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ललित शर्मा से सीधी बात

रायपुर से  श्री ललित शर्मा से सीधी बात
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नई बात में बहुत कुछ नया है : अफ़ज़ाल अहमद सैयद की कविताएं

नई बात 
चंदन पांडेय का ब्‍लॉग है
यह मत कहिएगा
नहीं जानते हैं

अरे वही इंडियन फार्मर
अच्‍छा पढि़ए
विचारों के साथ आगे बढि़ए
आप भी कहिए
जो कहा है सबने
उसे पढि़ए

एक लड़की

लज्जत की इन्तेहा पर
उसकी सिसकियाँ
दुनिया के तमाम कौमी तरानों से ज्यादा
मौसीकी रखती हैं

जिन्सी अमल के दौरान
वह किसी भी मलिकाए हुस्न से ज्यादा
खूबसूरत करार पा सकती है



और पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करिए और कहना चाहें तो यहीं पर कहिए

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मै आपकी ही बेटी बनना चाहूंगी |

मेरे अच्छे पिताजी ,
आज आठ वर्ष पूरे हो गयेआपको इस संसार को छोड़े | न जाने किस लोक में होंगे आप और पता नहीं मेरी बात सुन भी पायेंगे या नहीं |हमने संस्कार आपसे तो ही ग्रहण किए कभी आपने कुछ कहा नहीं पर आपका व्यक्तित्व सब कुछ कह देता | आपके चेहरे पर फ़ैली वह निशल मुस्कराहट किसी को भी प्रभावित कर देने के लिए काफी थी|किसी भी दुःख में आपको विचलित होते नहीं देखा| मुझे आज भी वह शाम याद है जब घर में छुटकी के बीमार होने पर हम सभी बहुत परेशान हो गए थे और आपको शांत और अविचिलित देखकर मैंने आपसे कहा भी था आप इतने शांत कैसे रह सकते है ?आपका उतनी ही गंभीरता से भरा जबाव था बेटा दुःख में हाथ पैर छोडने से काम नहीं चलता ,धैर्य रखो और प्रभू का स्मरण करो सब ठीक हो जाए गा | हम संसारी जीवो को उस समय आपका ये गीता जैसा सन्देश अखरा था पर आप कितना सही थे यह बाद में जाना | आपने ही तो सिखाया कि मुसीबत उतनी बड़ी नहीं होती जितना हम उसे आंक लेते हैं किसी समस्या का हल खोजना तो बुद्धिमानी हो सकता है पर उसको लेकर चिंतित होकर बैठ जाना कोई विकल्प नहीं| कितनी यादे आज मेरे जेहन में आरही है| लोग कहते थे कि शर्माजी ५ बेटियों के पिता है फिर भी कैसे मुसकाते रहते हैं |हाँ , पापा शायद आप के कंधे इसीलिए नहीं झुके क्योकि आपने अपनी पुत्रियों को संस्कारवान और मजबूत बनाया | पर पापा, हम बच्चिया आपके लिए बस एक लडकी ही बनी रही |कभी भी संतान होने के दायित्व की पूर्ति नही कर पाई| जो किया भी वह भी इस भाव के साथ कि जैसे कोई अहसान कर रहे हो|आपका अंतिम समय पास था पर हमने कभी भी आपको कमजोर पड़ते नहीं देखा |
कैसे कर पाते थे आप ये सब |दादी तो आपको ९ माह का ही छोड कर चल बसी थी और आपका बचपन इधर-उधर ही बीता |शायद अनुभव ने आपको समय से पहले ही गंभीर बना दिया |आपने अपनी सीमित आमदनी में कैसे हम सबको शिक्षित भी कर दिया| कभी किसी के आगे कभी हाथ पसारते नहीं देखा \सब को अच्छे घरों में ब्याह दिया |पर पापा हमने क्या किया|कभी आप से यह भी नहीं कह सके कि पापा अब आप आराम कीजिये ,हम सब सभाल लेगे |अरे कभी कुछ बाजार से ला भी दते थे तो ऐसा महसूस करते मानो हम बहुत बड़ा बोझ ढोकर लाये है |मैंने बहुत सोचा और अब मुझे लगता है कि फिर मैं आपकी बेटी बनकर ही जन्म लूंगी
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बापू यहीं मौजूद हैं, जरा अपनी जेबें तो टटोलिये

सबकी जेब में मौजूद हूं मैं
बापू की अनुपस्थिति को मत स्‍वीकार कीजिए। जब तक वे भारतीय नोटों पर अपनी छवि के साथ मौजूद हैं, उनकी उपस्थिति को कोई नहीं नकार सकता। अगर कोई नकार सकता है तो सबसे पहले अपनी जेब में मौजूद करेंसी को इस लेखक के पास भिजवाने का साहस करे।
बापू सबके पास मौजूद हैं। जो बापू को नहीं चाहते हैं, वे भी बापू के साथ हैं बल्कि बापू उनके पास मौजूद हैं। हम किसी से असहमति रखते हैं तो उससे संबंधित किसी वस्‍तु से सरोकार नहीं रखना चाहते हैं। अगर ऐसे दुस्‍साहसी हों तो सामने आयें। भारत में रहें और भारत के नोटों से बैर रखते हों, चाहकर भी कोई निर्धन नहीं रहना चाहता है। नकद नारायण महात्‍मा गांधी जी के सिवाय भला किसका काम चल सकता है।
मैं तो महात्‍मा गांधी जी को सब जगह मौजूद मानता हूं। और वे मौजूद हैं भी। जिनका चित्र नोटों पर मौजूद हैं, उनसे कोई किनारे नहीं हो सकता। आज सब जगह लूटपाट मची हुई है या ईमानदारी विद्यमान है, वे सब नोटों की प्राप्ति के लिए लगे हुए हैं।
कोई चिंता नहीं,
 कोई पल ऐसा नहीं,
जब आप बापू के दर्शन नहीं करते हों,
उनके दर्शन लाभ पाकर मन को चैन मिलता है
जो इस परम सत्‍य से इत्‍तेफाक न रखते हों
वे इसे पढ़कर भी
बिना टिप्‍पणी किए जा सकते हैं
इसलिए ईमानदार बनें
और सच को स्‍वीकारें।

आप क्‍या कहना चाहेंगे  ...
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'' हिंदी ब्लॉगिंग '' विषय पर आपके आलेख आमंत्रित हैं


आपके आलेख आमंत्रित हैं
                                
''  हिंदी ब्लॉगिंग ''  पर  फरवरी २०१२ में मुंबई में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए आप के आलेख सादर आमंत्रित हैं. इस संगोष्ठी में देश-विदेश के कई विद्वान सहभागी हो रहे हैं.
             आये हुये सभी स्‍तरीय  आलेखों को पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित करने क़ी योजना है. आपसे अनुरोध है कि आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने का कष्‍ट करें.
         इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें --------------
 डॉ.मनीष कुमार मिश्रा
 के.एम. अग्रवाल कॉलेज
 पडघा रोड,गांधारी विलेज
 कल्याण-पश्चिम ,४२१३०१
 जिला-ठाणे
 महाराष्ट्र ,इण्डिया
 mailto:manishmuntazir@gmail.com
 wwww.onlinehindijournal.blogspot.कॉम
 ०९३२४७९०७२६
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न आना इस देश बापू !


(शहीद दिवस पर विशेष )

!! न आना इस देश बापू !!

शान्ति का  उपदेशक
सत्य-अहिंसा में आस्था रखना छोड़ दिया है
और  जम्हूरियत
बन गयी है खानदानी वसीयत का पर्चा
सिपहसलार-
कर गया  है सरकारी खजाना
सगे-संवंधियों के नाम......

संसद के केन्द्रीय कक्ष में
व्हिस्की के पैग के साथ
होती रहती  है कभी  राम राज्य तो कभी भ्रष्टाचार पर चर्चा
बापू !
वह स्थान भी सुरक्षित नहीं बचा
जहां बैठकर गा सको -
वैष्णव जन.............पीर पराई जाने रे......!

तुम्हारे समय से काफी आगे निकल चुका है यह देश
इस देश के लिए सत्य-अहिंसा कोई मायने नहीं रखता अब
टूटने लगे हैं मिथक
चटखने लगी है आस्थाएं
और दरकने लगी है-
हमारी बची-खुची तहजीब
इसलिए लौटकर फिर -
न आना इस देश बापू !

() रवीन्द्र प्रभात
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गाँधी के आदर्शों का ‘शहीदी दिवस’

(सुनील) 7827829555

अनुशासन, ईमानदारी, सच्चाई और न जाने किन-किन आदर्शों के लिए गाँधी जी को जाना जाता है. जो बस एक खानापूर्ति मात्र रह गया है. किताबों में इन आदर्शों के बारे में बच्चों को केवल ज्ञान दिया जाता है, जिसका आज के जीवन से बहुत कुछ सम्बन्ध होते हुए भी कुछ वास्ता नहीं रह गया है. हमारी लाइफ स्टाइल ही कुछ ऐसी हो गई हैं जहाँ इन आदर्शों के कुछ मायने नहीं रह जाते. ये अलग बात हैं हम आज भी मंच पर जाकर उनकी आदर्शवादिता से रूबरू होते हैं, सुनने में अच्छा जो लगता है, और सामने वाला भी भला मानुस प्रतीत होता है. लेकिन सच तो ये है कि अनुशासन का अनुसरण करने वाला अब कोई नहीं रहा, ईमानदारी को भ्रष्टाचार के दीमक ने चट कर लिया और सच्चाई शब्दकोष में खो कर रह गई है. भला ऐसे में शहीदी दिवस को क्यूँ न आदर्शों के शहीदी दिवस आदर्शों की एक-एक पंक्तियाँ जला कर गाँधी को अपने आप से दूर कर रहे हैं. शेष पढ़ने के लिए क्लिक करें www.sunilvani.blogspot.com  
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नो वन किल्ड महात्मा गांधी?

                        (उपदेश सक्सेना)
आज  महात्मा गाँधी को राष्ट्र आज उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दे रहा है. गांधी की चौक-चौराहों पर लगी प्रतिमाओं पर जी भरकर श्रद्धासुमन अर्पित किये जा रहे हैं, देश गांधी मय हो गया है, मगर उनका क्या जो अब गांधी का चित्र केवल करारी करेंसी में ही देखने के आदी हो चुके हैं. यह कितनी बड़ी विडम्बना है कि जिस गांधी ने देश की आज़ादी के लिए अपने शरीर के सारे वस्त्रों का त्याग कर महज़ एक लंगोटी को अपनाया, जिनकी सच्चाई की कसमें खाईं जाती हों उसी बापू के चित्र वाले नोटों ने आज आदमियत खत्म कर दी है.................................. फिल्मकार अब फिल्म बनाए - नो वन किल्ड महात्मा गांधी.शर्म करें आज के दिन.............................आखिर कितनी बार गांधी की ह्त्या करेंगे?www.aidichoti.blogspot.com

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महात्मा की पत्रकारिता दिल्ली से देहात के बीच


महात्मा की पत्रकारिता और वर्तमान समय को लेकर विमर्श हो रहा है और यह कहा जा रहा है कि महात्मा की पत्रकारिता का लोप हो चुका है। बात शायद गलत नहीं है किन्तु पूरी तरह ठीक भी नहीं। महात्मा की पत्रकारिता को एक अलग दृष्टि से देखने और समझने की जरूरत है। महात्मा की पत्रकारिता दिल्ली से देहात तक अलग अलग मायने रखती है। पत्रकारिता का जो बिगड़ा चेहरा दिख रहा है वह महानगरीय पत्रकारिता का है। वहां की पत्रकारिता का है जिन्हें एयरकंडीशन कमरों में रहने और इसी हैसियत की गाड़ियों में घूमने का शौक है।

पत्रकारिता का चेहरा वहां बिगड़ा है जहां पत्रकार सत्ता में भागीदारी चाहता है और यह भागीदारी महानगर में ही संभव है। दिल्ली से देहात की पत्रकारिता के बीच फकत इसी बात का फरक है। दिल्ली की पत्रकारिता से महात्मा पत्रकार दूर हैं तो देहाती पत्रकारिता में वे आज भी मौजूद हैं। READ MORE
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Dr kumar vishwas - Latest - Hyderabad - IIIT



कुमार विश्वास ...............................
अनिल अत्री .....................
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खैयाम साहब की बातें सुनिये

आज़ दिनांक 29/01/2011 को जबलपुर के तरंग प्रेक्षागार में रेडक्रास सोसायटी जबलपुर द्वारा नि:शक्त जन सहायतार्थ  आयोजित कार्यक्रम में खैयाम साहब ने जो कहा वो सुनिये
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शब्‍दों की ताकत

किसी को दो गाली 
तो वो बजा देगा
आपके गाल पर ताली। पूरा पढ़ने और ताली बजाने के लिए क्लिक कीजिए

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परिधि आर्ट ग्रुप ने सोलह शख्सियतों को सम्‍मानित किया


नई दिल्ली। परिधि आर्ट ग्रुप के 25 वर्ष पूरे होने परपरिधि एचीवर्स अवार्ड का आयोजन किया गया। भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी को समर्पित इस आयोजन में राजस्थानी लोक गीतों, कथक-नृत्य, नाटक व सूफी गायन की प्रस्तुतियां हुई।
समारोह में अरविंद केजरीवाल को सूचना का अधिकार जैसी व्यस्था को देश भर में स्थापित करने के लिए देश के नाम अवार्ड दिया गया। किरन बेदी को उपेक्षित महिलाओं के उत्थान के लिए किये गए उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्व शांति अभियान के सूत्रधार महामंडलेश्वर श्री श्री सोहम बाबा , लोकप्रिय टीवी व फिल्म अभिनेत्री जोयश्री अरोड़ा, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्युट ऑफ इंडिया के निदेशक व कवि- साहित्यकार पंकज राग, वरिष्ठ आईएस अधिकारी व लेखिका लीना महेंडले, कवयित्री सविता सिंह, प्रवासी भारतीय संस्कृतिकर्मी धनंजय कुमार, कवि-साहित्यकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, सूफी कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी, प्रसिद्ध चित्रकार कृष्ण कन्हाई, समाजसेवी ग्रेस अशोक ठक्कर, मूर्तिकार सुशील सखूजा, यंग एचीवर सुशील बदरवाल, पवन कौशिक व पवन कार्टूनिस्ट को कला, संस्कृति, साहित्य व समाज में अपने विशिष्ट योगदान के लिए परिधि आर्ट ग्रुप द्वारा सम्मानित किया गया।
समारोह में युवा नृत्यांगना अरूषी निशंक द्वारा शिवस्तुति पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति हुई तो दूसरी तरफ बालीवुड का लोकप्रिय युवा गायक ऐश्वर्य निगम ने अपने गीतों से कार्यक्रम में समां बांध दी। अकबर-आजम द्वारा लिखित व निर्देशित नाटक फ्यूचर बाजारने आने वाले समय की एक झलक उपस्थित की तो दूसरी तरफ अरविंद गौड़ के नाटक ‘इंटरफेथ ’ ने समकालीन विषयों को सहज संवादों में लोगों के दिलों तक पहुंचाया। पूरे कार्यक्रम का संगीत नेत्रहीन कलाकारों की मंडली ने दी। कंचन, अनंत और राजू के ग्रुप ने अपने धुनों से कार्यक्रम को संगीतमय बनाने के साथ-साथ दर्शकों के सामने एक आदर्श भी स्थापित किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार चित्रा मुदगल, राजी सेठ, कवि पंकज सिंह, दार्शनिक प्रो. रिपुसूदन श्रीवास्तव, संस्कृति कर्मी अनिल जोशी, वरिष्ठ रंगकर्मी सलिम आरिफ, सांसद अर्जुन राय, प्रसिद्ध उद्योगपति सतेन्द्र कुमार जैन सहित कला- संस्कृति से कई जानी-मानी हस्तियां उपस्थित थीं।
संस्था के अध्यक्ष निर्मल वैद ने कहा कि 25 साल के इस सांस्कृतिक सफर में कला-संस्कृति को बेहतर तरीके से प्रमोट करने के लिए हमने नाटकों का सहारा लिया। नुक्कड़ नाटक से लेकर बच्चों के लिएथियेटर वर्क शॉपके आयोजन के माध्यम से परिधि आर्ट ग्रुप की शुरूआत हुई थी।
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आप ब्लागर हैं..तो बन सकते हैं मंत्री-प्रधानमंत्री

 यदि आप शौकिया तौर पर ब्लागिंग करते हैं तो अब गंभीर हो जाइये और चलताऊ विषयों की बजाय ज्वलंत मुद्दों पर लिखना शुरू कर दीजिए क्योंकि ब्लागिंग से अब आप न केवल भरपूर पैसा और नाम कमा सकते हैं बल्कि मंत्री तथा प्रधानमंत्री जैसे पदों पर भी पहुँच सकते हैं. मुझे पता है आपको यह ‘मंत्री’ बनने की बात हजम नहीं हो रही होगी और मेरी कपोल-कल्पना लग रही होगी ,पर यह वास्तविकता है और चौबीस कैरेट सोने सी खरी है. हमारे एक ब्लागर भाई तो मंत्री पद तक पहुँच भी गए हैं.
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" भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध "




............... पूरे देश मै भ्रष्टाचार शिखर पर ...देश मै शायद इतने बडे घोटाले पहले कभी हुए हो जितने इन दिनों भारत मै हो रहे हैं .... हर दिन कोई न कोई घोटाला ....भ्रष्ट लोगों का विरोध करने वाले ज़िंदा जला दिये जाते है ...काले धन मै सभी दल लिप्त ..कोई थोड़ा कोई ज्यादा ...इसी कारण सरकार भी खुलासा करने से डर रही है ..इन्हीं सबका विरोध करने के लिए कुछ देश के बुद्धिजीवी सामने आये है ...एक ग्रुप बना सरकार से आग्रह कर रहे है कि एक ऐसा क़ानून बनाये जो भर्ष्टाचार को रोके .. ये लोग आगामी तीस जनवरी को दिल्ली के रामलीला ग्राउंड से जन्तर मंतर तक पैदल मार्च कर भ्रष्टाचार के विरूद्ध क़ानून बनाने कि अपील करेंगे ..इनमें जे एम् लिग्दोह , किरन बेदी ,, स्वामी अग्निवेश . अन्ना हजारे , प्रशांत भूषण आदि भाग लेंगें ...
किरन बेदी , जस्टिस संतोष हेगड़े प्रशांत भूषण , जे एम् लिंगदोह और अरविन्द केजरीवाल ने मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक प्रारूप तेयार किया है ...इस प्रारूप को लागू करवाने के लिए " भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध " अभियान शुरू किया है ..इसमें सेकड़ों बुद्धिजीवी शामिल हो चुके है ..इसी के लिए छात्रो को भी शामिल करने के लिए दिल्ली विश्वविधालय के लो फेकल्टी के हाल मै एक सेमीनार का आयोजन किया गया जिसमें अरविन्द केजरीवाल , देवेंदर सहरावत ने छात्रों को संबोधित किया ..... इनका तर्क था कि ऐसा देश मै ऐसा नही होता कि भ्रष्टाचार मै लिप्त कर्मचारी कि नोकरी गई हो उसको जेल हुई हो ..विजिलेंस व CBI मै भी भ्रष्टाचार व्याप्त है .........

अब आम लोगों को इस जनयुद्ध मै भाग लेकर सख्त कानून बनवाने कि जरूरत है ...............




अनिल अत्री दिल्ली .......................
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SAVE BBC , SAVE MEDIA

SAVE BBC , SAVE MEDIA
http://www.petitions.in/petition/save-bbc-save-media/40

BBC Hindi Radio will fall silent soon. It is cutting down its Hindi services, which is a huge loss to the BBC Hindi Radio lovers across the world. The decision by the media giant will deprive the millions of listeners. Mediakhabar.com starts a campaign to sign a petition in this regard and request them not to suspend their services. Please sign this petition started by mediakhabar.com. Its like taking our loved ones away from us- forcibly. Save BBC, Save Media. (Kindly forward this petition to all your friends and BBC Hindi Service lovers.)
Link : http://www.petitions.in/petition/save-bbc-save-media/40

बीबीसी बचाओ , मीडिया बचाओ
http://www.petitions.in/petition/save-bbc-save-media/40
बीबीसी हिंदी रेडियो अब नहीं गूंजेगा. बीबीसी की तरफ से आधिकारिक घोषणा भी हो गयी. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के प्रमुख पीटर हॉरॉक्स ने कहा है कि सरकारी फंडिंग में अहम कटौती की वजह से ये परिवर्तन किए जा रहे हैं. इसी वजह से बीबीसी हिंदी रेडियो सर्विस को भी बंद किया जा रहा है. लेकिन यह घोषणा करते हुए बीबीसी हिंदी रेडियो सर्विस के लाखों – करोड़ों श्रोताओं की भावनाओं की पूर्णतया अनदेखी कर दी गयी. मीडिया खबर.कॉम ने बीबीसी हिंदी रेडियो सेवा को बंद करने के खिलाफ एक अभियान छेड़ा है और बीबीसी से आग्रह किया है कि वे बीबीसी हिंदी रेडियो को न बंद करें. इस संबंध में आप भी इस ऑनलाइन पेटिशन पर अपने दस्तख कर बीबीसी हिंदी रेडियो को बचाने की मुहिम में साथ दें.

Pl Click on this link to sign online petition .
http://www.petitions.in/petition/save-bbc-save-media/40

RELATED NEWS :
बीबीसी हिंदी रेडियो सेवा का प्रसारण मार्च से बंद
http://mediakhabar.com/index.php/radio/78-radio/1503-bbc-to-close-5-services-end-short-wave-hindi-radio-service.html

BBC to close 5 services, end short wave Hindi radio service
http://mediakhabar.com/index.php/mediakhabar-english/93-mediakhabar-english/1504-bbc-world-service-cuts-outlined-to-staff.html

SAVE BBC, SAVE MEDIA. MediaKhabar.Com signature campaign.
WWW.MEDIAKHABAR.COM
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स्वतंत्रता का अर्थ तो सिखा दो इनको भी

जी यशवंत सोनवाने को व्यवस्था ने मारा है

आत्म केंद्रित सोच स्वार्थ और आतंक का साम्राज्य है.चारों ओर छा चुका है अब तो वो सब घट रहा है जो इस जनतंत्र में कभी नहीं घटना था. कभी चुनाव के दौरान अधिकारी/कर्मचारी की हत्या तो कभी कर्तव्य परायण होने पर . भारतीय प्रजातंत्र में निष्ठुर एवम दमनकारी तत्व की ज़हरीली लक़ीरें साफ़ तौर पर नज़र आ रहीं हैं.. ब्यूरोक्रेसी की लाचार स्थिति, हिंसक होती मानसिकता, हम किस ओर ले जा रहे हैं विकास का रथ. कभी आप गांवों में गये हैं. ज़रूर गये होंगे जनता की भावनाओं से कितना खिलवाड़ होता है देखा ही होगा. लोगों की नज़र में सरकारी-तंत्र को भ्रष्ट माना जाता है यह सामान्य दृष्टिकोण है.किंतु सभी को एक सा साबित करना गलत है. सामान्य रूप से सफ़ल अधिकारी उसे मानतें हैं जो येन केन प्रकारेण नियमों को ताक़ पर रख जनता के उन लोगों का काम करे जो स्वम के हित साधने अथवा बिचौलिए के पेशे में संलग्न है. यदि अधिकारी यह नही करे तो उसके चरित्र हनन ,मानसिक हिंसा, प्रताड़ना और हत्या तक पर उतारू होते हैं.
खबर ये है कि "मालेगांव के एडीएम यशवंत सोवानणे को तेल माफिआओं ने जिंदा जला दिया है। एडीएम का कसूर सिर्फ इतना था कि वो पैट्रोल में कैरोसिन की मिलावट रोक रहे थे ।"
ए डी एम साहब लोक कल्याण ही कर रहे थे उनको उनके काम से रोकने का जो तरीका अपनाया गया भारतीय कानून-व्यवस्था को सरे आम चिंदी-चिंदी करना है. देश में सैकड़ों अधिकारीयों/कर्मचारियों को रोज़ मारपीट, उनका अपमान, उनको अपना नौकर मानना , नियम विरुद्ध काम न करने या कि नानुकुर करने पर चरित्र हनन करना. बैठकों में ज़लील करना और ज़लील करवाना फूहड़ समाचारों का प्रकाशन एवं प्रसारण करवाना जैसी स्थितियों का सामना करना होता है.
अन्य आलेख:- एक और तमाचा :शिखा वार्ष्णेय
एक टिप्पणी ऐसी मार्मिक भी :-
दीपक 'मशाल' सच में आज दिल रो रहा है दी. सुबह एक एस.एम.एस. आया जिसमे तिरंगा बना था, सन्देश था कि देशभक्त हैं तो इस तिरंगे ज्यादा से ज्यादा भारतीयों के इन्बोक्स में भेजो. लगा कि जैसे कोई कह रहा हो कि 'संतोषी माता के फलाने मंदिर में चमत्कार हुआ.. एक व्यक्ति ने उसे पर्चे में छपवा कर बांटा जिसने पढ़कर उसे फिर से छपवा कर और भी लोगों को बांटा उनकी मन-मुराद पूरी हुई और जीने फाड़ कर फेंक दिया उसका बेटा/ भाई/ पिता/ माँ मर गए, कारोबार में नुक्सान हुआ..' दूसरी तरफ लगे रहो मुन्नाभाई में गांधी बने चरित्र का वो संवाद याद आया कि 'मुझे नोट, चौराहे, कार्यालय और बाकी सब जगह से हटा दो.. कहीं रखना है तो अपने दिल में रखो.. तात्पर्य समझ ही रही होंगीं. शहीद यशवंत सोनवाने को अनचाही शहादत देने वाले सिर्फ ७-८ लोग नहीं हम सभी हैं.. हमारा लालच है.
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व्यंग्य एवं व्यंग्यलोक पर पढ़े मेरा व्यंग्य
सब भाई लोग को रिपब्लिक डे का बधाई
आपकी प्रतिक्रिया आलोचना समालोचना का इंतज़ार रहेगा।

प्रमोद ताम्बट
भोपाल
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हे भारत के कर्णधार बतलाओ वो मान कहां - आशा गुप्ता



हे भारत के कर्णधार बतलाओ वो मान कहां, 
कहां गई वो श्रद्धा तेरी ओंर तेरा ईमान कहां 

किसने ममता को है बेचा, किसने सपनो को मारा,  
किसने उजियारे को डस कर, फैलाया है अँधियारा 
किसने छीनी ख़ुशियाँ सबकी, कौन दुखो से है हारा
किसने किसकी फोड़ी गागर और पी गया सुख सारा
गली गली में शोर मचा है आया क्यों तूफ़ान यहाँ

सोना हो जिस देश की माटी जिसे लहू ने सींचा हो
जहाँ सीता के सुख की खातिर, लक्ष्मण ने घेरा खींचा हो
जिसके संस्कार, नैतिकता के आगे दूजे का सर नीचा हो
जिसमे जीवन खेल नहीं एक कठिन परीक्षा हो 
उसी देश के लोगो बोलो खोया वो जहान कहां 

अब भी नाम पर जाति-धर्म के निश दिन झगडे होते है
अब भी मुंदी पलकों के पीछे कितने सपने सोते है 
अब भी तेरे-मेरे की खातिर कई-कई सर कटते है 
अब भी जीने की चाहत में जाने कितने मरते है
कहां खो गए वादे- कसमे था एकता का सार जहाँ

यह कविता पोर्ट ब्लेयर निवासी प्रख्यात नाट्य लेखिका, निर्देशक और अदाकार श्रीमती आशा गुप्ता जी की नयी कविता है. ब्लॉग जगत में उनका स्वागत है.  

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ब्लॉग विमर्श -१

कुछ समय से दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में होने वाली ब्लागर गोष्ठियों और कार्यशालाओं में जाने का अवसर मिला है. हर बार कुछ ऐसे लोगों से मिलना हुआ जो या तो नए ब्लागर है अथवा अभी ब्लागिंग के बारे में नहीं जानते. हिंदी ब्लागिंग को लेकर ऐसे लोगों में उत्कंठा और उत्सुकता भी दिखी. लेकिन हिंदी ब्लागिंग को उसके शैशव काल में ही तमाम बीमारियों ने जकड़ लिया है. अच्छे एग्रीगेटरों की अनुपलब्धता, स्वयम्भू मठाधीशों की गुटबाजी, और सस्ती लोकप्रियता के टोटकों ने हिंदी ब्लागिंग का स्तर गिराने का ही कार्य किया है. कई अच्छे लेखन सर्वथा उपेक्षित दीखते हैं, जबकि ढेर सारे सस्ते और व्यर्थ के विषय प्रसिद्धि पा रहे हैं. आज संभवतः हिंदी ब्लागिंग में पढ़ने वालों से अधिक लिखने वाले हैं उसपर भी टिप्पणी पाने की लालसा से ब्लागिंग करना उनके स्तर को उच्च नहीं रख पाता है. ब्लागिंग हिंदी ब्लागिंग जब कि अभी अन्य कई भाषाओं से संख्या के मामले में काफी पीछे है, अभी से आतंरिक कलह, राजनीति, क्षेत्रवाद, गुटबाजी जैसी समस्याओं से ग्रसित दीखता है.
आगे पढ़ने के लिए यहाँ चटका लगाएं
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26 जनवरी 2011 की एक निराली झांकियां

महंगाई की खुशी कितनों के सीने में जलन पैदा कर रही है। कितनों के सीने की छलनी बना रही है। मतलब अब सीने की शामत भी मंहगाई के कारण ही आई है।  कोशिश की जा रही है कि महंगाई के गुर अब प्राथमिक शालाओं में पाठ्यक्रम में पढ़ाना अनिवार्य कर दिये जायें ताकि  महंगाई के बचपनीय पाठों से कोई महरूम न रह जाए। पूरा पढ़ने और अपनी बात कहने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए
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बढाइए हिन्‍दी ब्‍लॉगरों की संख्‍या

पढ़ तो लिया आपने, अगर कुछ कहना चाहते हैं तो यहां पर क्लिक कीजिए
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जयपुर साहित्‍य उत्‍सव में ब्‍लॉगिंग पर हुआ संवाद : जनसत्‍ता की खबर पर चाहिए आपकी नजर

24 जनवरी 2011 के दैनिक जनसत्‍ता में पेज 7 पर ब्‍लॉगिंग पर हुआ संवाद की खबर। जयपुर की खबर पर आपकी नजर, और आपके विचार जानने की उत्‍कंठा है। 
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असामान्‍य ब्‍लॉग से परिचित हो जायें : अमर उजाला की खबर पर नजर

24 जनवरी 2011 के अमर उजाल हिंदी दैनिक के पेज 13 पर प्रकाशित खबर पर आप भी नजर डालिए और क्लिक करके पढि़ए, फिर अपनी बात कहिए।
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महंगाई करा रही है परेड


 महंगाई अब राष्‍ट्रीय शोक का विषय है। राष्‍ट्र चलाने वाले सब अशोकी हैं। वो इन सबसे अदृश्‍य (हाइड)  हैं। साहित्‍य में भी अशोकों की घुसपैठ हो चुकी है और भरमार है।
महंगाई में उम्‍मीद से बढ़कर इजाफा नेताओं के समर्थन के बिना हासिल नहीं होने वाला था। महंगाई का तिरछा वार प्रत्‍येक आदमी की सांस पर है। जब से उसे यह भनक लगी है कि सरकार सांसों पर भी कर लगाने के लिए तैयार है। उसे लग रहा है कि उसकी बरसों की साध पूरी हो रही है।  पूरा पढ़ने के लिए क्लिक कीजिये
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ब्‍लॉग लिखने की तकनीकी जानकारी दी गई

आदर्श नगर दिल्ली के शिव मन्दिर में 
मीडिया से जुड़े लोगों को 
ब्‍लॉग लिखने की तकनीकी जानकारी दी गई
दिल्ली से पधारने वाले - सुमित प्रताप, अविनाश वाचस्पति, मदन विरक्त, राजीव, वन्दना गुप्ता,संगीता स्वरूप, प्रतिभा कुशवाहा (उपसम्पादक पाखी),
आज दिल्ली के विभिन्न चैनलों और प्रिंट मीडिया से जुड़े हुए लोगों में ब्लॉगिंग सीखने का जुनून था! जिससे यह आभास हो रहा था कि ब्लॉगिंग का भविष्य उज्जवल है।
इस गोष्ठी का संचालन रजनी कान्त तिवारी और अनिल अत्री ने संयुक्त रूप से किया!
सबसे सुखद पहलू यह था कि गोष्ठी में न तो कोई मुख्य अतिथि था तथा न ही कोई मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि।
मंच पर विराजमान- रजनी कान्त, डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक", डॉ.के.डी.कानोडिया, मदन "विरक्त" और संजीव शर्मा



इशिका, उपदेश सक्सेना,  सुशील कुमार, पवन चन्दन (चौखट), कनिष्क कश्यप, अनिल अत्री........आयोजक , विकास कुमार ........सहारा समय , राजेंद्र कुमार .........हिंदी आज तक , अनिल कुमार --------सहारा समय, शिशिर शुक्ला ..........exchange फ़ॉर मीडिया , प्रदीप कुमार ........स्तर न्यूज़, राम कुमार ..........सहारा,, राजेश खत्री ............भ्रष्टाचार पर लिखते हैं , संजय नारायण .........दैनिक क्राइम  रिपोर्टर, जगत, विजय सिंघत्ल, हर्षित मिश्र ........टोटल टीवी, विनय.......चढ़ती काला, विजय जोगवन , संजीव शर्मा ..........संपादक, सुरेश यादव. जय कुमार , इंदु पूरी, पदम् सिंह, ब्रह्मपाल प्रजापति ........आजाद पुलिस और डॉक्टर के . डी . कनोडिया आदि!
यह है एक ग्रुप फोटो 

श्रीमती वन्दना गुप्ता

अविनाश वाचस्पति
श्रीमती संगीता स्वरूप
पद्मसिंह
 मदन विरक्त
 दर्शकदीर्घा
नुक्कड़ की पुरानी पोस्ट से साभार
हिन्‍दी का प्रयोग न करने को देश में क्राइम घोषित कर दिया जाना चाहिए और आज मैं इस मंच से पूरा एक दशक हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के नाम करने की घोषणा करता हूं। इस एक दशक में आप देखेंगे कि हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग सबसे शक्तिशाली विधा बन गई है। जिस प्रकार मोबाइल फोन सभी तकनीक से युक्‍त हो गया है, उसी प्रकार हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग सभी प्रकार के संचार का वाहक बन जाएगी।
 
प्रख्‍यात व्‍यंग्‍यकार और चर्चित ब्‍लॉग नुक्‍कड़ के मॉडरेटर, अविनाश वाचस्‍पति ने जब यह आह्वान किया तो पूरा सभागार तालियों की करतल ध्‍वनि से गूंज उठा। उन्‍होंने कहा कि मीडियाकर्मियों और हिन्‍दी ब्‍लॉगरों का समन्‍वयन अवश्‍य ही इस क्षेत्र में सकारात्‍मक क्रांति का वाहक बनेगा। जिस प्रकार हिन्‍दी ब्‍लॉगर और मीडियाकर्मी एक साथ मिले हैं, उसी प्रकार यह परचम सभी क्षेत्रों में लहराना चाहिये। प्रत्‍येक क्षेत्र में से हिन्‍दी ब्‍लॉगर बनें और अपने अपने क्षेत्र की उपलब्धियों को सामने लायें। हिंदी मन की भाषा है और इस भाषा की जो शक्ति है वो हिन्‍दी के राष्‍ट्रभाषा न बनने से भी कम होने वाली नहीं है। वे राजधानी के आदर्श नगर में आयोजित हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की कार्यशाला और ब्‍लॉगर सम्‍मेलन के मौके पर उपस्थित समुदाय को संबोधित कर रहे थे।
 
आईबीएन7 के अनिल अत्री ने कहा कि हिंदी भाषा सम्पूर्ण राष्ट्र को जोड़ने की क्षमता रखती है। विश्व मंच पर राष्ट्र का गौरव भाषा बन सकती है। हिंदी खुद में एक संस्‍कृति और संस्कार है। दिल से बोली जाने और दिल से सुनी जाने वाली इस भाषा को पढ़ने और लिखने वालों की संख्या देशभर में कम नहीं है।
 
इस कार्यशाला की उपलब्धि उत्‍तराखंड खटीमा से पधारे डॉ. रूपचन्‍द्र शास्‍त्री ‘मयंक’ और चित्‍तौड़गढ़ से पधारी इंदुपुरी गोस्‍वामी रहीं। दिल्ली में प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से भी भारी संख्या में पत्रकारों ने शिरकत कर वेब पत्रकारिता के गुर भी सीखे और यह अनुभव किया कि आज हिंदी किस मुकाम पर है और इसे शिखर पर पहुंचाया जा सकता है। इस कार्य शाला में शिरकत कर रहे मीडियाकर्मियों ने अपने-अपने ब्‍लॉग बनाये और संकल्प किया कि वे भी अब नियमित रूप से ब्लॉग लिखा करेंगे।
 
उपस्थित लोगों में उल्‍लेखनीय चर्चित ब्‍लॉगर, अजय कुमार झा, पवन चंदन, सुरेश यादव, पाखी पत्रिका की उप संपादक, प्रतिभा कुशवाहा, संगीता स्‍वरूप, वंदना गुप्‍ता, राजीव तनेजा, शोभना वेलफेयर सोसायटी के सुमित तोमर, विनोद पाराशर हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में पीएचडी कर रहे केवल राम, अनिल अत्री इत्‍यादि के नाम उल्‍लेखनीय हैं। मीडियाकर्मियों में ‘इंडिया न्‍यूज़’ के वी के शर्मा, ‘सहारा टीवी’ के रजनीकांत तिवारी, ‘आज तक’ के आनंद कुमार, सतीश शर्मा, संजय राय, राजेश खत्री,  योगेश खत्री, हर्षित, दीपक शरमा, राजेंदर स्वामी ने अपने अपने ब्‍लॉग बनाये।
 
ब्‍लॉग लिखने की तकनीकी जानकारी पद्मावली ब्‍लॉग के पद्म सिंह, ब्‍लॉगप्रहरी के कनिष्‍क कश्‍यप और अविनाश वाचस्‍पति ने सामूहिक रूप से दी। इस कार्यशाला का आयोजन और संचालन अनिल अत्री ने किया। आदर्श नगर में करीब सुबह 11 बजे से शुरू हुई हिन्‍दी ब्‍लॉगिग की यह कार्यशाला शाम 5 बजे तक निरंतर चलती रही। इस कार्यशाला में देश के कई नामी साहित्‍यकार लेखक और दिल्ली के हिंदी पत्रकारों ने भाग लिया।

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एक हत्यारी माँ का बेटी के नाम पत्र

प्रिय बेटी,
आज जब से मैंने यह समाचार पढ़ा है कि ‘देश में हर साल सात लाख लड़कियां गर्भ में ही माता-पिता द्वारा मार दी जाती हैं’,मेरा मन अत्यधिक व्याकुल है. मैं चाह कर भी अपने आप को रोक नहीं पा रही हूँ इसलिए यह खत लिख रही हूँ ताकि अपने मन की पीड़ा को कुछ हद तक शांत कर सकूँ.....बस मेरी तुमसे एक गुज़ारिश है कि मेरा पत्र पढकर नाराज़ नहीं होना. लगता है कि जैसे मैं बौरा गई हूँ तभी तो यह कह बैठी कि पत्र पढकर मुझसे नाराज़ नहीं होना?हकीकत तो यह है कि मैंने तुमसे इस पत्र को पढ़ने तक का अधिकार छीन लिया है. मैं चाहती तो पत्र की शुरुआत में तुम्हें मुनिया,चंदा,गरिमा या फिर मेरे दिल के टुकड़े के नाम से भी संबोधित कर सकती थी परन्तु मैंने तो नाम रखने का अधिकार तक गवां दिया.बेटा मैं भी उन अभागन माँओं में से एक हूँ जिन्होंने अपनी लाडली को अपने पति और परिवार के ‘पुत्र मोह’ में असमय ही ‘सजा-ए-मौत’ दे दी.तुम्हारे कोख में आते ही मेरा दिल उछाले मारने लगा था.......
आगे पढ़े: http://www.jugaali.blogspot.com/ 
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मीडिया जब राडिया बन जाये, तो दु:ख होता है

देश का ईमान बिकता है तो दु:ख होता है।
गणतंत्र जब परतंत्र होता है तो दु:ख होता है।|

को‍ठियां खूब बने देश में, कोई हर्ज़ नहीं।
लोग फुटपाथ पर साते हैं, तो दु:ख होता है।|

ब्रेडबटर, पिज्‍जा-बर्गर, मुबारक आपकी थाली में।
पेट बांधकर कोई सोता है, तो दु:ख होता है।|

कार्यपालिका, न्‍यायपालिका, विधायिका और आस्‍था भी अब।
पर मीडिया जब राडिया बन जाये, तो दु:ख होता है।|

प्‍याज काटने में आंसू आये तो मजा देते हैं।
प्‍याज, बाजार में रूलाये, तो दु:ख होता है।|

बेशक भुला दे मुझे वो, जो गैर है ‘तरूण’ |
पर अपने भी याद न करें, तो दु:ख होता है।|

Prashant dubey
www.atmadarpan.blogspot.com
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मिलन अभी आधा अधूरा है...

(सुनील)  http://www.sunilvani.blogspot.com/ 7827829555

20 जनवरी को हुए ब्लॉग सम्मेलन में मुझे भी शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पहली बार मैं किसी ब्लॉग सम्मेलन में शामिल हुआ। इस सम्मेलन में मुझे एक खास अपनापन सा महसूस हुआ। हालांकि मैं सबों के लिए नया चेहरा था इस कारण मेरे और उनके बीच में कुछ दूरियां थीं और सबों से ठीक तरह मिल भी नहीं पाया। लेकिन उम्मीद करता हूं कि ये दूरियां आने वाले दिनों में इस तरह के कार्यशालाओं में लगातार शामिल होने से दूर हो जाएंगी। तब यह अपनापन और भी बढ जाएगा। वैसे ब्लॉग के प्रति लोगों का जज्बा देख कर दिल गदगद हो उठा, क्योंकि लोगों में ब्लॉग के प्रति उत्सुकता ही नहीं बल्कि इस ब्लॉग के जरिए काफी कुछ बदलने की ताकत भी देखा और यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में यह ब्लॉग लोगों के लिए सशक्त माध्यम होगा जहां से हर व्यक्ति न केवल अपनी समस्याओं को उठा सकेगा बल्कि हर घर में प्रत्येक सदस्य अपने आप में पत्रकार होगा और पत्रकारिता को भी एक नया स्वरूप मिलेगा। आने वाले समय में यह विधा जन-जन से जुडे इसके लिए इस तरह के सम्मेलन और कार्यशाल का आयोजन काफी महत्वपूर्ण होगा। देश के कोने-कोने से लोग ब्लॉग को जाने और बडे स्तर पर मिलने जुलने का मौका मिले। प्रत्येक राज्य से ब्लॉग के प्रति लोगों का जुडाव हो और ये आधा अधूरा मिलन संपूर्ण रूप में बदल जाए। बस यही कामना है। धन्यवाद
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तोते, गधे, घोड़े, ऊंट, चिडि़यां और साइबर कानून


आज जमाने में कल्‍पना के गधों का वर्चस्‍व भी हो गया है आप आजमा सकते हैं। पहचानने वाले इन गधों और कल्‍पना करने वाले अंधों क पहचान भी लेते हैं। जो साधु का वेश धरे धरा पर विद्यमान रहते हैं। जो घोड़ों पर रहते हैं वे कभी आपको धरा पर नजर नहीं आते हैं। वे सदा आसमान में बल्कि अनंत क्षितिज में मंडराते रहते हैं। वे जिन घोड़ों पर सवार रहते हैंजिन्‍हें दौड़ाते-उड़ाते हैंवे सदा मिलते तो धरती पर ही हैं। बस आपको इन्‍हें साधना होता है या वे आको साध लेते हैं। यह साधना-सधाना सदा ऐसा होता है कि सामने वाला खद को असधा समझने को बाध्‍य हो जाता है।
हिन्‍दी चेतना जनवरी 2011
उड़ती तो कल्‍पना की चिडि़याएं भी खूब हैं पर वे पहचान ली जाती हैं। इन चिडि़यों को आप हिदी ब्‍लॉग जगत में उड़ते हुए देखते हैंचिडि़याओं की इन उड़ानों का आनंद कतिपय ब्‍लॉगों पर आप नियमित रूप से पायेंगे पर इसके लिए आपको इन ब्‍लॉगों का नियमित विचरण करना होगा। कितने ही ब्‍लॉगर इन चिडि़यों को फांस लेते हैंपकड़ लेते हैं पर वे खुद भी इनसे बच नहीं पाते हैं। आजकल हिन्‍दी ब्‍लॉगों पर कल्‍पना के तोतों का कब्‍जा जमा हुआ है। वे इन्‍हें पकड़ते भी नहीं हैं मतलब इन तोतों क जहां से पकड़ा जाता हैये वहां भी रहते हैं और इनके यहां भी तोतियाते रहते हैं। इस तोतियाने को आप तुतलाना मत समझ लीजिएगा क्‍योंकि कल्‍पना के तोतों को पकड़ कर अपने ब्‍लॉग पर कैद करने वाले साइबर कानून के अज्ञान के कारण निर्भय नजर आते हैं।  पूरा पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक कीजिये
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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग का झंडा : अपनी प्रतिक्रियाएं प्रदान करें

हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग का झंडा
सरोकार ब्‍लॉग के श्री अरूण राय द्वारा प्रेषित हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के झंडे का डिजायन संपूर्ण हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत की प्रतिक्रियाओं के लिए लगाया जा रहा है।

इस पर आपकी बेबाक प्रतिक्रियाएं और सुझाव सादर आमंत्रित हैं।

आप अपने बहुमूल्‍य विचार nukkadh@gmail.com पर भी सीधे भेज सकते हैं। 
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करोडों का "गनतंत्र" या जनता का गणतंत्र ...


जगह-जगह ए के-४७ जैसी घातक बंदूकों के साथ रास्ता रोककर तलाशी लेते दिल्ली पुलिस के सिपाही, सड़कों पर दिन-रात गश्त लगाते कमांडो, रात भर कानफोडू आवाज़ के साथ सड़कों पर दौड़ती पुलिस की गाडियां, फौजी वर्दी में पहरा देते अर्ध-सैनिक बलों के पहरेदार, होटलों और गेस्ट-हाउसों में घुसकर चलता तलाशी अभियान और पखवाड़े भर पहले से अख़बारों-न्यूज़ चैनलों और दीवारों पर चिपके पोस्टरों के माध्यम से आतंकवादी हमले की चेतावनी देती सरकार.....ऐसा नहीं लग रहा जैसे देश पर किसी दुश्मन राष्ट्र की नापाक निगाहें पड गई हों लेकिन घबराइए मत क्योंकि न तो दुश्मन ने हमला किया है और न ही देश किसी मुसीबत में है बल्कि यह तो हमारे राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर की जा रही तैयारियां हैं. गणतंत्र यानी जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा....इसीतरह गणतंत्र दिवस अर्थात जनता का राष्ट्रीय पर्व पर क्या आम जनता अपने इस राष्ट्रीय त्यौहार को उतने ही उत्साह के साथ मना पाती है
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देनिक जागरण दिल्ली संस्करण 24 जनवरी ब्लोगर सम्मलेन 22 जनवरी का .. पेज नंबर - 6 पर




देनिक जागरण दिल्ली संस्करण 24 जनवरी ब्लोगर सम्मलेन 22 जनवरी का .. पेज नंबर - 6 पर

अनिल अत्री ..... anilattri.reporter@gmail.com

टेक्स्ट -
वेब पत्रकारिता पर कार्यशाला में ब्लॉगिंग पर हुई चर्चा
बाहरी दिल्ली, जासं: हिंदी वेब पत्रकारिता के विकास व संवर्धन को लेकर आज कार्यशाला का आयोजन किया गया। आदर्शनगर में हुई कार्यशाला में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने हिस्सा लेकर ब्लॉग लिखने की तकनीकी जानकारी हासिल की। इस मौके पर व्यंग्यकार व चर्चित ब्लॉगर अविनाश वाचस्पति ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में हिंदी के ब्लॉग बनें और इसके माध्यम से अपने अपने क्षेत्र की उपलब्धियों को सामने लाएं। मीडियाकर्मियों व हिंदी ब्लॉगरों के समन्वय से ही वेब पत्रकारिता के क्षेत्र में न केवल सकारात्मक क्रांति आएगी बल्कि इससे हिंदी का झंडा भी बुलंद होगा। अविनाश वाचस्पति ने कहा कि जिस प्रकार से मोबाइल फोन आज सभी तरह की तकनीकों से युक्त हो गए हैं। इसी तरह से आने वाला समय हिंदी ब्लॉगिंग न केवल सभी तरह के संचार का वाहक बनेगा बल्कि यह सशक्त विधा के रूप में सामने आएगा।
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नई दुनिया 24 जनवरी ब्लोगर सम्मलेन 22 जनवरी पेज नंबर -5 पर




नई दुनिया 24 जनवरी ब्लोगर सम्मलेन 22 जनवरी पेज नंबर -5 पर

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अनिल अत्री .....
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