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प्रिंट मीडिया में ब्‍लॉग चर्चा : मयंक, सलिल श्रेष्‍ठ कवि : डीएलए में प्रकाशित

डीएलए दिनांक 31 जुलाई 2010 पेज 11
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ये हैं श्री राजीव तनेजा और ये हैं श्री पवन चन्दन



ये हैं श्री राजीव तनेजा और ये हैं श्री पवन चन्दन
आज ये दोनों उपस्थित हैं सितारों की महफ़िल में .....
ब्लोगोत्सव-२०१० पर
सितारों की महफ़िल में आज राजीव तनेजा
सितारों की महफ़िल में आज पवन चन्दन

क्यों ?
यह जानने के लिए ऊपर अंकित नाम पर किलिक करें ....!
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ब्‍लॉगिंग छोडि़ये नोट बटोरिये

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मुंबई में होने वाला है हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन : मेरी अनुशंसा है कि इनसे मिल लें (अविनाश वाचस्‍पति)

एक को पहचानते हैं
दूसरे को पहचानने का मौका है
मौका मत गंवायें
आ रहे हैं मुंबई में
3 चार और 9 अगस्‍त 2010 को

कलाम-ए-चौहान
पहले मिलें यहां
फिर मिलें मोबाइल पर
नंबर है उनके ब्‍लॉग पर
फिर हो जाएं रूबरू
बांटें आपस में
विचारों की खुशबू

जो खुशबू बांटें
उनके खींचें चित्र भी
हम देखना चाहेंगे
महसूसना चाहेंगे
विचारों को भी

छापें सब अपने अपने ब्‍लॉगों पर
फिर हम छापा मारेंगे
पढ़ेंगे और सराहेंगे
जो गलत कहा तो
उसे जरूर डांटेंगे।

बाद में मत बनाना बहाना
हम तो भूल गए थे
2 तारीख तक तो याद था
फिर 5 को याद आ गया था
फिर से भूल गए
और 8 को याद आया
फिर 9 को भूल गए।
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सद्भाव के डंपर्स ने उडा दिए सडकों के धुर्रे

सडक किनारे पडे बोल्डर दे रहे दुर्घटना को न्योता

यातायात प्रभारी से कार्यवाही की अपेक्षा
 
कैसे गुजरें एक डेढ फिट के गड्ढों से

आईएसओ सर्टिफाईड होना चाहिए काम

(लिमटी खरे)

सिवनी। फोरलेन आएगी, फोरलेन बचेगी, फोरलेन जाएगी इसी उहापोह के बीच फोरलेन निर्माण करा रही निर्माण कंपनियों की मनमानियां जारी हैं, पर न तो जिला प्रशासन और न ही फोरलेन बचाने के लिए आगे आईं संस्थाएं ही इस दिशा में कोई पहल ही कर पा रही हैं। सिवनी से नागपुर मार्ग पर जगह जगह सडक पर बिखरी पडी बडी बडी बोल्डरनुमा चट्टाने सरेआम दुघटनाओं को न्याता दे रहीं हैं और सभी खामोशी से दुर्घटना घटने की बाट जोह रहे हैं।

एसा नहीं कि सिवनी जिले में नेतागिरी करने वाले नुमाईदे सिवनी से दक्षिणी दिशा में नागपुर जाने वाले मार्ग से न गुजरते हों। बावजूद इसके सडक पर जगह जगह सडाकों पर काले पत्थरों के ढेर उन्हें दिखाई न पडते हों। इसके साथ ही साथ सडकों पर मिट्टी के ढेर भी जहां तहां देखने को मिल जाते हैं। वस्तुतः ये आवागमन के दौरान दुर्घटनाओं के घटने का कारक बन सकते हैं।

गौरतलब होगा कि स्वर्णिम चतुर्भुज और इससे जुडे उत्तर दक्षिण और पूर्व पश्चिम गलियारे का निर्माण का काम भी गुणवत्ता के हिसाब से आईएसओ से प्रमाणित होना चाहिए। विडम्बना ही कही जाएगी कि बिना सुरक्षा नोटिस, निर्माण कार्य के दोनों ओर बिना दोरंगी पट्टी बांधे ही इसका काम नब्बे फीसदी करा दिया गया है, पर किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी। इस सारे मामले में नियम कायदों का सरेआम माखौल उडाकर इसका निर्माण करा रही कंपनियों ने अच्छी मलाई काटी है, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

बीती ताहि बिसार दे की तर्ज पर भी अगर वर्तमान परिस्थितियों में देखा जाए तो सिवनी से नागपुर मार्ग पर जगह जगह पडे पत्थरों के ढेर से आवागमन प्रभावित हुए बिना नहीं है। पुलिस के आला दर्जे के सूत्रों का कहना है कि जिले में यातायात प्रभारी और जिला पुलिस अधीक्षक का कार्यक्षेत्र बराबर ही होता है। इस लिहाज से यातायात प्रभारी की नजरें भी इस पर इनायत न हो पाना आश्चर्य का ही विषय माना जा सकता है। परिवहन विभाग के अधिकारी तो लक्ष्मी के मद में इतने चूर हो चुके हैं कि उन्हें लोगों की सुख सुविधाओं की परवाह कतई ही नहीं है, पर संजीदा यातायात प्रभारी से तो अपेक्षा की जा सकती है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।

यहां एक बात और गौरतलब है कि सडक के जिस भाग का निर्माण कथित तौर पर माननीय न्यायालय द्वारा रोका बताया जा रहा है उस भाग के धुर्रे अगर उडे हैं तो वह सडक निर्माण में लगी इन दोनों ही कंपनियों सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी के ओवर लोडेड डंपर्स ने ही उडाए हैं। कहा जा रहा है कि इन कंपनियों में बडे कद के राजनेताओं की भागीदारी है अतः इन दोनों ही कंपनियों का कोई भी कुछ नहीं बिगाड सकता है।

आश्चर्य का विषय तो यह है कि जिला प्रशासन भले ही राजनेताओं के दबाव में आकर इन कंपननियों के खिलाफ कार्यवाही करने से भले ही कतरा रहा हो पर लोगों के हक की लडाई के लिए आगे आने वाले गैर सरकारी संगठनों की इस मामले में चुप्पी वाकई शोध का विषय ही कही जाएगी।
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हाँ जी, इन दिनों हम प्यार में हैं

साखी पर 

अरुणा राय की कवितायें
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एक बात जो समझनी है

जीवन एक कविता की तरह है। उतना ही सुंदर, उतना ही सुरुचिपूर्ण, उतना ही सुष्ठु, उतना ही मधुर। जिस तरह कविता कवि की रचना होती है और वह उसे भावों, शब्दों, अलंकारों से सजा कर प्रस्तुत करता है, उसी तरह जीवन को भी प्रकृति सुंदर से सुंदर बनाकर प्रस्तुत करती है। जिसे केवल जीवन चाहिए, वह इसे सुंदर बनाये रख सकता है, जिसे जीवन के बदले और भी चीजें चाहिए, उसे जीवन के सौदर्य से वंचित होना पड़ता है। रचना अपने आप में ही फल है। किसी कवि ने एक सुंदर कविता रची, यह उसका पारिश्रमिक है। क्यों नहीं सभी लोग कविता रच लेते हैं, किसी के भी शब्द काव्य में बदल जायं, ऐसा कहां होता है? पूरा देखें बात-बेबात पर
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31 जुलाई 2010 को हैदराबाद में लोकार्पण है : पुस्‍तक का नाम व समय इत्‍यादि विवरण आप बतलाएं (अविनाश्‍ा वाचस्‍पति)


यह कहानी संग्रह है
पवित्रा अग्रवाल विरचित कहानियों का
पढ़ना चाहें तो बतलायें

वैसे उजाले दूर नहीं
अधिक अब
मन तो सबके
प्रकाशित हैं ही
जिनके मन में अंधेरा है
उनके मन में उजालों की
की जा रही है वायरिंग

कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के साथ ही
उम्‍मीद है सब सही चलता रहा
तो मन में भी हो जाएगी
बिजली सप्‍लाई

पर घबराइयेगा मत
अगर उसका बिल आ जाए
क्‍योंकि फ्री बिजली देता है
सिर्फ सूरज

और सूरज से जिनके मन
होते हैं प्रकाशित
वहां कभी अंधेरा नहीं होता
और मिलते हैं भारी भरकम
राशि के बिल

न कटती है बिजली
पर जिंदगी जरूर कट सकती है
यदि वहां तक हवा न पहुंच पाए

इसीलिए कहा गया है
हर सांस में विश्‍वास।

कल यानी 31 जुलाई 2010 को इसका भारत के किसी शहर में लोकार्पण हो रहा है। नुक्‍कड़ के जागरूक पाठक, जो हैदराबाद के हैं, वे या अन्‍य जो भी हैं, वे इसकी पूरी जानकारी टिप्‍पणियों में साझा करें। यह एक इशारा भर है उस राज्‍य का, जिस राज्‍य की लेखिका हैं। जरूर कहानी संग्रह का लोकार्पण वहीं हो रहा होगा।
नुक्‍कड़ परिवार की शुभकामनाएं इस लोकार्पण पर। पूरा विवरण मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा। या आप मार लें बाजी।
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अपने बच्‍चों की ही नहीं, अपनी लिखावट भी सु‍धारें

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कल रात नींद न आई .................कविता

कल रात नींद न आई 
करवट बदल बदल कर 
कोशिश 
की थी सोने की
आखें खुद बा खुद भर आई
तुम्हारे न आने पर
मैं उदास होता हूँ जब
भी
ऐसा ही होता है मेरे साथ
फिर जलाई भी मैंने माचिस 
और
बंद डायरी से निकली थी तुम्हारी तस्वीर 
कुछ ही देर में बुझ गयी थी रौशनी
और उसमे खो गयी थी
तुम्हारी हसी
जिसे देखने की चाहत लिए मई
गुजर देता था रातों को
सजाता था सपने तुम्हारे
तारों के साथ
चाँद से भी खुबसूरत
लगती थी तुम
हाँ तुम से जब कहता ये
सब
तुम मुस्कुराकर
मुझे पागल
कहकर कर चिढाती थी
मुझे अच्छा लगता था
तुमसे यूँ मिलना
जिसके लिए तुम लिखती ख़त 
लेकिन 
कभी वो पास न आया मेरे
और जिसे पढ़ा था मैंने हमेशा ही
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लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान-2010


लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान-2010 में हिन्दी चिट्ठाकारी संबंधी आलेख के लिए खाकसार को वर्ष के श्रेष्ठ लेखक के सम्मान से नवाजा गया है। मैं इस उपलब्धि को आप सब के साथ बांटना चाहता हूँ। कृपया विज़िट करें-
http://www.parikalpnaa.com/2010/07/blog-post_27.html
http://utsav.parikalpnaa.com/2010/07/blog-post_27.html
जिस आलेख ने मुझे यह सम्मान दिलाया उसका शीर्षक है:-
ब्लॉगिंग को परिवर्तन के हथियार के रूप में ढालने की जरूरत है....
लिंक हैः-
http://utsav.parikalpnaa.com/2010/04/blog-post_7114.html
आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा।

प्रमोद ताम्बट
भोपाल
व्यंग्य और व्यंग्यलोक
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वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि और युवा गीतकार कौन ?


चेहरा पहचानिए और बताईये कौन हैं ये दोनों जिन्हें क्रमश: वर्ष के श्रेष्ठ युवा गीतकार और वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि का खिताब प्राप्त हुआ है ?
बधाईयाँ देने के लिए यहाँ किलिक करें -
() वर्ष के श्रेष्ठ युवा गीतकार
() वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि

साथ ही -
आईये मिलते हैं सितारों की महफ़िल में रविकांत पाण्डेय से
और ओम आर्य से
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चार प्रतिकवितायें, किसकी? अ....वा की

चार प्रतिकवितायें देखें
बात-बेबात पर,
किसकी?
वहीं जाकर पता चलेगा
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सरकार को लग सकती है एक हजार करोड की चपत

 

सद्भाव, मीनाक्षी की पांचों उंगलियां घी में सर कडाही में

दोनों कंपनियां 18 दिसंबर 2008 से जबर्दस्त मुआवजा लेने की जुगत में
  
किसी की नजर नहीं है कंपनियों के हिडन एजेंडे पर
 
(लिमटी खरे)

सिवनी। सिवनी जिले में उत्तर दक्षिण गलियारे का निर्माण करा रही मूल अथवा पेटी कांटेक्टर कंपनियां सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी की हर हाल में चांदी ही चांदी है। 18 दिसंबर 2008 को जिला कलेक्टर सिवनी के आदेश क्रमांक 3266 /फो.ले. / 2008 से मोहगांव से लेकर खवासा तक का सडक निर्माण का काम रोक दिया गया है। इसका निर्माण सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। इसी तरह जबलपुर रोड पर बंजारी माता के आगे से गनेशगंज के कुछ पहले तक काम भी रोका गया है, यह किसके आदेश से कब रोका गया है, यह बात अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसका निर्माण मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा करवाया जा रहा है।

एनएचएआई के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि एनएचएआई के निर्माण की निविदा में इस बात का साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि निर्धारित समय सीमा के बाद जिसके द्वारा भी विलंब किया जाएगा वह पेनाल्टी देने का अधिकारी होगा। चूंकि यह केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी परियोजनाओं में अग्रणी थी अतः इसमें जुर्माना भी भारी भरकम ही आहूत किया गया था। उदहारण के लिए अगर निर्माण करा रहा ठेकेदार निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं कर पाता है तो शासन को उससे जुर्माना वसूलने का पूरा अधिकार होगा। और अगर सरकार द्वारा सडक निर्माण के लिए उपजाउ माहौल नहीं दिया जाता है तो ठेकेदार द्वारा सरकार से जुर्माने की रकम वसूल की जाएगी।
सूत्रों ने कहा कि सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी की पांचों उंगलियां घी में, सर क
डाही में और पूरे के पूरे पैर धड सहित थाली में पडे हुए हैं, क्योंकि 18 दिसंबर 2008 के उपरांत सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी ने सडक निर्माण का काम रोक दिया है, वह भी तत्कालीन जिला कलेक्टर पिरकीपण्डला नरहरि के 18 दिसंबर 2008 के आदेश के तहत। इस हिसाब से 18 दिसंबर 2008 के बाद से अगले आदेश तक के लिए सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी का मीटर जुर्माने के लिए डाउन हो चुका है। हालात देखकर यह कहा नहीं जा सकता है कि आगामी आदेश कब आएगा, और जब तक आगामी आदेश नहीं आता तब तक जुर्माना बढता ही जाएगा।

कमोबेश यही आलम मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी का है। मीनाक्षी को भी बंजारी के पास का काम नहीं करने दिया जा रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन सहित फोरलेन बचाने मेें लगे सारे गैर राजनैतिक, गैर सामाजिक और राजनैतिक संगठन चुप्पी ही साधे हुए हैं, जो कि आश्चर्यजनक ही माना जाएगा। बहरहाल इस निर्माण कार्य को जिस दिन से रोका गया है, उसी दिन से मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी का मीटर भी जुर्माने के लिए डाउन हो चुका है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों ही कंपनियों ने अपने कर्मचारियांे और संसाधनों की फौज को सिवनी से अन्य निर्माणाधीन साईट्स पर स्थानांतरित कर दिया गया है, किन्तु कागजों पर आज भी उनकी तैनाती सिवनी के बेस केम्प में ही दर्शाई जा रही है, ताकि मुआवजे  और हर्जाने की राशि को बढाया जा सके। जिला कलेक्टर द्वारा काम रोके जाने के 19 माह बीत चुके हैं, इस लिहाज से प्रतिदिन का ही अगर मुआवजा और हर्जाना जोडा जाए तो राशि करोडों रूपयों में आती है।

इन कंपनियों द्वारा अपने अपने पास लगाए गए डंपर्स को ही एक एक लाख रूपए प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा था, जिससे इन डंपर्स की संख्या और अब तक हुए 19 माह में कितनी राशि का नुकसान और हर्जा खर्चा की देनदारी सरकार पर बन चुकी है, यह बात न तो सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय को ही समझ में आ रही है और न ही सिवनी में फोरलेन की लडाई प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर लडने वालों को।

चर्चाओं के अनुसार एक ओर तो भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा एलीवेटेड हाईवे के लिए लगभग नौ सौ करोड रूपए की लागत देने से इंकार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मंत्रालय द्वारा इन कंस्ट्रक्शन कंपनियों को बिना काम के हाथ पर हाथ रखे बैठे रहने के लिए करोडों रूपए मुआवजे और हर्जाने के तौर पर देना कहां की समझदारी है? कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि सद्भाव और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा इस तरह का माहौल बनाने में मदद की जा रही है कि मामला चाहे किसी न्यायालय के माध्यम से जितना लंबित करवाया जा सके करवाया जाए, ताकि उनको मिलने वाली राशि में गुणोत्तकर वृद्धि हो सके। सिवनी में फोरलेन बचाने वाले जाने अनजाने अगर कंपनियों के हिडन एजेंडे का अंग बन रहे हों तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
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कामन वेल्थ गेम्स का रास्ता काटते मणिशंकर

 


किसे ''शैतान'' बताने की जहमत उठा रहे हैं अय्यर?
 
कांग्रेसी ही नहीं चाह रहे राष्ट्रमण्डल खेल की सफलता
 
अय्यर उवाच: शैतान ही पैसे की बरबादी का कर सकते समर्थन
 
रक्षात्मक मुद्रा में दिख रही कांग्रेस
 
(लिमटी खरे)

 
एक तरफ कांग्रेसनीत कंेद्र और कांग्रेस की ही दिल्ली सरकार द्वारा भारत की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए माकूल माहौल तैयार करने में दिन रात एक की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता और पिछले दरवाजे (बरास्ता राज्य सभा) संसद में अपनी आमद देने वाले मणि शंकर अय्यर द्वारा ही यह कहा जा रहा है कि अगर कामन वेल्थ गेम्स सफल होते हैं तो इससे वे खुश नहीं होंगे।
 
आखिर एसा क्या हो गया है कि कामन वेल्थ गेम्स की मेजबानी लेने के पांच सालों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर अचानक भडक पडे हैं। अमूमन वैसे तो माना यही जाता है कि नब्बे के दशक के उपरांत कांग्रेस का कोई भी वरिष्ठ नेता तब तक सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी नहीं करता है जब तक कि कांग्रेस का आलाकमान उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर एसा करने के लिए इशारा न कर दे।
 
राजनीति में एक दूसरे के कद को कम करने या यूं कहें कि साईज में लाने के उद्देश्य से वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस तरह के खेल को अंजाम दिया जाता है। इस मामले को भी दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बढते कद से जोडकर देखा जा रहा है। देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली जैसे प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में बैठना कोई मामूली बात नहीं है। हो सकता है कि शीला के बढते कद ने कांग्रेस की दूसरी पंक्ति के नेताओं की नींद हराम कर दी हो और उन्होंने षणयंत्र के तहत कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के कान भरने आरंभ कर दिए हों।
 
बहरहाल कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य चीख चीख कर इस बात को कह रहे हैं कि अक्टूबर में दिल्ली में होने वाले कामन वेल्थ गेम्स का आयोजन अगर सफल होता है तो उन्हें खुशी के बजाए दुख होगा। उन्होंने इस आयोजन को पैसों की बरबादी करार देते हुए कहा कि सिर्फ और सिर्फ ''शैतान'' ही इसका समर्थन कर सकते हैं। मणिशंकर अय्यर की इस बात को सही माना जा सकता है कि यह वाकई पैसे की बरबादी ही है, किन्तु उस वक्त मणिशंकर अय्यर कहां थे, जब इस आयोजन में भारत ने मेजबानी करने का प्रस्ताव रखा था, और भारत को मेजबानी प्रदान भी की गई थी।
 
इतना ही नहीं 2005 से अब तक जब कामन वेल्थ गेम्स के लिए बैठकें पर बैठकें होती रहीं, आयोजन के लिए स्टेडियम दुरूस्त होते रहे, करोडों अरबों रूपयों का आवंटन जारी किया गया, सडकों, चमचमाती विदेशी लुक वाली यात्री बस, चकाचक यात्री प्रतीक्षालय, विदेशियों की सुविधा के लिए आरामदेह विलासिता भरे मंहगे टायलेट आदि का निर्माण कराया जा रहा था, तब राज्य सभा सदस्य मणि शंकर अय्यर पता नहीं किस नींद में सो रहे थे। अचानक ही कामन वेल्थ गेम्स से तीन माह पूर्व ही उनकी तंद्रा टूटी है, और उन्होंने कामन वेल्थ गेम्स पर उलटबंसी बजाना आरंभ कर दिया है।
 
हमें तो देश के इलेक्ट्रानिक मीडिया की सोच पर भी तरस ही आता है। अपनी टीआरपी (टेलीवीजन रेटिंग प्वाईंट) बढाने के चक्कर में इस तरह की बेकार खबरों से सनसनी पैदा करने की नाकामयाब कोशिश में ही लगा रहता है इस तरह का मीडिया। मीडिया ने मणिशंकर के कामन वेल्थ गेम्स वाले बयान पर तो काफी सनसनी फैलाई पर किसी ने भी अय्यर से यह सवाल पूछने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर पांच सालों तक जब यह पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा था, तब वे चुप क्यों बैठे?
 
आज अचानक किस बोधी वृक्ष के नीचे बैठने से उन्हें इस सत्य का भान हुआ कि पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, और शैतान ही इसका समर्थन कर सकता है। चूंकि इस खेल का समर्थन कांग्रेस की राजमात श्रीमति सोनिया गांधी, युवराज राहुल गांधी और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित कंेद्र की कांग्रेसनीत संप्रग और दिल्ली की कांग्रेस सरकार कर रही हैं तो क्या राज्य सभा सदस्य मणिशंकर अय्यर खुद मंत्री न बन पाने के चलते अपनी ही पार्टी की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी और दिल्ली की गद्दी पर तीसरी मर्तबा बैठने वाली शीला दीक्षित सहित समूची सरकार को ही ''शैतान'' की संज्ञा दे रहे हैं।
 
वैसे मणिशंकर अय्यर का यह कथन सही ठहराया जा सकता है कि इसकी तैयारियों में बहाए गए 35 हजार करोड रूपयों का उपयोग देश के गरीबों और बच्चों की बेहतरी में करना मुनासिब होता। सच है देश की दो तिहाई आबादी को आज दो जून की रोटी तक मुहैया नहीं है और सरकार 35 हजार करोड रूपए दिखावे में खर्च कर रही है। यह राशि आई कहां से है? भारतीय रिजर्व बैंक ने कहीं से नोट तो नहीं छापे हैं, जाहिर है यह समूचा धन देश के गरीब गुरबों के द्वारा हर कदम पर दिए जाने वाले कर से ही जुटाई गई है।
 
एक तरफ जहां मणिशंकर अय्यर द्वारा इस आयोजन को लेकर सरकार को कोसा जा रहा है, वहीं उसी वक्त देश के खेल मंत्री एम.एस.गिल द्वारा 19वंे राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए सज रहे स्टेडियम का जायजा लिया जा रहा था। खेल मंत्री इस आयोजन को भारत की इज्जत का सवाल भी निरूपित कर रहे हैं। गिल ने नेहरू स्टेडियम को देखकर यह कहा कि उन्हें खुशी हो रही है कि यह स्टेडियम आखिरकार पूरा हो गया है।

इधर भारत गणराज्य के खेल मंत्री एम.एस.गिल इस आयोजन पर पैसे की कथित तौर पर बरबादी में अपनी ओर से खुशी जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के ही राज्य सभा सदस्य मणि शंकर अय्यर द्वारा इस तरह की खुशी वही जाहिर कर सकता है जो  ''शैतान'' हो। अब फैसला जनता करे या मणिशंकर अय्यर अथवा देश पर आध्शी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस कि मणि शंकर अय्यर आखिर ''शैतान'' की उपाधि किसे देना चाह रहे हैं।
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नियम कायदों का माखौल उडाते स्‍कूल

सीबीएसई पर हावी शिक्षा माफिया (6)

 
सर्कस के बाजीगर ही जा सकते हैं वाहन से सेंट फ्रांसिस शाला

 
 सिवनी। ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में पालकों को सीबीएसई का लोभ दिखाकर जिला मुख्यालय में संचालित निजी तौर पर संचालित होने वाली शालाओं द्वारा लूट सके तो लूट को मूल मंत्र अपनाया जा रहा है, और प्रशासन ध्रतराष्ट्र की भूमिका में ही दिख रहा है. जिला मुख्यालय में कितनी शालाओं के पास सीबीएसई की मान्यता है, यह बात कोई नहीं जानता है, बावजूद इसके जिला प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया जाना आश्चर्यजनक की माना जा सकता है. शालाओं पर नियंत्रण के लिए जवाबदेह जिला शिक्षा अधिकारी ही जब अपने आप को इस मामले से दूर रखते हुए शाला संचालकों के पक्ष में परोक्ष तौर पर आकर खडे हो गए हों, तब विद्यार्थियों और पालकों का तो भगवान ही मालिक है.
 
 मध्य प्रदेश के लिए सीबीएसई बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय राजस्थान के अजमेर में स्थित है. वहां स्थित सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में अब तक किसी भी शाला को सीबीएसई से संबद्धता नहीं प्रदान की गई है, अलबत्ता सीबीएसई की मान्यता लेने की कार्यवाही अवश्य ही कुछ शालाओं द्वारा दी गई है. सूत्रों का कहना है कि जब तक सीबीएसई बोर्ड की मान्यता शाला को नहीं मिल जाती तब तक शाला के द्वारा अपने आप को सीबीएसई से संबद्ध होने की बात प्रसारित प्रचारित नहीं की जा सकती है.
 
 बताया जाता है कि जिला मुख्यालय में संचालित होने वाली कुछ शालाओं द्वारा मीडिया में विज्ञापन, पंपलेट आदि साधनों के माध्यम से अपने आप को सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध होना बताया जा रहा है. प्रशासन की निष्क्रियता के चलते इन शाला संचालकों का आलम यह है कि ये विद्यार्थियों को ढोने में प्रयुक्त होने वाले वाहनों में भी सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त का ठप्पा लगाकर चोरी और सीना जोरी कर रहे हैं. यहां उल्लेखनीय होगा कि जिन वाहनों में यह लिखा है, वे शाला के लिए निर्धारित किए गए पीले रंग के स्थान पर सफेद रंग से रंगे हुए हैं. इन वाहनों में निर्धारित से अधिक बच्चों को भी ढोया जा रहा है.
 
 परिवहन कार्यालय में गौरतलब होगा कि निजी उपयोग के लिए पंजीबद्ध होने के बावजूद इन वाहनों का पूरी तरह से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है, और यातायात पुलिस के साथ ही साथ क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का कार्यालय भी आंख बंद किए हुए बैठा है. इस तरह आपसी सांठ गांठ के चलते परिवहन विभाग को दिए जाने वाले करों के रूप में लाखों रूपए की सीधी सीधी क्षति पहुंचाई जा रही है. जिन वाहन संचालकों ने बाकायदा यात्रीकर या अन्य मदों में बाकायदा कर जमा किया है, उनमें रोष और असंतोष की स्थिति बनती जा रही है.
 
 इसी क्रम में जिला मुख्यालय में कचहरी चौक में रिहाईशी इलाके में इसाई मिशनरी द्वारा संचालित होने वाले सेंट फ्रांसिस स्कूल द्वारा आनन फानन अपनी शाला को शहर से लगभग सात किलोमीटर दूर जबलपुर रोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है. आधे अधूरे भवन में स्थानांतरित इस शाला को संभवतरू सीबीएसई बोर्ड के अधिकारियों के निरीक्षण के उददेश्य से स्थानांतरित किया गया है. बताया जाता है कि जुलाई माह में ही किसी दिन सीबीएसई बोर्ड के द्वारा पाबंद किए गए दो प्राचार्य आकर इसका निरीक्षण करेंगे कि शाला का संचालन सीबीएसई के मापदण्डों के मुताबिक किया जा रहा है, अथवा नहीं. अगर यह पाया गया कि उक्त शाला का संचालन सीबीएसई के मापदण्डों के हिसाब से नहीं किया जा रहा है तो वे अपने प्रतिवेदन में प्रतिकूल टिप्पणी अवश्य करेंगे, जिससे इस शाला का सीबीएसई से एफीलेशन खटाई में पड सकता है.
 
 वर्तमान में बारिश के माह में शाला की स्थिति काफी दयनीय बताई जा रही है. बताया जाता है कि मुख्य मार्ग से शाला पहुंच मार्ग पूरी तरह से कीचड से सना हुआ है. इस मार्ग पर अगर कोई पालक, विद्यार्थी अथवा शिक्षक अपना वाहन लेकर शाला तक पहुंचता है तो रास्ते में अनेक बार उसका दुपहिया वाहन हिचकोले खाता रहता है. वाहन चालकों को डर बना रहता है कि कहीं वह फिसलकर दुर्घटना ग्रस्त न हो जाए. अनेक वाहन चालक इस मार्ग पर अपने वाहनों से गिर भी चुके बताए जा रहे हैं. पालकों, विद्यार्थियों या शिक्षकों की इस परेशानी से शाल प्रबंधन को कुछ लेना देना नहीं है, शोर शराबा होने पर शाला प्रबंधन द्वारा रस्म अदायगी के लिए रोलर आदि चलवाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है. चर्चाओं के अनुसार इस मार्ग पर वाहन चलाना अब सिर्फ सर्कस के बाजीगरों के बस की ही बात रह गई है, क्योंकि सर्कस के बाजीगर ही अपना बेलेंस साधने में मास्टरी रखते हैं.
 
व्याप्त चर्चाओं के अनुसार इस शाला में पूर्व में सीबीएसई के निर्धारित मापदण्डों के हिसाब से चालीस छात्र प्रति कक्षा के बंधन को भी तोडा जा रहा है. मई और जून माह में प्रवेश पर बंदिश लगाने के बाद अब धडल्ले से इस शाला में प्रवेश देने का सिलसिला चल पडा है, जिससे लगने लगा है कि शाला प्रबंधन को अपने विद्यार्थियों को पढाई आदि की गुणवत्ता से ज्यादा चिंता किसी और चीज की है. इतना सब कुछ होने के बावजूद भी अगर सांसद, विधायक, जिला प्रशासन सहित सत्ताधारी भाजपा और विपक्ष में बैठी कांग्रेस चुप्पी साधे बैठी हो तो फिर शहर के बच्चों के भविष्य पर प्रश्रचिन्ह स्वयंमेव ही लग जाता है.
(क्रमशः जारी)
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सरकार को लग सकती है एक हजार करोड की चपत

 

सद्भाव, मीनाक्षी की पांचों उंगलियां घी में सर कडाही में

दोनों कंपनियां 18 दिसंबर 2008 से जबर्दस्त मुआवजा लेने की जुगत में
  
किसी की नजर नहीं है कंपनियों के हिडन एजेंडे पर
 
(लिमटी खरे)

सिवनी। सिवनी जिले में उत्तर दक्षिण गलियारे का निर्माण करा रही मूल अथवा पेटी कांटेक्टर कंपनियां सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी की हर हाल में चांदी ही चांदी है। 18 दिसंबर 2008 को जिला कलेक्टर सिवनी के आदेश क्रमांक 3266 /फो.ले. / 2008 से मोहगांव से लेकर खवासा तक का सडक निर्माण का काम रोक दिया गया है। इसका निर्माण सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। इसी तरह जबलपुर रोड पर बंजारी माता के आगे से गनेशगंज के कुछ पहले तक काम भी रोका गया है, यह किसके आदेश से कब रोका गया है, यह बात अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसका निर्माण मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा करवाया जा रहा है।

एनएचएआई के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि एनएचएआई के निर्माण की निविदा में इस बात का साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि निर्धारित समय सीमा के बाद जिसके द्वारा भी विलंब किया जाएगा वह पेनाल्टी देने का अधिकारी होगा। चूंकि यह केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी परियोजनाओं में अग्रणी थी अतः इसमें जुर्माना भी भारी भरकम ही आहूत किया गया था। उदहारण के लिए अगर निर्माण करा रहा ठेकेदार निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं कर पाता है तो शासन को उससे जुर्माना वसूलने का पूरा अधिकार होगा। और अगर सरकार द्वारा सडक निर्माण के लिए उपजाउ माहौल नहीं दिया जाता है तो ठेकेदार द्वारा सरकार से जुर्माने की रकम वसूल की जाएगी।
सूत्रों ने कहा कि सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी की पांचों उंगलियां घी में, सर क
डाही में और पूरे के पूरे पैर धड सहित थाली में पडे हुए हैं, क्योंकि 18 दिसंबर 2008 के उपरांत सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी ने सडक निर्माण का काम रोक दिया है, वह भी तत्कालीन जिला कलेक्टर पिरकीपण्डला नरहरि के 18 दिसंबर 2008 के आदेश के तहत। इस हिसाब से 18 दिसंबर 2008 के बाद से अगले आदेश तक के लिए सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी का मीटर जुर्माने के लिए डाउन हो चुका है। हालात देखकर यह कहा नहीं जा सकता है कि आगामी आदेश कब आएगा, और जब तक आगामी आदेश नहीं आता तब तक जुर्माना बढता ही जाएगा।

कमोबेश यही आलम मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी का है। मीनाक्षी को भी बंजारी के पास का काम नहीं करने दिया जा रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन सहित फोरलेन बचाने मेें लगे सारे गैर राजनैतिक, गैर सामाजिक और राजनैतिक संगठन चुप्पी ही साधे हुए हैं, जो कि आश्चर्यजनक ही माना जाएगा। बहरहाल इस निर्माण कार्य को जिस दिन से रोका गया है, उसी दिन से मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी का मीटर भी जुर्माने के लिए डाउन हो चुका है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों ही कंपनियों ने अपने कर्मचारियांे और संसाधनों की फौज को सिवनी से अन्य निर्माणाधीन साईट्स पर स्थानांतरित कर दिया गया है, किन्तु कागजों पर आज भी उनकी तैनाती सिवनी के बेस केम्प में ही दर्शाई जा रही है, ताकि मुआवजे  और हर्जाने की राशि को बढाया जा सके। जिला कलेक्टर द्वारा काम रोके जाने के 19 माह बीत चुके हैं, इस लिहाज से प्रतिदिन का ही अगर मुआवजा और हर्जाना जोडा जाए तो राशि करोडों रूपयों में आती है।

इन कंपनियों द्वारा अपने अपने पास लगाए गए डंपर्स को ही एक एक लाख रूपए प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा था, जिससे इन डंपर्स की संख्या और अब तक हुए 19 माह में कितनी राशि का नुकसान और हर्जा खर्चा की देनदारी सरकार पर बन चुकी है, यह बात न तो सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय को ही समझ में आ रही है और न ही सिवनी में फोरलेन की लडाई प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर लडने वालों को।

चर्चाओं के अनुसार एक ओर तो भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा एलीवेटेड हाईवे के लिए लगभग नौ सौ करोड रूपए की लागत देने से इंकार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मंत्रालय द्वारा इन कंस्ट्रक्शन कंपनियों को बिना काम के हाथ पर हाथ रखे बैठे रहने के लिए करोडों रूपए मुआवजे और हर्जाने के तौर पर देना कहां की समझदारी है? कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि सद्भाव और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा इस तरह का माहौल बनाने में मदद की जा रही है कि मामला चाहे किसी न्यायालय के माध्यम से जितना लंबित करवाया जा सके करवाया जाए, ताकि उनको मिलने वाली राशि में गुणोत्तकर वृद्धि हो सके। सिवनी में फोरलेन बचाने वाले जाने अनजाने अगर कंपनियों के हिडन एजेंडे का अंग बन रहे हों तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
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सरकार को लग सकती है एक हजार करोड की चपत

 

सद्भाव, मीनाक्षी की पांचों उंगलियां घी में सर कडाही में

दोनों कंपनियां 18 दिसंबर 2008 से जबर्दस्त मुआवजा लेने की जुगत में
  
किसी की नजर नहीं है कंपनियों के हिडन एजेंडे पर
 
(लिमटी खरे)

सिवनी। सिवनी जिले में उत्तर दक्षिण गलियारे का निर्माण करा रही मूल अथवा पेटी कांटेक्टर कंपनियां सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी की हर हाल में चांदी ही चांदी है। 18 दिसंबर 2008 को जिला कलेक्टर सिवनी के आदेश क्रमांक 3266 /फो.ले. / 2008 से मोहगांव से लेकर खवासा तक का सडक निर्माण का काम रोक दिया गया है। इसका निर्माण सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। इसी तरह जबलपुर रोड पर बंजारी माता के आगे से गनेशगंज के कुछ पहले तक काम भी रोका गया है, यह किसके आदेश से कब रोका गया है, यह बात अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसका निर्माण मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा करवाया जा रहा है।

एनएचएआई के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि एनएचएआई के निर्माण की निविदा में इस बात का साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि निर्धारित समय सीमा के बाद जिसके द्वारा भी विलंब किया जाएगा वह पेनाल्टी देने का अधिकारी होगा। चूंकि यह केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी परियोजनाओं में अग्रणी थी अतः इसमें जुर्माना भी भारी भरकम ही आहूत किया गया था। उदहारण के लिए अगर निर्माण करा रहा ठेकेदार निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं कर पाता है तो शासन को उससे जुर्माना वसूलने का पूरा अधिकार होगा। और अगर सरकार द्वारा सडक निर्माण के लिए उपजाउ माहौल नहीं दिया जाता है तो ठेकेदार द्वारा सरकार से जुर्माने की रकम वसूल की जाएगी।
सूत्रों ने कहा कि सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी की पांचों उंगलियां घी में, सर क
डाही में और पूरे के पूरे पैर धड सहित थाली में पडे हुए हैं, क्योंकि 18 दिसंबर 2008 के उपरांत सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी ने सडक निर्माण का काम रोक दिया है, वह भी तत्कालीन जिला कलेक्टर पिरकीपण्डला नरहरि के 18 दिसंबर 2008 के आदेश के तहत। इस हिसाब से 18 दिसंबर 2008 के बाद से अगले आदेश तक के लिए सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी का मीटर जुर्माने के लिए डाउन हो चुका है। हालात देखकर यह कहा नहीं जा सकता है कि आगामी आदेश कब आएगा, और जब तक आगामी आदेश नहीं आता तब तक जुर्माना बढता ही जाएगा।

कमोबेश यही आलम मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी का है। मीनाक्षी को भी बंजारी के पास का काम नहीं करने दिया जा रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन सहित फोरलेन बचाने मेें लगे सारे गैर राजनैतिक, गैर सामाजिक और राजनैतिक संगठन चुप्पी ही साधे हुए हैं, जो कि आश्चर्यजनक ही माना जाएगा। बहरहाल इस निर्माण कार्य को जिस दिन से रोका गया है, उसी दिन से मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी का मीटर भी जुर्माने के लिए डाउन हो चुका है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों ही कंपनियों ने अपने कर्मचारियांे और संसाधनों की फौज को सिवनी से अन्य निर्माणाधीन साईट्स पर स्थानांतरित कर दिया गया है, किन्तु कागजों पर आज भी उनकी तैनाती सिवनी के बेस केम्प में ही दर्शाई जा रही है, ताकि मुआवजे  और हर्जाने की राशि को बढाया जा सके। जिला कलेक्टर द्वारा काम रोके जाने के 19 माह बीत चुके हैं, इस लिहाज से प्रतिदिन का ही अगर मुआवजा और हर्जाना जोडा जाए तो राशि करोडों रूपयों में आती है।

इन कंपनियों द्वारा अपने अपने पास लगाए गए डंपर्स को ही एक एक लाख रूपए प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा था, जिससे इन डंपर्स की संख्या और अब तक हुए 19 माह में कितनी राशि का नुकसान और हर्जा खर्चा की देनदारी सरकार पर बन चुकी है, यह बात न तो सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय को ही समझ में आ रही है और न ही सिवनी में फोरलेन की लडाई प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर लडने वालों को।

चर्चाओं के अनुसार एक ओर तो भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा एलीवेटेड हाईवे के लिए लगभग नौ सौ करोड रूपए की लागत देने से इंकार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मंत्रालय द्वारा इन कंस्ट्रक्शन कंपनियों को बिना काम के हाथ पर हाथ रखे बैठे रहने के लिए करोडों रूपए मुआवजे और हर्जाने के तौर पर देना कहां की समझदारी है? कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि सद्भाव और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा इस तरह का माहौल बनाने में मदद की जा रही है कि मामला चाहे किसी न्यायालय के माध्यम से जितना लंबित करवाया जा सके करवाया जाए, ताकि उनको मिलने वाली राशि में गुणोत्तकर वृद्धि हो सके। सिवनी में फोरलेन बचाने वाले जाने अनजाने अगर कंपनियों के हिडन एजेंडे का अंग बन रहे हों तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
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कामन वेल्थ गेम्स का रास्ता काटते मणिशंकर

 


किसे ''शैतान'' बताने की जहमत उठा रहे हैं अय्यर?
 
कांग्रेसी ही नहीं चाह रहे राष्ट्रमण्डल खेल की सफलता
 
अय्यर उवाच: शैतान ही पैसे की बरबादी का कर सकते समर्थन
 
रक्षात्मक मुद्रा में दिख रही कांग्रेस
 
(लिमटी खरे)

 
एक तरफ कांग्रेसनीत कंेद्र और कांग्रेस की ही दिल्ली सरकार द्वारा भारत की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए माकूल माहौल तैयार करने में दिन रात एक की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता और पिछले दरवाजे (बरास्ता राज्य सभा) संसद में अपनी आमद देने वाले मणि शंकर अय्यर द्वारा ही यह कहा जा रहा है कि अगर कामन वेल्थ गेम्स सफल होते हैं तो इससे वे खुश नहीं होंगे।
 
आखिर एसा क्या हो गया है कि कामन वेल्थ गेम्स की मेजबानी लेने के पांच सालों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर अचानक भडक पडे हैं। अमूमन वैसे तो माना यही जाता है कि नब्बे के दशक के उपरांत कांग्रेस का कोई भी वरिष्ठ नेता तब तक सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी नहीं करता है जब तक कि कांग्रेस का आलाकमान उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर एसा करने के लिए इशारा न कर दे।
 
राजनीति में एक दूसरे के कद को कम करने या यूं कहें कि साईज में लाने के उद्देश्य से वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस तरह के खेल को अंजाम दिया जाता है। इस मामले को भी दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बढते कद से जोडकर देखा जा रहा है। देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली जैसे प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में बैठना कोई मामूली बात नहीं है। हो सकता है कि शीला के बढते कद ने कांग्रेस की दूसरी पंक्ति के नेताओं की नींद हराम कर दी हो और उन्होंने षणयंत्र के तहत कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के कान भरने आरंभ कर दिए हों।
 
बहरहाल कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य चीख चीख कर इस बात को कह रहे हैं कि अक्टूबर में दिल्ली में होने वाले कामन वेल्थ गेम्स का आयोजन अगर सफल होता है तो उन्हें खुशी के बजाए दुख होगा। उन्होंने इस आयोजन को पैसों की बरबादी करार देते हुए कहा कि सिर्फ और सिर्फ ''शैतान'' ही इसका समर्थन कर सकते हैं। मणिशंकर अय्यर की इस बात को सही माना जा सकता है कि यह वाकई पैसे की बरबादी ही है, किन्तु उस वक्त मणिशंकर अय्यर कहां थे, जब इस आयोजन में भारत ने मेजबानी करने का प्रस्ताव रखा था, और भारत को मेजबानी प्रदान भी की गई थी।
 
इतना ही नहीं 2005 से अब तक जब कामन वेल्थ गेम्स के लिए बैठकें पर बैठकें होती रहीं, आयोजन के लिए स्टेडियम दुरूस्त होते रहे, करोडों अरबों रूपयों का आवंटन जारी किया गया, सडकों, चमचमाती विदेशी लुक वाली यात्री बस, चकाचक यात्री प्रतीक्षालय, विदेशियों की सुविधा के लिए आरामदेह विलासिता भरे मंहगे टायलेट आदि का निर्माण कराया जा रहा था, तब राज्य सभा सदस्य मणि शंकर अय्यर पता नहीं किस नींद में सो रहे थे। अचानक ही कामन वेल्थ गेम्स से तीन माह पूर्व ही उनकी तंद्रा टूटी है, और उन्होंने कामन वेल्थ गेम्स पर उलटबंसी बजाना आरंभ कर दिया है।
 
हमें तो देश के इलेक्ट्रानिक मीडिया की सोच पर भी तरस ही आता है। अपनी टीआरपी (टेलीवीजन रेटिंग प्वाईंट) बढाने के चक्कर में इस तरह की बेकार खबरों से सनसनी पैदा करने की नाकामयाब कोशिश में ही लगा रहता है इस तरह का मीडिया। मीडिया ने मणिशंकर के कामन वेल्थ गेम्स वाले बयान पर तो काफी सनसनी फैलाई पर किसी ने भी अय्यर से यह सवाल पूछने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर पांच सालों तक जब यह पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा था, तब वे चुप क्यों बैठे?
 
आज अचानक किस बोधी वृक्ष के नीचे बैठने से उन्हें इस सत्य का भान हुआ कि पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, और शैतान ही इसका समर्थन कर सकता है। चूंकि इस खेल का समर्थन कांग्रेस की राजमात श्रीमति सोनिया गांधी, युवराज राहुल गांधी और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित कंेद्र की कांग्रेसनीत संप्रग और दिल्ली की कांग्रेस सरकार कर रही हैं तो क्या राज्य सभा सदस्य मणिशंकर अय्यर खुद मंत्री न बन पाने के चलते अपनी ही पार्टी की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी और दिल्ली की गद्दी पर तीसरी मर्तबा बैठने वाली शीला दीक्षित सहित समूची सरकार को ही ''शैतान'' की संज्ञा दे रहे हैं।
 
वैसे मणिशंकर अय्यर का यह कथन सही ठहराया जा सकता है कि इसकी तैयारियों में बहाए गए 35 हजार करोड रूपयों का उपयोग देश के गरीबों और बच्चों की बेहतरी में करना मुनासिब होता। सच है देश की दो तिहाई आबादी को आज दो जून की रोटी तक मुहैया नहीं है और सरकार 35 हजार करोड रूपए दिखावे में खर्च कर रही है। यह राशि आई कहां से है? भारतीय रिजर्व बैंक ने कहीं से नोट तो नहीं छापे हैं, जाहिर है यह समूचा धन देश के गरीब गुरबों के द्वारा हर कदम पर दिए जाने वाले कर से ही जुटाई गई है।
 
एक तरफ जहां मणिशंकर अय्यर द्वारा इस आयोजन को लेकर सरकार को कोसा जा रहा है, वहीं उसी वक्त देश के खेल मंत्री एम.एस.गिल द्वारा 19वंे राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए सज रहे स्टेडियम का जायजा लिया जा रहा था। खेल मंत्री इस आयोजन को भारत की इज्जत का सवाल भी निरूपित कर रहे हैं। गिल ने नेहरू स्टेडियम को देखकर यह कहा कि उन्हें खुशी हो रही है कि यह स्टेडियम आखिरकार पूरा हो गया है।

इधर भारत गणराज्य के खेल मंत्री एम.एस.गिल इस आयोजन पर पैसे की कथित तौर पर बरबादी में अपनी ओर से खुशी जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के ही राज्य सभा सदस्य मणि शंकर अय्यर द्वारा इस तरह की खुशी वही जाहिर कर सकता है जो  ''शैतान'' हो। अब फैसला जनता करे या मणिशंकर अय्यर अथवा देश पर आध्शी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस कि मणि शंकर अय्यर आखिर ''शैतान'' की उपाधि किसे देना चाह रहे हैं।
 
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सीबीएसई पर हावी शिक्षा माफिया (6)

सर्कस के बाजीगर ही जा सकते हैं वाहन से सेंट फ्रांसिस शाला

 
 सिवनी। ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में पालकों को सीबीएसई का लोभ दिखाकर जिला मुख्यालय में संचालित निजी तौर पर संचालित होने वाली शालाओं द्वारा लूट सके तो लूट को मूल मंत्र अपनाया जा रहा है, और प्रशासन ध्रतराष्ट्र की भूमिका में ही दिख रहा है. जिला मुख्यालय में कितनी शालाओं के पास सीबीएसई की मान्यता है, यह बात कोई नहीं जानता है, बावजूद इसके जिला प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया जाना आश्चर्यजनक की माना जा सकता है. शालाओं पर नियंत्रण के लिए जवाबदेह जिला शिक्षा अधिकारी ही जब अपने आप को इस मामले से दूर रखते हुए शाला संचालकों के पक्ष में परोक्ष तौर पर आकर खडे हो गए हों, तब विद्यार्थियों और पालकों का तो भगवान ही मालिक है.
 
 मध्य प्रदेश के लिए सीबीएसई बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय राजस्थान के अजमेर में स्थित है. वहां स्थित सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में अब तक किसी भी शाला को सीबीएसई से संबद्धता नहीं प्रदान की गई है, अलबत्ता सीबीएसई की मान्यता लेने की कार्यवाही अवश्य ही कुछ शालाओं द्वारा दी गई है. सूत्रों का कहना है कि जब तक सीबीएसई बोर्ड की मान्यता शाला को नहीं मिल जाती तब तक शाला के द्वारा अपने आप को सीबीएसई से संबद्ध होने की बात प्रसारित प्रचारित नहीं की जा सकती है.
 
 बताया जाता है कि जिला मुख्यालय में संचालित होने वाली कुछ शालाओं द्वारा मीडिया में विज्ञापन, पंपलेट आदि साधनों के माध्यम से अपने आप को सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध होना बताया जा रहा है. प्रशासन की निष्क्रियता के चलते इन शाला संचालकों का आलम यह है कि ये विद्यार्थियों को ढोने में प्रयुक्त होने वाले वाहनों में भी सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त का ठप्पा लगाकर चोरी और सीना जोरी कर रहे हैं. यहां उल्लेखनीय होगा कि जिन वाहनों में यह लिखा है, वे शाला के लिए निर्धारित किए गए पीले रंग के स्थान पर सफेद रंग से रंगे हुए हैं. इन वाहनों में निर्धारित से अधिक बच्चों को भी ढोया जा रहा है.
 
 परिवहन कार्यालय में गौरतलब होगा कि निजी उपयोग के लिए पंजीबद्ध होने के बावजूद इन वाहनों का पूरी तरह से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है, और यातायात पुलिस के साथ ही साथ क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का कार्यालय भी आंख बंद किए हुए बैठा है. इस तरह आपसी सांठ गांठ के चलते परिवहन विभाग को दिए जाने वाले करों के रूप में लाखों रूपए की सीधी सीधी क्षति पहुंचाई जा रही है. जिन वाहन संचालकों ने बाकायदा यात्रीकर या अन्य मदों में बाकायदा कर जमा किया है, उनमें रोष और असंतोष की स्थिति बनती जा रही है.
 
 इसी क्रम में जिला मुख्यालय में कचहरी चौक में रिहाईशी इलाके में इसाई मिशनरी द्वारा संचालित होने वाले सेंट फ्रांसिस स्कूल द्वारा आनन फानन अपनी शाला को शहर से लगभग सात किलोमीटर दूर जबलपुर रोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है. आधे अधूरे भवन में स्थानांतरित इस शाला को संभवतरू सीबीएसई बोर्ड के अधिकारियों के निरीक्षण के उददेश्य से स्थानांतरित किया गया है. बताया जाता है कि जुलाई माह में ही किसी दिन सीबीएसई बोर्ड के द्वारा पाबंद किए गए दो प्राचार्य आकर इसका निरीक्षण करेंगे कि शाला का संचालन सीबीएसई के मापदण्डों के मुताबिक किया जा रहा है, अथवा नहीं. अगर यह पाया गया कि उक्त शाला का संचालन सीबीएसई के मापदण्डों के हिसाब से नहीं किया जा रहा है तो वे अपने प्रतिवेदन में प्रतिकूल टिप्पणी अवश्य करेंगे, जिससे इस शाला का सीबीएसई से एफीलेशन खटाई में पड सकता है.
 
 वर्तमान में बारिश के माह में शाला की स्थिति काफी दयनीय बताई जा रही है. बताया जाता है कि मुख्य मार्ग से शाला पहुंच मार्ग पूरी तरह से कीचड से सना हुआ है. इस मार्ग पर अगर कोई पालक, विद्यार्थी अथवा शिक्षक अपना वाहन लेकर शाला तक पहुंचता है तो रास्ते में अनेक बार उसका दुपहिया वाहन हिचकोले खाता रहता है. वाहन चालकों को डर बना रहता है कि कहीं वह फिसलकर दुर्घटना ग्रस्त न हो जाए. अनेक वाहन चालक इस मार्ग पर अपने वाहनों से गिर भी चुके बताए जा रहे हैं. पालकों, विद्यार्थियों या शिक्षकों की इस परेशानी से शाल प्रबंधन को कुछ लेना देना नहीं है, शोर शराबा होने पर शाला प्रबंधन द्वारा रस्म अदायगी के लिए रोलर आदि चलवाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है. चर्चाओं के अनुसार इस मार्ग पर वाहन चलाना अब सिर्फ सर्कस के बाजीगरों के बस की ही बात रह गई है, क्योंकि सर्कस के बाजीगर ही अपना बेलेंस साधने में मास्टरी रखते हैं.
 
व्याप्त चर्चाओं के अनुसार इस शाला में पूर्व में सीबीएसई के निर्धारित मापदण्डों के हिसाब से चालीस छात्र प्रति कक्षा के बंधन को भी तोडा जा रहा है. मई और जून माह में प्रवेश पर बंदिश लगाने के बाद अब धडल्ले से इस शाला में प्रवेश देने का सिलसिला चल पडा है, जिससे लगने लगा है कि शाला प्रबंधन को अपने विद्यार्थियों को पढाई आदि की गुणवत्ता से ज्यादा चिंता किसी और चीज की है. इतना सब कुछ होने के बावजूद भी अगर सांसद, विधायक, जिला प्रशासन सहित सत्ताधारी भाजपा और विपक्ष में बैठी कांग्रेस चुप्पी साधे बैठी हो तो फिर शहर के बच्चों के भविष्य पर प्रश्रचिन्ह स्वयंमेव ही लग जाता है.
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श्रेष्ठता का प्रमाण: लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान


कहा गया है कि प्रेम में जीव अभय हो जाता है , वहां तो सिर्फ समर्पण ही रह जाता है ! प्रेम सर्वस्व न्योछावर करके गदगद हो जाता है ! अहंकार सबकुछ पाकर भी खुश नहीं होता है ! प्रेम दूसरों की छाया बनकर अपने को धन्य मानता है, अहंकार दूसरो की छाया छीनकर भी उदास बना रहता है ....प्रेम जब कुछ बाँट नहीं पाता तब दुखी होता है !

ऐसे दो गीतकार हैं हमारे चिट्ठाजगत में जिनका एक मात्र उद्देश्य है प्रेम बांटना ....उनके गीतों में प्रेम की कोमलता होती है और छंद श्रृंगार से सराबोर ! इनके गीत ह्रदय की धड़कन और साँसों के आरोह-अवरोह के वे सरगम होते हैं जिसमें डूबकर पाठक सत्य -शिव और सुन्दर की तलाश हेतु आतुर हो जाता है !
इन दोनों सुमधुर गीतकारों को ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ किलिक करें
१० मई २०१० को हिंदी के प्रतिष्ठित समाचार पत्र जनसत्ता के नियमित स्तंभ में एक आलेख ब्लोगोत्सव-२०१० से साभार प्रकाशित किया गया था , शीर्षक था " भविष्य का यथार्थ"
यह अपने आप में एक प्रमाण है पोस्ट की श्रेष्ठता का , इस आलेख में भविष्य से संबंधित उन पहलूओं पर प्रकाश डाला गया है जो पूर्णत: प्रमाणिक और सत्यता से परिपूर्ण है !
ब्लोगोत्सव की टीम ने इस पोस्ट को वर्ष का श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट का अलंकरण देते हुए इसके लेखक को सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ किलिक करें

साथ ही ब्लोगोत्सव-२०१० पर आज-
आप शुभकामनाएं देना चाहते हैं तो उसी पोस्ट के लिंक पर क्लिक करके परिकल्‍पना ब्‍लॉगोत्सव 2010 की संबंधित पोस्ट पर ही देंगे तो पाने वाले और देने वाले - दोनों को भला लगेगा। यह भलापन कायम रहे।
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आइये पहचानिए * फिर मत कहिएगा, खबर न हुई वरना हम पहाड़ पर चढ़ जाते (अविनाश वाचस्‍पति)

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आदमीयत अब है कहां : हम तो हिन्‍दी ब्‍लॉगरों में तलाश रहे हैं

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चिट्ठी पत्री से...!

आजाओ न कभी यूँ ही
चिट्ठी पत्री से एकदम से

फिर कुछ पूछो न नाम पता
फिर देहरी पर जम ही जाओ
फिर मै थामूं समझ अपना
आखर से आंगन भर जाओ

इक खुशियों भरी सूचना से
घर महका जाओ मद्धम से !

हाँ सबको संबोधन करना
कोई भी अपना छूटे न
स्नेह भी हो आदर भी हो
कोई भी परिजन रूठे न

लेकिन मुझसे ऐसे मिलना
जैसे इक प्रियतम, प्रियतम से !
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अज्ञेय और शमशेर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी (द्वितीय प्रमोद वर्मा स्मृति समारोह-2010) : मधुरेश, ज्योतिष जोशी और डॉ.शोभाकांत झा का सम्मान

(द्वितीय प्रमोद वर्मा स्मृति समारोह-2010 )
मधुरेश, ज्योतिष जोशी और डॉ.शोभाकांत झा का सम्मान
रायपुर । छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा प्रेमचंद जयंती के अवसर पर देश के दो मूर्धन्य रचनाकार अज्ञेय और शमशेर की जन्मशताब्दी वर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर  मनाया जा रहा है । यह आयोजन 30-31 जुलाई,2010 को होटल गोल्डन ट्यूलिपव्ही.आई.पी.रोड किया जा रहा है जिसमें देश और राज्य के 200 से अधिक साहित्यकार भाग ले रहे हैं । समारोह की शुरूआत 30 जुलाई की शाम 7 बजे राष्ट्रीय कविता पाठ से होगी जिसमें देश के प्रतिष्ठित कवि- सर्वश्री नंदकिशोर आचार्य(जयपुर)दिविक रमेश(दिल्ली)अष्टभुजा शक्ल(बस्ती)बुद्धिनाथ मिश्र(देहरादून)श्रीप्रकाश मिश्र(इलाहाबाद)नरेंद्र पुंडरीक(बांदा)रवीन्द्र स्वप्निल प्रजापति(भोपाल)प्रेमशंकर रघुवंशी(हरदा)अनिल विभाकर(रायपुर)रति सक्सेना(त्रिवेन्द्रम)सुधीर सक्सेना(दिल्ली), राकेश श्रीमाल(वर्धा)श्री अरुण शीतांश(आरा)संतोष श्रेयांश(आरा),शशांक(बक्सर)कुमुद अधिकारी(नेपाल), कुमार नयन(बक्सर)जयशंकर बाबु (आंध्रप्रदेश)आदि अपनी श्रेष्ठ कविताओं का पाठ करेंगे । अध्यक्षता करेंगे जाने माने आलोचक डॉ. धनंजय वर्मा । मुख्य अतिथि होंगे - डॉ. गंगा प्रसाद विमल और विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे श्री मधुरेशप्रभुनाथ आजमी आदि ।
मधुरेश

संस्थान के सचिव सुरेन्द्र वर्मा ने बताया है कि 31 जुलाई2010 9 बजे प्रातः द्वितीय प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान-2010 से प्रमुख कथाआलोचक श्री मधुरेश और युवा आलोचक ज्योतिष जोशी को सम्मानित किया किया जायेगा । इसके पूर्व गत वर्ष श्रीभगवान सिंह और कृष्ण मोहन जैसे आलोचकों को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है ।  इस  सम्मान के  अंतर्गत 21, 11 व 7 हजार रुपये, प्रतीक चिन्ह, सम्मान पत्र आदि से सम्मानित किया जाता है ।इस  अवसर पर राज्य स्तरीय प्रमोद वर्मा रचना सम्मान से हिन्दी के पूर्णकालिक ललित निबंध लेखन के लिए डॉ. शोभाकांत झा को भी अंलकृत किया जायेगा । इस अवसर पर राज्य से प्रकाशित होने वाली संपूर्ण त्रैमासिक पत्रिका पांडुलपि के प्रवेशांक (प्रधान संपादक- अशोक सिंघई)कठिन प्रस्तर में अगिन सुराख (विश्वरंजन)ठंडी धुली सुनहरी धूप (विश्वरंजन), शिलाओं पर तराशे मज़मून (डॉ. धनंजय वर्मा पर एकाग्र) छत्तीसगढ़ की कविता(डॉ. बलदेव), मीडिया : नये दौर,नयी चुनौतियाँ (संजय द्विवेदीभोपाल) चाँदनी थी द्वार पर ( सुरेश पंड़ा)पक्षी-वास (मूल उडिया उपन्याससरोजिनी साहू, अनुवाद– दिनेश मालीउड़ीसा)झरोखा (पंकज त्रिवेदी,अहमदाबाद),विष्णु की पाती – राम के नाम (विष्णु प्रभाकर के पत्र- जयप्रकाश मानस),कहानी जो मैं नहीं लिख पायी ( श्री कुमुद अधिकारीनेपाल)11 किताबें (डॉ. के. के. झा,बस्तर)पत्रिका देशज (अरुण शीतांशबिहार), ये है इंडिया मेरी जान (युक्ता राजश्री) आदि का विमोचन भी किया जायेगा ।
ज्‍योतिष जोशी

31 जुलाई को 11 बजे अज्ञेय की शास्त्रीयता  विषय पर राष्ट्रीय विमर्श होगा जिसमें डॉ. कमल कुमार-दिल्ली डॉ. आनंदप्रकाश त्रिपाठी-सागरश्री बजरंग बिहारी-दिल्ली, डॉ.देवेन्द्र दीपक-भोपाल, डॉ. रति सक्सेना-त्रिवेंन्द्रमडॉ. सुशील त्रिवेदी-रायपुरश्री बुद्धिनाथ मिश्र-देहरादूनश्री महेन्द्र गगन-भोपाल श्री प्रकाश त्रिपाठी-इलाहाबादश्री माताचरण मिश्र-भोपाल,श्री संतोष श्रेयांस-आरा अपना वक्तव्य देंगे । अध्यक्ष मंडल में होगें - श्री नंदकिशोर आचार्य-जयपुरश्री गंगाप्रसाद विमल-दिल्ली,डॉ. दिविक रमेश-दिल्लीडॉ. धनंजय वर्मा-भोपाल आदि । इसी तरह उसी दिन 3 बजे शमशेर का कविता संसार  पर विमर्श में वक्ता के रूप में डॉ. रोहिताश्व-गोवाश्री राकेश श्रीमाल-वर्धा, श्री प्रभुनाथ आजमी-भोपालश्री ज्योतिष जोशी-दिल्ली, श्री नरेन्द्र पुंडरीक-बांदाडॉ. शिवनारायण-पटनासंतोष श्रीवास्तव-मुंबई श्री दिवाकर भट्ट-हलद्वानी,श्री मुकेश वर्मा-उज्जैन, श्री कुमार नयन-बक्सरश्री राजेन्द्र उपाध्याय-दिल्लीश्री रविन्द्र स्वप्निल प्रजापति-भोपालडॉ. कमलेश-इलाहाबाद, डॉ. सुधीर सक्सेना-दिल्ली, अध्यक्ष मंडल में होंगे -  डॉ. धंनजय वर्मा-भोपालश्री मधुरेश-कानपुरश्री खगेन्द्र ठाकुर-पटनाश्री त्रिभुवन नाथ शुक्ल-भोपाल आदि ।  इस अवसर पर  टैगोरशमशेरअज्ञेयफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ एवं प्रमोद वर्मा की कविताओं की प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही है । श्री सुरेन्द्र वर्मा ने जिले के साहित्यकारों, कलाधर्मियों, लेखकों, शिक्षाविदों को उक्त राष्ट्रीय आयोजन में सम्मिलित होने की अपील की है ।
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श्रेष्ठता का प्रमाण : लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान

एक ऐसा गीतकार जिसकी प्रतिभा को स्थानीय स्तर पर केवल दबाया ही न गया हो, अपितु उन्हें उस स्थान को प्राप्त करने से वंचित भी रखा गया जिसके वे सचमुच हक़दार थे ...!

एक ऐसा गीतकार जिसकी लेखनी से प्रेम के स्वर प्रस्फुटित होते हैं और कंठ में निवास करती हैं स्वयं सरस्वती ....जिसके गीत पाठकों/श्रोताओं को आंदोलित ही नहीं करते अपितु भीतर-ही भीतर नए महासमर के लिए तैयार भी करते हैं .....जिसकी प्रेमानुभुतियाँ इंसानियत के लड़खड़ाते कदमों को संभालने में, प्रेम पंजरी फांकने वालों को झुलसाने से बचाने में और हताश-निराश लोगों को आशा की किरण प्रदान करती है !

जानते हैं कौन हैं वो ?

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एक ऐसा गीतकार जिसकी गीतात्मक अभिव्यक्तियों में एक और प्रीति के फाग का राग है तो दूसरी ओर गहन दार्शनिक चिंतन- सरणि का सारभूत अध्यात्म का पराग भी है ...!

एक ऐसा गीतकार जिसके बिंब और कथ्य ग्रामीण परिस्थितियों से लबरेज है वहीं भाव व्यापक प्रभामंडल को आयामित करने में समर्थ ...!

जिसकी प्रवाहशीलता के साथ-साथ अर्थ व्यंजनायें बरबस आकर्षित करती है और जिसकी जिन्दादिली से वाकिफ है पूरा हिंदी चिट्ठाजगत ...!
जानते हैं कौन हैं वो ?
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इसके अतिरिक्त ब्लोगोत्सव-२०१० पर अवश्य पढ़ें --

सितारों की महफ़िल में आज राजेन्द्र स्वर्णकार
सितारों की महफ़िल में आज ललित शर्मा
आप शुभकामनाएं देना चाहते हैं तो उसी पोस्‍ट के लिंक पर क्लिक करके परिकल्‍पना ब्‍लॉगोत्‍सव 2010 की संबंधित पोस्‍ट पर ही देंगे तो पाने वाले और देने वाले - दोनों को भला लगेगा। यह भलापन कायम रहे।
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जाने भी दो यारो का एक यार चला गया : रवि वासवानी का जाना बहुत दुखद है

जाने माने फिल्म अभिनेता रवि वासवानी का मंगलवार को दिल का दौरा पडने से निधन हो गया। 64 वर्षीय वासवानी का निधन शिमला में हुआ। । 1981 में चश्मे बद्दूर से कैरियर की शुरुआत करने वाले वासवानी ने  कॉमेडी फिल्म जाने भी दो यारो से खूब वाहवाही लूटी थी। इस फिल्म में उन्होंने एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर का किरदार निभाया था, जिसके लिए उन्हें 1984 में बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया था। उन्‍होंने  टेलीविजन पर  और लाडला, कभी हां कभी ना, , प्यार तूने क्या किया, बंटीऔर बबली जैसी फिल्मों में भी काम किया।

वासवानी की मौत पर जिन सितारों ने दुख जताया, उनमें अभिनेता अनुपम खेर ने ट्विटर पर लिखा, ‘अभी पता चला कि रवि वासवानी नहीं रहे। सुनकर दुख हुआ। कमाल के व्यक्ति थे। हमेशा खुशनुमा और मदद करने वाले।’ फिल्मकार मधुर भंडारकर ने लिखा, ‘रवि वासवानी की मौत की खबर सुनकर दुख हुआ। उनकी आत्मा को शांति मिले।’
नुक्‍कड़ परिवार की विनम्र श्रद्धांजलि।
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क्या ५ रुपये के सिक्के आप की जान बचा सकते है ??

क्या ५ रुपये के सिक्के आप की जान बचा सकते है ?? 
शायद ................. हाँ !!
बता रहे है कारगिल के योद्धा व परमवीर चक्र विजेता जोगेंद्र सिंह यादव| 
पूरी कहानी यहाँ है !
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यदि महिलाएं डायन हैं तो पुरुष कुछ क्यों नहीं?

पिछले दिनों तमाम अख़बारों में एक दिल दहलाने देने वाली खबर पढ़ने को मिली.इसमें लिखा गया था कि देश में अभी भी महिलाओं को डायन बताकर मारा जा रहा है.दादी-नानी से सुनी कहानियों के मुताबिक डायन वह महिला होती है जो दूसरों के ही नहीं बल्कि अपने बच्चे तक खा जाती है.इन कहानियों के आधार पर बचपन में मेरे मन में डायन कि कुछ ऐसी डरावनी छवि बन गयी थी जैसी कि अंग्रेजी फिल्मों में ड्राकुला की होती है.मसलन लंबे भयानक दांत.कुरूप चेहरा,गंदे व खून से लथपथ नाखून इत्यादि वाली महिला! परन्तु जब भी डायन बताकर मारी गयी महिला की तस्वीर देखता तो वो इस छवि से मेल नहीं खाती थी.कभी दादी-नानी से पूछा तो वे भी संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं दे पायीं.वक्त के साथ समझ आने पर डायन कथाओं और इनके पीछे की हकीकत समझ में आने लगी.
ऊपर मैंने जिस खबर का उल्लेख किया है उसमें एक गैर सरकारी संस्था रूरल लिटिगेशन एंड एनटाइटिलमेंट केंद्र द्वारा किये गए अध्ययन के अनुसार बताया गया था कि देश में हर साल 150-200 महिलाओं को डायन बताकर मार डाला जाता है। इस संस्था ने राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकडों के हवाले से बताया कि इस सूची में झारखंड का स्थान सबसे ऊपर है। वहां 50 से 60 महिलाओं की डायन कहकर हत्या कर दी जाती है। दूसरे नंबर पर पर आंध्रप्रदेश है, जहां करीब 30 महिलाओं की डायन के नाम पर बलि चढ़ा दी जाती है। इसके बाद हरियाणा और उड़ीसा का नंबर आता है। इन दोनों राज्य में भी प्रत्येक वर्ष क्रमश: 25-30 और 24-28 महिलाओं की हत्या कर दी जाती है। इस संगठन के मुताबिक पिछले 15 वर्षों में देश में डायन के नाम पर लगभग 2,500 महिलाओं की हत्या की जा चुकी है।
सवाल यह उठता है कि यदि आज के आधुनिक और तकनीकी संपन्न दौर में भी जब महिला डायन हो सकती है तो पुरुष कुछ क्यों नहीं होता.अब इसे पुरुष सत्तात्मक समाज की विडंबना कहें या पुरुषवादी सोच कि उन्होंने शब्दकोष में डायन के पर्यायवाची शब्द की गुन्जाइश ही नहीं रखी.दरअसल गांवों में फैली अज्ञानता और शिक्षा की कमी के कारण इस तरह की कुप्रथाएं आज भी शान से कायम है. वैसे जानकर डायन बनाने का कारण ज़मीन के झगड़े,महिलाओं के साथ जबरदस्ती करने में मिली नाकामयाबी,पारिवारिक शत्रुता,विधवा हो जाने को भी मानते हैं.खास बात यह है कि डायन सदैव दलित या शोषित समुदाय की ही होती है.ऊंचे तबके की महिलाओं के डायन होने की बात यदा-कदा ही सुनने में आती हैं.इससे भी आश्चर्य की बात यह है कि “ओनर किलिंग” के नाम पर देश को सर पर उठा लेने वाले मीडिया,नेता,समाजसेवी और बड़े गैर सरकारी संगठन डायन के मुद्दे को ज्यादा महत्त्व नहीं दे रहे जबकि यह वास्तव में मानव सभ्यता पर कलंक है और स्त्री जाति का अपमान है.जिस देश में महिलाओं को दुर्गा,काली ,लक्ष्मी,सरस्वती,गंगा,माँ जैसे पवित्र नामों से पूजा जाता है वहीँ उसे डायन बताकर मार भी डाला जाता है?हम कब तक इसीतरह मौन रहकर माँ को डायन बनता देखते रहेगें?कम से कम इसके खिलाफ आवाज़ तो उठा ही सकते हैं..?
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मीडिया खबर.कॉम के संपादक को मिली धमकी



आज़ाद न्यूज़ या इसके किसी भी व्यक्ति के खिलाफ ख़बर करोगे तो जान से जाओगे. यह धमकी पिछले कुछ दिनों से लगातार मीडिया ख़बर.कॉम के संपादक को मिल रही है. धमकी फ़ोन से दी जा रही है. यह फ़ोन बार - बार आ रहा है. फ़ोन का नंबर है - (+911203140856 / +911204262205). फ़ोन के जरिये धमकाया जा रहा है कि कमलकांत गौरी (इनपुट हेड), रवींद्र शाह (आउटपुट हेड), नवीन सिन्हा (पॉलिटिकल एडिटर) या हिंदी समाचार चैनल आज़ाद न्यूज़ के खिलाफ कुछ भी लिखा तो अच्छा नहीं होगा. अंजाम बुरा होगा. कुछ भी हो सकता है. कुछ भी...

मीडिया खबर.कॉम के संपादक की खता इतनी है कि कुछ वक़्त पहले मीडिया खबर पर मिशन आज़ाद नाम से कुछ स्टोरीज प्रकाशित की गयी थी. उसमें चैनलों के अंदर चल रहे फर्जीवाड़े और उसमें संलिप्त ऊँचे पद पर बैठे कई कथित पत्रकारों का पर्दाफाश किया गया था. चैनलों के अंदर की अव्यवस्था, पत्रकारों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार और श्रम कानूनों के उल्लंघन को बेनकाब किया गया था. हालाँकि किसी खास व्यक्ति का नाम नहीं दिया गया था. इससे कुछ लोग खफ़ा थे. लिहाजा, इन लोगों ने साम, दाम, दंड, भेद हर तरीके से ख़बरें रूकवाने की कोशिश की. लेकिन जब खबर रूकवा नहीं पाए तो ओछेपन पर उतर आये. पहले अलग - अलग माध्यमों से धमकाया गया. फिर झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गयी. चैनल का रूतबा दिखाकर पुलिस से पिटवाना चाहा. लेकिन जब कुछ नहीं कर पाए तो लगे फ़ोन से धमकी देने.

इसके पहले आज़ाद न्यूज़ के इनपुट हेड कमलकांत गौरी, आउटपुट हेड रवींद्र शाह और पॉलिटिकल एडिटर नवीन सिन्हा ने मीडिया खबर.कॉम को मेल के जरिये नोटिस भेजा था जिसका जवाब मीडिया खबर के लीगल सेल की तरफ से दे दिया गया. लेकिन इस बीच, मीडिया खबर के संपादक पुष्कर पुष्प को डराने और धमकाने की कोशिशें लगातार जारी रहीं. घर पर गुंडे भेजे गए. नोटिस मिला है की नहीं. यह पूछने के लिए कई लोगों को मीडिया खबर के संपादक के घर भेजा गया. यह लोग सफ़ेद रंग की कार से आये. कार में कई लोग थे. इनका मकसद नोटिस के बारे में पूछना नहीं बल्कि टोह (रेकी) लेना था. यदि नोटिस के बारे में ही पूछना था तो फोन करके या मेल के जरिए पूछा जा सकता था। मुंहज़बानी पूछने का क्या मतलब? यदि पूछने ही आये तो कार भर के आदमियों के साथ क्यों आये? उसके बाद भी कई संदिग्ध लोगों का आना - जाना जारी रहा. इसके बाद मीडिया खबर.कॉम के संपादक ने पांडव नगर थाने में शिकायत दर्ज करवायी. शिकायत की कॉपी साथ में संलग्न है. पुलिस के आला अधिकारियों से भी मुलाकात की गयी और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत करवाया गया. शिकायत की विषय सामग्री इस तरह से है :

To,
The SHO,
Pandav Nagar,
Delhi 110092

Subj: Intimidation & threat to my personal safety

Dear Sir,

With due respect I submit that am a journalist & an editor-in-chief of a website www.mediakhabar.com, R/O …………………………………………………………………….. Recently, we published some reports pertaining to some investigations we conducted, which I cant elaborate on here as they were confidential in nature. However, in the aftermath of those reports being published some people were discomfited. They issued me a legal notice, which my lawyers are perusing and will proceed accordingly.

What I wish to bring to your notice by way of this complaint is the trespassing & intimidation tactics employed by these elements (1. Kamal Kant Gouri S/o Shri Ujjal Singh Gouri , Corporate Office- Lane W-17A, House No.18, Western Avenue, Sainik Farms, South, New Delhi. 2. Ravindra Shah S/o Late Shri G G Shah, Corporate Office- Lane W-17A, House No.18, Western Avenue, Sainik Farms, South, New Delhi. 3. Nabin Sinha S/o Late Shri Nagendra Prasad, Corporate Office- Lane W-17A, House No.18, Western Avenue, Sainik Farms, South, New Delhi.) to threaten me surreptiously while my lawyers are pursuing the matter already. These elements sent some people over to my residence, uninvited to check if I had recieved a copy of the notice who then proceeded to do a recce of my neighborhood, which I found very unusual & suspect. Their business rivalry aside, they had no right to visit my premises uninvited or unsupervised and may please be cautioned to keep their distance from me

.By way of this complaint I want to bring to your notice the fact that my personal safety & security could be endangered & if any untoward incident were to take place, I would wish for you to investigate these elements’ role in the same. (1. Kamal Kant Gouri S/o Shri Ujjal Singh Gouri, Corporate Office- Lane W-17A, House No.18, Western Avenue, Sainik Farms, South, New Delhi. 2. Ravindra Shah S/o Late Shri G G Shah, Corporate Office- Lane W-17A, House No.18, Western Avenue, Sainik Farms, South, New Delhi. 3. Nabin Sinha S/o Late Shri Nagendra Prasad, Corporate Office- Lane W-17A, House No.18, Western Avenue, Sainik Farms, South, New Delhi.) I would also request for you to provide me with some extra security or access to my beat constable on a frequent basis, so I feel more at ease. Look forward to your co-operation on the same.

Regards,

Pushkar Pushp
+91 9999 177 575

उसके बाद से फोन आने का सिलसिला शुरू हुआ. फोन करके मीडिया खबर के संपादक को कहा गया कि तुम्हारा घर देख लिया है. अब बाहर निकलो तो बताते हैं. बहुत रिपोर्ट लिखते हो. वेबसाईट बंद करवा देंगे. अभी तो नोटिस ही भेजा है. अब घर में घुस कर मारेंगे. तब अपनी रिपोर्ट बनाकर साईट पर लगाना. फिर भद्दी गालियों की बौछार की गयी. इससे भी मन नहीं भरा तो उठवा लेने की धमकी दी गई. यानी, डराने-धमकाने की हरसंभव कोशिश की गयी. गौरतलब है कि इन लोगों का मारपीट का इतिहास रहा है. कुछ वक़्त पहले आज़ाद न्यूज़ के दफ्तर में अलीगढ़ के स्ट्रिंगर चंद्रशेखर मिश्रा को बुलाकर बेदर्दी से उनकी पिटाई की गयी थी. चंद्रशेखर अपने हक के पैसे वापस पाना चाहते थे. लेकिन, पैसे तो वापस नहीं मिले. बदले में मिला लात, जूता और घूँसा. बाद में उन्होंने थाने में एफआईआर दर्ज करवायी. उस स्ट्रिंगर ने बयान दिया था कि आजाद में ऊँचे पद पर बैठे कई पत्रकारों ने उसके साथ खुद मारपीट की. चैनल के आउटपुट हेड रवींद्र शाह का भी स्ट्रिंगर ने नाम लिया था.

मीडिया खबर.कॉम के संपादक ने कहा कि ऐसी किसी भी धमकी के आगे हमलोग नहीं झुकने वाले हैं. यह वर्चुअल स्पेस पर हमला है. नयी मीडिया से जुड़े लोगों के प्रति एक खतरनाक प्रवृति की शुरुआत है. मीडिया वेबसाईट को कुचलने की साजिश है और इसका प्रतिरोध जरूरी है. मीडिया से जुड़ी तमाम वेबसाइटों पर सभी पक्षों को समान रूप से जगह दी जाती है. यह खुला मंच है. यदि आप किसी वेबसाईट की रिपोर्ट से इत्तफाक नहीं रखते तो कलम के जरिए विरोध कीजिये. प्रतिकार का यह कैसा तरीका है?
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