Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

अलिखित....

Posted on
  • by
  • मयंक
  • in
  • लिखने

    और कुछ न लिखने

    के बीच

    फर्क सिर्फ

    कह देने

    और

    न कह देने सा है

    कुछ

    जो सोचा गया

    कभी

    कहा नहीं गया

    कुछ

    जो मन में चला

    कभी

    लिखा नहीं गया

    कुछ

    सोच कर भी

    अनकहा रहा

    कुछ

    जान कर भी

    अलिखित है

    आज तक....


    मयंक सक्सेना

    6 comments:

    रश्मि प्रभा... ने कहा…

    bahut badhiyaa

    संगीता पुरी ने कहा…

    सोच कर भी

    अनकहा रहा

    कुछ

    जान कर भी

    अलिखित है

    आज तक...

    सही है !!

    VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

    आपका चिंतन सही दिशा में है, जो सामने आये वही सच होता है.
    - विजय

    काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

    वाह भई मयंक जी. बहुत बढ़िया.

    वन्दना ने कहा…

    bahut kuch alikhit rah jata hai sirf bhavon mein hi bah jata hai.........bahut sundar prastuti.

    Manju Gupta ने कहा…

    मैंने तो कह -लिख दिया बढ़िया है .

    एक टिप्पणी भेजें

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
    Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz