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चैनलों को ज्योतिष का बुखार भाग

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  • पुष्कर
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  • एक प्राचीन कथा पर विश्वास करें तो ज्योतिष एक श्रापित विद्या है। एक बार नारद जी कैलाश पर्वत पर पहुंचे भगवान शिव ने कहा नारद जी आप तो बहुत बड़े ज्योतिषी हैं, बताइए सती इस समय कहां है? नारद जी ने गोचर देखा और गणना कर बताया कि माता सती इस समय स्नान कर रही हैं और उनके शरीर पर कोई वस्त्र नहीं है। शिवजी बोले आने दीजिए पूछते हैं जब माता सती पहुंची तो शिव जी ने सारी बात बताई तो सती बोलीं नारद जी के द्वारा की गई गणना सही है। लेकिन ऐसी विद्या जो वस्त्रों के पार भी देख ले ठीक नहीं है इसलिए मैं इस विद्या को श्राप देती हूं कि कभी भी कोई ज्योतिषी सौ फीसदी गणना नहीं कर सकेंगे। यह आज भी अकाट्य सत्य है। लेकिन आज ख़बरिया चैनलों को ज्योतिष का ऐसा बुखार चढ़ा है कि वे किसी भी बकलोल बगुला भगत को बुला कर लोगों की निजी जिंदगी के वस्त्रों को सारी दुनिया के सामने उघाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते। READ MORE...

    4 comments:

    mahadev ने कहा…

    ज्योतिष और क्रिकेट भारतीय टीभी चैनलो का दुर्भाग्य है। इन दोनो पर रोक लगाने या इनके विरुद्ध आवाज उठाने वालो के मै साथ हुं।.......

    सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi ने कहा…

    एक बार देवी लेविंस्‍की समुद्र में नहा रही थी। तब क्लिंटन भगवन ने पूछा कि क्‍या साइंस में इतनी ताकत है कि वह बता सके कि लेविंस्‍की क्‍या कर रही है तो वैज्ञानिकों ने हाथों हाथ देवी के नग्‍न चित्र क्लिंटन को मेल कर दिए। क्लिंटन भगवन को विश्‍वास नहीं हुआ। उन्‍होंने देवी को फोटोग्राफ दिखाए और पूछा कि क्‍या वे उन्‍हीं के फोटो हैं देवी ने फोटो देखकर कहा कि इतनी सटीकता अच्‍छी नहीं है। इससे उन्‍होंने सीआईए के जरिए श्राप दे दिया। उसके बाद से अमरीकी कभी सही गणनाएं नहीं कर पाए। देख लीजिए ग्‍लोबल वार्मिंग का खोटा सर्वे, ओबामा को नोबल शांति का गलत आंकलन...

    क्‍या क्‍या गिनाउं... :)

    डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

    वस्तुतः ‘ज्योति’ शब्द से ‘ज्योतिष’ की उत्पति हुई है। ज्योति शब्द स्वत: प्रकाश अर्थात आलोक का द्योतक है। ......जिस प्रकार सजग शिक्षक अपने विद्यार्थियों के आचरण और व्यवहार में निहित गुण-दोषों को देखकर उसके जीवन का खाका खीच देता है। वैसे ही ज्योतिषी भी जातक के जीवन में घटित होने वाली धटनाओं का अनुमान लगाता है।.............. ज्योतिष शास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है। इस विज्ञान के निष्कर्ष अन्य सामाजिक विज्ञानों की तरह से शतप्रतिशत खरे हो ही नहीं सकते हैं। कु़दरती तौर पर संसार का हर व्यक्ति अपने आप में मौलिक होता है। इस आधार पर हर व्यक्ति का भविष्य भी दूसरे से भिन्न होता है। अत: शुद्ध विज्ञान की भांति इसके परिणामों की आशा करना व्यर्थ है।............ हाँ किसी धंधे को चमकाने के लिए...... मीडिया एक अच्छा माध्यम है । ‘ज्योतिषियों’ और मीडिया की आपसी साठगांठ से दोनों का धंधा फलफूल रहा है।............ वर्तमान को सुधारने से भविष्य सुधरता है। इस तथ्य से जो मनीषी परिचित हैं उन्हें मालूम हो जाता है कि उनका भविष्य कैसा होगा।

    नारदमुनि ने कहा…

    nai jankari ke liye aabhar.narayan narayan

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