंगटन टंकण प्रणाली आधारित एक सरल शब्द संसाधक है। इस सॉफ़्टवेयर का संपूर्ण इंटरफ़ेस हिन्दी में होकर यूनिकोड आधारित देवनागरी लिपि में है। अभी तक कोई भी हिन्दी का ऐसा सॉफ़्टवेयर उपलब्ध नहीं था जो कि कम्प्यूटर उपयोगकर्ता को यूनिकोड आधारित हिन्दी पाठ्य रेमिंगटन की-बोर्ड लेआउट में लिखने की सुविधा प्रदान कर सका हो! आज हमारे देश में लाखों लोग ऐसे हैं जो की हिन्दी टाइप-राइटर पर हिन्दी टाईपिंग (रेमिंगटन की-बोर्ड लेआउट ) जानते हैं, लेकिन यदि वही लोग जब कम्प्यूटर पर टाईपिंग करना चाहते हैं, तब रेमिंगटन लेआउट में यूनिकोड आधारित टाईपिंग की सुविधा न होने के कारण उनको काफ़ी दिक्कत होती है, लेकिन अब “प्रखर देवनागरी लिपिक” उक्त समस्या को पूरी तरह से समाप्त करते हुये उपयोगकर्ताओं के लिये एक नई सौगात है।
विशेषतायें:-यह सॉफ़्ट्वेयर यूनिकोड आधारित देवनारी (हिन्दी,मराठी,संस्कृत) पाठ्य को रेमिंगटन की टंकण शैली अनुसार, टंकित करने की विशेष सुविधा प्रदान करता है। इस सॉफ़्ट्वेयर के माध्यम से देवनागरी लिपि एवम् रोमन लिपि युक्त पाठ्य को संयुक्त रूप से एक ही पृष्ठ पर आसानी से टंकित किया जा सकता है।यह सॉफ़्ट्वेयर विशेष तौर पर अस्की/इस्की (ASCII/ISCII) फ़ॉन्ट में टंकण करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिये है, जोकि अस्की/इस्की (ASCII/ISCII) फ़ॉन्ट पर रेमिंगटन की टंकण शैली अनुसार टंकण करते हैं। इसके माध्यम से अस्की/इस्की (ASCII/ISCII) फ़ॉन्ट पर रेमिंगटन की टंकण शैली अनुसार टंकण करने वाले उपयोगकर्ता, अपनी आदत के अनुसार देवनागरी पाठ्य को बहुत आसानी से रेमिंगटन की टंकण शैली अनुसार यूनिकोड में 100% शुद्धता से टंकित कर सकते हैं।
प्रखर देवनागरी लिपिक कैसे कार्य करता है? यूनिकोड आधारित देवनागरी पाठ्य कैसे टंकित करें?
सर्वप्रथम {स्क्रोल लॉक} Scroll Lock को चालू {ऑन} करें, {स्क्रोल लॉक} Scroll Lock के चालू रहने पर यह सॉफ़्ट्वेयर आपको देवनागरी लिपि आधारित पाठ्य को यूनिकोड में टंकित करने की सुविधा प्रदान करता है। यदि {स्क्रोल लॉक} Scroll Lock बन्द {औफ़} है तब यह आपको रोमन लिपि में टंकित करने की सुविधा प्रदान करता है। यूनिकोड आधारित पाठ्य को आप ऑन स्क्रीन कुंजीपटल की सहायता से भी टंकित कर सकते हैं, इसको माउस के माध्यम से चलाया जा सकता है।
यूनिकोड आधारित देवनागरी पाठ्य को कैसे सुरक्षित करें?
आप टंकित की हुई फ़ाइल को फ़ाइल मीनू में दिये गये विकल्प "इस रूप में सहेजें (Save As...)" से फ़ाइल को सुरक्षित कर सकते हैं, जोकि *.RTF फ़ाइल के रूप में कम्प्यूटर पर सुरक्षित होगी।
यूनिकोड टंकण हेतु प्रखर देवनागरी लिपिक ही क्यों?
यूनिकोड के आगमन से पूर्व कंप्यूटर पर टंकण की दो विधियाँ बहुत प्रचलित थी जो कि इस प्रकार से हैं:-
१. रेमिंगटन टंकण शैली२. इन-स्क्रिप्ट टंकण शैली
इनमे से रेमिंगटन टंकण शैली प्राचीन एवम् बहु-प्रचलित रही है, जोकि कंप्यूटर के आगमन के कई वर्षों पूर्व से टाईपिस्ट इसी शैली में टाईप-राइटर पर टंकण करते आये हैं। कंप्यूटर के आने पर उपयोगकर्ताओं ने अस्की/इस्की (ASCII/ISCII) फ़ॉन्ट आधारित देवनागरी पाठ्य टंकण के लिये रेमिंगटन टंकण शैली और इन-स्क्रिप्ट टंकण शैली को अपनाया। रेमिंगटन टंकण शैली का सिद्धांत इस प्रकार से है (The way you see, the way you type) अर्थात् "जिस तरीके से आपको पाठ दिखता है, वैसा ही आप टाईप करते हैं", जबकि इन-स्क्रिप्ट टंकण शैली का सिद्धांत इस प्रकार से है (The way you pronounce, the way you type) अर्थात् " जिस तरीके से आप पाठ्य का उच्चारण करते हैं, उसी तरीके से आप टाईप करते हैं"।
यूनिकोड के आगमन पर कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं को यूनिकोड आधारित देवनागरी लिपि टंकण हेतु दो विधियाँ दी गई जो इस प्रकार से हैं:-
१. इन-स्क्रिप्ट टंकणशैली और २. फ़ॉनेटिक इंगलिश टंकण शैली
फ़ॉनेटिक इंगलिश टंकण शैली में हम अंग्रेजी में टाईप करते हैं तो हमें उसी के अनुरूप उच्चारण अनुसार देवनागरी पाठ्य प्राप्त होता है। लेकिन इस टंकण शैली में कार्य करने के लिये उपयोगकर्ता को अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान होना आवश्यक है। जोकि हिन्दी टंकणकर्ता के लिये असुविधाजनक एवम् कठिन है। वर्तमान में हिन्दी उपयोगकर्ताओं के लिये यूनिकोड आधारित देवनागरी टंकण हेतु इन-स्क्रिप्ट टंकण शैली में टंकण की सुविधा है, लेकिन इन-स्क्रिप्ट टंकण शैली में पाठ्य को टंकण करने में अधिक समय लगता है एवम् कई जटिल हिन्दी/संस्कृत के शब्दों को शुद्ध रूप से टंकित नहीं किया जा सकता है। इसलिये कंप्यूटर पर यूनिकोड आधारित देवनागरी टाईपिंग के लिये रेमिंगटन टंकण शैली ही अधिक सरल एवम् उपयोगी है। इसमें हिन्दी/संस्कृत एवम् मराठी के जटिल से जटिल शब्दों को शुद्ध रूप से टंकित किया जा सकता है। इसके अलावा इस शैली से टंकण करने में टंकणकर्ता को अपेक्षाकृत कम समय लगता है, क्योंकि किसी शब्द विशेष को टाईप करने में कम से कम कुंजियों का इस्तेमाल करना होता है, जबकि उसी शब्द विशेष को अन्य टंकण शैली में टंकण करने में अपेक्षाकृत अधिक कुंजियों का इस्तेमाल करना पड़ता है। रेमिंगटन टंकण शैली पूर्व समय से प्रचलित होने के कारण प्रत्येक टंकणकर्ता इस शैली का अभ्यस्त है एवम् उसे कंप्यूटर पर यूनिकोड आधारित पाठ्य को रेमिंगटन टंकण शैली में टंकण करने में अत्यधिक सुविधा होगी। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुये प्रखर देवनागरी लिपिक सॉफ़्ट्वेयर विकसित किया गया है, जिससे कंप्यूटर पर टंकणकर्ता यूनिकोड आधारित देवनागरी (हिन्दी,संस्कृत,मराठी) पाठ्य को रेमिंगटन टंकण शैली में बखूवी शुद्ध रूप से एवम् सहजता से टंकण कार्य कर सके।
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Demo Link:- Prakhar Devanagari Lipik
Demo Link:- Prakhar Devanagari Font Parivartak
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दिल्‍ली ब्‍लॉगर्स मिलन की तारीख दोबारा तय किए जाने के लिए अनुरोध (अविनाश वाचस्‍पति)

सभी ब्‍लॉगर्स को सूचित किया जा रहा है कि दिल्‍ली मिलन संगोष्‍ठी की तारीख, समय और दिन पर पुनर्विचार किया जा रहा है जब तक के लिए इस कार्यक्रम को मुल्‍तवी समझा जाए। दिल्‍ली से बाहर के ब्‍लॉगर्स की भावनाओं का सम्‍मान करते हुए प्रयास किया जाएगा कि बाहर से ब्‍लॉगर्स तो शामिल हों ही, यहां के ब्‍लॉगर्स भी दिल्‍ली से दूर न हों और इस अवसर पर शामिल हों। एक आधा अधूरा कार्यक्रम मुख्‍यधारा के ब्‍लॉगर्स की अनुपस्थिति में करने से बेहतर यह समझा गया है कि इसमें चाहे और समय लगे परन्‍तु मौजूद सभी हों और अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को सार्थक बनायें।

आगामी दिन, दिनांक, समय और स्‍थान के लिए यह मामला पुन: ब्‍लॉगर्स बंधु/बांधवों के मध्‍य विचार के लिए प्रस्‍तुत है।
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दिल्ली मे लगेगा ब्लॉगर्स का मेला-----आईएगा ज़रूर.

दिल्ली मे लगेगा ब्लॉगर्स का मेला,
जुटेगे बड़े बड़े महाशय,
सबके होंगे अलग अलग आशय.

अब मैं बताता हूँ,कैसे कैसे सीन हो सकते है,
देखिएगा आप मेरी कल्पनाओं मे खो सकते है,
थोड़ी देर के लिए सच को भी मत पहचानिएगा,
कुछ अनुचित भी लगे,तो भी बुरा मत मानिएगा.

क्योंकि कोई भी अपनी आदत से बाज़ नही आता है,
और करता वही है,जो उसके मन को भाता है,
अब ज़रूरी नही जो हमारे मन को भाए,
वो ब्लॉगर्स सोसाइटी मे,भी महत्वपूर्ण योगदान निभाए.

इसलिए हम अलग अलग हो सकते है,विचारो मे,
दुनियाँ भर की घटनाओं और सामाजिक प्रचारों मे,
फिर भी अपने अंदाज मे ही रंग भरेंगे,
और देखिएगा कैसे कैसे दूसरों का ध्यान भंग करेगें.

कोई अपनी कहेगा,कोई दूसरे की सुनाएगा,
कोई बैठ के बिना सुन ताल के गीत गाएगा,
कोई कहेगा मेरे पोस्ट पर कमेंट किया करो भाई.
और कुछ देंगे नयी नवेली, सरकार को दुहाई.

कुछ आज पर प्रवचन देंगे,कुछ लोग कल पर,
कुछ कर्म प्रधान कहेंगे,कुछ ज़ोर देंगे फल पर,
कुछ मायानगरी के मायावी,बसिन्दो की बात करेंगे,
कुछ उड़ना सिख रहे,नये नये परिंदो की बात करेंगे.

अविनाश जी अपने दूरसंचार और परेशानी जनता को बतलाएँगे,
सुभाष जी ब्लॉग को सुरक्षित रखने के नुक्से बताएगे,
विजय कुमार जी अपने कविताओं को मन से बाहर लाएँगे,
कप्तान जी बैठ कर खूब कार्टून बनाएँगे.

संगीता जी अपने ज्योतिष् शास्त्र की कहानी बताएँगी,
निर्मला जी हिन्दी साहित्य मंच की शोभा बढ़ाएँगी,
राजेश जी ब्लॉगर्स को उत्साहित भावनाएँ देंगे,
और समीर जी बस दूर से ही शुभकामनाएँ देंगे.

विनीत कुमार मोहल्ले को मीडिया मंत्र सिखाएँगे,
कुलवंत जी खिड़की खोलने और खुलवाने का तंत्र सिखाएँगे,
दिनेश जी अदालत से तीसरा खंभा हिला देंगे,
सुशील कुमार जी पतझड़ मे भी फूल खिला देंगे.

छोक्कर जी,आपके उत्सुक मन की तलाश उलझा देंगे,
संजय बैरागी,तरकसी से समस्त पहेली सुलझा देंगे,
आदित्य रंजन स्वाद और स्वास्थ्य की दवा देंगे,
विवेक रस्तोगी कल्पतरु बन कर शीतल हवा देंगे.

हम बैठ कर आप सब से कुछ सिख लेंगे,
अच्छा लगेगा और हृदय की पन्नो पर लिख लेंगे,
अमल करके मैं भी आप सब के बताए पथ का राही बन जाऊँगा,
और ब्लॉग जगत का जीता जागता सिपाही बन जाऊँगा.

बस यही शुभकामना है,ये मिलन समारोह सफल रहे,
हम सभी के शुभ विचारों का शुभ प्रतिफल रहे,
ऐसे ही सबको हँसाते रहे,
विश्व संप्रदाय पर एक विश्वास सा छाते रहे,
हिन्दी और हिन्दुस्तान की उन्नति करे,
ताकि हमारे उपर हँसने वाले नज़र उठाने से भी डरे.
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दिल्‍ली में 31 मई 2009 रविवार को ब्‍लॉगर्स मिलन (अविनाश वाचस्‍पति)

रविवार 31 मई 2009 को सांय 4 बजे से एक ब्‍लॉगर्स मिलन प्रस्‍तावित है। नुक्‍कड़ वाले हैं इसलिए किसी नुक्‍कड़ पर तो कर लेंगे पर यदि दिल्‍ली में कहीं पर कोई सज्‍जन ऐसे स्‍थान की व्‍यवस्‍था करवा सकें जिसके उपर खुला आसमान न हो और खर्च भी न हो तो वरीयता वहीं देना चाहेंगे जिससे धूप अथवा आंधी बारिश की संभावना से बचा जा सके।
वैसे कनाट प्‍लेस का सैन्‍ट्रल पार्क, लोधी गार्डन, इंडिया गेट, आस्‍था कुंज (नेहरू प्‍लेस) के खुले आसमान के नीचे बिछी घास तो उपलब्‍ध है ही। पहली बार सिर्फ मिलना मिलाना और जान पहचान ही होगी। समय होने पर इससे अधिक पर चर्चा भी की जा सकेगी। पर विषय यहीं पर तय हो जिससे ब्‍लॉगर्स मिलन की जय हो और किसी को इससे न भय हो।

जो सचमुच पहुंच सकें, वे अपनी स्‍वीकृति टिप्‍पणी में अवश्‍य दें। दिन और समय तो निश्चित है सिर्फ स्‍थान अनिश्चित। इसे भी बृहस्‍पतिवार, शुक्रवार तक निश्चित कर लिया जाएगा। दिल्‍ली और आसपास से जुड़े ब्‍लॉगर्स और उस दिन दिल्‍ली में बाहर से आये हुये ब्‍लॉगर्स को भी सादर आमंत्रण है। अपना फोन नंबर, ई मेल पता व अन्‍य संपर्क अवश्‍य दर्ज करें।
इस कार्यक्रम को अपना ही मानें। नुक्‍कड़ तो सबका साझा है।
इस पोस्‍ट को अपने ब्‍लॉग पर भी सहर्ष प्रकाशित कर सकते हैं अथवा इसका लिंक दे सकते हैं।
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कम्‍प्‍यूटर में भी राम : रैम बनकर बसे हुए हैं (अविनाश वाचस्‍पति)

राम की महिमा है भैया देखो अपरंपार
सारे जगत को इससे ही अनोखा प्‍यार
राम राम ही हैं राम रहेंगे राम कहेंगे
कंप्‍यूटर वाले इन्‍हें रैम कहेंगे
रैम कहेंगे

रैम कहो या कहो राम
जय श्री राम
ताकत के हैं सच्‍चे धाम जय श्री राम
राम बिना नहीं हिलता पत्‍ता
श्री राम
कंप्‍यूटर बिना रैम के नहीं चलता राम

मौसम आम का भी कारनामा राम का
बेमौसम भी आम कारखाना राम का
कंप्‍यूटर बनाया इसमें भी राम बसाया
मां की महिमा को इसमें है जतलाया

बिना मदरबोर्ड और राम के कैसा कंप्‍यूटर
कंप्‍यूटर को करो सलाम पर मत बिसराओ
मां का नाम राम का नाम शक्ति का धाम
कंप्‍यूटर है यादों का मां का राम का प्रणाम
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कार्टून- भोजन करने का नया तरीका.....

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मल्‍टीसिम मोबाइल की कहानी

पंगेबाज के जन्‍मदिन पर लिया गया एक पंगा
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हाय रे मंदी....अभी और कितना

मंदी मे सब बदल रहे है,साधु, नेता,चोर,

सबके बिजनेस पे छाया है,इस मंदी का ज़ोर,

कहाँ मुनाफ़ा यही सोच कर, सभी लगे तैयारी मे,

 साधु बाबा भी अब तो ,फँस जाते है बमबारी मे.

 

पर नेता को नही फ़र्क है,ना मंदी का कोई गम है.

 इस मंदी के महादौर मे, जनता से मिलते ही कम है,

 उन्हे सुरक्षा का डर है,इस असुरक्षित जनता से

दुर्जन भी भयभीत हुए है,अब तो सज्जनता से.

 

इनकी क्या मंदी होगी, ये तो जनता का खाते है,

लूट खसोट ग़रीबो को ये,अपना माल बनाते है,

 हार,जीत,मंत्री,सत्ता, सब कुछ नोटों का खेल है,

उनकी महागणित के आगे,आज गणित हर फेल है,

 

 मंदी मंदी कहते कहते थक गयी जनता सारी,

 कब तक रहेगी मंदी जैसी इतनी बड़ी बीमारी,

 अब तो फिर से वही पुराना,दिन जाए तो अच्छा,

फिर से खुशियाँ लौट पड़े,अपने द्वारे पर ,तो अच्छा.

 

जब हम फिर से लहराएँगे,वो दिन लौट के कब आएँगे,

सूखे मुरझाए चेहरों पे, सुर्ख चंद्रमा कब छाएँगे,

कितनो के घर बिखर गये, अब भी क्या कुछ बाकी है,

 डूब रही है अर्थव्यवस्था, वो कहते तैराकी है,

 

आएगा फिर से वो सावन, आँखे बोझिल मत होने दो,

 नया सवेरा फिर से होगा,स्वाभिमान को मत रोने दो,

उलझन के चादर से निकलो,ईश्वर घर अंधेर नही,

रात घनी घनघोर गयी तो,कल आने मे देर नही,

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