आप अब कादम्बिनी मासिक पत्रिका ऑनलाईन पढ़ सकते हैं : फिर मत कहिएगा खबर नहीं हुई

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  • अविनाश वाचस्पति
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    कादम्बिनी
    आप जिसे चाहते हैं
    आप जिसे पसंद करते हैं
    आप जिसे पढ़ते हैं
    वो मैं हूं
    जी हां, मैं कादम्बिनी हूं
    आपकी प्‍यारी मासिक पत्रिका।

    मैं भी इंटरनेट पर आ गई हूं
    और आपके पास आना चाहती हूं
    आप पढ़ना चाहते हैं मुझे
    तो सुरक्षित कर लें
    ऊपर दिए गए लिंक को
    और भेजें मेरे चाहने वालों को भी
    जो अब इंटरनेट पर मौजूद रहते हैं
    मैं भी अब आप सबके साथ
    इंटरनेट पर आ गई हूं
    चाहती हूं कि आप सब
    मुझसे इंटरनेट पर अवश्‍य मिलें
    देश ही नहीं विदेश के
    शहर ही नहीं गांव के
    सभी पाठक, बच्‍चे हों
    जवान हों, किशोर हों
    या हों वृद्ध
    पर पढ़ने की इच्‍छा हो जवान
    वे मेरे लिंक को सुरक्षित कर लें।

    6 टिप्‍पणियां:

    1. आपकी कृपा से बहुत सालों बाद कादंबिनी देख पाया हूँ। रंग-रूप बदला हुआ है। जंतर-मंतर और टोना-टोटका ना पाकर बहुत अच्छा लगा।

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    2. वाह जी बहुत अच्छा किया ये तो इन्होंने. ख़बर के लिए धन्यवाद.

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    3. कर लिया गुडिया रानी. तुम्हें कैद कर लिया मैंने.
      जानती हो जब छोटी सी थी तब से पढ़ रही हूं तुम्हें.
      बीच में एकदम साथ छूट गया.लोगों ने बताया 'अब नही आती तुम?'
      कहीं नही जा सकती तुम ! मैं ही भूल बैठी थी तुम्हें.अब रोज मिला करेंगे.'राजेन्द्र अवस्थीजी के सम्पादकीय में किये जाने वाले वो हस्ताक्षर भी. बीच में तुम्हारा रूप भी बदल दिया था.
      यूँ अच्छा नही लगा मुझे किन्तु........ हर रूप में मंजूर थी मुझे.
      तुम से कितनी यादें जुडी है मेरी तुम क्या जानो.
      पर....नेट की दुनिया में तुम्हारा स्वागत है.

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    4. इस अच्छी खबर के लिए आभार।

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    5. इतनी अच्छी जानकारी के लिए आभार। कादम्बिनी नेट पर आ गई है यह देखकर बहुत प्रसन्नता हुई ।

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    6. जै हो देख आए हम वो गलियां

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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