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आज का फैसला और आपका हौसला .......................... अविनाश वाचस्‍पति

जब इतना रख लिया है तो तनिक सा और रख लो और यकीन मानो जितना रखोगे उससे मिलने वाला फल अद्भुत मिठास लिए हुए होगा । जिसने भी रखा है, इस मिठास को मन से चखा है, उसने इस का महत्‍व जाना-माना है। आप रखोगे तो आप भी मान जाओगे, इसके मुरीद हो जाओगे। जबकि आपको मनाने के लिए कोई नहीं आएगा। आपके भीतर से ही इसको मानने की इच्‍छाशक्ति जागृत होगी। जब मिठास मिलेगी तो आप भी मिठास ही दोगे न, वह मिठास आपकी बोली में इस कदर रची-घुली होगी कि लेने वाला दिव्‍य-मिठास से ओत-प्रोत हो जाएगा।

आप सोच रहे होंगे, बल्कि कईयों ने तो फैसला भी ले लिया होगा कि मैं क्‍या रखने की भूमिका बना रहा है और वे भी गलत नहीं हैं क्‍योंकि आजकल माहौल ही ऐसा है कि कोई भी धन से दीगर सोच ही नहीं पाता है। धन के होने को ही सब अच्‍छाईयों की वजह पाता है। मैं मानता हूं कि धन की ताकत अपरंपार है। पर अपरंपार होते हुए भी पार नहीं पहुंचा पाता है, जबकि किनारा नजर आ रहा है। जिसका किनारा दिखलाई दे रहा हो, उसे मालूम नहीं, मानव क्‍यों अपरंपार मान लेता है। जबकि मानव जहां पहुंच जाता है, उसे अपरंपार नहीं कहा जाना चाहिए। अपरंपार तक तो मानव की पहुंच ही संभव नहीं है। जहां मानव पहुंच ही गया तो वो अपरंपार नहीं रहा।

जीवन में जिनके पास पैसा नहीं होता है और न आने की उम्‍मीदें भी होती हैं। उनके पास इतनी मिठास होती है कि कई धनवान भी अचरज में पड़ जाते हैं और ईर्ष्‍या कर बैठते हैं, जबकि ईर्ष्‍या भाव मन में स्‍वयं ही पैदा हो जाता है। ईर्ष्‍या कभी रखने-सहेजने की चीज नहीं रही है पर फिर भी बहुतायत में सहेजी जाती है। होना तो यह चाहिए कि इसे मन में आने से पहले ही निकालकर बाहर कर देना चाहिए।
मैंने सब्र रखने की बात की है। आप मानेंगे कि सब्र से बड़ी ताकत, इस कायनात में कुछ भी नहीं है। जिसने सब्र रख लिया, उसने सकल जग पा लिया। धैर्य के बल पर कठिन से कठिन संकटों को काटा जाता है। सहनशक्ति धारण करने के लिए पैसा मददगार नहीं हुआ है। पैसा कभी इतना ताकतवर न तो हुआ है और न कभी होगा कि वो सब्र का मुकाबला कर सके। आप एक बार रखकर तो देखिए, सभी फल मीठे मिठास भरे ही मिलेंगे और इस मिठास से न शरीर को, न दिल को, न जिगर को, न रक्‍तवाहिनियों को और अन्‍य किसी अंग को या विचारों को नुकसान पहुंचता है। तो आज जो भी फैसला आये, उसे हौसले से सुनिये, सहन करिये। जान लीजिए कि हौसला ही सबके वजूद का सबब बनता है। तो आप फैसला सुनने के बाद भी सब्र रख रहे हैं न ? घड़ी इम्‍तहान की है।
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कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स से पहले शुरू होगा तीसरा हरियाणा अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव


बिल्‍कुल सच कह रहा हूं गेम्‍स शुरू होंगे 3 अक्‍टूबर को और हरियाणा फिल्‍म समारोह, यमुनानगर में शुरू होगा 1 अक्‍टूबर को। बतलाइये कौन बाजी मार रहा है। गेम्‍स की तैयारियां शुरू हो गई थीं बरसों पहले और फिल्‍म समारोह की शुरू हुई हैं सिर्फ एक बरस पहले।


डीएवी गर्ल्‍स कॉलेज, यमुनानगर में 1 अक्‍टूबर से आयोजित तीसरे हरियाणा अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में भारतीय फिल्‍म जगत की कई बड़ी हस्तियां शिरकत करेंगी। समारोह के निदेशक अजित राय ने आज यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि इसमें भारत और विदेशों की लगभग 50 फिल्‍में दिखाई जायेंगी। उन्‍होंने कहा कि इस फेस्टिवल का उद्घाटन दादा साहेब फाल्‍के अवार्ड से सम्‍मानित सुप्रसिद्ध फिल्‍मकार अडूर गोपालकृष्‍णन करेंगे। अडूर की मलयालम फिल्‍म शेडो किल के प्रदर्शन से फेस्टिवल की शुरूआत होगी।

यह समारोह 7 अक्‍टूबर तक चलेगा जिसमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, अमरीका, पोलैंड, रूस, जापान, चीन, ईरान, स्‍वीडन, फिलीपिन्‍स, हांगकांग, डेनमार्क, हंगरी, नार्वे, अर्जेंटीना, ब्राजील आदि देशों की फिल्‍मों का प्रदर्शन होगा। उन्‍होंने बताया कि इस समारोह में ईरानी सिनेमा का विशेष खंड प्रदर्शित किया जाएगा। इस खंड का शुभारंभ भारत के ईरानी दूतावास में ईरान कल्‍चरल हाऊस के निदेशक अली देहघई करेंगे। 3 अक्‍टूबर को साहित्‍य और सिनेमा खंड का शुभारंभ हंस के संपादक राजेन्‍द्र यादव करेंगे। इस अवसर पर उनके उपन्‍यास सारा आकाश पर इसी नाम से बासु चटर्जी की बनाई फिल्‍म का विशेष प्रदर्शन होगा।

फेस्टिवल की आयोजक डीएवी गर्ल्‍स कॉलेज की प्रिंसीपल सुषमा आर्य ने बताया कि यह खुशी की बात है कि हरियाणा के मुख्‍यमंत्री भूपिन्‍दर सिंह हुड्डा और गवर्नर जगन्‍नाथ पहाडि़या ने समारोह में आने की स्‍वीकृति दी है। इस फेस्टिवल में हरियाणा में सिनेमा के विकास पर एक राष्‍ट्रीय सेमिनार का आयोजन भी किया जा रहा है जिसकी अध्‍यक्षता हरियाणा स्‍टेट चाइल्‍ड वेल्‍फेयर सोसायटी की उपाध्‍यक्ष आशा हुड्डा करेंगी। उन्‍होंने बताया कि हरियाणा के गवर्नर जगन्‍नाथ पहाडिया 6 अक्‍टूबर की शाम 4 बजे सीमा कपूर की राजस्‍थानी फिल्‍म हाट द वीकली बाजार के हरियाणा प्रीमियर पर मुख्‍य अतिथि होंगे।

अजित राय ने बताया कि दादा साहेब फाल्‍के अवार्ड से सम्‍मानित भारत के विश्‍व प्रसिद्ध फिल्‍मकार श्‍याम बेनेगल से दर्शकों की बातचीत का विशेष आयोजन 5 अक्‍टूबर को 2.30 बजे से 5 बजे तक किया जा रहा है। फेस्टिवल में श्‍याम बेनेगल की 2 फिल्‍में समर और सूरज का सातवां घोड़ा दिखाई जा रही हैं। चर्चित युवा फिल्‍मकार अनवर जमाल दर्शकों के सामने श्‍याम बेनेगल से विशेष बातचीत करेंगे। इसी दिन पंजाब में किसानों की आत्‍महत्‍याओं पर अनवर जमाल की फिल्‍म हार्वेस्‍ट ऑफ ग्रीफ का प्रीमियर होगा। उन्‍होंने बताया कि 6 और 7 अक्‍टूबर को भारत के अंतर्राष्‍ट्रीय अभिनेता ओमपुरी फेस्टिवल में मौजूद रहेंगे। फेस्टिवल का अंतिम दिन 7 अक्‍टूबर ओमपुरी की फिल्‍मों को समर्पित किया गया है। ओमपुरी समापन समारोह के मुख्‍य अतिथि भी होंगे। उस दिन उनकी 3 अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍में – ईस्‍ट इज ईस्‍ट, सिटी ऑफ जॉय और माइ सन इज फाइनेटिक दिखाई जायेंगी।

हरियाणा के मुख्‍यमंत्री भूपिन्‍दर सिंह हुड्डा 4 अक्‍टूबर को दिन में 3 बजे ओमपुरी और यशपाल शर्मा की मुख्‍य भूमिकाओं वाली अश्विनी चौधरी की फिल्‍म धूप का विशेष प्रदर्शन देखेंगे। यह फिल्‍म कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों का सघर्ष बयान करती है। इसी दिन अश्विनी चौधरी की राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित हरियाणवी फिल्‍म लाडो भी दिखाई जायेगी। हरियाणा मूल के चर्चित फिल्‍म अभिनेता यशपाल शर्मा की 4 फिल्‍में
समारोह के दौरान दिखाई जाएंगी

अजित राय और सुषमा आर्य ने बताया कि फेस्टिवल के दौरान छात्र-छात्राओं के लिए एक फिल्‍म एप्रीसिएशन कोर्स भी चलेगा। इसके संयोजक सुप्रिसिद्ध फिल्‍मकार के. बिक्रम सिंह होंगे। इसमें छात्रों का विश्‍व की महान फिल्‍मों से परिचय कराया जायेगा और फिल्‍म निर्माण से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारियों पर चर्चा होगी। इसका उद्घाटन 2 अक्‍टूबर की सुबह राष्‍ट्रीय फिल्‍म अभिलेखागार, पुणे के निदेशक विजय जाधव करेंगे। भारतीय फिल्‍म एवं टेलीविजन संस्‍थान, पुणे के पूर्व निदेशक त्रिपुरारी शरण मुख्‍य अतिथि होंगे। इसी दिन चिल्‍ड्रन फिल्‍म सोसायटी, इं‍डिया के सहयोग से बच्‍चों की फिल्‍मों का उत्‍सव शुरू होगा। इस दौरान द ब्‍लू अम्‍ब्रेला फिल्‍म की बाल कलाकार श्रेया शर्मा दो अक्‍टूबर को कालेज में उपस्थित रहेंगी। नाना पाटेकर अभिनीत फिल्‍म अभय का प्रदर्शन भी समारोह में होगा।

तीसरें हरियाणा अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के दौरान कम से कम 9 फिल्‍मों का भव्‍य हरियाणा प्रीमियर आयोजित किया जा रहा है। ये वे फिल्‍में हैं जो अभी व्‍यवसायिक रूप से रिलीज नहीं हुई हैं। ये फिल्‍में हैं कालबेला, (गौतम घोष), हाट द वीकली बाजार (सीमा कपूर), जब दिन चले न रात चले (त्रिपुरारी शरण) स्ट्रिंग – बाउंड विद फेथ (संजय झा), टुन्‍नू की टीना (परेश कामदार), सबको इंतजार है (रंजीत बहादुर), हनन (मकरंद देशपांडे), बियोंड बॉर्डर (शर्मिला मैती) और हार्वेस्‍ट आफॅ ग्रीफ (अनवर जमाल)।
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नुक्कड़: ...और ढह गया पुल

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...और ढह गया पुल

मेरी बेटी ने सूचना दी ... पापा जो पुल नेहरू स्‍टेडियम के पास बन रहा था वह गिर गया और जो मजदूर उस पर काम कर रहे थे, वे भी गिर गये। बहुत से घायल हो गये हैं। मैंने कहा कोई बात नहीं .. । मुझे उदासीन सा पाकर, हैरान, परेशान होकर बोली.. ब्रिज गिर गया... मजदूर गिर गये, घायल भी हो गये और आप हैं कि... कोई बात नहीं, कोई बात नहीं, कहे जा रहे हैं, क्‍या मतलब है? दर्दनाक खबरों को पढ़कर आंखें छलकाने वाले आज इतने उदासीन क्‍यों और कैसे हो गये ?
आखिर बेटी के प्रश्‍नवाचक भावों को भांपकर मैंने चुप्‍पी तोड़ी और उसे समझाया।
http://chokhat.blogspot.com/
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अंडे पर ठंडी पड़ी सरकार का दोगलापन

अंडे पर ठंड़ी पड़ी सरकार के मुख्यमंत्री इस दोगलेपन को भी साफ करने का जतन करें कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार यदि मांसाहार के समर्थन में नहीं है तो फिर पिछले पांच वर्षों में यानी जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई है प्रदेश में मांस का उत्पादन दूना कैसे हो गया !!! मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2009-10 इस तथ्य को प्रतिपादित करता है, उसके अनुसार वर्ष 2004-05 में मांस का उत्पादन जहां 16 हजार मीट्रिक टन था जो कि वर्ष 08-09 में बढ़कर 34 हजार मीट्रिक टन हो गया। और अव्वल तो यह भी है कि यही सरकार झाबुआ में कड़क़नाथ मुर्गे के उत्पादन हेतु 500 स्वसहायता समूहों को सरकारी सहायता दे रही है। राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद की भूतपूर्व सहायक निदेषक वीणा शत्रुघ्न कहती हैं कि अंड़ा या कोई भी एनीमल प्रोटीन (दूध, दही, वसा आदि) कुपोषित बच्चों के लिये एक कारगर दवा है जिसमें एनर्जी सर्वाधिक है । लेकिन मध्यप्रदेश में सरकार इस शोध को जैन समुदाय की जनभावनाओं के नाम पर नकारने का कृत्य कर रही है। इसका विष्लेषण यह भी है कि अंड़ा आने पर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। यानी अंड़ा व्यापारिक हितों को नहीं साधता और व्यापारिक हितों की यही आवाज जैन समुदाय के श्रीमुख से बाहर निकली भावनाओं के आहत होने के रुप में । ज्ञात हो कि जैन समाज यदि विश्व में छठे नंबर का सबसे धनी समुदाय के रुप में विख्यात है तो यही संपन्न व शिक्षित समुदाय कन्या भ्रूण हत्याओं के लिये भी कुख्यात है ।

विस्तृत आलेख के लिए यहाँ आयें
http://atmadarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_28.html
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पानीपत ब्‍लॉगर मिलन और बारिशरस से लबालब बारिशरानी से खुली बातचीत

और मस्‍ती के मूड में निकला तो बारिश ने मुझसे बातचीत करने की इच्‍छा जाहिर की। उसे मालूम था कि मैं लेखक हूं और सीधा-सादा नहीं लिखता। लेकिन इस मामले में मैं बारिशरानी की सीधी बातचीत को सादे अंदाज में पेश करने के लिए राजी हो गया। मैंने बारिशरानी से बातचीत के आमंत्रण को मौके की नजाकत समझते हुए स्‍वीकार कर लिया, जिससे वो मूसलाधार न बरस पड़े और मेरे फुहारों के आनंद को दूर कर दे।  रिमझिम वाले अंदाज में बातचीत शुरू हुई। बारिश ने बतलाया कि आपको याद ही होगा कि पिछले दिनों सरकार ने ऐलान किया था कि दिल्‍ली में गेम्‍स के अवसर पर चूहे नहीं रहने
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पानीपत होते हुए सड़क मार्ग से यमुनानगर,हरियाणा जा रहा हूं (अविनाश वाचस्‍पति)

रवि धवन
यमुनानगर में तीसरा अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍मोत्‍सव आयोजित होने को है। एक अक्‍टूबर से फिल्‍म एप्रीसिएशन कोर्स और फिल्‍मोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है, जो 7 अक्‍टूबर 2010  तक चलेगा। विगत दो वर्षों की तरह इस बार भी मैं इसमें प्रकाशित किए जाने दैनिक बुलेटिन के कार्य के संबंध में शिरकत कर रहा हूं। मैं 3 अक्‍टूबर को वापिस दिल्‍ली आऊंगा।

जाते समय कल दोपहर में पानी में दैनिक भास्‍कर में कार्यरत् श्री रवि धवन जी और कुछ हिन्‍दी ब्‍लॉगर साथियों से मुलाकात का योग है। इसे संयोग नहीं कहा जा सकता है क्‍योंकि पहले से तय है, तब से जब से रवि धवन जी से परिचय हुआ है।

यमुनानगर बिल्‍कुल सटा हुआ है जगाधरी से। जगाधरी में मीडिया डॉक्‍टर ब्‍लॉग के डॉ. प्रवीण चोपड़ा रहते हैं। नांगलाई ब्‍लॉगर मिलन में तय हुआ था कि अगली बार जब मैं यमुनानगर आऊंगा तो वे वहां पर मुझसे अवश्‍य मिलेंगे। उनसे अभी फोन पर बात हो गई है और कोशिश रहेगी कि 3 अक्‍टूबर के पहले ही किसी दिन-समय एक हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन का आयोजन यमुनानगर या जगाधरी में हो जाए।

डॉ. प्रवीण चोपड़ा
पानीपत में कल दोपहर का तो तय है।
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कन्‍हैयालाल नंदन जी और वीरेन्‍द्र सेंगर की कलम

देह दाह गई
नई राह सही

वे जीत ले गए 'कलक्‍टरगंज' : नंदन जी के बारे में वीरेन्‍द्र सेंगर डीएलए में
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पर पहले मेज इमेज की ढूंढ तो लें
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A TRIBUTE TO MR SURESH KALMADI....

दोस्तों, कलमाडी ने भले ही फजीहत की ज़िम्मेदारी कल ली हो मगर इस देश ने उनकी फजीहत का ठेका बहुत पहले ही ले लिया था...हालांकि ये बात जब मैंने कलमाडी को बताई तो उनका कहना था कि किसने दिया तुम्हें ये ठेका...सारे ठेके तो मैंने खुद अपने रिश्तेदारों को दिए हैं!!!बहरहाल पिछले दिनों FACEBOOK पर कलमाडी पर कुछ ONE LINER और JOKE लिखे हैं...आप भी मुलाहिज़ा फरमाएं...
पेट ख़राब होने की शिकायत ले कलमाडी डॉक्टर के पास पहुंचे...डॉक्टर-क्या आजकल बाहर से ज़्यादा खाना हो रहा है...कुछ देर सोचने के बाद कलमाडी....हां सर, घर से बाहर निकलते ही मुझे गालियां खानी पड़ती हैं!!!.................डॉक्टर...ओफ्फ फो....ये तो ऐसी प्रॉब्लम है...जिस पर मैं चाहकर भी आपको 'परहेज़' नहीं बता सकता!!!!!!!
कलमाडी ने साधा इंग्लैंड पर निशाना....कहा अंग्रेज़ों ने अगर हमें वक़्त पर आज़ाद कर दिया होता तो आज इतने काम अधूरे नहीं पड़े होते!!!
कलमाडी 'साहब' घर पहुंचे तो काफी भीग चुके थे...बीवी ने चौंक कर पूछा...इतना भीगकर कहां से आ रहे हैं...क्या बाहर बारिश हो रही है...कलमाड़ी-नहीं....तो फिर...कलमाड़ी-क्या बताऊं...जहां से भी गुज़र रहा हूं...लोग थू-थू कर रहेहैं!!!!!
कलमाडी साहब ने अपना मेल बॉक्स चैक किया...जो मैसेज उसमें थे उसकी डिटेल नीचे दे रहा हूं
1.ASIF ALI ZARDARI & OSAMA BIN LADEN WANT TO BE YOUR FRIEND ON FACEBOOK 2.RAKHI SAWANT,RAHUL MAHAJAN & RAJA CHAUDHARY ARE NOW FOLLOWING YOU ON TWITTER 3 LATE HARSHAD MEHTA &VEERAPAN WANT TO BE YOUR PAL FROM HELL & LAST BUT NOT THE LEA...ST...PAKISTAN CRICKET TEAM INVITES YOU TO BE THEIR BETTING COACH!!!

वैधानिक चेतावनी:-गर्भवती महिलाएं और कमज़ोर दिल के लोग इसे न पढें....पीपली लाइव को ऑस्कर में भेजे जाने के बाद कलमाडी ने मांग की है कि कॉमनवेल्थ थीम सांग को भी ऑस्कर के लिए भेजा जाए...उसमें क्या बुराई है!!!!
रहमान का कहना है कि उन्होंने पांच करोड़ थीम सॉंग कम्पोज़ करने के नहीं, खेलों से जुड़ अपनी छवि ख़राब करवाने के लिए है...गाना तो कलमाडी के ड्राईवर ने बनाया है!!!

BREAKING NEWS...कलमाडी को 'लोकप्रियता' का अंदाज़ा मोबाइल कम्पनियों को भी हो गया है...उनका फोन BUSY जाने पर अब आवाज़ आती है...जिस ज़लील आदमी से आप बात करना चाह रहे हैं वो अभी व्यस्त है...पता नहीं स्साला क्या कर रहा है!!

ये तय हुआ कि कलमाडी को सज़ा-ए-मौत दी जाए...मगर दिक्कत ये है कि उन्हें फांसी पर लटकाने के लिए जल्लाद कहां से लाया जाए...दुनिया के सबसे बड़े जल्लाद तो वो खुद हैं...सरकार खुद कसाब को फांसी पर लटकाने के लिए कलमाडी की मदद लेने वाली थी... रही बात ज़हर का इंजेक्शन देने की...अब बाहर से उन्हें ज़हर देकर मारने की बात तो बहुत बचकानी है!!! कलमाडी ने तो खुद एक्सिडेंट में घायल दो नेवलों को ज़हर की दो बोतल देकर उनकी जान बचाई है...आख़िर भाई ही भाई के काम आता है!!

कलमाडी अपने नाम में मौजूद'कल' की वजह से भी सारे काम 'कल' पर टालते रहे हैं...उनका नाम या तो आजमाडी या फिर अभीमाडी होना चाहिए था!!! मैं जानता हूं कि ये घटिया पैरेडी है मगर जिस आदमी पर की जा रही है...उसे भी तो देखो!

कलमाडी की 'IMAGE' इस हद तक ख़राब हो चुकी है कि किसी EDITING SOFTWARE में भी IMPROVE नहीं हो सकती!!!

बेइज्ज़ती की इंतहा...कलमाडी के कुत्ते ने उन्हें देख पूंछ हिलाना बंद कर दिया है!

दोस्तों, रात को जूतों की एक माला कलमाडी के पोस्टर पर डाली थी...सुबह उठ कर देखा रहा हूं तो उसमें से दो जूते गायब हैं!
पेंटर-WHITEWASH करवाएंगे...कलमाडी-नहीं, अभी पिछले महीने ही घर में करवाया है...पेंटर-सर मैं घर की नहीं आपके मुंह की बात कर रहा हूं!!!

BREAKING NEWS...कलमाडी की बढ़ती 'बदनामी' से प्रभावित हो कांग्रेस ने तय किया है कि नए-पुराने सभी पाप उन्हीं के सिर डाले जाएं...इसी कड़ी में पहला शिगुफा..........अर्जुन सिंह या राजीव गांधी नहीं...एंडरसन को भगाने के पीछे सुरेश कलमाडी का हाथ था!!!

अधूरी तैयारियों से परेशान कलमाडी ने अपना सिर पीटा...कहा स्साला कोई भी अपना वादा नहीं निभाता...आतंकी कह गए थे...खेल नहीं होने देंगे...पता नहीं कहां रह गए???

BREAKING NEWS...ख़बर है कि पिछले तीन दिनों में एक लाख लोगों ने नाम परिवर्तन की सूचना अखबारों में दी है....और क्या ये महज़ इत्तेफाक है कि इन सभी के नाम सुरेश हैं!!!

BREAKING NEWS...साइक्लिंग इवेंट से इतने खिलाड़ियों ने नाम वापिस ले लिए हैं कि अब इस स्पर्धा में कांस्य पदक नहीं दिया जा सकता...वजह...सिर्फ दो खिलाडी़ ही भाग ले रहे हैं!!!

BREAKING NEWS...इंग्लैंड ने कहा है कि जब तक खेल गांव की हालत नहीं सुधरती वे होटल में ही ठहरेंगे...ये सुन कलमाडी ने कल से ही इंग्लैंड के फ्लैट किराए पर चढ़ा दिए हैं!
बाहरी लोगों के दिल्ली आने से परेशान शीला दीक्षित के लिए इससे बड़ी खुशख़बरी और क्या हो सकती है कि एक-के-बाद-एक विदेशी खिलाड़ी दिल्ली आने से मना कर रहे हैं!!!

SWISS GOVERNMENT को शक़ है कि SWISS BANK ने कलमाडी के पास SAVING ACCOUNT खुलवा रखा है!

BREAKING NEWS....कलमाडी को काटने के लिए मच्छरों का कल एक एवेंट होना था...मगर...आख़िरी वक़्त पर ज्यादातर मच्छरों ने अपना नाम वापिस ले लिया है!

कुकर्मों के लिए माफी मांगते हुए सुरेश कलमाडी भगवान की मूर्ति के सामने दंडवत हो गए...मन में माफी मांगी...आंख खोली तो देखा...भगवान खुद कलमाडी के सामने दंडवत थे...बोला...बच्चा...रहम करो...जाओ यहां से...
किसी ने GOOGLE में 'SURESH KALMADI' टाइप किया...सामने से जवाब आया...बच्चा... दुनिया ने इस पर 'रिसर्च' कर ली और तुम अब तक इसे 'सर्च' करने में लगे हो!!

BREAKING NEWS...कलमाडी का कहना है कि उनके साथ धोखा हुआ है...पहले उन्हें बताया गया था कि खेल दो हज़ार दस में नहीं दस हज़ार दो में होने हैं!

BREAKING NEWS...भारत में हो रही कलमाडी की ज़लालत को देखते हुए एंजलिना जोली ने उन्हें ADOPT करने का फैसला किया है!!!

कलमाडी ने हाथ दे कर रिक्शे वाले को रोका और पूछा...बस स्टैंड चलना है...कितने पैसे दोगे???

पाकिस्तान ने प्रस्ताव दिया है कि अगर विदेशी खिलाड़ी भारत आने में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे तो COMMONWEALTH GAMES पाकिस्तान में करवा खेल गांव की गंदगी देखकर इंग्लैंड के कुछ अधिकारियों ने सवाल पूछा कि क्या स्लमडॉग मिलिनेयर की शूटिंग यहीं हुई थी???

आदत से मजबूर अधिकारियों ने अधूरे कामों को पूरा करने के लिए नई DEADLINE 31 अक्टूबर तय कर दी थी!!!
NCERT ने कक्षा छह की किताब से 'चालाक लोमड़ी' का चैप्टर निकाल उसकी जगह 'चालाक कलमाडी' का नया चैप्टर जोड दिया है मगर....कुछ लोगों का सोचना है कि इतने छोटे बच्चों को ये सब पढ़ाना क्या ठीक रहेगा?

BREAKING NEWS...कलमाडी को भारत रत्न दिए जाने की मांग के बीच पाक सरकार ने कलमाडी को निशान-ए-पाकिस्तान सम्मान से नवज़ाने का फैसला किया है...उसका मानना है कि भारत की जितनी बदनामी वो पिछले साठ सालों में नहीं कर पाए उससे ज्यादा इस शख्स ने पिछले छह दिनों में करवा दी है!

इतने प्रस्तावों के बीच अयोध्या विवाद पर एक और प्रस्ताव...न मंदिर...न मस्जिद...कलमाडी का कहना है कि विवादित ज़मीन पर नया खेल गांव बनाया जाए!

आज़ादी की लड़ाई के सबसे बड़े सिपाही महात्मा गांधी के जन्मदिन के अगले दिन... गुलामी के सबसे बड़े प्रतीक कॉमनवेल्थ खेलों का जश्न शुरू हो रहा है...क्या इससे बड़ी शर्मिंदगी कुछ और हो सकती है!

HEART BREAKING NEWS.. अफ्रीकी देश TOKELAU ने भी कॉमनवेल्थ खेलों में न आने की धमकी दी है...अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता...जा रहा हूं...क्वींस बैटन से आत्मदाह करने...
टूटती छतें, ढहते पुल, ऊफनती यमुना...BREAKING NEWS...विदेशी खिलाड़ियों के बाद विदेशी आतंकियों ने भी सुरक्षा कारणों से दिल्ली आने से मना कर दिया है!!!

कॉमनवेल्थ से जुड़ी तमाम बुरी ख़बरें देखकर दिल्ली शहर डूब मरना चाहता है और क्या ये महज़ इत्तेफाक है कि यमुना में कभी भी बाढ़ आ सकती है!

दिल्ली की सुरक्षा ख़ामी का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है कि सुरेश कलमाडी अब तक ज़िंदा घूम रहा है!
सोमालियाई लूटेरों ने कलमाडी को CHIEF CONSULTANT नियुक्त किया!

नाम पर सहमति न बन पाने के कारण कलमाडी साहब के हाथ से एक कुकरी शो का ऑफर निकल गया...चैनल शो का नाम 'खाना-खजाना' रखना चाहता था और कलमाडी इस ज़िद्द पर अड़े थे कि उसका नाम 'खाना खा जाना' रखा जाए!
वेटर-साहब, क्या खाएंगे?

कलमाडी-स्साला, अब भी तुम्हें ये बताना पड़ेगा कि हम क्या खाएंगे।

दिल्ली की रिकॉर्डतोड़ बारिश से प्रभावित हो, प्रधानमंत्री ने मणिशंकर अय्यर को बद्दुआ मामलों का प्रभारी बना दिया है!

कुकरी शो का ऑफर भले ही हाथ से निकल गया हो मगर कलमाडी साहब को FAIR & LOVELY का विज्ञापन मिल गया है...पंचलाइन है...धूप ही नहीं, कर्मों से काले हुए मुंह भी करे साफ!

कॉमनवेल्थ खेलों को भारत की शान बताने वाले अफसरों की ख्वाहिश है कि उनको मुखाग्नि भी क्वींस बेटन से दी जाए!

कलमाडी साहब दिल के बड़े नेक हैं...मैंने उनसे कहा सर, माफ कर दो... मैंने आप पर इतने जोक बनाए...वो बोले बेटा, मैंने कुछ 'नहीं बनाने' पर भी माफी नहीं मांगी और तुम 'बनाने' पर मांग रहे हो!!!

"सुरेश कलमाडी एक ईमानदार, कुशल, मेहनती और देशभक्त आदमी है। उस जैसा सच्चा आदमी आज तक इस देश ने नहीं देखा...पूरे देश को उस पर नाज़ है" ....ऐसी ही फनी और मज़ेदार चुटकुलों के लिए SMS करें...5467 पर!

AND LAST BUT NOT THE LEAST…..कलमाडी की 'लोकप्रियता' का आलम ये है कि लोग दिल्ली के बाद मुन्नी की बदनामी के लिए भी उन्हें ही कसूरवार ठहरा रहे हैं!!!
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कन्हैयालाल नंदन-एक जीवंत नौकुचिया ताल

कन्हैयालाल नंदन के संबंध में लिखने को कुछ सोचता हूं कि एक विशाल चुनौती युक्त दुर्गम किंतु इंद्रधनुषी प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त ,निमंत्राण देता पर्वत मेरे सामने खडा है। ऐसी चुनौतियों को स्वीकार करना मुझे अच्छा लगता है । और इतने बरस से नंदन जी को जानता हूं, इतनी यादे हैं कि उनपर लिखना बांए हाथ का खेल है । पर लिखने बैठा तो उंट पहाड के नीचे आ गया । पता चला कि दोनों हाथों , दिलो – दिमाग और अपनी सारी संवेंदनाओं को भी केंद्रित कर लूं तो इस लुभावने पर्वत के सभी पक्षों को शब्द बद्ध नहीं कर पाउंगा । नैनीताल के पास एक ताल है — नौकुचिया ताल । कहते हैं इसके नौ कोणों को एक साथ देख पाना असंभव है । इस व्यक्तित्व में इतने डाईमेंशंस हैं कि … । तुलसीदास ने कहा है कि जाकि रही भावना जैसी प्रभु मूरति देखी तिन तैसी । अब कन्हैयालाल नामक यह प्राणी प्रभु है कि नहीं अथवा नाम का ही कन्हैया ,यह खोज करना आधुनिक आलोचकों का काम है पर इस मूरति को लोग अनेक रूपों में देखते हैं , यह तय है। इस नौकुचिया ताल के कोणों में- कला,कविता,मंच, पत्रकारिता,मीडिया, संपादन,अध्यापन, मैत्री, परिवार आदि ऐसे कोण हैं जिन्हे किसी एक साथ देख पाना संभव नहीं है

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अंधे रिश्ते - सही या गलत

हाल  ही  में  मैं  अपने मित्र  की बहिन की  शादी  में  शरीक  हुआ | सभी  रस्मो  रिवाज़  के  साथ  विवाह  संपन्न  हुआ | फिर  दौर  चला  पीने  पिलाने  का | इन  लोगों  ने  जिद  की  तो  मैंने  एक सोफ्ट ड्रिंक कंपनी  देने  के  लिए  अपने  हाथ  में  ले  ली | अब  दौर  चला अपने अपने अनुभव बताने का | सभी  लोग  अपने  अपने  अनुभव  बताने  लगे  .
उनमें  से  एक   युवक  जो  लड़के   वालों  की  तरफ  से  था  काफी  देर  से  चुप  था | हमने  उससे  पूछा  की  आप  भी  अपने  अनुभव हमें  बताएं | पहले  तो  वह  झिझकने  लगा , पर  शायद  यह  नशे  का  असर  था  जिससे  उसने  बताना  शुरू  किया , और अंत में भावनात्मक हो गया | जो  कुछ  उसने  बताया ,उसे  सुनकर  हम  सभी  सोच  में  पड़  गए  कि क्या  वास्तव  में  ऐसा  हो  सकता  है  ,क्योंकि   वह  थोड़े  नशे  में  था  तो  हमने  उसकी  बात  सच  ही  मानी | क्योंकि शोध बताते हैं कि नशे में व्यक्ति बहुत कम ही झूठ बोलता है , और उसके बताने कि रफ़्तार और हाव भाव से यह जाहिर था कि वह सच ही बोल रहा  होगा | उसने हमें जो कुछ बताया वह इस प्रकार से है | उसने  हमें बताया कि वह अलीगढ से है और पेशे से इंजिनियर है ,फिर उसने बताया कि जब वह इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष में था, तो उसके रिश्ते के मामाजी कि लड़की जो गाँव में रहते हैं, हाई स्कूल पास करके उसके घर इंटर तक पढाई करने के लिए आयी | वह बहुत ही भोली, सुन्दर, सुशील और पढाई में भी अच्छी थी | वह उसे टूशन अपनी मोटरसाईकिल पर छोड़ आता था | वह भी घर में उसका काम कर देती थी मसलन चाय बना देना, कपडे धो देना  | धीरे धीरे वह दोनों करीब आने लगे | अब वह उसके लिए कुछ न कुछ खरीद कर लाने लगा और उसे मूवी भी दिखा देता | घर में उनकी नजदीकियों से सभी अनजान थे | इस तरह दो साल गुजर गए और उस युवक के अंतिम वर्ष के  एक्साम और उसकी लड़की के इंटर के एक्साम करीब आने लगे , एक दिन उस युवक ने उसे अपने गले लगाना चाहा तो वह दूर हट गयी और कहने लगी कि हम कभी एक नहीं हो सकते , लेकिन वह हमेशा उसे प्यार करती रहेगी | इस तरह उनका बोलना बहुत कम हो गया , लेकिन वह युवक इस तरह तनावग्रस्त हो गया कि अपनी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया 
और फेल हो गया , उसके इस प्रदर्शन पर वह भी बहुत दुखी हुई  लेकिन उस लड़की ने अच्छा प्रदर्शन किया और अब वह विज्ञान में स्नातक कर रही है , उसके बाद वह  लड़की उनके घर को छोड़ हॉस्टल में चली गयी | बाद में उस युवक को एहसास हुआ कि उनके रिश्ते का कोई वजूद नहीं , उसके बाद एक बार वह लड़की उसके घर आई , तब वह उस युवक से बोली कि कुछ रिश्ते सिर्फ महसूस किये जा सकते हैं , क्योंकि मानव समाज में ऐसे अंधे  रिश्ते कलंकित करते हैं , लेकिन एक दोस्त कि तरह वह हमशा उसके साथ है | एक साल बाद उस युवक ने भी परीक्षा पास कर ली , और जॉब करने लगा | 
                                                                                        जब मैंने इस पर विचार किया  तो यही समझ में आया  कि लोग खासकर ( युवा वर्ग ) डेटिंग में उलझकर रह गया है . पहली नहीं तो दूसरी , दूसरी नहीं तो तीसरी , नहीं तो कोई और , और अंत में अवसाद में घिर जाता है , लेकिन जो सच्चे प्यार कि अहमियत को समझते हैं वह निरंतर अपने लक्ष्य को हासिल कर आगे बढ़ जाते हैं | सच्चा प्यार वही है जिसमे हो बलिदान, सच्चाई और भरोसा |
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साहित्‍यकार-रचनाकार कन्‍हैयालाल नंदन जी नहीं रहे

कन्‍हैयालाल नंदन
अभी-अभी श्री प्रेम जनमेजय जी का मोबाइल संदेश प्राप्‍त हुआ है और उनसे फोन पर भी बात हुई है कि  हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता को अमूल्य योगदान देने वाले तथा आत्मीयता,संवेदनशील तथा मिलनसार व्यक्तित्व के स्वामी श्रद्धेय कन्हैयालाल नंदन का आज 25 सितंबर को स्वर्गवास हो गया।। श्री कन्‍हैयालाल नंदन जी की कविताएं इत्‍यादि इस बार गगनांचल के अंक में प्रकाशित हो रही हैं। अंक थोड़ा विलम्‍ब से है, प्रेम जी ने बतलाया कि वे नंदन जी को गगनांचल का वह अंक भेंट कर सरप्राइज देना चाहते थे परंतु नंदन जी ने बाजी मार ली। आखिर मारें भी क्‍यों न, हैं तो वे वरिष्‍ठ और आदरणीय रचनाकार-साहित्‍यकार। आज सुबह 4 बजे वे स्‍वर्ग की ओर प्रस्‍थान कर गए।
 प्राप्त सूचना के अनुसार 26 सितंबर को साढ़े दस बजे लोधी रोड स्थित श्‍मशानघाट  में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उनकी कविता अहसास का घर की पंक्तियां हैं

हर सुबह को कोई दोपहर चाहिए,
मैं परिंदा हूं उड़ने को पर चाहिए।
 
और वे बिना पर के ही उड़ गए। दोपहर का भी इंतजार नहीं किया। पर दोपहर आ रही है। बस नंदन जी नहीं हैं। उनकी स्‍मृतियां हैं।
 
अभी जल्‍दी में इतना ही, शेष बाद में ...
 
नुक्‍कड़ और समस्‍त साहित्‍य परिवार की नंदन जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
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बारिशरानी से रोमांटिक बातचीत

रिमझिम वाले अंदाज में बातचीत शुरू हुई। बारिश ने बतलाया कि आपको याद ही होगा कि पिछले दिनों सरकार ने ऐलान किया था कि दिल्‍ली में गेम्‍स के अवसर पर चूहे नहीं रहने दिए जायेंगे, इसलिए मैं लगातार बरस रही हूं। जिससे जमीन में बिल बनाकर रहने वाले चूहे बाहर निकल आयें और सरेंडर कर दें। मैं उन चूहों की गारंटी नहीं ले रही, जिनके बैंक खातों तक मैं चाहकर भी नहीं पहुंच सकी और न उन पर छींटे ही डाल पाई। इस तहकीकात में मुझे किसी भी जमीनी बिल में एक भी चूहा-सांप-बिच्‍छू इत्‍यादि नहीं मिले हैं। मैंने पाया है कि वे सब एयरकंडीशंड गाडि़यों में सामने घूमते हुए भी छिपे रहते हैं।
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हमारे यहाँ बहुत सारी महत्वाकाँक्षी सरकारी योजनाएँ हैं पर सब के सब भ्रष्टाचार के दलदल में फँसी हुई हैं

सोशल साइट्स पर कदम रखने के बाद मुझे लगा कि सामाजिक समस्याओं के प्रति बहुत सारे पढ़े-लिखे लोग काफी चिन्तित रहते हैं। पर, कुछ लोग पूर्णतावादी विचार रखते हैं, कुछ व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव चाहते हैं तो कुछ नागरिकों के हाथ में ऐसी ताकत चाहते हैं, जो वास्तव में उसे मालिक होने का अहसास कराए। कुछ हमारे प्रबुद्ध साथी कहते हैं कि जिला पदाधिकारी का नाम जिला सेवक कर दिया जाना चाहिए। सबके अपने-अपने राय हैं और शायद सब अपने हिसाब से सही भी हों।

पर, मेरी समझ है कि तंत्र व्यवस्थित ढ़ंग से एवं ईमानदारी से काम करे तो विकास की गति कई गुणा बढ़ जाएगी साथ ही सामाजिक समस्याओं खासकर अति गरीबी को तो दूर किया ही जा सकता है। इसे दूसरे शब्दों में यूँ कहें कि किसी को परमावश्यक आवश्यकताओं की कमी नहीं खलेगी। भोजन के लाले नहीं पड़ेंगे, रहने को घर मिल जाएगा और पहनने को कपड़े। आज आधी आबादी की मूलभूत आवश्यकतायें पूरी नहीं हो पाती, मैं इसके कारणों के विशद विवेचना में नहीं जाना चाहता पर प्रशासन में भ्रष्टाचार कैंसर की तरह फैल गया है जो मुख्य वजह है।बहुत सारी शानदार योजनायें हमारी सरकार के द्वारा चलायी जा रही है, इन पर पानी के तरह पैसे बहाए जा रहे हैं, पर परिणाम वही ढ़ाक के तीन पात रहते हैं।

सबसे पहले तो शुरुआती स्तर से ही पढ़ाई की व्यवस्था बिल्कुल दुरुस्त होने चाहिए। लोगों को इस लायक जरुर बनाया जाए कि वे कम से कम अपनी समस्या तथा उसके कारणों से अवगत हो सकें, साथ ही उस समस्या के निराकरण हेतु उपलब्ध उपचार को अपनाने हेतु ललक रख सकें। यहाँ तो स्थिति यह है कि आप अहले सुबह या शाम में सड़क पर निकल जाएँ तो सड़क के दोनों किनारे शौच करनेवालों की लंबी कतारें मिलेंगी।

पढ़ा-लिखा आदमी हमेशे ही अपने जीवन-स्तर को बेहतर बनाने की सोचता है, अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहता है और उपलब्ध विकल्पों को अपनाने में हिचकता नहीं। अभी तो मैं देखता हूँ एक-एक आदमी के बारह-बारह बच्चे हैं। एक अपने खाने-पीने, रहने की उचित व्यवस्था नहीं और बारह बच्चों को पैदा कर दिया, भाई समस्या तो पहले से ही थी, अब तो समस्या विस्फोट में बदल रही है। परिवार-नियोजन के साधनों का काफी प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है, पर जो अत्यंत गरीबी बदहाली में जी रहे हैं, उन्हें आज भी नहीं पता परिवार को कैसे सीमित रखा जाए। कोई बताता भी है तो वे अपनाने को तैयार नहीं होते, क्योंकि उनका मानसिक स्तर इस लायक नहीं हो पाया है।

अब इनके हित के लिए जो योजनाएँ हैं, उनका क्या हश्र होता है ये तो सभी को मालूम है। इन योजनाओं की ऐसी की तैसी इसलिए होती है, क्योंकि वे जागरुक नहीं हैं, पढ़े-लिखे नहीं हैं। इनमें जानकारी के अभाव के चलते व्यवस्था का विरोध करने के साहस का अभाव है। और मैं एक बात बता दूँ, कोई भी समाजसेवी उनकी फिक्र उस हद तक नहीं कर पाएगा, जितना वे स्वयं करेंगे। गरीब, दलित, पिछड़ों (कृपया जाति के आधार पर न देखें) के उद्धार के लिए उन्हें स्वयं शिक्षित करना होगा, जागरुक बनाना होगा। एक बार उन्हें गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया करा दिया जाए तो फिर वे स्वयं सक्षम हो जायेंगे अपनी सारी समस्याओं को सुलझाने में। फिर किसी मुखिया जी या बीडीओ साहब में हिम्मत नहीं होगी कि वे प्रतीक्षा सूची के अनुसार इन्दिरा आवास का आवंटन न कर मनमाना करें और प्रति इन्दिरा आवास पाँच हजार रुपए वसूलें।

हर पंचायत में अमूमन दस से बीस लाख रुपए प्रत्येक वर्ष मनरेगा में खर्च हो रहे हैं, लेकिन वास्तव में धरातल पर बीस प्रतिशत राशि का भी व्यय नहीं हो पा रहा। चर्चा होती है कि बिहार में निवेश नहीं हुआ, फैक्ट्री नहीं लगी, मजदूरों का पलायन अन्य प्रदेशों में हो रहा है। और तो और महाराष्ट्र, गुजरात, आसाम सब जगह बिहारी मजदूर पीटे जा रहे हैं। निवेश नहीं हुआ तो नहीं हुआ, मनरेगा को तो ईमानदारी से कार्यान्वित करा दीजिए। जो काम बिहार सरकार के हाथ में है उसका कार्यान्वयन तो सही तरीके से हो जाए। मनरेगा को ईमानदारी से धरातल पर उतार दिया जाए तो बड़े स्तर पर मजदूरों को अपने घर में काम मिल जाएगा साथ ही आधारभूत संरचनाओं का भी विकास होगा और मजदूरों के पलायन को रोकना संभव हो सकेगा।

हमारे यहाँ बहुत सारी महत्वाकाँक्षी सरकारी योजनाएँ हैं पर सब के सब भ्रष्टाचार के दलदल में फँसी हुई हैं,
उदाहरणार्थ-----इन्दिरा आवास योजना, राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, मनरेगा, बीआरजीएफ, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सर्व शिक्षा अभियान इत्यादि।

मैंने इन सारी योजनाओं को बेहद करीब से देखा है, इनको लागू कराने के लिए प्रयास किया है और अपने प्रयास में सफल हुआ हूँ। पर, जैसा कि मैंने पहले कहा है मैं उनकी समस्याओं के समाधान हेतु अपनी ऊर्जा का कुछ अंश तो लगा सकता हूँ, अपना सर्वस्व न्योछावर नहीं कर सकता। सभी लोगों का सामाजिक जीवन के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन भी होता है और स्वाभाविक रुप से व्यक्तिगत महत्वाकाँक्षाएँ भी। इसका एकमात्र उपाय है जिनकी समस्या हो उन्हें इस योग्य बना देना ताकि समस्या का समाधान निकालना उनकी व्यक्तिगत महत्वाकाँक्षा बन जाए।
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मातृत्व को तो बख्श दो मेरे भाई..

आजकल टीवी पर एक विज्ञापन बार-बार दिखाया जा रहा है जिसमें माँ अपने बच्चे को बिना किसी आवाज़ के जन्म दे रही है और बच्चा भी बिना रोये पैदा हो जाता है...विज्ञापन के अंत में आवाज़ आती है अपनी आवाज़ बचाकर रखना इंडिया क्योंकि आस्ट्रेलिया आ रहा है. दरअसल यह विज्ञापन जल्दी ही शुरू होने वाली भारत-आस्ट्रेलिया क्रिकेट को लेकर है.विज्ञापन कहता है कि मैचों के दौरान भारतीय टीम के समर्थन के सभी भारत वासियों को अभी बोलना नहीं चाहिए मतलब अपनी आवाज़ बचाकर रखनी चाहिए ताकि मैचों के समय जमकर शोर मचा सके. इस बात पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती कि हमें अपनी टीम का समर्थन करना चाहिए लेकिन इस अपील के लिए मातृत्व या कोख का अपमान तो ठीक नहीं है. मातृत्व मानव जीवन की सबसे अनूठी और यादगार उपलब्धि है. पूरे नौ महीने की तपस्या के बाद माँ अपनी कोख से नव-सृजन करती है और जन्म लेते बच्चे का रोना सुनने के लिए माँ ही नहीं पूरा परिवार और यहाँ तक कि डाक्टर-नर्स भी इंतज़ार करते हैं क्योंकि बच्चे के इस रुदन में ही.......
पूरा पढ़े...www.jugaali.blogspot.com
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सृजन गाथा पर पढि़ए : खेल और खिलवाड़ : कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स है पैसे का पहाड़

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बेटी ऐसी हो तो बहू वैसी क्यों....?

बहू और बेटी के फर्क की नहीं.... परवरिश की बात।
पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए कृपया यहाँ जाएँ......
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हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की हिन्‍दी कार्यशाला

30 अगस्‍त, 2010 को  हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के दिल्‍ली समन्‍वय कार्यालय तथा एलपीजी एसबीयू-उत्‍तरी अंचल ने मथुरा में दो दिवसीय हिन्‍दी कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यालयीन कार्य में हिन्‍दी के प्रयोग को बढ़ाने के उद्देश्‍य से आयोजित इस हिन्‍दी कार्यशाला का उदघाटन दीप प्रज्‍वलित कर अंतरराष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त कवि सोम ठाकुर ने किया। उन्‍होंने इस कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्‍दी को प्राथमिक शिक्षा के स्‍तर से आम व्‍यक्ति से जोड़ा जाना चाहिए। हिन्‍दी हमारी संस्‍कृति की वाहक भाषा है और यदि आने वाली पीढियां इसे नहीं समझ पाएंगी तो हम अपनी सांस्‍कृतिक विरासत को आने भावी पीढि़यों को नहीं सौंप पाएंगे। हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के प्रयासों की उन्‍होंने सराहना करते हुए हिन्‍दी कार्यशाला के आयोजन पर बधाई दी। उन्‍होनें ‘प्रेम का प्‍याला’ कविता का पाठ किया जिसे सुनकर सभी श्रोता झूम उठे। इसी अवसर पर डीएलए, आगरा के संपादक (विचार) डॉ. सुभाष राय ने समाज में हिन्‍दी की मौजूदा स्थिति के लिए व्‍यवस्‍था में मौजूद खामियों को रेखांकित किया। उन्‍होंने कहा कि जब तक हिन्‍दी को रोजगार से न जोड़ा जाएगा, जब तक हिन्‍दी को विज्ञान की भाषा नहीं बनाया जाएगा और जब तक हिन्‍दी के प्रति कथनी और करनी के अंतर को नहीं मिटाया जाएगा तब तक हिन्‍दी अपने खोए गौरव को नहीं पा सकेगी। एचपीसीएल में हिन्‍दी की उपलब्धियों की ब्‍यौरा देते हुए मुख्‍य प्रबंधक-एलपीजी पी के सिंह ने बताया कि भारत सरकार द्वारा एचपीसीएल को लगातार तीसरे साल इंदिरा गांधी राजभाषा शील्‍ड से सम्‍मानित किया जा रहा है जो एचपीसीएल प्रबंधन के हिन्‍दी के प्रति प्रतिबद्धता का द्योतक है। इस हिन्‍दी कार्यशाला में एचपीसीएल के जम्‍मू, होशियारपुर, जींद, बहादुरगढ, दिल्‍ली, लोनी, उन्‍नाव तथा गोरखपुर के विभिन्‍न कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों ने हिस्‍सा लिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान डॉ. सुभाष राय, डॉ. ईश्‍वर सिंह, डॉ. आर एस तिवारी, डॉ. शिलेन्‍द्र वशिष्‍ठ, अमित गुप्‍ता आदि ने संघ की राजभाषा नीति, मीडिया और हिन्‍दी, कंप्‍यूटर व ईमेल पर हिन्‍दी के प्रयोग, व्‍यवहारिक कार्यालयीन हिन्‍दी तथा हिन्‍दी के प्रयोग में मानसिक अवरोध जैसे विषयों पर व्‍याख्‍यान दिए। समारोह का संचालन राजभाषा अधिकारी डॉ. ईश्‍वर सिंह ने किया। इस अवसर पर आगरा के श्री सतीश इंजीनियर विशेष रूप से उपस्थित थे।
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ओय ओय, फुट ब्रिज गिर गया

व्यंग्यलोक पर पढ़े मेरा व्यंग्य ओय ओय, फुट ब्रिज गिर गया
प्रमोद ताम्बट
भोपाल

व्यंग्य और व्यंग्यलोक
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पवित्रा अग्रवाल रचित लघु कथा संस्था

शहर की सात आठ साहित्यिक संस्थाओं ने मिल कर दिल्ली से आये एक लेखक के सम्मान में गोष्ठी का आयोजन किया .

अतिथि लेखक के एक घंटा विलंब से आने के बाद भी सभा में आठ दस लोग ही उपस्थित थे .

लेखक के साथ आई उनकी पत्नी ने अपनी स्थानीय मित्र से पूछा--'यह सम्मान गोष्ठी तो कई साहित्यिक संस्थाओ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी .मैं तो सोच रही थी कि बहुत लोग आये होंगे पर यहाँ तो .....'

मित्र ने बताया --'यहाँ उपस्थित हर व्यक्ति अपनी बनाई किसी संस्था का अध्यक्ष है. इस तरह हर आदमी अपने आप में एक संस्था है .

पवित्रा अग्रवाल जी की अन्‍य लघुकथाएं पढ़ने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक कीजिए
पवित्रा अग्रवाल रचित लघुकथा अनुमान
पवित्रा अग्रवाल रचित लघुकथा मजबूरी
पवित्रा अग्रवाल रचित लघुकथा उलझन


घरोंदा --4-7-126 ईसामिया बाजार ,हैदराबाद --500027
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मैं लाउडस्पीकर होना चाहता हूँ




---------- Forwarded message ----------
From: ?????? ??????
Date: 2010/9/23
Subject: [आत्मदर्पण] मैं लाउडस्पीकर होना चाहता हूँ
To: prashantd1977@gmail.com





मैं लाउडस्पीकर होना चाहता हूँ
दुम की और एक लम्बा सा डंडा और आगे भी फैला सा/बेडौल सा
ना रूप बेहतर इसका, ना ही रंग
पर बात पते की करता है ये |

जो मस्जिद मैं चढ़ जाये तो अज़ान के बोल बोले
और जो मंदिर मैं तो रामायण
इससे निकली गुरबानी की धुन सुनकर लोग कहते हैं, गुरुद्वारा यहीं कही है
और जो देने लगे घंटों की आवाज सुनाई तो जीसस याद आते हैं |

पर ना जाने क्यूँ आदमी लाउडस्पीकर नहीं होना चाहता है
घुसते ही किसी चहारदिवारी/परकोटे मैं
बदल जाते हैं उसके स्वर
भूल जाता है वह इंसान होने की पहली शर्त यानी भाईचारा

लेकिन उसे(लाउडस्पीकर को) मंदिर/मस्जिद/गुरूद्वारे/चर्च मैं जाने से पहले
नहीं ताकना पड़ता है किसी अदालत की और
वह तो जहाँ जाता है वहीँ का हो जाता है |

मैंने पहले ही कहा था
वह बेडौल तो है लेकिन बात पते की करता है |
इसलिए मैं मैं लाउडस्पीकर होना चाहता हूँ |||
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सृजनात्मक लेखन कार्यशाला हेतु ब्लॉगरों से प्रविष्टि आमंत्रित : आपने आवेदन किया क्‍या

रायपुर । रचनाकारों की संस्था, प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा देश के उभरते हुए कवियों/लेखकों/निबंधकारों/कथाकारों/लघुकथाकारों/ब्लॉगरों को देश के विशिष्ट और वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा साहित्य के मूलभूत सिद्धातों, विधागत विशेषताओं, परंपरा, विकास और समकालीन प्रवृत्तियों से परिचित कराने, उनमें संवेदना और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने, प्रजातांत्रिक और शाश्वत जीवन मूल्यों के प्रति उन्मुखीकरण तथा स्थापित लेखक तथा उनके रचनाधर्मिता से तादात्मय स्थापित कराने के लिए अ.भा.त्रिदिवसीय (13, 14, 15 नवंबर, 2010) सृजनात्मक लेखन कार्यशाला का आयोजन बिलासपुर में किया जा रहा है । इस अखिल भारतीय स्तर के कार्यशाला में देश के 75 नवोदित/युवा रचनाकारों को सम्मिलित किया जायेगा ।
संक्षिप्त ब्यौरा निम्नानुसार है-


प्रतिभागियों को 20 अक्टूबर, 2010 तक अनिवार्यतः निःशुल्क पंजीयन कराना होगा । पंजीयन फ़ार्म संलग्न है ।

प्रतिभागियों का अंतिम चयन पंजीकरण में प्राप्त आवेदन पत्र के क्रम से होगा ।

पंजीकृत एवं कार्यशाला में सम्मिलित किये जाने वाले रचनाकारों का नाम ई-मेल से सूचित किया जायेगा ।

प्रतिभागियों की आयु 18 वर्ष से कम एवं 40 वर्ष से अधिक ना हो ।

प्रतिभागियों में 5 स्थान हिन्दी के स्तरीय ब्लॉगर के लिए सुरक्षित रखा गया है ।

प्रतिभागियों को संस्थान/कार्यशाला में एक स्वयंसेवी रचनाकार की भाँति, समय-सारिणी के अनुसार अनुशासनबद्ध होकर कार्यशाला में भाग लेना अनिवार्य होगा ।

प्रतिभागी रचनाकारों को प्रतिदिन दिये गये विषय पर लेखन-अभ्यास करना होगा जिसमें वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा मार्गदर्शन दिया जायेगा ।

कार्यशाला के सभी निर्धारित नियमों का आवश्यक रूप से पालन करना होगा ।

प्रतिभागियों को सैद्धांतिक विषयों के प्रत्येक सत्र में भाग लेना अनिवार्य होगा । अपनी वांछित विधा विशेष के सत्र में वे अपनी इच्छानुसार भाग ले सकते हैं ।

प्रतिभागियों के आवास, भोजन, स्वल्पाहार, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह की व्यवस्था संस्थान द्वारा किया जायेगा ।

प्रतिभागियों को कार्यशाला में संदर्भ सामग्री दी जायेगी ।

प्रतिभागियों को अपना यात्रा-व्यय स्वयं वहन करना होगा ।

प्रतिभागियों को 12 नवंबर, 2010 शाम 5 बजे के पूर्व कार्यशाला स्थल - बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में अनिवार्यतः उपस्थित होना होगा । पंजीकृत/चयनित प्रतिभागी लेखकों को कार्यशाला स्थल (होटल) की जानकारी, संपर्क सूत्र आदि की सम्यक जानकारी पंजीयन पश्चात दी जायेगी ।

प्रस्तावित/संभावित विषय एवं विशेषज्ञ लेखक

दिनाँक 13 नवंबर, 2010

रचना की दुनिया – दुनिया की रचना – श्री चंद्रकांत देवताले – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी – प्रभाकर श्रोत्रिय

रचना में यथार्थ और कल्पना – श्री राजेन्द्र यादव – नीलाभ – केदारनाथ सिंह

रचना और प्रजातंत्र – श्री अखिलेश – रघुवंशमणि – परमानंद श्रीवास्तव

रचना और भारतीयता – श्री नंदकिशोर आचार्य – श्री अरविंद त्रिपाठी – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

रचना : महिला, दलित और आदिवासी –– सुश्री अनामिका - कात्यायनी - मोहनदास नैमिशारण्य

रचना और मनुष्यता के नये संकट - श्री विनोद शाही- श्रीप्रकाश मिश्र – सीताकांत महापात्र

दिनाँक 14 नवंबर, 2010

रचना और संप्रेषण – श्री कृष्ण मोहन – ज्योतिष जोशी – मधुरेश

शब्द, समय और संवेदना – श्री नंद भारद्वाज - श्रीभगवान सिंह – ए.अरविंदाक्षन

कविता की अद्यतन यात्रा – श्री वीरेन्द्र डंगवाल – ओम भारती - अशोक बाजपेयी

कविता - छंद और लय – श्री दिनेश शुक्ल – राजेन्द्र गौतम – डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

कैसा गीत कैसे पाठक ? - श्री राजगोपाल सिंह – यश मालवीय – माहेश्वर तिवारी

कहानी-विषयवस्तु, भाषा, शिल्प – श्री शशांक – डॉ. परदेशीराम वर्मा – गोविन्द मिश्र

दिनाँक 15 नवंबर, 2010

कहानी की पहचान – सुश्री उर्मिला शिरीष - सूरज प्रकाश – सतीश जायसवाल



लघुकथा क्या ? लघुकथा क्या नहीं ? – श्री अशोक भाटिया – फ़ज़ल इमाम मल्लिक - बलराम

आलोचना क्यों, आलोचना कैसी? श्री शंभुनाथ – डॉ. रोहिताश्व - विजय बहादुर सिंह

ललित निबंध : कितना ललित-कितना निबंध – श्री नर्मदा प्रसाद उपा.-अष्टभुजा शुक्ल – डॉ.श्रीराम परिहार

(अंतिम नाम निर्धारण स्वीकृति/अस्वीकृति उपरांत)



संपर्क सूत्र

जयप्रकाश मानस

कार्यकारी निदेशक

प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, छत्तीसगढ़

एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा, रायपुर, छत्तीसगढ – 492001

ई-मेल-pandulipipatrika@gmail.com

मो.-94241-82664

बिलासपुर

श्री सुरेन्द्र वर्मा, मो.-94255-70751

श्री राजेश सोंथलिया, 9893048220

पंजीयन हेतु आवेदन पत्र फार्म नमूना

01. नाम -

02. जन्म तिथि व स्थान (हायर सेंकेंडरी सर्टिफिकेट के अनुसार) -

03. शैक्षणिक योग्यता –

04. वर्तमान व्यवसाय -

05. प्रकाशन (पत्र-पत्रिकाओं के नाम) –

06. प्रकाशित कृति का नाम –

07. ब्लॉग्स का यूआरएल – (यदि हो तो)

08. अन्य विवरण ( संक्षिप्त में लिखें)

09. पत्र-व्यवहार का संपूर्ण पता (ई-मेल सहित) –                                                                       हस्ताक्षर
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कॉमनवेल्थ का सच दिखाएंगे कार्टूनिस्ट इरफ़ान...खुशदीप

अगर आप दिल्ली में हैं और रविवार २६ सितंबर को कुछ सार्थक देखना चाहते हैं तो प्रेस क्लब पहुंचे...आपको वहां कार्टूनिस्ट इरफान की कूची से कॉमनवेल्थ गेम्स की गफ़लत, भ्रष्टाचार, सरकारी काहिली का हर रंग देखने को मिलेगा...ये प्रदर्शनी दस दिन तक चलेगी...मैं तो जाऊंगा ही, आप भी आइएगा ज़रूर...ये रही सूचना जो जनसत्ता और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में छपी है...
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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग क्‍या सामान्‍य रोग है ? (शशि पाधा)

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व्यावसायिक चिकित्सा पद्धति !

व्यावसायिक चिकित्सा पद्धति   (Occupational Therapy ) एक चिकित्सा विधि है , जिससे सभी वाकिफ नहीं है और सच कहूं तो अभी तक मैं भी नहीं थी. हम जिस विषय के जानकर नहीं होते हैं तब अँधेरे में दूसरों कि सलाह पर भटका करते हैं और हमें मार्ग तब भी नहीं मिलता. ये चिकित्सा पद्धति विशेष रूप से उन बच्चों के लिए है जो जन्मजात विकलांग है या फिर मानसिक तौर पर विकलांग हैं. इस दुर्भाग्य हम न भी जुड़े हों अगर हमारे किसी परिचित या अन्तरंग को इस परेशानी से जूझना पड़ रहा हो तो आप इसको पढ़ कर सही दिशा दे सकते हैं और वे अपने बच्चे के भविष्य के प्रति आशान्वित हो सकते हैं.
                      इसके लिए मैं अपनी लिंक दे रही हूँ, इसमें यह कई कड़ियों में लिख रही हूँ लेकिन सभी कड़ियाँ महत्वपूर्ण है और अगर मेरे इस प्रयास से किसी एक भी माता पिता को अपने बच्चे के लिए सही दिशा मिल रही है तो मैं अपना लेखन सार्थक मानूंगी. इससे अपने लिए न सही दूसारों के लिए जरूर पढ़े और जिन्हें जरूरत हो उन्हें इस विषय में सही जानकारी प्रदान करें.

लिंक:  www.merasarokar.blogspot .com  
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गोलमाल है भाई सब गोलमाल है

(सुनील) http://www.sunilvani.blogspot.com/

देश की प्रतिष्ठा को बचने वाले ठेकेदारों की नजरों में जरा सुनिए उनकी ही जुबानी राष्ट्रमंडल की कहानी-
घटनाएं एवं विवाद - माननीय देश के ठेकेदारों की जुबान
दिल्ली का फुट ओवर ब्रिज गिरा - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
जामा मस्जिद पर आतंकी हमला - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
खेलगांव तक पहुंचा पानी- राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
हर जगह मलबा ही मलबा - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
आधी-अधूरी है तैयारियां - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
स्टेडियमों का काम पूरा नहीं - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
कई नामी गिरामी खिलाडी नहीं आएंगे भारत - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
भिखारी तंग कर सकते हैं विदेशी मेहमानों को - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
हर जगह खुदी पडी है दिल्ली - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
थीम सांग नहीं आया लोगों को पसंद - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
कई इवेंट किए जा सकते हैं रद्द - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
कई देशों ने मांग की रद्द हो खेल - राष्ट्रमंडल खेलों पर कोई असर नहीं
और अंत में नहीं होंगे राष्ट्रमंडल खेल - कोई बात नहीं हम पर कौन सा असर पडने वाला है, हमें जो खेल(भ्रष्टाचार) खेलना था वो तो हमने खेल लिया अब बाकी का खेल नहीं भी हो तो हमारे सेहत पर कौन सा असर पडने वाला है।
जय भारत
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कोई इलाज हो तो बताइये बन्धु

हे मित्र, सुनिये, आप से ही कह रहा हूं. साखी पर टिप्पड़ी की समस्या आ रही है. टिप्पड़ी बाक्स  कई बार टिप्पड़ी लेता नहीं है. कई मित्रों ने कहा है, कई लोग परेशान होकर लौट जाते हैं, कई मित्र मुझसे कहते हैं पर मैं इस मामले में बड़ा नादान हूं . क्या करूं समझ में नहीं आता. आप के पास कोई इलाज हो तो बताइये न.
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भरोसेमंद सुरक्षा!

खेलों से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। किसी भी संभावित रासायनिक और आणविक हमले से बचाने के शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिसवाले ‘लाठियां’ लिए मौजूद हैं। सिर्फ लाठी के सहारे दुश्मन को ख़ाक कर देने के ख़ाकी वर्दी के कांफिडेंस पर मैंने एक पुलिसवाले से बात की। श्रीमान, रामलीला की तरह खेलों से पहले भी आप सिर्फ लाठी के सहारे हालात पर नज़र रखे हुए हैं...क्या वजह है? देखिए, मुझे नहीं लगता कि हमें इसके अलावा किसी और चीज़ के ज़रूरत है। जहां तक रिक्शे से हवा निकालने की बात है तो उसके लिए किसी एके-47 की ज़रूरत नहीं पड़ती, उसके लिए हमारे हाथ ही काफी है। रही बात ठेले वालों की... उन स्सालों ने अगर कोई बदमाशी की तो उनके लिए हमारे पास ये लठ है...तो आपको लगता है कि सुरक्षा के लिहाज़ से सबसे बड़ी चुनौती रिक्शे और ठेले वाले हैं। जी हां, बिल्कुल।

और जितने बड़े बदमाश हैं, उनसे कैसे निपटेंगे? जनाब हम पुलिसवाले हैं...बदमाशों को हम आपसे ज़्यादा बेहतर समझते हैं। गुंडे-बदमाश तभी आक्रामक होते हैं, जब उन्हें जायज़ हक़ नहीं मिलता, मुख्यधारा में उनके लिए कोई जगह नहीं होती। मगर प्रभु कृपा से हमारी व्यवस्था में ऐसी कोई असुरक्षा नहीं है। माल में हिस्सेदारी ले, हम उन्हें चोरियां करने देते हैं। अपराध के मुताबिक पैसा खा, मामला दबा दिया जाता है। सबूत इक्ट्ठा न कर, उन्हें ज़मानत दिलवा दी जाती है। अब जब इतनी फैसिलिटीज़ उन्हें दी जा रही हैं, तो क्या उनकी बुद्धि भ्रष्ट हुई है, जो वो हमारे लिए कोई सिर दर्द पैदा करेंगे। लेकिन सर, आपको क्या लगता है...अगर आतंकी आए... तो वो क्या लाठियां ला, आपके साथ डांडिया खेलने आएंगे...उनका क्या करेंगे आप। पुलिसवाला-ऐसा कुछ नहीं होगा..हमें पूरा भरोसा। मगर किस पर...उसी पर... जिसके भरोसे ये देश चल रहा है...कौन...भगवान!

(हिंदुस्तान 21 सितम्बर,2010)
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बारिशरस में डूबी दिल्‍ली

बादलों के पर्सनल कंप्‍यूटर में एरर आ गया और वो दिल्‍ली की लोकेशन में होने पर पांडिचेरी बतला रहा है और लगने तो यह भी लगा है, मानो बारिश कोई नेता हो गई है –चुनाव सिर पर हैं और उसे वोटों की चाहत है, इसलिए वो रोजाना पूरे जोर से खटखटा रही है। सोच रहा हूं कि दिल्‍ली में सीएनजी गैस के उपयोग का बढ़ता प्रभाव रूठी बारिश को मना वापिस लौटा लाया है। बढ़ता प्रदूषण सीएनजी गैस के प्रयोग के कारण काफी कम जो हुआ है। पैट्रोल, डीजल, कोयले की खपत में आई गिरावट अवश्‍य ही दिल्‍ली के पर्यावरण पर सकारात्‍मक असर दिखला रही है। फिर जो चश्‍मा बादल पहनते हैं, उसमें देखने पर कंक्रीट के जंगल, हरियाली शो कर रहे हैं, तो बादल बेचारे बारिश क्‍यों न करें
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पाबला जी, नदिया-जल, वृक्ष-फल...खुशदीप

नदिया न पीए कभी अपना जल,
वृक्ष न खाए कभी अपने फल,
अपने तन का,मन का, धन का दूजों को जो दे दान है,
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है,
नदिया न पीए कभी अपना जल...


अगर किसी का तन जले और दुनिया को मीठी सुहास दे
दीपक का उसका जीवन है जो दूजों को अपना प्रकाश दे,
धर्म है जिसका भगवद् गीता, सेवा ही वेद-कुरान है,
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है,
नदिया न पीए कभी अपना जल...


चाहे कोई गुणगान करे, चाहे करे निंदा कोई,
फूलो से कोई सत्कार करे या काटे चुभा जाए कोई,
मान और अपमान ही दोनों जिसके लिए समान है
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है...
नदिया न पीए कभी अपना जल...






पाबला जी ने अपनी ज़िंदगी के फ़लसफ़े को चरितार्थ करता हुआ भजन आज अपनी पोस्ट पर दिखाया-सुनाया...इस भजन का एक-एक शब्द जीवन में उतारने लायक है...पाबला जी ने क्या कमाया है, ये आज उनके जन्मदिन पर ब्लॉग जगत में चारों तरफ से उमड़े प्यार और सम्मान ने साबित कर दिया है...मैं इस पोस्ट के ज़रिए प्रस्ताव करता हूं कि आज से हर साल 21 सितंबर को पाबला डे के तौर पर मनाया जाए...
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हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत की उड़नतश्‍तरी भारत की राजधानी दिल्‍ली में

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मेरी दिल्‍ली मजबूत दिल्‍ली : दिल है जिगर है

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आउटलुक हिन्‍दी अब इंटरनेट पर पढि़ए और लिंक सुरक्षित कर लीजिए

http://hindi.outlookindia.com/
हिन्‍दी पत्रिका आउटलुक पर इंटरनेट पर मौजूद है। आपका इसका लिंक अवश्‍य सुरक्षित कर लें। इस पोस्‍ट के लिंक को सभी हिन्‍दी प्रेमियों के पास भेजें और बतलायें। इससे पहले कादम्बिनी के इंटरनेट लिंक की सूचना सबसे साझा की गई थी। जिनके जानकारी में न हो, वे उसे भी सहेज लें।
जल्‍दी ही नुक्‍कड़ पर अन्‍य कई पत्रिकाओं और दैनिक समाचार-पत्रों के लिंक दिए जायेंगे। जिन्‍हें आप सहेज सकते हैं।
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हिन्दी यूएनओ की भाषा बने - अनिरूद्ध जगन्नाथ (राष्ट्रपति, मारीशस)

रायपुरमारीशस के राष्ट्रपति श्री अनिरूद्ध जगन्नाथ ने कहा कि छत्तीसगढ़, भारत की साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा विश्वभर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार, साहित्यकारों का सम्मान एवं हिन्दी की जो सेवा की जा रही है वह प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाओं में सम्मिलित करने का प्रयास करना अच्छी बात है। यह विचार उन्होंने भारत के छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा आयोजित साहित्यिक भ्रमण के अंतर्गत संस्था के राष्ट्रीय महासचिव एवं यात्रा संयोजक द्वय जयप्रकाश मानस एवं एच.एस.टाकुर के नेतृत्व में मारीशस पहुँचे यात्रा समूह के सदस्यों के साथ आयोजित एक बैठक में व्यक्त किए। उन्होंने संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मारीशस की अर्थव्यवस्था एवं उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी सदस्यों से बातचीत की। इस अवसर पर मारीशस की प्रथम महिला श्रीमती सरोजनी जगन्नाथ विशेष रूप से उपस्थित थी।

तृतीय अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन बाली (इंडोनेशिया) में
बैठक के आरंभ में जयप्रकाश मानस ने पुस्तकें भेंटकर राष्ट्रपति का स्वागत किया। अपने स्वागत उद्बोधन में मानस ने व्यस्तता के बावजूद भारतीय साहित्यकारों के दल को समय देने के लिए राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्था के माध्यम से मारीशस में द्वितीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया गया। गतवर्ष पहला अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन थाईलैंड में किया गया था । हिन्दी दिवस के अवसर पर मारीशस के 7 वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान भी किया गया। उन्होंने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि भविष्य में हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाओं में सम्मिलित किए जाने का प्रयास जारी है और इस सिलसिले में अगले साल इंडोनेशिया (बाली) में तृतीय अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया है।
राष्ट्रपति भवन में साहित्यकारों का दल
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का एक पत्र एवं बस्तर के कलाकारों द्वारा निर्मित धातु शिल्प भी राष्ट्रपति को सौंपा गया। इसके अलावा अनेक साहित्यकारों ने अपनी पुस्तकें तथा फ़िलाटेलिक सोसायटी ऑफ इंडिया की छत्तीसगढ़ इकाई की ओर से भारत के साहित्यकारों एवं अगले माह आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर केन्द्रित भारतीय डाक टिकटों के दो एलबम भेंट किए गए। तत्पश्चात राष्ट्रपति के साथ सदस्यों का एक फ़ोटो सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम महिला एवं बड़ी संख्या में मारीशस के शिक्षाविद एवं साहित्यकार भी सम्मिलित थे। राष्ट्रपति भवन की ओर से सदस्यों के लिए स्वल्पाहार का आयोजन भी किया गया था।

उल्लेखनीय है कि साहित्यिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा संस्था के महासचिव जयप्रकाश मानस के नेतृत्व में विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर 10 से 18 सितम्बर तक मारीशस का साहित्यिक, सांस्कृतिक पर्यटन अध्ययन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर के 61 सदस्यों ने भाग लिया।
हिन्दी का संसार एवं संसार की हिन्दी विषय पर संगोष्ठी
भ्रमण के दौरान मारीशस सरकार द्वारा गठित सांस्कृतिक प्रतिष्ठान हिन्दी स्पीकिंग यूनियन द्वारा हिन्दी दिवस पर हिन्दी का संसार एवं संसार की हिन्दी विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि थे हिन्दी के वरिष्ठ उपन्यासकार अभिमन्यु अनत और अध्यक्षता की जयप्रकाश मानस ने । द्वितीय सत्र में कृतियों का विमोचन एवं मॉरीशस के साहित्यकारों का अंलकरण कार्यक्रम आयोजित था । इस सत्र के मुख्य अतिथि थे - मारीशस के संस्कृति एवं कला मंत्री श्री मुखेश्वर शोन्नी ।

मॉरीशस के 7 साहित्यकारों को सृजनश्री अंलकरण
इस अवसर पर सृजन-सम्मान द्वारा वहाँ के वरिष्ठ 7 साहित्यकारों को सृजन-श्री अंलकरण से अलंकृत किया गया । सम्मानित साहित्यकारों को शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। जिसमें उपन्यास के लिए मारीशस के श्री अभिमन्यु अनत, कहानी के लिए प्रकारेश धुरंधर, नाटक के लिए महेश राम जीयावन, कविता के लिए पूजा नंद नेमा, महिला विमर्श के लिए भानुमति नागदान, हिन्दी सेवा के लिए स्व.मुनेश्वर लाल चिन्तामणी के अलावा महात्मा गांधी संस्थान के वरिष्ठ व्याख्याता एवं कार्यक्रम के संयोजक विनय गोदारी को सृजन श्री सम्मान से विभूषित किया गया। संगोष्ठी में भारत से मारीशस पहुँचे अनेक साहित्यकारों की पुस्तकों, पत्रिकाओं एवं गीतों के कैसेटों का विमोचन भी किया गया। इसके अलावा सदस्यों ने महात्मा गांधी संस्थान का भ्रमण किया। संस्थान के विभागाध्यक्ष एवं अन्य प्राध्यापकों ने प्रतिष्ठान की गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही प्रतिष्ठान द्वारा संचालित हिन्दी प्रचार अभियान के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक का अवलोकन किया।


इस सांस्कृतिक अध्ययन दल में यात्रा संयोजक जयप्रकाश मानस एवं एच.एस.ठाकुर सहित छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के संचालक राजीव श्रीवास्तव, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, डॉ.महेन्द्र ठाकुर, दीपक पाचपोर, सुरेश तिवारी, चेतन भारती, संजीव ठाकुर, डॉ.निरुपमा शर्मा, डॉ.सीमा श्रीवास्तव, लतिका भावे, शकुन्तला तरार, अरूणा चौहान,अरविन्द मिश्रा, कुमेश कुमार जैन, नागेन्द्र दुबे, टामन सिंह सोनवानी, श्रीमती पदमनी सिंह, अभिषेक सोनवानी, ललित गणवीर, श्रीमती गणवीर, जी.एस.बाम्बरा, श्रीमती आर.बाम्बरा, प्रतापचंद पारख, सत्यपाल,  श्रीकांत अग्रवाल, रमाकांत अग्रवाल, बिलासपुर के राजेश सोन्थलिया, रायगढ़ के सत्यदेव शर्मा, संजय तिवारी, उसत राम, भीखलाल पटेल,  सुरेश पंडा, सुरेश छत्री, श्रीमती क्षत्री, अर्जुन दास, देवानी,  एम.आर.ठाकुर, समुन्द सिंह, मिश्री लाल पाण्डे, राजेश तिवारी, सरायपाली के मीनकेतन दास, नागपुर महाराष्ट्र के भाषाविद डॉ.रामप्रकाश सक्सेना, हनुमन्त ठाकरे, नागेन्द्र अन्नाराव, रामदेव खुशहाल राव, बंडोपाद्ये यशवंत, नरेन्द्र दंडारे, उत्तराखण्ड नैनीताल के दिवाकर भट्ट, मध्यप्रदेश भोपाल के  डी.पी.सक्सेना, मधु सक्सेना, प्रकाशचंद तापड़े, अरूणा तापड़े एवं सृजन-सम्मान के यात्रा-पार्टनर क्रियेटिव ट्रेव्हलर्स के प्रमुख विकास मल्होत्रा आदि सम्मिलित थे।
(मारीशस से लौटकर हीरामन सिंह ठाकुर)
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संदेसे आते हैं, हमें फुसलाते हैं!

एक ज़माने में ईश्वर से जो चीज़ें मांगा करता था, आज वो सब मेरी चौखट पर लाइन लगाए खड़ी हैं। कभी मेल तो कभी एसएमएस से दिन में ऐसे सैंकड़ों सुहावने प्रस्ताव मिलते हैं। लगता है कि ईश्वर ने मेरा केस मोबाइल और इंटरनेट कम्पनियों को हैंडओवर कर दिया है। पैन कार्ड बनवाने से लेकर, मुफ्त पैन पिज़्ज़ा खाने तक के न जाने कितने ही ऑफर हर पल मेरे मोबाइल पर दस्तक देते हैं! इन कम्पनियों को दिन-रात बस यही चिंता खाए जाती है कि कैसे ‘नीरज बधवार’ का भला किया जाए?

कुछ समय पहले ही किन्हीं पीटर फूलन ने मेल से सूचित किया कि मेरा ईमेल आईडी दो लाख डॉलर के इनाम के लिए चुना गया है। हफ्ते भर में पैसा अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। ‘सिर्फ’ दो हज़ार डॉलर की मामूली प्रोसेसिंग फीस जमा करवा मैं ये रक़म पा सकता हूं। ये जान मैं बेहद उत्साहित हो गया। कई दिनों से न नहाने के चलते बंद हो चुका मेरा रोम-रोम, इस मेल से खिल उठा। इलाके की सभी कोयलें कोरस में खुशी के गीत गाने लगीं, मोर बैले डांस करने लगे। मैं समझ गया कि मेरी हालत देख माता रानी ने स्टिमुलस पैकेज जारी किया है।


पहली फुरसत में मैंने ये बात बीवी को बताई। मगर खुश होने के बजाए वो सिर पकड़कर बैठ गई। फिर बोली...मैं न कहती थी आपसे कि अब भी वक़्त है... संभल जाओ....मगर आप नहीं माने...अब तो आपकी मूर्खता को भुनाने की अंतर्राष्ट्रीय कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। मैंने वजह पूछी तो वो और भी नाराज़ हो गईं। कहने लगी कि आज के ज़माने में दुकानदार तक तो बिना मांगे आटे की थैली के साथ मिलने वाली मुफ्त साबुनदानी नहीं देता और आप कहते हैं कि किसी ने आपका ई-मेल आईडी सलेक्ट कर आपकी दो लाख डॉलर की लॉटरी निकाली है! हाय रे मेरा अंदाज़ा...आपकी जिस मासूमियत पर फिदा हो मैंने आपसे शादी की थी, मुझे क्या पता था कि वो नेकदिली से न उपज, आपकी मूर्खता से उपजी है!


दोस्तों, एक तरफ बीवी शादी करने का अफसोस जताती है तो दूसरी तरफ हर छठे सैकिंड मोबाइल पर शादी करने के प्रस्ताव आते हैं। बताया जाता है कि मेरे लिए सुंदर ब्राह्मण, कायस्थ, खत्री जैसी चाहिए, वैसी लड़की ढूंढ ली गई है। बंदी अच्छी दिखती है और उससे भी अच्छा कमाती है। सेल के आख़िरी दिनों की तरह चेताया जाता है कि देर न करूं। मगर मैं बिना देर किए मैसेज डिलीट कर देता हूं। ये सोच कर ही सहम जाता हूं कि बिना ये देखे कि मैसेज कहां से आया है, अगर बीवी ने उसे पढ़ लिया तो क्या होगा?

और जैसे ये संदेश अपनेआप में तलाक के लिए काफी न हों, अब तो सुंदर और सैक्सी लड़कियों के नाम और नम्बर सहित मैसेज भी आने लगे हैं। कहा जा रहा है कि मैं जिससे,जितनी और जैसी चाहूं, बात कर सकता हूं। बिना ये समझाए कि सुंदर और सैक्सी लड़की के लालच का भला फोन पर बात करने से क्या ताल्लुक है। साथ ही मुझे बिकनी मॉडल्स के वॉलपेपर मुफ्त में डाउनलोड करने का अभूतपूर्व मौका भी दिया जाता है। मानो, इस ब्रह्माण्ड में जितने और जैसे ज़रूरी काम बचे थे, वो सब मैंने कर लिए हैं, बस यही एक बाकी रह गया है!

दोस्तों, ऐसा नहीं है कि ये लोग मेरा घर उजाड़ना चाहते हैं। इन बेचारों को तो मेरे घर बनाने की भी बहुत फिक्र है। नोएडा से लेकर गाज़ियाबाद और गुडगांव से लेकर मानेसर तक का हर बिल्डर मैसेज कर निवेदन कर कर रहा है कि सिर्फ मेरे लिए आख़िर कुछ फ्लैट बाकी हैं। ये सोच कभी-कभी खुशी होती है कि इतने बड़े शहर में आज इतनी इज्ज़त कमा ली है कि बड़े-बड़े बिल्डर पिछले एक साल से सिर्फ मेरे लिए आख़िर के कुछ फ्लैट खाली रखे हुए हैं। पिछली दिवाली पर शुरू किए ‘सीमित अवधि’ के डिस्काउंट को सिर्फ मेरे लिए खींचतान कर वो इस दिवाली तक ले आए हैं। उनके इस प्यार और आग्रह पर कभी-कभी आंखें भर आती हैं। मगर मकान भरी आंखों से नहीं, भरी जेब से खरीदा जाता है। मैं खाली जेब के हाथों मजबूर हूं और वो मेरा भला चाहने की अपनी आदत के हाथों। वो संदेश भेज रहे हैं और मैं अफसोस कर रहा हूं। मकान से लेकर ‘जैसी टीवी पर देखी, वैसी सोना बेल्ट’ खरीदने के एक-से-एक धमाकेदार ऑफर हर पल मिल रहे हैं। कभी-कभी सोचता हूं कि सतयुग में अच्छा संदेश सुन राजा अशर्फियां लुटाया करते थे, ख़ुदा न ख़ास्ता अगर उस ज़माने में वो मोबाइल यूज़ करते, तो उनका क्या हश्र होता!
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वरिष्‍ठ पत्रकार एवं कवि स्‍व. विद्यासागर वसिष्‍ठ 'सागर' की 27वीं पुण्‍य-तिथि पर पत्रकारिता एवं कवि गोष्‍ठी संपन्‍न

अग्रसर, के तत्‍वावधान में वरिष्‍ठ पत्रकार एवं कवि स्‍व. विद्यासागर वसिष्‍ठ 'सागर' की 27वीं पुण्‍य-तिथि पर विगत की भांति इस वर्ष भी 17 सितम्‍बर, 2010 (शुक्रवार) को पत्रकारिता एवं कवि गोष्‍ठी का आयोजन गुलमोहर पार्क में 'सागर' में  किया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ  स्‍व. विद्यासागर जी की धर्मपत्‍नी द्वारा उनके चित्र पर माल्‍यार्पण से हुआ। जिसके उपरांत उपस्थितों ने चित्र पर पुष्‍प अर्पण किए और  प्रणाम निवेदित किया।
पत्रकारिता विमर्श गोष्‍ठी का विषय 'धर्म - अध्‍यात्‍मक और पत्रकारिता' था। जिस पर उपस्थित पत्रकारों एवं कवियों ने अपने विचार प्रस्‍तुत किए। विमर्श सार्थक रहा।
दोनों सत्रों के लिए मुख्‍य अतिथि कविश्री सोम ठाकुर रहे जो कि इस अवसर पर आगरा से पधारे थे।  पत्रकारिता विमर्श गोष्‍ठी की अध्‍यक्षता मुख्‍य उप-संपादक श्री महेश दर्पण ने की और संचालन सुभाष वसिष्‍ठ ने किया। इस विमर्श में भाग लेने वाले अनिल कुमार, महेन्‍द्र महर्षि, नरेन्‍द्र लाहड़, पुरुषोत्‍त्‍म वज्र, अजय कुमार भल्‍ला और सुधीर सुमन ने कई नए पहलुओं पर बात की।  सुभाष वसिष्‍ठ के संचालन में  और अध्‍यक्षीय संबोधन में महेश दर्पण ने गागर में सागर भर दिया।
तदुपरांत कवि गोष्‍ठी का प्रारंभ हुआ। इस सत्र की अध्‍यक्षता निदेशक, आकाशवाणी डॉ. लक्ष्‍मी शंकर वाजपेयी ने की। गोष्‍ठी का प्रारंभ इन्‍दु भारद्वाज की हास्‍य कविता से हुई। इसके बाद बृज अभिलाषी ने अपने दोहों से मंत्रमुग्‍ध कर दिया।
बकौल संचालक सुभाष वसिष्‍ठ, अविनाश वाचस्‍पति ने कविता की जगह कवि गोष्‍ठी में अपनी गद्य व्‍यंग्‍य रचना का लैपटाप से पाठ किया। इसके बाद लाल बहादुर लाल, डॉ. धनंजय सिंह, डॉ. प्रताप अनम, आनंद क्रांतिवर्द्धन, नरेन्‍द्र लाहड़, पुरुषोत्‍तम वज्र, सुरेश यादव, जर्फ देहलवी, ममता किरण, सतीश सागर, रामकुमार कृषक, सुभाष वसिष्‍ठ, डॉ. लक्ष्‍मीशंकर वाजपेयी, वरदान और कवि सोम ठाकुर ने अपने-अपने नवगीत, कविताएं, गजलों इत्‍यादि का वाचन किया और सस्‍वर पाठ भी किया।
अन्‍य उपस्थितों में सर्वश्री सुरजीत सिंह जोबन, राम नरेश सिंह, अनिल कुमार, स्‍नेह लाहड़, कमलेश, महेन्‍द्र महर्षि और वसिष्‍ठ परिवार के सदस्‍य शामिल हुए।
कुल मिलाकर कार्यक्रम सफल रहा और रात्रि 10 बजे के बाद संपन्‍न हुआ।
इस अवसर के चित्र मिलने पर नुक्‍कड़ और साहित्‍य जगत के पाठकों के लिए पुन: नुक्‍कड़ पर लगाये जायेंगे।
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फल महंगी हैं या सब्जियां

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नेता बडा या गुरु, बखेडा काहे का

(सुनील) http://www.sunilvani.blogspot.com/

सुना है नेताजी ने गुरु का अपमान कर दिया, अरे भाई! नेता तो स्वार्थ की प्रतिमूरत है, उसके लिए किसी का मान क्या और अपमान क्या। वैसे भी वे गुरु तो केवल गिने-चुने के ही होंगे, नेता तो पूरे देश का है तो सबसे बडा गुरु इस लिहाज से तो नेता ही हुआ न। आप लोग भी छोटी सी बात का बखेडा खडा कर देते हैं। हैं तो भारतीय ही न, आदत तो भारतीयों वाली ही रहेगी। नेता(गिल) ठहरा आई-पिल, प्रभावशाली तो होगा ही। अब फोटो में अदना सा गुरु दिखेगा तो गिल का आई-पिल जैसा प्रभाव कहां रहेगा। वैसे भी जिसको प्रतिक्रिया देना चाहिए था, वो तो चुपचाप मुस्कुराता रहा, विश्वास न हो तो अखबारों में छपे फोटो का देख लीजिएगा। फिर भला हम क्यों अंगुली करने पर तुले हुए हैं। एक ठहरा विश्व विजेता तो दूसरा ठहरा देश का नेता, दोनों एक-दूसरे में अपना लाभ देख रहे थे लेकिन मीडिय वालों को तो आजकल बखेडा करने के अलावा कुछ सूझ ही नहीं रहा है। अखबारों में छपे फोटो को देखिए शिष्य के चेहरे पर क्या चमक है। गुरु के अपमान का अफसोस तो बाद में भी होता रहेगा।
और अंत में- गुरु तो कुम्हार ही रहेगा, शिष्य को कुंभ बनाता ही रहेगा।
गुणगान तो उसका होना चाहिए जो उस कुंभ में तरह-तरह का खजाना डालेगा।
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मनी यात्रा का सफ़र


प्रिय मित्रों ,
पिछले कई दिनों मे जब गूगल सर्च का डाटा देखा तो जाना कि गूगल पर सबसे ज्यादा खोजा जाने वाला डाटा है अर्न मनी ऑनलाइन  यानि कि इन्टरनेट पर पैसा कमाने के तरीके तब सोचा कि लगभग हर नया इन्टरनेट उपयोगकर्ता सबसे पहले यही खोजता है की ऑनलाइन पैसा कैसे कमा सकते हैं तो क्यूँ ना इसी पर कुछ लिखा जाए | 
पैसों के पेड़ का फल खाना आसान नहीं होता लेकिन अगर थोड़ी सी समझदारी के साथ थोडा सा धैर्य मिला दे तो हम घर बैठे भी पैसे बना सकते हैं |
तो हमने बनाया है एक ऐसा मंच ( मनी यात्रा ) जहाँ हम हर रोज़ नेट से कमाई का एक नया तरीका सीखेंगे और अपनी जानकारी एक दूसरे से बांटेंगे |
तो आप सब भी आमंत्रित हैं इस मनी यात्रा के सफ़र पर  , आप सब भी हमारे साथ इस सफ़र मे शामिल हों और अपने बहुमूल्य सुझाव और जानकारियां हमारे साथ बाटें | 
इस सफ़र को शुरू करने के लिए यहाँ क्लिक करें और इस सफ़र मे एक दूसरे का साथ दें और साथ मिल कर कमायें |
सभी का जीवन खुशियों और धनधान्य से भरा रहे इसी शुभकामना के साथ आज के लिए अलविदा |

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हिन्‍दी दिवस की मलाई और रायते का जायका लीजिए

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एक पखवाड़ा मुकर्रर है हिन्दी की मातमपुर्सी के लिए

हिन्दी दिवस पर व्यंग्य-

सच्चाई यह है कि स्वातंत्रोत्तर काल में जैसे-जैसे हिन्दी आन्दोलन फलता-फूलता पल्लवित होता गया है, वैसे-वैसे देश में हिन्दी की खटिया-खड़ी होती देखी गई है। कुछ तो देश के कर्ता-धर्ताओं ने उसे गर्व करने लायक नहीं छोड़ा, रही-सही कसर हम जैसे सैकड़ों लिख्खाड़ पूरी कर रहे हैं.......... कृपया लिंक देखें।

एक पखवाड़ा मुकर्रर है हिन्दी की मातमपुर्सी के लिए

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हिन्‍दी बन रही है विश्‍वभाषा : हरिभूमि में पढि़ए

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अब मैं माँ को समझती हूँ......!

हर माँ अपनी बेटी को कहती है की यह बात माँ बनोगी तो समझोगी..... वो बात माँ बनोगी तो समझोगी...... बातें तो बहुत हैं जो माँ बनकर समझ आती हैं पर सबसे खास बात यह हर बेटी माँ बनकर अपनी माँ को समझने लगती है.......उसके जैसी बनने लगती है।
पूरी रचना पढने के लिए यहाँ पधारें ...
अब मैं माँ को समझती हूँ......

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16 वर्षीय हिन्‍दी ब्‍लॉगर संपर्क करें : अक्षिता, पाखी, जादू, बुलबुल कहां हो : जल्‍दी आओ

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रोके रुके न हिन्‍दी

http://www.abhivyakti-hindi.org/vyangya/2010/rokerukenahindi.htm
रोके रुके न हिन्‍दी
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लघु कथा

नशा
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स्टेशन पर भीड़ थी ! लोग बहुत बेसब्री से ट्रेन के आने का इंतज़ार कर रहे थे ! ट्रेन के लेट होने से खोमचे वालों की खूब बिक्री हो रही थी ! अचानक एक धम्म की आवाज़ हुई ! सबने चौंक कर आवाज़ की तरफ देखा ! एक नाटे कद का अधेड़ उम्र का व्यक्ति प्लेटफॉर्म पर गिरा पड़ा था ! देखते ही देखते उस बेहोश पड़े आदमी के चारों तरफ भीड़ जुट गई ! एक चिल्लाया, 'अरे, दूर हटो,हवा आने दो!'..दूसरी आवाज़ आई, 'अरे, पानी लाओ, पानी!' पास ही बेंच पर बैठी एक युवती ने अपने पास से पानी की एक बोतल तुरंत निकल कर कर दी !ऐसा कर के उसने यह जता दिया कि उस आदमी के चारों तरफ इकठ्ठा हुई भीड़ की तरह उसे भी पूरी हमदर्दी है, चाहे वह भीड़ में शामिल न हो कर बेंच पर बैठी है !
एक आदमी उस बुज़ुर्ग के सीने पर हथेलियों से पम्प करने लगा! उसे लगा कि कहीं यह दिल का मामला न हो! एक व्यक्ति तत्परता दिखता हुआ मुंह पर छींटें मारने लगा! ...एक ही पल में लगा कि इंसानियत अभी मरी नहीं है! जिंदगी कि भागदौड ने बेशक आदमी को बाहर से कठोर कर दिया है लेकिन उसके दिल में प्यार और हमदर्दी का सोता अभी सूखा नहीं है !
इतने में वो बाहोश पड़ा आदमी हिला व उठने को तत्पर हुआ !लोगों ने राहत की सांस ली ! फ़ौरन बेंच खाली करवाई गई, ताकि वो बुज़ुर्ग उस पर बैठ सके!... अब तक वो व्यक्ति खड़ा हो चुका था! वह हाथ जोड़ कर लोगों का शुक्रिया करने लगा ! उसकी भाव भंगिमा देख कर लोगों ने ठहाका लगाया , 'अरे भाई , ये तो पिए हुए है ! हम तो कुछ और ही समझे थे!...वो व्यक्ति नशे में चूर लहराता हुआ अस्फुट से स्वर में धन्यवाद करता हुआ आगे बढ़ने लगा !
अब तक जिसके लिए भीड़ में सहानुभूति थी , नशे ने उसे एक ही पल में मजाक का विषय बना दिया था .....!
द्वारा -नमिता राकेश
namita.rakesh@gmail.com
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हिन्‍दी ब्‍लॉगर सुशील कुमार अंग्रेजी अखबार की खबर में

http://www.telegraphindia.com/1100911/jsp/jharkhand/story_12923067.jsp

सुशील कुमार
पिछले दिनों दिल्‍ली आए थे
जिन्‍होंने ब्‍लॉगिंग में खूब धूम मचाई थी
आजकल गायब हैं
पर उन्‍होंने
जो किया
अच्‍छा किया
जो कहा
अच्‍छा कहा
सच्‍चा कहा
आप भी पढि़ए
खबर में सुशील कुमार
http://www.telegraphindia.com/1100911/jsp/jharkhand/story_12923067.jsp
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हठीलो राजस्थान : वीर रस के दोहे

स्व.आयुवानसिंह शेखावत द्वारा लिखे गए वीर रस के दोहे "हठीलो राजस्थान" के नाम से राजपूत वर्ल्ड ब्लॉग पर नित्य प्रकाशित हो रहे है जिन्हें आप यहाँ चटका लगाकर पढ़ सकते है
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नुक्‍कड़ का हर बाशिन्‍दा आज खुश है : यूनीकवि और यूनिकविता की प्रत्‍येक नेक यूनिट को जानिए

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भावनाओं को समझो!

स्पॉट फिक्सिंग कांड के बाद पूरी दुनिया में पाक खिलाड़ियों पर थू-थू हो रही है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पाकिस्तान के बाद इंग्लैंड में भी बाढ़ की नौबत आ गई है! खुद पाकिस्तान में जो इलाके बाढ़ से बच गए थे वो अब इस मामले की शर्मिंदगी से डूब गए हैं। तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। कुछ का कहना है कि बीसीसीआई ने 2015 तक का भारतीय टीम का कैलेंडर जारी कर रखा है तो वहीं पीसीबी ने 2015 तक के पाक टीम के नतीजे। और भी न जाने क्या कुछ....हर कोई नो बॉल के बदले नोट लेने की आलोचना कर रहा है। मगर मैं पूछता हूं कि इसमें ग़लत क्या है? दुनिया भर के गेंदबाज़ों को नो बॉल के बदले फ्री हिट देनी पड़ती है, अब इसी काम के लिए कोई उन्हें पैसा दे रहा है, तो क्या प्रॉब्लम है। आख़िर आदमी सब करता तो पेट की ख़ातिर ही है। वैसे भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को जब से आईपीएल में भी नहीं चुना गया, उनमें एक तिलमिलाहट थी...जैसे-तैसे खुद को बेच कर दिखाना था। सो वो बिक गए। मगर अफसोस दुनिया तो दूर, खुद पाकिस्तानी सरकार उनकी इस भावना को समझ नहीं रही। समझती तो फिक्सिंग कांड को भारत को ‘मुहंतोड़ जवाब’ के रूप में देखती।

दूसरा ये कि अगर वो पैसे लेकर मैच हारे भी तो इसमें बुराई क्या है। ये समझना होगा कि किसी भी देश की कला-संस्कृति और खेल वगैरह को वहां की राजनीति का आईना होना चाहिए। ख़ासतौर पर किसी भी अराजक देश में तो हुक्मरानों को ख़ासतौर पर नज़र रखनी चाहिए कि कुछ भी अच्छा न होने पाए। फिल्में बनें तो दूसरे देश की नक़ल कर बनें। खिलाड़ी खेलें तो पैसा लेकर हारें। परमाणु वैज्ञानिक एक ठंडी बीयर के बदलें परमाणु तकनीक बेच दें। इससे होगा ये कि जब हर जगह गुड़-गोबर होगा तो लोग नेताओं पर अलग से गुस्सा नहीं होंगे। ये नहीं सोचेंगे कि हमारे यहां हर जगह काबिल लोग भरे हुए हैं, बस नेता ही भ्रष्ट है। उन्हें बैनिफिट ऑफ डाउट मिल जाएगा। उसी तरह जैसे शकूर राणा के वक़्त पाक बल्लेबाज़ों को अक्सर मिल जाया करता था!
(दैनिक हिंदुस्तान 11, सितम्बर, 2010)

और अंत में...
कलमाडी 'साहब' घर पहुंचे तो काफी भीग चुके थे...बीवी ने चौंक कर पूछा...इतना भीग कर कहां से आ रहे हैं...क्या बाहर बारिश हो रही है...कलमाड़ी-नहीं....तो फिर...कलमाड़ी-क्या बताऊं...जहां से भी गुज़र रहा हूं...लोग थू-थू कर रहे हैं!!!!!

(vyanjana.blogspot.com)
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गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है यह बाल कविता
पूरी रचना यहाँ पढ़ें
हैप्पी बर्थ डे बप्पा.........
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PHP DEVELOPER required for DELHI LOCATION

DELHI के लिए PHP DEVELOPER की आवश्यकता है  | कृपया अपना CV इस  email id- iifpl@yahoo.com पर भेजें |
Requirement for PHP DEVELOPER for DELHI LOCATION send cv on email id- iifpl@yahoo.com
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एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी चाहेगा!

यह रविवार की एक औसत सुबह है। रिमोट को सारथी बना मैं टीवी पर कुछ सार्थक ढूंढ़ रहा हूं। पर ज़्यादातर टीवी कार्यक्रम मेरी सुबह से भी ज़्यादा औसत हैं। धार्मिक चैनलों पर बाबा महिलाओं को शांति और संयम का पाठ पढ़ा रहे हैं। न्यूज़ चैनल बता रहे हैं कि कैसे एक बाबा ने संयम का पाठ पढ़ने आई शिष्या को एक्सट्रा क्लास देने की कोशिश की। वहीं मनोरंजन चैनल्स पर सास-बहुएं एक-दूसरे को नीचा दिखाने के ऊंचे काम में लगी हैं, दूसरों का खून पी अपना हीमोग्लोबीन बढ़ा रही हैं। कल्पना के कैनवस पर हर क्षण षड्यंत्रों के दृश्य उकेर रही हैं। कभी-कभी हैरानी होती है कि धारावाहिकों में जिन परिवारों की कहानी देख हम अपना मनोरंजन करते हैं, खुद उन परिवारों में कितना तनाव है! आखिर क्या वजह है कि दूसरे का तनाव हमें आनन्द देता है। किसी का झगड़ा देख हम एंटरटेन होते हैं। क्या हम इतना गिर गए हैं...हमारे पास कुछ और काम नहीं बचा...इससे पहले कि मैं किसी महान् नतीजे पर पहुंचता, मुझे बाहर से झगड़ने की आवाज़ सुनाई देती है।

टीवी बंद कर मैं बालकनी में आता हूं। सोसायटी के दूसरे छोर पर एक महिला ज़ोर-ज़ोर से चीख रही है। उसके सास-ससुर बालकनी में चिल्ला रहे हैं तो वो अपार्टमेंट के नीचे। झगड़े के सुर के साथ-साथ दर्शकों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। शादी के निमंत्रण पत्र की तर्ज पर लोग ‘सपरिवार’ बालकनी में आ गए हैं। बीवी भी गैस बंद कर बाहर आ गई है। मैं कॉन्‍संट्रेट करता हूं मगर कुछ समझ नहीं पा रहा हूं। जो शब्द कान में पड़ रहे हैं, उनसे मेरी पहचान नहीं है। बीवी कहती है...साउथ इंडियन हैं... तमिल या तेलुगू में झगड़ रहे हैं। मुझे खीझ चढ़ती है। अपनी बेबसी पर रोना आता है। ऐसा लगता है कि बिना सबटाइटल के रजनीकांत की कोई एक्शन फिल्म देख रहा हूं। मैं आपा खोने लगता हूं। सोचता हूं कि नीचे जाकर उनसे इसी बात पर झगड़ूं। कहूं कि इतने लोग बीवी-बच्चों समेत तुम्हारा झगड़ा देख रहे हैं। खुद मेरी बीवी ने दो बार अपनी मां तक का फोन नहीं उठाया। बच्चा आधे घंटे से नाश्ते के लिए रो रहा है। हम लोग क्या पागल हैं जो तुम्हारे चक्कर में अपना संडे ख़राब कर रहे हैं। झगड़ना है तो हिंदी में झगड़ो। वरना अंदर जाकर लड़ो-मरो।

मगर इससे पहले कि मैं नीचे जाने के लिए चप्पल खोजता, महिला गाड़ी स्टार्ट कर वहां से चली गई। ये देख पूरी सोसायटी में निराशा छा गई। मैं भी भारी अवसाद में था। अंदर आया। टीवी चलाया। वही सास-बहू के सीरियल वाले झगड़े। फिर वही ख़्याल...यार, ये लोग हमेशा झगड़ते क्यों रहते हैं...लोगों को इनका झगड़ा देखने में मज़ा भी क्या आता है मगर मन में यही बात फिर दोहराई तो शर्म आने लगी।

यह सच है कि सीरियल के न सही, पर असल झगड़े देखने में मुझे भी खूब आनन्द आता है। मगर गुस्सा तब आता है, जब ये झगड़े अंजाम तक नहीं पहुंचते। दिल्ली में ब्लू लाइन के सफर के दौरान मैंने सैंकड़ों झगड़े देखे। कंडक्टर ‘सवारी’ से टिकट लेने के लिए कहता। वो बाद में लेने की ज़िद्द करती। फिर लम्बी बहस होती। सामर्थ्य के मुताबिक सुर ऊंचा किया जाता। संस्कारों और सामान्य ज्ञान के आधार पर बेहिसाब गालियां दी जाती। ये देख रूटीन लाइफ से बोर हो चुकी ‘सवारियों’ की आंखों में चमक दौड़ जाती। सब को लगता कि अब झगड़ा होगा। कुछ एक्साइटिंग देखने को मिलेगा। दोस्त-यारों को सुनाने के लिए एक किस्सा मिलेगा। मगर अफसोस...तभी नई सवारियां चढ़ने के साथ बात आई-गई हो जाती। इन सालों में न जाने ऐसी कितनी ही बहसें, जिनमें झगड़ा बनने की पूरी संभावना थी, मेरी आंखों के सामने आई-गई हुई हैं। मगर मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। यह स्वीकारने में मुझे कोई शर्मिंदगी भी नहीं है। आख़िर इंसान मूलतः है तो जानवर ही जो सभ्य बनने की कोशिश कर रहा है। अब इस कोशिश से बोर हो, वो और उसके भीतर का जानवर कभी-कभार झगड़ा देख, मनोरंजन करना चाहें, तो क्या बुराई है! एंटरटेनमेंट के लिए जब कुछ भी करने में हर्ज नहीं, तो चाहने में क्या प्रॉब्लम है!

(नवभारत टाइम्स 10,सितम्बर,2010)
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आप अब कादम्बिनी मासिक पत्रिका ऑनलाईन पढ़ सकते हैं : फिर मत कहिएगा खबर नहीं हुई

http://www.livehindustan.com/kadambini/1.html

कादम्बिनी
आप जिसे चाहते हैं
आप जिसे पसंद करते हैं
आप जिसे पढ़ते हैं
वो मैं हूं
जी हां, मैं कादम्बिनी हूं
आपकी प्‍यारी मासिक पत्रिका।

मैं भी इंटरनेट पर आ गई हूं
और आपके पास आना चाहती हूं
आप पढ़ना चाहते हैं मुझे
तो सुरक्षित कर लें
ऊपर दिए गए लिंक को
और भेजें मेरे चाहने वालों को भी
जो अब इंटरनेट पर मौजूद रहते हैं
मैं भी अब आप सबके साथ
इंटरनेट पर आ गई हूं
चाहती हूं कि आप सब
मुझसे इंटरनेट पर अवश्‍य मिलें
देश ही नहीं विदेश के
शहर ही नहीं गांव के
सभी पाठक, बच्‍चे हों
जवान हों, किशोर हों
या हों वृद्ध
पर पढ़ने की इच्‍छा हो जवान
वे मेरे लिंक को सुरक्षित कर लें।
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वीरेन्‍द्र सहवाग ने फेसबुक, ट्विटर और यू ट्यूब पर जीवंत प्रसारण में अविनाश वाचस्‍पति के दो प्रश्‍नों को शामिल किया

उनकी इमेज आप नीचे देख लीजिए
जो ट्विटर पर हिंदी में पूछे गए थे
जिनके पास इस प्रसारण के हों लिंक
वे टिप्‍पणी में भेजने का कष्‍ट करें।

जिन्‍होंने सुना है इस जीवंत प्रसारण को
वे बतलायें कि कौन से सवाल किए गए हैं
और वीरेन्‍द्र सहवाग ने उनके क्‍या जवाब दिए ।
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टेक्निया इंस्‍टीच्‍यूट ऑफ एडवांस स्‍टडीज की कार्यशाला में अविनाश वाचस्‍पति ने कहा कि

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हिन्‍दी ब्‍लॉगर कुछ नहीं जानते क्‍या, जानते भी हैं और बतलाते भी हैं

पर क्‍या सच में ऐसा है
हिन्‍दी ब्‍लॉगर जानते हैं
सब बतलाते भी हैं
उन तक आपकी इस पोस्‍ट का
लिंक तो पहुंचे
और लिंक पहुंचने से भी
नहीं बनती है बात
वे उसे क्लिक भी करें
खोलें और पढ़ें
फिर जो किस्‍से
स्‍मृति में आयें
उन्‍हें तुरंत टिप्‍पणी में लिखें
या मेल पर बतलायें
चाहें तो अपने ब्‍लॉग पर
एक नई पोस्‍ट लगायें
उसका लिंक इस पोस्‍ट
में बतौर टिप्‍पणी लगा जायें
तरीका यही उम्‍दा है
इसी में मजा है
विश्‍वसनीय और रोचकता
अपने आप में मजा है।

वैसे जो जानना चाह रहे हैं
संदीप पांडेय
उन्‍हें कुछ जानकारी मिलेगी
श्‍याम माथुर की हालिया प्रकाशित
पुस्‍तक में भी, जिसकी जानकारी यहां पर है
दिल-ए-नादां

मीडिया के कल, आज और कल की पड़ताल - वेब पत्रकारिता पर पुस्‍तक प्रकाशित हो गई है


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राष्ट्रमंडल खेलों का नहीं,सेक्स रैकेटों की तैयारियां पूरी

(सुनील) www.sunilvani.blogspot.com
दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में भले ही कितने उतार-चढाव आ रहे हों, काम के डेडलाइन पर डेडलाइन खत्म हो रहे हैं लेकिन काम नहीं खत्म हो रहे हैं। ऐसे में राजधानी का एक तबका ऐसा भी जिसने राष्ट्रमंडल खेलों से पहले अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली है। जी हां, मैं बात कर रहा हूं सेक्स रैकेट का धंधा चलाने वाले वर्करों की। इन्होंने बकायदा वेबसाइट(जैसे रितीदेसाईडॉटकॉम) और न जाने इन जैसे अनेक साइटों ने अपनी तैयारियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए ईमेल का सहारा लिया है। इन वेबसाइटों में उन तक संपर्क करने से लेकर आपकी पसंद तक का विशेष ख्याल रखा गया है। हाई प्रोफाइल, मॉडल्स से लेकर कॉलेज गर्ल हर तरह की लडकियां उपलब्ध कराने वाले इस वेबसाइट ने कीमतों के साथ भी किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया है। घंटे और रात के हिसाब से हर तरह के कीमत इस वेबसाइट पर दर्शाए गए हैं। 15 हजार से कम में बात करने वाले लोगों से इस वेबसाइट ने पहले ही हाथ जोड लिए हैं। अब आप खुद ही सोच सकते हैं कि यह वेबसाइट किन लोगों के लिए तैयार की गई है। राष्ट्रमंडल खेलों में धनाढय वर्ग भले ही अपनी रूचि न दिखाए लेकिन ऐसे वेबसाइटों पर अपनी दिलचस्पी बखूबी दिखा रहे होंगे। वैसे भी गेम्स में इतने बडे पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार के पैसों का इस्तेमाल कहीं और तो होना ही था, सो कुछ लोगों के लिए इससे अच्छा इंवेस्टमेंट कुछ और हो भी नहीं सकता है। खैर इस प्रकार का धंधा चलाने वालों ने तो अपनी तैयारियां पूरी कर ली है, लेकिन हम मौन क्यों हैं। मीडिया, सरकार, प्रशासन सभी ने चुप्पी क्यों साध रखी है? शायद इसलिए कि बहती गंगा में हाथ धोने का मौका उन्हें भी मिल जाए

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