लिखने
और कुछ न लिखने
के बीच
फर्क सिर्फ
कह देने
और
न कह देने सा है
कुछ
जो सोचा गया
कभी
कहा नहीं गया
कुछ
जो मन में चला
कभी
लिखा नहीं गया
कुछ
सोच कर भी
अनकहा रहा
कुछ
जान कर भी
अलिखित है
आज तक....
लिखने
और कुछ न लिखने
के बीच
फर्क सिर्फ
कह देने
और
न कह देने सा है
कुछ
जो सोचा गया
कभी
कहा नहीं गया
कुछ
जो मन में चला
कभी
लिखा नहीं गया
कुछ
सोच कर भी
अनकहा रहा
कुछ
जान कर भी
अलिखित है
आज तक....
6 comments:
bahut badhiyaa
सोच कर भी
अनकहा रहा
कुछ
जान कर भी
अलिखित है
आज तक...
सही है !!
आपका चिंतन सही दिशा में है, जो सामने आये वही सच होता है.
- विजय
वाह भई मयंक जी. बहुत बढ़िया.
bahut kuch alikhit rah jata hai sirf bhavon mein hi bah jata hai.........bahut sundar prastuti.
मैंने तो कह -लिख दिया बढ़िया है .
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आपके आने के लिए धन्यवाद
लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद