गुडिया गुड्डे और परियों की कहानी
ख्वाब , आंसू और मुस्कान के रिश्ते
राजा रानी, परियां और खुदा के फ़रिश्ते
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तो हम देखते हैं कि न तो कोई वैज्ञानिक,न दार्शनिक ओर न ही कोई पैगम्बर,मसीहा इत्यादि ही जीवन के सत्य को उजागर कर पाता हैं । मेरी दृ्ष्टि में तो पैगम्बर,मसीहाओं नें तो भ्रमपूर्ण ज्ञान के प्रचार के साथ साथ ओर भी बहुत सारी गलतियाँ की हैं । सामाजिक अशान्ती को दूर करके मानवी समाज को सुखी एवं समृ्द्ध करने के लिए उन लोगों नें जिन उपदेशों का प्रचार किया,उनका क्या पूरा पढ़ने और टिप्पणी देने के लिए यहां क्लिक करें


| 13 से 15 अक्टूबर तक बहरीन यात्रा पर जाना हुआ. आइए आपको भी इस यात्रा पर हुए अनुभवों से अवगत कराया जाए. 11,000 हजार मीटर की उंचाई पर 725 कि.मी. प्रति घंटे की गति से जब जहाज उड़ान भरता है, तो बाहर का तापमान शून्य से 47 डिग्री नीचे होता है. दिल्ली से मस्कट (ओमान) की उड़ान करीब 4 घंटे की है. जब जहाज पाकिस्तान के शहर कराची के ऊपर से उड़ता है तो शहर नीचे दिखाई देता है. इसके बाद जहाज़ ओमान की खाड़ी के ऊपर उड़ान भरता है. मस्कट से मनामा (बहरीन) की उड़ान डेढ़ घंटे की है. बहरीन साउदी अरब और ईरान के बीच फारस की खाड़ी में स्थित है. |
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भारत का राजदूतावास |
| हम जहां ठहरे, उस होटल रमादान के ठीक सामने राजनिवास था और होटल के पीछे दूसरी तरफ कुछ ही दूरी पर भारतीय राजदूतावास था.
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बहरीन में सड़क के दायीं ओर चलने वाला यातायात बहुत अनुशासित है किंतु जाम बड़ी समस्या हैं. |
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| बहरीन, खाड़ी के देशों में सर्वाधिक आज़ाद ख्याल देश है. अरब संस्कृति के बावजूद यहां कामकाजी महिलाएं आपको समाज के हर क्षे़त्र में मिलेंगी. यहां के होटलों में मदिरा पान आम बात है. शायद यही कारण है कि यहां के होटल सप्ताहांत में भरे मिलते हैं. |
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प्यारे चेतन,
एक भगत तो चेतन है । यह जानकर अच्छा लगा और इतना चेतन कि उसने मुझे ई मेल के इस क्रांतिकारी दौर में चिट्ठी लिखकर नि:संदेह एक क्रांतिकारी कार्य ही किया है। यह भारत की चेतनता है। भगत भी हो और चेतन भी हो – ऐसा अपवाद ही होता है और इसी अपवाद के कारण ई मेल के दौर में पत्र लिखने का साहस किया है। ओबामा ने मेरे साथ डिनर की ख्वाहिश जाहिर की तो उसे नोबेल का हकदार मान लिया गया और शांति का नोबेल उसके नाम कर भी दिया गया। इस चेतन भगत ने मुझे सीधे पत्र लिखकर कलम की ताकत के अहसास को जीवंतता प्रदान की है इसलिए इस भगत को नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए, शांति का संपन्न हो गया है तो सादगी का ही दो, जरूर दो। ई मेल के युग में पत्र लिखना सादगी तो है ही, चिट्ठी लिखने की परंपरा से भी प्रेम का द्योतक है।
मेरे पास यह अखबार भास्कर आज ही पहुंचा है और मैं इसका जवाब नुक्कड़ ब्लॉग पर इसलिए दे रहा हूं क्योंकि इसे जानने के अधिकारी लोगों तक बात पहुंचाने के लिए नुक्कड़ ही मुझे जंचा है और इसी ब्लॉग के मॉडरेटर अविनाश ने अपने नाम के ब्लॉग अविनाश वाचस्पति पर हिन्दी ब्लॉग जगत की (गर महात्मा गांधी ने ब्लॉग बनाया होता) प्रतिक्रिया जानी थी। मैं बतलाना चाहता हूं कि मैं अपने हिन्दी ब्लॉग का नाम बापू ही रखता, राष्ट्रपिता नहीं रखता। सहज और सादगी का पर्याय – यह सूत्र वाक्य होता मेरे ब्लॉग का। बिना लाग लपेट के अपनी बात अपनी मजबूती से कहने वाला।
मैं भी हाड़ मांस का ही इंसान था और वही नियम मेरे पर भी लागू होते हैं। 140 बरस का मैं कैसे हो सकता हूं। इतना झूठ, जबकि यह मीठा झूठ है जबकि मैं बार बार कहता रहा हूं मुझे झूठ सख्त नापसंद है परंतु तुम कल्पनाओं के सहारे मुझे झूठ से बरगलाना चाह रहे थे। जिस प्रकार जन्मदिन पर शुभकामनाओं के जरिए एक भ्रम पैदा किया जाता है कि तुम जिओ हजारों साल और साल के दिन हों पचास हजार। खैर ...
बैंक के हर नोट पर मेरी तस्वीर तो छापी है जबकि खोट का जन्म ही नोट से होता है। इसलिए तुम मुझे कभी भुला न पाओगे। वो खोट अपने अतिवादी स्वरूप में तब आता है जब नकली बनाया जाता है। वैसे बिना बनाये भी नकली स्विस बैंकों में ढेर लगाना भी खोट ही है। मेरी मूर्तियों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है जिस तरह से मेरी अच्छी बातों की हो रही है बिल्कुल उसी तरह। प्रतिष्ठित सड़कों का नाम मेरे नाम से होने पर ऐसा तो नहीं होता कि उनमें गड्ढे नहीं होते या नहीं होतीं दुर्घटनायें। जब यही सब होना है तो किसी को मेरे नाम से क्या लेना देना है। राजनेता मेरे अनुरूप खुद को ढालने की कोई कोशिश नहीं करते बल्कि मुझे ही उन्होंने अपना वोट बैंक बनाने के लिए सदा ही नये नये रूपों में ढाला है।
मेरा जो अनुगमन आप बतला रहे हैं वो और कुछ नहीं, निरा स्वार्थ सिद्धि का साधन है। मेरे अनुगमन से अच्छा मानवता की पूजा करना है। वोट बैंक हथियाने का जरिया है। इसी प्रकार मुन्नाभाई एमबीबीएस में गांधीगिरी दिखलाकर दर्शक हथियाए गए थे। जहां तक मेरे नीचे आने की बात है तो चाहे मैं नीचे आकर सदा ही रहूं। तो मुझ पर बहस वगैरह तो खूब होंगी जिनमें मुझे पूरी बेदर्दी से सरदर्द होने तक घसीटा जाएगा परन्तु इसे चैनलों के लिए एक सनसनीखेज खबर से अधिक कोई स्थान नहीं मिलेगा और न ही कोई मेरे आने से सीखना चाहेगा। आज सीखने वाले नहीं है, सब सिखाने वाले हैं – वो चाहे युवा पीढ़ी हो, बचपन हो या ... और बुजुर्गों के पास तो सनातन सिखाने का अधिकार ही है। मैं तो अब भी जोरदार तरीके से कह रहा हूं कि सदा अपने दुश्मनों को प्यार करो जिससे वो तुम्हारे ऐसे मित्र बनें जो मित्रता की मिसाल हों।
तुमने यह माना तो है कि युवाओं का इस्तेमाल किया जाता है और वे इस्तेमाल होने के लिए ही बने हैं। इन्हें बचाने के नाम पर तो मैं भी फेल हूं और इसे स्वीकारने में मुझे कोई शर्म महसूस नहीं होती। ये अपना भुला बुरा नहीं जानते हैं और न जानना ही चाहते हैं। इन्हें अपने से अधिक कोई समझदार नहीं लगता है। अधिक विस्तार में न जाते हुए मैं अपनी बात यहीं संपन्न कर रहा हूं अब यह कोई प्रवचन तो है नहीं जो खूब सारा और घंटों दिया जाये दूसरा किसी के पास समय नहीं है इतना सुनने का, और सच बतलाऊं तो उन्हें जरूरत भी नहीं है। बीच बीच में उनका मोबाइल भी बजेगा। मेरे जितने लेख धरती पर मौजूद हैं वे ही बहुत ही हैं अगर सही से अमल में लाए जाएं, माने जाएं और अधिक की जरूरत नहीं है। मैं कह चुका हूं कि जो जागते हुए सोने का बहाना कर रहा है उसे नहीं जगाया जा सकता है। जो सो रहा है उसे जगाना तो संभव है। तो मुझे तो सब सोने का बहाना ही करते दिखलाई दे रहे हैं।
हे राम।
अपनी समूची आस्थाओं के साथ
तुम्हारा बापू

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