दिखते ही किसे हैं उनक मटमैले छप्पर
धू धू कर जला देते हैं सबकुछ
उनका एक अकेला सुन्दर घर
पूरी कविता पढ़ने और अपनी राय देने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए


रनों के लिए दौड़ने-फिरने के हम नहीं कायल/जब पाक ही से न खेला तो फिर खेल क्या है? ग़ालिब का नाम आते ही शायरी का शहद चिपकने लगता है। लेकिन, बात शायरी की नहीं,राष्ट्रीय अवकाश की करनी है।
तो साहब,आज राष्ट्रीय अवकाश है। कैलेंडर से आंख चुरा 30 मार्च को हाईजैक करने वाला राष्ट्रीय अवकाश। छुट्टीबाजों के लिए ऐसे राष्ट्रीय अवकाश जश्न का मौका होते हैं। पर, इस बार तो मामला ऐसा है कि जश्न या .....
पूरा पढ़ने के लिए अपने माउस को बल्ला बना लीजिए और इस लिंक को बाल समझ कर एक सिक्सर जड़ दीजिए

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| nukkadh@gmail.com |

ब्लॉगप्रहरी वह व्यापक परिकल्पना है , जिसने अब तक के सभी अनुत्तरित सवालों को सुलझा दिया है. यह कोई अवतार नहीं है , यह कोई थोपा गया और प्रचारित-प्रसारित व् सुनियोजित पहल नहीं है. यह प्राकृतिक तरीके से विकास को अपनाते हुए आज रणक्षेत्र में खड़े उस योद्धा जैसा है , जिसके माथे पर कोई शिकन का भाव नहीं. क्योंकि इस विकास की पराकाष्ठा को इसके उत्पति के समय ही भांप लिया गया था.आज ब्लॉगजगत उस लंबे इंतजार से बाहर आकार खड़ा है , जब उसे आवश्यकता थी एक साझा मंच की. जब एग्रीगेटर के भूमिका पर ही सवाल उठने लगे और तमाम बड़े एग्रीगेटरों ने अपनी सेवाए समाप्त कर दीं.शायद एग्रीगेटर अपनी सुविधाओं और दृष्टि को वह विस्तार नहीं दे पाए , जिसकी आवश्यकता समय ने पैदा कर दी थी. ऐसे में ब्लॉगप्रहरी पुनः सक्रिय हुआ और आज उसे देखा तो पाया कि उसने वह कर दिखाया , जिसके लिए वह चर्चा में आया था.
ब्लॉगप्रहरी ने इस व्यापक सुधार के मध्य में यह सवाल रखा कि क्या हिंदी ब्लॉग्गिंग को हिंदी ब्लॉग लिखने वालों तक ही रखा जाना सही है ? फेसबुक पर करोड़ों की संख्या में हिंदीभाषी मौजूद है, पर वह आपके ब्लॉग के पाठक नहीं ! आपके ब्लॉग के पाठक , ब्लॉगर ही क्यों? इस सवाल ने जो स्वरूप पैदा किया वह ..एक उन्नत दृष्टिकोण था, जो आने वाले समय में आपके लेख को कई नए पाठकों तक ले जायेगा.
एक एग्रीगेटर के तौर पर ब्लॉगप्रहरी क्या सुविधा दे रहा है|
ब्लॉग प्रहरी आपके ब्लॉग पोस्ट को ४ से ६० सेकंड के भीतर उठा ले जाता है. यह सामान्य तौर पर अत्यंत विश्वसनीय और सही समय है. अब तक के सभी एग्रीगेटर इससे कहीं ज्यादा समय लेते थे.
सामान्य तौर पर यह सर्वाधिक वांक्षित सुविधा है , जिसकी अपेक्षा प्रत्येक एग्रीगेटर से की जाती है. ब्लॉगप्रहरी पर यह सेवा भी उसी प्रारूप में उपलब्ध है, जिसके आप आदि है.
ब्लोग्प्रहरी पर यह सेवा भी उपलब्ध है. परन्तु इस सेवा के साथ एक विस्तार किया गया है. हमने देखा कि पसंद - नापसंद का दुरूपयोग किया गया था. इससे प्रतिस्पर्धा को विकृत किया गया था.
सुधार : ब्लॉगप्रहरी पर किसने पसंद किया और किसने नापसंद किया , इसे भी देखा जा सकता है. अतः कोई भी बेवजह आपकी पोस्ट को नापसंद कर नीचे नहीं गिरा सकता है
आप इसे ब्लॉगप्रहरी के दाहिनी तरफ देख सकते हैं. वर्तमान में " सर्वाधिक नापसंद " नहीं दिखाया जा रहा, वर्ना सबसे ज्यादा नापसंद पोस्ट को भी बिना वजह प्रसिद्धि मिलेगी.
जैसा कि एग्रीगेटर से अपेक्षा की जाती है. यह सुविधा भी ब्लॉगप्रहरी पर उपलब्ध है.
सुधार : हमने देखा कि लोग अपने ही पोस्ट को कई दफा किल्क कर उसे सर्वाधिक पढ़े गए पोस्ट वाले हिस्से में पहुंचा देते थे. ब्लॉगप्रहरी आपके द्वारा क्लिक को रजिस्टर कर लेता है. आप किसी भी पोस्ट को अपने पहले क्लिक से ही , पढ़ी गयी संख्या में इजाफा कर सकते है. दूसरी बार क्लिक करने पर आप पोस्ट तो पढ़ पाएंगे परन्तु , पढ़ी गई संख्या में इजाफा नहीं होगा.
यह सुविधा भी ब्लोग्प्रहरी पर उपलब्ध है .
सुधार : आप यह भी देख सकते हैं कि अमुक पोस्ट को किसने पसंद का चटखा लगाया है . इससे कोई भी छद्म खेल को बढ़ावा नहीं मिलेगा . क्योंकि आपकी राय सार्वजनिक है.
ब्लॉगप्रहरी पर आपके ब्लॉग से आयातित ब्लॉगपोस्ट्स की लिंक्स को उनके पठन और पसंद संख्या के साथ सुन्दर तरीके से सहेजा जाता है.
हिंदी ब्लॉगजगत में लेखों का विषयवार संकलन तकनीक द्वारा संभव नहीं. एक ही ब्लॉग पर कई विषय पर लेखन किया जाता है. अतः कोई भी वर्गीकरण कारगर और सही नहीं हो सकता, जब तक इसे मानव द्वारा नहीं किया जाए.
उपाय : ब्लॉगप्रहरी में कई ग्रुप्स बनाये गए हैं. यह ग्रुप फेसबुक के ग्रुप निर्माण जैसा है. हर उपयोगकर्ता अपना ग्रुप बना सकता है. कुछ विशेष ग्रुप ब्लॉगप्रहरी द्वारा बनाये गए हैं. यह ग्रुप द्वारा ही आप पोस्ट्स को विभिन्न विषय में दाखिल कर सकते हैं. हर सदस्य एक साथ कई ग्रुप में शामिल हो सकता है.
किसी भी एग्रीगेटर द्वारा यह मूलभूत सुविधाएं अपेक्षित हैं . ब्लॉगप्रहरी इससे कहीं ज्यादा है|
१. ट्वीट करने की सुविधा.
: ट्वीटर/ बज्ज के बढते प्रभाव और प्रसिद्धि को देखते हुए यह आवश्यक समझा गया कि आज बहुत कुछ लिखने का समय सबके पास नहीं और न ही गैर-ब्लॉग लेखक आपकी लंबी पोस्ट को पढ़ने का समय रखता है. शायद इसी वजह से दो- टूक विचार वाले ट्विटर ने धूम मचा दी है. ब्लॉगप्रहरी ने इस आवश्यकता को समझते हुए ट्वीटर द्वारा प्रदत सभी प्रमुख सुविधाओं को आत्मसात किया.
2. ट्वीटर से अपने ट्वीट आयातित करने की सुविधा
आज सभी ट्वीटर पर सक्रिय है. ऐसे में यह आवश्यक है कि एक ही जगह आपको ट्वीट पढ़ने और प्रत्युतर देने का साधन भी हो. ब्लॉगप्रहरी पर आप अपना ट्वीटर अकाउंट जोड़ कर ऐसा कर सकते हैं.
3. आप अपने ब्लॉग जोड़ने और हटाने में सक्षम होंगे
बार – बार यह शिकायत रही कि अमुक एग्रीगेटर मेरा ब्लॉग नहीं दिखाता. अथवा बार बार आवेदन के बाद भी वह आपके ब्लॉग को शामिल नहीं कर रहा. कई बार आपको अपने ब्लॉग हटाने के लिए भी अनुरोध करना पड़ता है. यह सब झमेले से अलग ब्लॉगप्रहरी पर अपने खाते में आप अपना ब्लॉग स्वयम जोड़ या हटा सकते हैं.
इसके लावा आप ब्लॉगप्रहरी पर पाते हैं, निम्न सुविधाएं
१. अपने प्रशंसक बनाना और दूसरे के प्रशंसक बनना (इस सुविधा से आप अवांछित पोस्ट्स से मुक्ति पा सकेंगे )
२. एक सार्वजनिक चर्चा का मंच ( फोरम , जिसमे आप ब्लॉग लेखन और तमाम तकनीकी जानकारियों को पा सकते हैं , और अपने सवाल भी पूछ सकते हैं. ब्लॉगप्रहरी टीम आपके द्वारा पूछे गए सवाल का २४ घंटे के भीतर उत्तर देगी )
३. एक सार्वजनिक व प्राइवेट चैट रूम ( आम बात-चित के लिए और विशेष प्रयोजन हेतु चर्चा के लिए एक चैट-रूम, जो टेक्स्ट और वीडियो दोनों मोड में संभव है )
४. इवेंट मैनेजमेंट यानि विशेष आयोजनों की सूचना का मंच ( ब्लॉगप्रहरी पर आप किसी विशेष आयोजन जैसे ब्लॉग सम्मलेन और गोष्ठिओं कि सूचना को बेहतर ढंग से साझा कर पाते हैं. साथ ही आप स्थान , दिन और समय का उल्लेख करते हैं . पाठकों के समक्ष यह विकल्प होता है कि वह उस आयोजन में अपना नाम रजिस्टर करा सके. इससे आपके आयोजन बल मिलेगा तथा आप उसे सही तरीके से निभा पाएंगे .
५. ग्रुप एल्बम और वीडियो लाइब्रेरी ( हम विभिन्न आयोजनों में शामिल होते हैं और कई बड़े ब्लॉग सम्मलेन अभी तक हो चुके हैं. कितना अच्छा होता अगर इनका संकलन एक जगह मौजूद होता. ब्लॉगप्रहरी ने इस आवश्यकता को भांप लिया और या सुविधा हमने प्रदान की है )
६. सार्वजनिक ब्लॉग मंच ( कई पाठक ऐसे हैं, जो ब्लॉग बनाने की प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं . ऐसे नए हिंदी नेटीजन के लिए एक ब्लॉग मंच का होना आवश्यक है. जहाँ वह अपने विचार व्यक्त कर सकें.
७. फेसबुक जैसा चैट : जी हाँ , ब्लॉगप्रहरी पर आप ब्लॉग एग्रीगेटर की सेवा का मज़ा लेने के साथ, अपने दोस्तों से चैट भी कर सकतें है , जिस दौरान आप ऑडियो -वीडियो चैट , फाइल शेयर करना , डेस्कटॉप शेयर करना , गेम खेलना , अपना चैट रूम बनाना , और बने -बनाये चैट रूम का उपयोग करना इत्यादि कई सेवायों को एक साथ देख सकते हैं .
८ . ब्लॉगप्रहरी का सर्च सेवा : एक ही पन्ने पर बिना किसी परेशानी के टेक्स्ट, न्यूज, वीडियो और पी डी एफ फाइल को सर्च किया जा सकता है.
इसके अलावा अन्य ब्लॉगप्रहरी पर अनगिनत सुविधाएं मौजूद है. यह संपूर्ण परिकल्पना ३ महीने के गहन शोध के बाद लिखी गयी और उसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया गया. आप ब्लॉगप्रहरी पर जाने के बाद , किसी अन्य सेवा पर आश्रित नहीं रहेंगे. सब कुछ - एक जगह , सुविधा के साथ. इसके प्रयोग को समझने में कोई कठिनाई नहीं हो , इसलिए एक वीडियो द्वारा समझाया भी गया है . जिसे आप हेडर पा बने लिंक से देख सकते हैं .
तो देर किस बात की , चले ब्लॉगप्रहरी की ओर .. फिर से ब्लॉगिरी शुरू करते हैं.
लेकिन भ्रष्टाचार को तो मिटाना है ऐसे 

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| दांयी ओर पहले डॉ. हरीश अरोड़ा |

मुझे हंसना है

सेवा में,
हे प्रभु…हे पालनहार…हे कुल देवता…
टैल मी ओ खुदा ये कैसी अंधेरगर्दी है?…ये कैसा चौसर खेलने वाला चौपट राजा है?…बरसों तक क्या हम एक ही उदहारण को ढोते चले जाएंगे?…कभी खुद को अपडेट नहीं करेंगे?..
“मूछें हों तो नत्थूलाल जैसी”…
अरे!…कैसा नत्थूलाल और कैसी उसकी मूछें?…ना रहा अब नत्थूलाल और ना रही अब उस जैसी मूछें…फिर क्यों हम इस बेमन की विरासत को ढोते चले जा रहे हैं? और कब तक ढोते चले जाएंगे?…
आप ही का दिया फोर्मुला है कि….वक्त के साथ हर चीज़ को बदलना पड़ता है…प्रजा को भी और बादशाह को भी …यहाँ तक कि हम और आप भी इस बदलाव से अछूते नहीं हैं…पहले आपके दरबार में मैं सवा रुपया चढ़ाया करता था और आप खुश हो जाया करते थे…अब इक्यावन से भी आपका पेट नहीं भरता है…भरना तो दूर आपकी दाढ़ तक गीली नहीं होती है इससे…वक्त और ज़रूरत के साथ हम बदले तो तुम भी बदल गए…पहले राम-कृष्ण का…ज़माना था…उसके बाद पैगम्बर और क्राईस्ट भी आए हमारे देश में लेकिन ये नत्थूलाल वहीँ का वहीँ अटका पड़ा है…आखिर क्यों?…क्यों हम इस बेमन की विरासत को बरसों से सदियों तक ढोते रहे?…
आज हमारे पास एक से बढकर एक युवा आईकोन हैं…हमें उनका अनुसरण आम जनता के सामने एक मिसाल रखनी चाहिए…
क्यों?…है कि नहीं?…
मैं आपसे पूछता हूँ जनाब आपसे…आपसे और आपसे कि जब हमारे पास यहीं भारत में ही ब्लॉग तकनीकों से लैस ‘ललित शर्मा’ जैसे धुरंदर टाईप के युवा आईकोन हैं तो फिर मूछों के मामले में हम पुराने ढर्रे पे चलते हुए पुरानों का अनुकरण क्यों करें?…आखिर क्यों?…क्यों?…क्यों?…
संयोग से आज अपने ‘ललित शर्मा’ जी का जन्मदिन भी है…इसलिए हे!…प्रभु..हे!…पालनहार…ललित शर्मा जी को सम्मानित करने के लिए आज से बढ़िया दिन भला और कौन सा होगा?…आज ही के दिन उन्होंने इस धरती पर पदार्पण किया..इसलिए…मेरी आपसे ये करबद्ध प्रार्थना है कि आज के दिन को ‘मूँछ दिवस’ या फिर ‘मुच्छ दिवस' के रूप में घोषित कर इसे राष्ट्रीय पर्व का दर्जा दिया जाए…क्योंकि …
जिसकी मुच्छ नहीं…उसका कुच्छ नहीं…
जिसका कुच्छ नहीं…उसकी पुच्छ नहीं …
उससे बढ़कर इस जहाँ कोई तुच्छ नहीं ..
ना मिलता उसको कभी पुष्प गुच्छ नहीं
धन्यवाद
विनीत:
सदा से आपका
राजीव तनेजा
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