
दिल्ली ब्लॉगर मिलन की झलकियाँ याद करते हुए , आइये आपको भी सुना देते हैं ये दास्ताँ ।
बात उन दिनों की है जब मैं एम बी बी एस कर रहा था । एक दिन हरियाणा के एक गाँव चला गया, एक शादी में ।
हलवाई की कढाई पर सब बुजुर्ग बैठे हुक्का पी रहे थे। मैंने जाकर राम राम करी।
तो एक ताऊ बोला --राम राम भाई छोरे। आज्या , और सुना कौन सी क्लास में पढ़े सै।
मैंने सोचा --इनको एम बी बी एस का मतलब तो क्या समझ आएगा । सो कहा --ताऊ मैं डॉक्टरी का कोर्स कर रहा हूँ।
ताऊ बोला --भाई कोर्स वोर्स तै ठीक सै, पर न्यू बता , कितनी ज़मात पढ्या ।
मैंने कहा -बस ताऊ यूँ समझ लो कि बारहवीं पास कर के दाखिला लिया था।
भाई , बस बारा ही पढ्या --अरै थोडा ए पढ्या । अरै भाई कम तै कम १४ पढ़ कै बी ए पास तै करनी चाहिए थी।
मैंने कहा ताऊ, बस ये दाखिला मिल गया तो ---।
ताऊ --न भाई न , मज़ा कोन्या आया , अरै बी ए पास करता तै पटवारी बनता , डी सी बनता ।
यो डॉक्टरी का कोर्स करके के कम्पाउंडर बनेगा।

बढ़िया...मजेदार संस्मरण
प्रत्युत्तर देंहटाएंगाँव के बड़े बूढों की बात ही निराली है...मजेदार संस्मरण है..
प्रत्युत्तर देंहटाएंaanand aa gaya sir !
प्रत्युत्तर देंहटाएंjai ho........
Aisa bhi hota hai...
प्रत्युत्तर देंहटाएंसंस्मरण मज़ेदार है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत मजेदार संस्मरण है !!
प्रत्युत्तर देंहटाएंरोचक संस्मरण ....!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुंदर हास्य!
प्रत्युत्तर देंहटाएंअब तो लोग कंपाउंडरी का कोर्स कर के डाक्टर हुए जा रहे हैं।
गाँव में कलेक्टर पहुंच गया, एक बूढी माँ ने आशीर्वाद दिया कि बेटा भगवान तुझे पटवारी बनाए।
प्रत्युत्तर देंहटाएंहा हा हा ! दिनेश जी और अजित जी , बढ़िया कमेंट्स !
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