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दामिनी की कलम से विकास का धुंधलका कविता में महसूसिए

बड़े बड़े कारखानों की लालच में
दिखते ही किसे हैं उनक मटमैले छप्पर
धू धू कर जला देते हैं सबकुछ
उनका एक अकेला सुन्दर घर



पूरी कविता पढ़ने और अपनी राय देने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए
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मोहाली की महाविजय की खुशी में कल देश भर में अवकाश रहेगा

विश्‍वस्‍त सूत्रों से मालूम हुआ है कि मोहाली में महाविजय की खुशी में कल देश भर में अवकाश की घोषणा की जाने वाली है। कल होने वाले अवकाश की घोषणा पहली बार शुक्रवार  रात को बारह बजकर एक सैकेंड पर की जाएगी। इस संबंध में जारी आदेश की प्रति भी उसी समय जारी की जायेगी। आप एक तारीख को अपने कार्यक्रमों को अवकाश की तरह ही प्‍लान कर सकते हैं। जिनके कार्यालयों में दो दिन का साप्‍ताहिक अवकाश रहता है, वे शनिवार और रविवार की छुट्टियों को साथ मिलाकर तीन दिन की छुट्टियों का संगठित आनंद ले सकते हैं। यह अवकाश सरकारी, गैर-सरकारी, असरकारी, निजी और सभी प्रकार की दुकानों इत्‍यादि में भी लागू रहेगा परंतु उन्‍हें शनिवार और रविवार की साप्‍ताहिक छुट्टियों का फायदा नहीं होगा। इस अवकाश को 26 जनवरी, 2 अक्‍टूबर और 15 अगस्‍त की भांति लागू किए जाने का निर्णय लिया गया है।  एक तारीख  को अवकाश होने के कारण दो तारीख को अखबारों के अंक भी प्रकाशित नहीं होंगे।
जिन कार्यालयो में शनिवार को छुट्टी नहीं रहती है, वहां के कर्मचारी-अधिकारी शनिवार के दिन छुट्टी लेने का मन बना चुके हैं।
आप सबको प्रयास और सायास मिलने वाले तीन दिन का अवकाश मुबारक हो। क्रिकेट की जीत का रंग ऐसा भी होगा, जानकर हिन्‍दी ब्‍लॉगर बहुत प्रसन्‍न हैं क्‍योंकि दो दिन हिन्‍दी ब्‍लॉगर कल ट्विटर पर खूब छाये रहे और उन्‍होंने हिन्‍दी में ट्विट कर करके पाकिस्‍तान के कई खिलाडि़यों के विकेट लिए। आप यहां पर क्लिक करके इसकी जानकारी ले सकते हैं।
एक बार फिर से खूब सारी बधाई।
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क्रिकेट में भारत की जीत की घोषणा नुक्‍कड़डॉटकॉम पर आज दोपहर में खेल शुरू होने से पहले ही कर दी गई थी

क्रिकेट में मजबूती का ऑस्‍कर रहा है यह खेल। इसे सब स्‍वीकार रहे हैं। इसकी पूर्व घोषणा आज नुक्‍कड़ पर दोपहर में ही मैच शुरू होने से पहले ही कर दी गई थी। इसे देखें। इसके बाद कई तरह की उहापोह से गुजरते हुए आखिर क्रिकेट का यह मैच भारत ने जीत ही लिया। यह खेल भावना की भी जीत है। आज दोपहर में तीन बजकर दो मिनिट पर की गई यह पोस्‍ट सफल रही है।
आओ नुक्‍कड़ परिवार की तरफ से सबको इस जीत पर बधाई। 
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संत नगर ब्‍लॉगर मिलन की एक रपट : चिट्ठीचर्चा ब्‍लॉग पर


यह मेरी पहली मीटिंग थी ब्लॉगरों के साथ जिन्हें मैंने कभी देखा नहीं था बस जानती थी ब्लॉग की दुनिया में
आने की वजह से! सब कुछ बहुत नया सा लग रहा था! मैं क्या बोलू क्या न बोलू यह भी नहीं पता था! एक
खुशनुमा माहौल में यु बैठ कर लाइव टेलीकास्टिंग में कुछ बाते,गंभीर बाते और उसमे मेरी राय! तब भी मैं क्या
बोलती! फिर भी मैंने .........
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क्रिकेट में जीत गया भारत

शेष विशेष सब बाद में
पहले खुशियों का
मजा लीजिए।
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मैच देखो, मदिरा पीओ, मैच के गुण गाओ, मदिरा में नहाओ - पवित्र पावन हो जाओ


रनों के लिए दौड़ने-फिरने के हम नहीं कायल/जब पाक ही से न खेला तो फिर खेल क्या है? ग़ालिब का नाम आते ही शायरी का शहद चिपकने लगता है। लेकिन, बात शायरी की नहीं,राष्ट्रीय अवकाश की करनी है।

तो साहब,आज राष्ट्रीय अवकाश है। कैलेंडर से आंख चुरा 30 मार्च को हाईजैक करने वाला राष्ट्रीय अवकाश। छुट्टीबाजों के लिए ऐसे राष्ट्रीय अवकाश जश्न का मौका होते हैं। पर, इस बार तो मामला ऐसा है कि जश्न या .....

पूरा पढ़ने के लिए अपने माउस को बल्‍ला बना लीजिए और इस लिंक को बाल समझ कर एक सिक्‍सर जड़ दीजिए

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सोच भाई सोच - सदा हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की उन्‍नति के बारे में सोच


हिंदी ब्लॉगिंग अभी तो शुरुआती दौर से ही गुजर रही है। एक छोटा-सा समाज है। लोग एक-दूसरे को जानने लगे हैं। परस्पर व्यक्तिगत संबंध स्थापित हो रहे हैं। बाद में शायद यह वाला आयाम न रहे। रोज नए लोग आ रहे हैं। समुदाय बढ़ता जा रहा है। कभी कभार थोड़े-बहुत विवाद हो जाते हैं, मगर जल्द ही हल भी हो जाते हैं। मैं हिन्दी ब्लॉगिंग के सुनहरे भविष्य के लिये पूर्णतः आशान्वित हूँ।आने वाले समय में हिंदी ब्लॉगिंग एक बडी ताकत के रूप में उभर कर सामने आएगी । इसलिए ब्लॉगिंग करने वाले हर ब्लॉगर को एक जिम्मेदारी का स्वत: अहसास होना चाहिए ।
  • समीर लाल
(अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हिंदी में अग्रपंक्ति के ब्‍लॉगर)
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क्रिकेट..... आफत और गफ़लत के बीच भारतीय महिलाएं


इस देश में क्रिकेट को मजहब कहा जाता है। यह एक दीवानगी है........... एक पागलपन है........... कुछ खास मैच तो ऐसे होते हैं कि सङकें सूनी हो जाती हैं और बॉस के सामने उस दिन की छुट्टी चाहने वालों की कतार लग जाती है। यहां बच्चा-बच्चा इस खेल के पीछे पागल है बङों की तो पूछिये ही मत और बुजुर्गों की क्या बतायें............ ?

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क्रिकेट के बहाने देश में दंगे कराना चाहते हैं न्यूज चैनल्स

क्रिकेट के बहाने देश में दंगे कराना चाहते हैं न्यूज चैनल्स: "मोहाली में आज भारत और पाकिस्तान के बीच जो विश्व कप को लेकर मैच होने जा रहा है,वह न्यूज चैनलों के लिए कोई खेल नहीं बल्कि जंग है। एक ऐसा जंग जिसमें कि दोनों देश के बीच की नफरत को हवा दी जा सके और इसे किसी भी हाल में खेल नहीं रहने दिया जाए। संभवतः इसलिए न्यूज चैनलों ने सप्ताहभर पहले से ही अपने माध्यम से दुनियाभर में ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की है कि इस मैच के बीच से खेल गायब होकर वह राजनीति,दोनों

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कवि,पत्रकार,, विचारक संगठक मोहन शशि से वार्ता

जबलपुर के युवा चेतना के संवर्धक, मोहन शशि के  ७५वें जन्म-दिवस के पूर्व  के साथ एक शाम बिताई मैने डा०विजय तिवारी किसलय, भाई बसंत मिश्रा
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जनसंदेश टाइम्‍स में अनूप शुक्‍ल का आलेख होली अंक में



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होली पर कुछ डिफरेंट टाइप सवाल-जवाब

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Pray 4 INDIA


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दैनिक जागरण में भी लगी चौबे जी की चौपाल






आज भी यानी -
29 मार्च 2011 को दैनिक जागरण,
राष्ट्रीय संस्करण के नियमित स्तंभ
‘फिर से’ में परिकल्पना पर प्रकाशित 
चौबे जी की  चौपाल में  क्रिकेट चर्चा
 हुई है ......!






आपने यदि इस व्यंग्य का रसास्वादन  नहीं किया है तो
पूरा पढ़ने के लिए यहाँ किलिक करें और टिपण्णी भी वहीं दें :

न रन, न बिकेट ......इंडिया हिट बिकेट


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सट्टा-शीला-सेक्स और ‘विश्व युद्ध’


(उपदेश सक्सेना)
भारत की जंगे आजादी की तर्ज पर कल होने वाला विश्वकप क्रिकेट का मुकाबला कई सवालों के दायरे में है. कई करोड़ के इस तमाशे में हमने अतिथि देवो भवः को जिलाने के उद्देश्य से जिलानी के लिए पलक-पांवड़े बिछा रखे हैं. हम भूल गए उस 26/11 को जिसने शीत के मौसम में खून की फाग खेली थी. अब असल फाल्गुन का मौसम है और उसी 26/11 के षड्यंत्रकारियों को पनाह देने और पोषित करने वालों के आका यहाँ आ रहे हैं. दूसरी बात, प्रधानमन्त्री-राष्ट्रपति इस महामुकाबले को देखने जायेंगे. सवाल यह है कि क्रिकेट हमारा राष्ट्रीय खेल नहीं है और न ही इस खेल का संचालन करने वाली बीसीसीआई पर सरकार का ही कोई नियंत्रण है, ऐसे में इन वीवीआईपी के दौरे को सरकारी कैसे कहा जा सकता है, इनकी सुरक्षा पर होने वाली भारी-भरकम राशि क्यों देश की टेक्स के बोझ से दबी जनता भरे?
प्यार और मोहब्बत दो समानार्थी शब्द हैं, मगर मेरा नजरिया दीगर है. माँ-बच्चे, पिता-पुत्री, भाई-बहन के बीच प्यार का रिश्ता होता है, यह रिश्ता रूहानियत से लबरेज होता है, मगर माशूक-माशूका, पति-पत्नी का रिश्ता मोहब्बत भरा होता है, जिसमें से जिस्मानी संबंधों की बदबू आती है.प्यार सब को दिया जा सकता है, मगर मोहब्बत किसी एक से ही की जाती है. हमारा पाकिस्तान के प्रति भले ही रिश्ता प्यार से भरपूर हो मगर पाकिस्तान के नजरिये से यह मोहब्बत भरा ज्यादा नजर आता है. उस पाकिस्तान पर ज्यादा भरोसा कैसे किया जा सकता है, जिसे अपने घरेलु मामलों से ज्यादा हमारे मामलों में रुचि रहती है.
मामला क्रिकेट का है, सो सटोरिये भी सक्रिय हैं. आंकड़े बताते हैं कि इस इकलौते मैच पर ही दस हजार करोड़ का सट्टा लग चुका है. इसमें भी कोई शक नहीं कि..पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें  http://www.aidichoti.co.in/
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जोखिम हैं ई मेल में बहुत सारे : ई मेल पता बदल लें मेरा (अविनाश वाचस्‍पति)

nukkadh@gmail.com
मेरा ई मेल खाता avinashvachaspati@gmail.com भर चुका है लबालब
अब मुझे भेजें ई मेल nukkadh@gmail.com पते पर
पहले वाले में भेजेंगे
तो वे नहीं पहुंच पायेंगे
इसलिए नुक्‍कड़ एट जीमेल डॉट कॉम पर भेजें
और संपर्क में बने रहें।

खाता वो भी बना रहे
पर उसमें मेल नहीं पहुंचेगी
भर चुका है खाता
इसलिए मेल बाहर ही
फैल जाएगी और
मुझे मालूम भी नहीं होगा
इसलिए ....

क्‍या करेंगे
मुझे बतला दीजिए
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क्रिकेट को लेकर यह युद्धोन्माद किसलिए?

पाकिस्तान को पीट दो,आतंक का बदला क्रिकेट से,पाकिस्तान को धूल चटा दो,मौका मत चूको,पुरानी हार का बदला लो,अभी नहीं तो कभी नहीं,महारथियों की महा टक्कर,प्रतिद्वंद्वियों में घमासान,क्रिकेट का महाभारत....ये महज चंद उदाहरण है जो इन दिनों न्यूज़ चैनलों और समाचार पत्रों में छाये हुए हैं.मामला केवल इतना सा है कि विश्व कप क्रिकेट के सेमीफाइनल में भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने हैं.लेकिन मीडिया की खबरों,चित्रों,रिपोर्टिंग,संवाददाताओं की टिप्पणियों और दर्शकों की प्रतिक्रियाओं से ऐसा लग रहा है मानो इन दोनों देशों के बीच क्रिकेट का मैच नहीं बल्कि युद्ध होने जा रहा है.हर दिन उत्तेजना का नया वातावरण बनाया जा रहा है,एक दूसरे के खिलाफ तलवार खीचनें के लिए उकसाया जा रहा है और महज एक स्टेडियम में दो टीमों के बीच  होने वाले मुकाबले को दो देशों की जंग में बदल दिया गया है.रही सही कसर सरकार और राजनीतिकों ने पूरी कर दी है. क्रिकेट डिप्लोमेसी जैसे नए-नए शब्द
आगे पढ़े: http://www.jugaali.blogspot.com/
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हिन्‍दी ब्‍लॉगर कह उठेंगे : सच में इसी की तो जरूरत है : खाता खोलें और जुड़ जाएं


ब्लॉगप्रहरी वह व्यापक परिकल्पना है , जिसने अब तक के सभी अनुत्तरित सवालों को सुलझा दिया है. यह कोई अवतार नहीं है , यह कोई थोपा गया और प्रचारित-प्रसारित व् सुनियोजित पहल नहीं है. यह प्राकृतिक तरीके से विकास को अपनाते हुए आज रणक्षेत्र में खड़े उस योद्धा जैसा है , जिसके माथे पर कोई शिकन का भाव नहीं. क्योंकि इस विकास की पराकाष्ठा को इसके उत्पति के समय ही भांप लिया गया था.आज ब्लॉगजगत उस लंबे इंतजार से बाहर आकार खड़ा है , जब उसे आवश्यकता थी एक साझा मंच की. जब एग्रीगेटर के भूमिका पर ही सवाल उठने लगे और तमाम बड़े एग्रीगेटरों ने अपनी सेवाए समाप्त कर दीं.शायद एग्रीगेटर अपनी सुविधाओं और दृष्टि को वह विस्तार नहीं दे पाए , जिसकी आवश्यकता समय ने पैदा कर दी थी. ऐसे में ब्लॉगप्रहरी पुनः सक्रिय हुआ और आज उसे देखा तो पाया कि उसने वह कर दिखाया , जिसके लिए वह चर्चा में आया था.

ब्लॉगप्रहरी ने इस व्यापक सुधार के मध्य में यह सवाल रखा कि क्या हिंदी ब्लॉग्गिंग को हिंदी ब्लॉग लिखने वालों तक ही रखा जाना सही है ? फेसबुक पर करोड़ों की संख्या में हिंदीभाषी मौजूद है, पर वह आपके ब्लॉग के पाठक नहीं ! आपके ब्लॉग के पाठक , ब्लॉगर ही क्यों? इस सवाल ने जो स्वरूप पैदा किया वह ..एक उन्नत दृष्टिकोण था, जो आने वाले समय में आपके लेख को कई नए पाठकों तक ले जायेगा.


एक एग्रीगेटर के तौर पर ब्लॉगप्रहरी क्या सुविधा दे रहा है|

  • आपके ब्लॉग पोस्ट के लिंक का तुरंत प्रकाशन :

ब्लॉग प्रहरी आपके ब्लॉग पोस्ट को ४ से ६० सेकंड के भीतर उठा ले जाता है. यह सामान्य तौर पर अत्यंत विश्वसनीय और सही समय है. अब तक के सभी एग्रीगेटर इससे कहीं ज्यादा समय लेते थे.

  • आपके ब्लॉग पोस्ट की टाइटल, लिंक तथा लघु रूप दिखाना:

सामान्य तौर पर यह सर्वाधिक वांक्षित सुविधा है , जिसकी अपेक्षा प्रत्येक एग्रीगेटर से की जाती है. ब्लॉगप्रहरी पर यह सेवा भी उसी प्रारूप में उपलब्ध है, जिसके आप आदि है.

  • पसंद-नापसन्द करने का विकल्प :

ब्लोग्प्रहरी पर यह सेवा भी उपलब्ध है. परन्तु इस सेवा के साथ एक विस्तार किया गया है. हमने देखा कि पसंद - नापसंद का दुरूपयोग किया गया था. इससे प्रतिस्पर्धा को विकृत किया गया था.

सुधार : ब्लॉगप्रहरी पर किसने पसंद किया और किसने नापसंद किया , इसे भी देखा जा सकता है. अतः कोई भी बेवजह आपकी पोस्ट को नापसंद कर नीचे नहीं गिरा सकता है

  • कितने पसंद और कितने नापसन्द हैं :

आप इसे ब्लॉगप्रहरी के दाहिनी तरफ देख सकते हैं. वर्तमान में " सर्वाधिक नापसंद " नहीं दिखाया जा रहा, वर्ना सबसे ज्यादा नापसंद पोस्ट को भी बिना वजह प्रसिद्धि मिलेगी.

  • एक दिन में सबसे ज्यादा पढ़े गए ब्लॉग पोस्ट :

जैसा कि एग्रीगेटर से अपेक्षा की जाती है. यह सुविधा भी ब्लॉगप्रहरी पर उपलब्ध है.

सुधार : हमने देखा कि लोग अपने ही पोस्ट को कई दफा किल्क कर उसे सर्वाधिक पढ़े गए पोस्ट वाले हिस्से में पहुंचा देते थे. ब्लॉगप्रहरी आपके द्वारा क्लिक को रजिस्टर कर लेता है. आप किसी भी पोस्ट को अपने पहले क्लिक से ही , पढ़ी गयी संख्या में इजाफा कर सकते है. दूसरी बार क्लिक करने पर आप पोस्ट तो पढ़ पाएंगे परन्तु , पढ़ी गई संख्या में इजाफा नहीं होगा.

  • एक दिन में सबसे ज्यादा पसंद प्राप्त ब्लॉग पोस्ट :

यह सुविधा भी ब्लोग्प्रहरी पर उपलब्ध है .

सुधार : आप यह भी देख सकते हैं कि अमुक पोस्ट को किसने पसंद का चटखा लगाया है . इससे कोई भी छद्म खेल को बढ़ावा नहीं मिलेगा . क्योंकि आपकी राय सार्वजनिक है.

  • आपके अभी ब्लॉग पोस्ट्स के लिंक का प्रोफाइल में संकलन

ब्लॉगप्रहरी पर आपके ब्लॉग से आयातित ब्लॉगपोस्ट्स की लिंक्स को उनके पठन और पसंद संख्या के साथ सुन्दर तरीके से सहेजा जाता है.

  • ब्लॉग पोस्ट्स का विषय -अनुसार संकलन

हिंदी ब्लॉगजगत में लेखों का विषयवार संकलन तकनीक द्वारा संभव नहीं. एक ही ब्लॉग पर कई विषय पर लेखन किया जाता है. अतः कोई भी वर्गीकरण कारगर और सही नहीं हो सकता, जब तक इसे मानव द्वारा नहीं किया जाए.

उपाय : ब्लॉगप्रहरी में कई ग्रुप्स बनाये गए हैं. यह ग्रुप फेसबुक के ग्रुप निर्माण जैसा है. हर उपयोगकर्ता अपना ग्रुप बना सकता है. कुछ विशेष ग्रुप ब्लॉगप्रहरी द्वारा बनाये गए हैं. यह ग्रुप द्वारा ही आप पोस्ट्स को विभिन्न विषय में दाखिल कर सकते हैं. हर सदस्य एक साथ कई ग्रुप में शामिल हो सकता है.

किसी भी एग्रीगेटर द्वारा यह मूलभूत सुविधाएं अपेक्षित हैं . ब्लॉगप्रहरी इससे कहीं ज्यादा है|


१. ट्वीट करने की सुविधा.

: ट्वीटर/ बज्ज के बढते प्रभाव और प्रसिद्धि को देखते हुए यह आवश्यक समझा गया कि आज बहुत कुछ लिखने का समय सबके पास नहीं और न ही गैर-ब्लॉग लेखक आपकी लंबी पोस्ट को पढ़ने का समय रखता है. शायद इसी वजह से दो- टूक विचार वाले ट्विटर ने धूम मचा दी है. ब्लॉगप्रहरी ने इस आवश्यकता को समझते हुए ट्वीटर द्वारा प्रदत सभी प्रमुख सुविधाओं को आत्मसात किया.

2. ट्वीटर से अपने ट्वीट आयातित करने की सुविधा

आज सभी ट्वीटर पर सक्रिय है. ऐसे में यह आवश्यक है कि एक ही जगह आपको ट्वीट पढ़ने और प्रत्युतर देने का साधन भी हो. ब्लॉगप्रहरी पर आप अपना ट्वीटर अकाउंट जोड़ कर ऐसा कर सकते हैं.

3. आप अपने ब्लॉग जोड़ने और हटाने में सक्षम होंगे

बार – बार यह शिकायत रही कि अमुक एग्रीगेटर मेरा ब्लॉग नहीं दिखाता. अथवा बार बार आवेदन के बाद भी वह आपके ब्लॉग को शामिल नहीं कर रहा. कई बार आपको अपने ब्लॉग हटाने के लिए भी अनुरोध करना पड़ता है. यह सब झमेले से अलग ब्लॉगप्रहरी पर अपने खाते में आप अपना ब्लॉग स्वयम जोड़ या हटा सकते हैं.

इसके लावा आप ब्लॉगप्रहरी पर पाते हैं, निम्न सुविधाएं

१. अपने प्रशंसक बनाना और दूसरे के प्रशंसक बनना (इस सुविधा से आप अवांछित पोस्ट्स से मुक्ति पा सकेंगे )

२. एक सार्वजनिक चर्चा का मंच ( फोरम , जिसमे आप ब्लॉग लेखन और तमाम तकनीकी जानकारियों को पा सकते हैं , और अपने सवाल भी पूछ सकते हैं. ब्लॉगप्रहरी टीम आपके द्वारा पूछे गए सवाल का २४ घंटे के भीतर उत्‍तर देगी )

३. एक सार्वजनिक व प्राइवेट चैट रूम ( आम बात-चित के लिए और विशेष प्रयोजन हेतु चर्चा के लिए एक चैट-रूम, जो टेक्स्ट और वीडियो दोनों मोड में संभव है )

४. इवेंट मैनेजमेंट यानि विशेष आयोजनों की सूचना का मंच ( ब्लॉगप्रहरी पर आप किसी विशेष आयोजन जैसे ब्लॉग सम्मलेन और गोष्ठिओं कि सूचना को बेहतर ढंग से साझा कर पाते हैं. साथ ही आप स्थान , दिन और समय का उल्लेख करते हैं . पाठकों के समक्ष यह विकल्प होता है कि वह उस आयोजन में अपना नाम रजिस्टर करा सके. इससे आपके आयोजन बल मिलेगा तथा आप उसे सही तरीके से निभा पाएंगे .

५. ग्रुप एल्बम और वीडियो लाइब्रेरी ( हम विभिन्न आयोजनों में शामिल होते हैं और कई बड़े ब्लॉग सम्मलेन अभी तक हो चुके हैं. कितना अच्छा होता अगर इनका संकलन एक जगह मौजूद होता. ब्लॉगप्रहरी ने इस आवश्यकता को भांप लिया और या सुविधा हमने प्रदान की है )

६. सार्वजनिक ब्लॉग मंच ( कई पाठक ऐसे हैं, जो ब्लॉग बनाने की प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं . ऐसे नए हिंदी नेटीजन के लिए एक ब्लॉग मंच का होना आवश्यक है. जहाँ वह अपने विचार व्यक्त कर सकें.

७. फेसबुक जैसा चैट : जी हाँ , ब्लॉगप्रहरी पर आप ब्लॉग एग्रीगेटर की सेवा का मज़ा लेने के साथ, अपने दोस्तों से चैट भी कर सकतें है , जिस दौरान आप ऑडियो -वीडियो चैट , फाइल शेयर करना , डेस्कटॉप शेयर करना , गेम खेलना , अपना चैट रूम बनाना , और बने -बनाये चैट रूम का उपयोग करना इत्यादि कई सेवायों को एक साथ देख सकते हैं .

८ . ब्लॉगप्रहरी का सर्च सेवा : एक ही पन्ने पर बिना किसी परेशानी के टेक्स्ट, न्यूज, वीडियो और पी डी एफ फाइल को सर्च किया जा सकता है.

इसके अलावा अन्य ब्लॉगप्रहरी पर अनगिनत सुविधाएं मौजूद है. यह संपूर्ण परिकल्पना ३ महीने के गहन शोध के बाद लिखी गयी और उसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया गया. आप ब्लॉगप्रहरी पर जाने के बाद , किसी अन्य सेवा पर आश्रित नहीं रहेंगे. सब कुछ - एक जगह , सुविधा के साथ. इसके प्रयोग को समझने में कोई कठिनाई नहीं हो , इसलिए एक वीडियो द्वारा समझाया भी गया है . जिसे आप हेडर पा बने लिंक से देख सकते हैं .

तो देर किस बात की , चले ब्लॉगप्रहरी की ओर .. फिर से ब्लॉगिरी शुरू करते हैं.

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हिन्‍दी ब्‍लॉगर तो नहीं कर रहे हैं आमरण अनशन ?

लेकिन भ्रष्‍टाचार को तो मिटाना है ऐसे
कि उसके दाग भी न उभरें दोबारा से
पर क्‍या सफलता मिलेगी ...
अलख तो जगेगी ...


अगली 5 अप्रैल सुबह 10 बजे से देश के प्रसिद्ध समाज-सेवी अन्ना हज़ारे दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू करने जा रहे हैं...वही अन्ना हज़ारे जिन्होंने 1965 के युद्ध में अपनी यूनिट के सारे सिपाही शहीद होने के बाद अपनी नई ज़िंदगी समाज के नाम कर दी....शादी नहीं की...संपत्ति के नाम पर पर बस कपड़ों की कुछ जोड़ियां हैं...न कोई बैंक बैलेस...एक मंदिर में रहते हैं...अन्ना हज़ारे ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी जानकारी और इस अनशन में शामिल होने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए
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जिंदगी और मौत की ज़द्दोजहद के बीच 9 महीने का पीयूष, मदद के लिए आगे आयें

जिंदगी और मौत की ज़द्दोजहद के बीच 9 महीने का पीयूष, मदद के लिए आगे आयें: "9 महीने का पीयूष अपने माँ – बाप का लाडला है. उसकी एक हंसी पर उसके माँ – बाप न्योछावर है. पीयूष के पिता रामानंद मिश्र उसके लिए सपने संजोते हैं. उसके डॉक्टर – इंजीनियर – आईएस बनने के सपने देखते हैं.

पीयूष खुशमिजाज़ बच्चा है. लेकिन पीयूष की हंसी अब छीन चुकी है. पीयूष जिंदगी और मौत के बीच चेन्नई के एक अस्पताल में संघर्ष कर रहा है. उसका चेन्नई के अपोलो स्पेसिलिटी अस्पताल में इलाज चल रहा है. उसे थेलेसेमिया (Thalassemia) है. उसका स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जा रहा है.

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से दो दिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी



कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज़
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
29-30 मार्च ,2011
29 मार्च,2011
उद्घाटन- सत्र 9.30 से 11.30 बजे
मुुख्य अतिथि डॉ0 नामवर सिंह का उद्घाटन भाषण
अध्यक्ष मंडल: श्री अशोक वाजपेयी, डॉ0 निर्मला जैन
विशिष्ट अतिथि: डॉ0 विश्वनाथ त्रिपाठी
स्वागत भाषणः डॉ0 इंद्रजीत
संचालनः प्रेम जनमेजय
प्रथम सत्र 12.00-2.00
कविता की प्रासंगिकता-संदर्भ केदारनाथ अग्रवाल
अध्यक्ष: डॉ0 नित्यानंद तिवारी
मुख्य अतिथिः डॉ0 खगेंद्र ठाकुर
विशिष्ट वक्ताः डॉ0 बली सिंह, द्वारकाप्रसाद चारुमित्र, डॉ0 विनय विश्वास
संचालनः डॉ0 रत्नावली कौशिक
भोजनावकाश: 2.00-3.00 बजे
द्वितीय सत्र 3.00-5.30
कविता की प्रासंगिकता-संदर्भ नागार्जुन
अध्यक्ष: प्रोफेसर गोपेश्वर सिंह
मुख्य अतिथिः डॉ0 विजयबहादुर सिंह
विशिष्ट वक्ता: डॉ0 अनामिका, डॉ0 हरजेंद्र चौधरी, डॉ0 वागेश्वरी चक्रध्र, श्री राध्ेश्याम तिवारी,
संचालनः डॉ0 वीनू भल्ला
30 मार्च2011
तृतीय सत्र 9.30-12.30
कविता की प्रासंगिकता-संदर्भ अज्ञेय
मुख्य अतिथिः श्री ओम थानवी
अध्यक्ष: डॉ0 कृष्णदत्त पालीवाल
विशिष्ट वक्ताः डॉ0 हरीश नवल, रमेश मेहता,डॉ0 प्रेम जनमेजय डॉ0अवनिजेश अवस्थी,वीनू भल्ला
संचालनः डॉ0 विनय विश्वास
चतुर्थ सत्र 1.30-4.00
कविता की प्रासंगिकता-संदर्भ शमशेर
अध्यक्ष: डॉ0 हरिमोहन शर्मा
विशिष्ट अतिथिः यशवंत व्यास
विशिष्ट वक्ताः डॉ0 दिविक रमेश, डॉ0 अजय नावरिया,डॉ0 हेमंत कुकरेती, भारत भारद्वाज
संचालनः डॉ0 भगवतीप्रसाद शर्मा
समापन सत्र:4.30-5.30
अध्यक्ष: डॉ0 सुधीश पचौरी
विशिष्ट अतिथि: डॉ0 निर्मला जैन
धन्यवाद ज्ञापन: डॉ0 इंद्रजीत सिंह
संचालनः प्रेम जनमेजय
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सेक्स-रिलेक्स और सक्सेस के बीच मस्ती


हरे,पीले,नीले लाल,गुलाबी रंग,भांग का नशा,ढोल की मदमस्त थाप,रंग भरे पानी से भरे हौज,बदन से चिपके वस्त्रों में मादकता बिखेरती महिला पात्र और छेड़खानी करते पुरुष....इसे हमारी हिंदी फिल्मों का ‘डेडली कम्बीनेशन’ कहा जा सकता है क्योंकि इसमें ‘सेक्स-रिलेक्स-सक्सेस’ का फार्मूला है और उस पर “होली खेले रघुबीरा बिरज में होली खेले रघुबीरा....” या फिर “रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे..” जैसे गाने....... हमें अहसास होने लगता है कि होली का त्यौहार आ गया है और जब मनोरंजक चैनलों के साथ-साथ न्यूज़ चैनलों पर भी “रंग दे गुलाल मोहे आई होली आई रे..” गूंजने लगता है तो फिर कोई शक ही नहीं रह जाता.आखिर किसी भी त्यौहार को जन-जन में लोकप्रिय बनाने में फिल्मों...........
आगे पढ़े: http://www.jugaali.blogspot.com/
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धोनी बदनाम हुआ डार्लिंग तेरे लिए



आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2011 के ग्रुप 'बी' के मैच में दक्षिण अफ्रीका के हाथों मिली तीन विकेट की हार का ठीकरा टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के सिर फूटा । क्रिकेट प्रशंसकों ने एक सुर में धोनी की तीखी आलोचना की और बेचारे नेहरा  की माँ-बहन एक कर डाली  ! यानी धोनी बदनाम हुआ नेहरा तेरे लिए !

फिर भारत ने आस्ट्रेलिया को हराकर सेमी फाईनल में पहुंचा तो सबकी बोलती हो गयी बंद और फिर क्या हुआ चौपाल में, जानने के लिए पढ़ें-


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बच्चों को घर से मिलें राष्ट्रधर्म के संस्कार....डॉ. मोनिका शर्मा


अपनी मातृभूमि......... राष्ट्रीय प्रतीक..... संस्कृति...... सभ्यता और जीवन दर्शन का सम्मान किसी भी देश के नागरिकों का धर्म भी है और कर्तव्य भी। आज की पीढी में देखने में आ रहा है देश की गरिमा और स्वाभिमान का भाव मानो है ही नहीं। देश के कर्णधारों के ह्दय में अपनी जन्मभूमि के प्रति जो नैर्सगिक स्वाभिमान होना चाहिए उन संस्कारों की अनुपस्थिति विचारणीय भी है और चिंताजनक भी। पूरी पोस्ट कृपया यहाँ पढ़ें.......
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बाबा रामदेव जी से मिलने चलते हैं

कार्ड तो साथ लाना होगा
कार्यक्रम में
आ रहे हैं
लाल कृष्‍ण आडवाणी जी
बाबा रामदेव जी
पूज्‍य दीदी साध्‍वी ऋतंभरा जी
पर आपने भेजा है ई मेल से
इसे कैसे उठाकर लाऊं
कोई उपाय तो बतलाइये

आप भी बतला सकते हैं
जिन्‍हें मिला हो ई मेल से
वे कैसे साथ ले जा रहे हैं
उपाय मुझे भी बतलाएं
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हाशिए उलॉंघती स्‍त्री : साहित्‍य अकादेमी सभागार में शनिवार को


साहित्‍य अकादमी सभागार
के शनिवार 26 मार्च 2011 को
आयोजित कार्यक्रम में आप
पूरे दिन साहित्‍य अकादेमी में
ही रहिए और कविताओं का
आनंद लीजिए।

कार्यक्रम सुबह 9.30 बजे आरंभ होकर
सांय 9 बजे तक चलेगा
चाय भोजन भी वहीं मिलेगा
पेट को भी और मानस को भी।
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डॉ. हरीश अरोड़ा जी को मातृ शोक

दांयी ओर पहले डॉ. हरीश अरोड़ा
हमारे आपके सबके प्रिय
मनमोहक व्‍यक्तित्‍व के धनी
की माताजी का देहान्‍त
हो गया है।

नुक्‍कड़ परिवार की विनम्र श्रद्धांजलि।
दोपहर बाद 3 बजे नेहरू प्‍लेस टर्मिनल के पास स्थित शमशान घाट में दाह संस्‍कार किया जायेगा।
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सम्‍मान समारोह जिसे भुलाना नहीं चाहेंगे







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दुख को लगाओ जोरदार चांटे


सिर्फ 360 दिन ही तो शेष हैं, वे भी विशेष हैं। होली के कारनामे की याद में वे भी बीतेंगे, इन दिनों को सब जीतेंगे। होली आपके सामने नये रंग रूप में, नई खुशियों में, नई महक और नई लहक में फिर सामने होगी, वो गई नहीं है, मन में बस गई है। होली है, तो घपले हैं, घोटाले हैं इनके सबसे अधिक नेता मतवाले हैं। उन्‍होंने नोट बटोर- सटोर कर स्विस बैंक में डाले हैं। सोचते हैं, किसी दिन भूकंप आएगा या सुनामी सताएगा तो उस दिन निकाल लेंगे। नोटों को बिछायेंगे, नोटों से नहायेंगे और नोटों को ही खायेंगे। नोटों से जितने लुत्‍फ उठा सकते हैं, सारे उठायेंगे। पर जो खुशियों की कहानी है, नोट कर लें, चाहे डॉलर अमेरिकी हों, सब बेमानी हैं। पूरा पढ़ने और टिप्‍पणी रूपी चांटे लगाने के लिए यहां क्लिक कीजिए


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तुम जिन्दा हो और हमेशा जिन्दा रहोगे

आज 23 मार्च है, यानी शहीद दिवस क्योंकि आज ही के दिन भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु को ब्रिटिश सरकार ने फांसी कि सजा सुनाई थी. हम नहीं जानते कि ये महान शहादत का दिन कितनो को याद है मगर हमें याद हैं क्योंकि हम महसूस कर सकते हैं. वो तो मर कर भी अमर हो गए और हम उन्हें याद न कर जीते जी स्वयं को मुर्दा कैसे कहला सकते हैं?  होना तो ये चाहिए कि १५ अगस्त एवम २६ जनवरी की ही तरह ये दिवस भी पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ तिरंगा फहरा कर मनाया जाना चाहिए. जिन भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के क्रांतिकारी हौसलों से सम्पूर्ण बर्तानी जड़ें हिल गई थी, उनकी शहद आज कितनो को याद है? उन दिनों भगतसिंह की शोहरत से प्रभावित होकर डॉ. पट्टाभिसीतारमैया ने लिखा है — "यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भगतसिंह का नाम भारत में उतना ही लोकप्रिय था, जितना कि गांधीजी का।" भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की जांबाजी, दिलेरी और देश के लिए मर मिटने के हौसले देखते हुवे लाहौर के उर्दू दैनिक समाचारपत्र 'पयाम' ने लिखा था — "हिन्दुस्तान इन तीनों शहीदों को पूरे ब्रितानिया से ऊंचा समझता है। अगर हम हज़ारों-लाखों अंग्रेज़ों को मार भी गिराएं, तो भी हम पूरा बदला नहीं चुका सकते। यह बदला तभी पूरा होगा, अगर तुम हिन्दुस्तान को आज़ाद करा लो, तभी ब्रितानिया की शान मिट्टी में मिलेगी। ओ ! भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव, अंग्रेज़ खुश हैं कि उन्होंने तुम्हारा खून कर दिया। लेकिन वो ग़लती पर हैं। उन्होंने तुम्हारा खून नहीं किया, उन्होंने अपने ही भविष्य में छुरा घोंपा है। तुम जिन्दा हो और हमेशा जिन्दा रहोगे।" शहीद-ए-आज़म अमर शहीद सरदार भगतसिंह का नाम विश्व में 20वीं शताब्दी के अमर शहीदों में बहुत ऊँचा है। भगतसिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है।
हमारे देश का ये भी एक दुर्भाग्य ही है कि हमारे देश के को चलाने वाले कितने ऐसे राजनेता हैं जो देश के स्वाभिमान से जुड़े दिवसों को याद रखते हैं . क्या हम उन महान वीर सपूतों को याद न करके उनकी शहादत का रोज़ खून नहीं करते ? आज के दिन मैं इन तीनो शहीदों को नमन करने के साथ-साथ देश के उन सपूतों को भी नमन करता हूँ जिन्होंने आज़ादी के समय और आज़ादी के बाद से लेकर अब तक भारत पर आए हर संकट में अपने प्राणों की आहूति देकर अपने देश के सम्मान और सीमाओं की रक्षा की है और आगे के लिए भी इन्ही हौंसलों के साथ हर मौसम और हालात में इस देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने सर पर कफ़न बांधे तैनात हैं.
अंत में मेरे दिल की बात कहना चाहूँगा कि हमारे राष्ट्रीय सम्मान, गौरव और शहादत के प्रतीक शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के नाम से भारत रत्न, अशोक चक्र, परमवीर चक्र आदि के स्तर का सम्मान भी शुरू करना उन महान सपूतों को एक सच्छी श्रद्धांजलि होने के साथ-साथ इस देश के समस्त वीरों का सच्चा सम्मान भी होगा..
अपने देश के लिये ही जीने और उसी के लिए शहीद भी हो जाने वाले इन वीर सपूतों की इस महान शहादत को दिल से नमन करता हूँ.. भारत माता की जय ! हिंद जय हिंद !!
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बावळे गांव के ऊंट -(काजल कुमार)

टैबलेट का मूल्य न तो ऊपर वाले चित्र में ग़लत है, न ही नीचे वाले चित्र में.
(हो सकता है एप्पल वाला सोने से बनाता हो, वेस्प्रो वाला चमड़े से, कौन जाने...)
पोस्ट समाप्त हुई.
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पंकज पत्र पर पंकज की कविताएं


कल नहीं
आज
मैं मिला
प्रकाश पंकज से

मैंने जानना चाहा
दिल्‍ली में रहते हो
वे बोले
कोलकाता में

मैंने कहा दिल्‍ली आओ तो मिलना
वे बोले आया तो जरूर मिलूंगा
फिर मैंने उनसे उनके ब्‍लॉग का पता मांगा
और उसका स्‍नैप शॉट लेकर नुक्‍कड़ पर लगाया

आप इनकी रचनायें पढि़ए
और रचना पर
जिन्‍होंने नहीं की है जाहिर
अपनी राय
जाहिर करिये

फिर मैं आऊंगा
जल्‍दी ही
आपकी राय पढ़ने
देखूंगा कि प्रकाश पंकज की
कविता के बारे में
आपकी क्‍या है राय

फिर मैं भी पढूंगा
गंभीरता पूर्वक
उनकी लिखी कविताएं।

आपको पसंद आई हैं
तो मुझे भी आएंगी।
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परिकल्पना डॉट कॉम की खुमारी अभी नहीं उतरी है



परिकल्पना डॉट कॉम होरी में ऐसा होरिआया की अभी तक होश में नहीं आ पाया, अब क्या करूँ .....जगाये नहीं जग रहा और जाग भी जा रहा है तो तिलमिला रहा है ससुरा .....मैंने सोचा कि जब तक वह पूरी तरह होश में नहीं आ जाता उसकी आत्मा को ब्लॉग स्पॉट के हवाले क्यूँ न कर दिया जाए ?

तो लीजिये भैया !
परिकल्पना को एक-दो दिन के लिए मैं ब्लॉग स्पॉट के खूंटे में बाँध रहा हूँ ताकि 
परिकल्पना की आत्मा जीवित रहे ......!

आप भी फिलहाल परिकल्पना को ब्लॉग स्पोट के घर में ही ढूंढिए हुजूर , पता है-

परिकल्पना : http://parikalpnaa.blogspot.com/
और-
वटवृक्ष : http://urvija.blogspot.com/

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कलमाड़ी क़ी शीला से गुहार!

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होली पर हंसना क्‍यों जरूरी है

मुझे हंसना है
गंभीरता से बचना है
होली को होली न रहने दूं
होली को या तो हंसाऊं
या बुराई को मार भगाऊं
पर खूब खिलखिलाऊं

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लेगेसी इंडिया मासिक पत्रिका में ब्‍लॉगरी स्‍तंभ में इंडिया वाटर पोर्टल

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ममता की 'छाँव' में!

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बुधवार 23 मार्च 2011 को भूल न जाना : आपस में मिलने और जुलने आना : हिन्‍दी ब्‍लॉगर भी मिलेंगे



23 मार्च 2011 को सायं 5.00 बजे हिन्‍दी भवन में बुला रहे हैं हम आपको।
हम भी आ रहे हैं और आ रहे हैं
जिनके नाम प्रकाशित हैं कार्ड पर
लेकिन वे भी आ रहे हैं
जिनके नाम प्रकाशित नहीं हैं कार्ड पर
कार्ड पर कभी सभी भागीदारों के नाम
प्रकाशित नहीं होते हैं


समारोह साहित्‍यकारों के सम्‍मान का है
पुस्‍तकों पर दिए जा रहे हैं सम्‍मान
जैसे भवानी प्रसाद मिश्र सम्‍मान दिया जा रहा है चिमनी पर टंगा चांद पुस्‍तक पर कवि सुरेश यादव को
और
डॉ. रामलाल वर्मा सम्‍मान दिया जा रहा है
डॉ. हरीश अरोड़ा को उनकी पुस्‍तक
इलैक्‍ट्रोनिक मीडिया लेखन पर।

पुस्‍तकें और भी हैं
सम्‍मान और हैं
लेने वाले नेक हैं
देने वाले एक हैं
लेने वाले अनेक हैं
अनेकता में एकता
इसे ही तो कहते हैं
आप विशेष हैं

आप इस लेन देन के साक्षी बनेंगे
हम आपको वहीं मिलेंगे
आकर पहचानना।

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जिसकी मुच्छ नहीं…उसका कुच्छ नहीं…बनाम ललित शर्मा- राजीव तनेजा

सेवा में,

हे प्रभु…हे पालनहार…हे कुल देवता…

टैल मी ओ खुदा ये कैसी अंधेरगर्दी है?…ये कैसा चौसर खेलने वाला चौपट राजा है?…बरसों तक क्या हम एक ही उदहारण को ढोते चले जाएंगे?…कभी खुद को अपडेट नहीं करेंगे?..

“मूछें हों तो नत्थूलाल जैसी”…

अरे!…कैसा नत्थूलाल और कैसी उसकी मूछें?…ना रहा अब नत्थूलाल और ना रही अब उस जैसी मूछें…फिर क्यों हम इस बेमन की विरासत को ढोते चले जा रहे हैं? और कब तक ढोते चले जाएंगे?…

आप ही का दिया फोर्मुला है कि….वक्त के साथ हर चीज़ को बदलना पड़ता है…प्रजा को भी और बादशाह को भी …यहाँ तक कि हम और आप भी इस बदलाव से अछूते नहीं हैं…पहले आपके दरबार में मैं सवा रुपया चढ़ाया करता था और आप खुश हो जाया करते थे…अब इक्यावन से भी आपका पेट नहीं भरता है…भरना तो दूर आपकी दाढ़ तक गीली नहीं होती है इससे…वक्त और ज़रूरत के साथ हम बदले तो तुम भी बदल गए…पहले राम-कृष्ण का…ज़माना था…उसके बाद पैगम्बर और क्राईस्ट भी आए हमारे देश में लेकिन ये नत्थूलाल वहीँ का वहीँ अटका पड़ा है…आखिर क्यों?…क्यों हम इस बेमन की विरासत को बरसों से सदियों तक ढोते रहे?…

आज हमारे पास एक से बढकर एक युवा आईकोन हैं…हमें उनका अनुसरण आम जनता के सामने एक मिसाल रखनी चाहिए…

क्यों?…है कि नहीं?…

lalit-sharma[8]

मैं आपसे पूछता हूँ जनाब आपसे…आपसे और आपसे कि जब हमारे पास यहीं भारत में ही ब्लॉग तकनीकों से लैस ‘ललित शर्मा’ जैसे धुरंदर टाईप के युवा आईकोन हैं तो फिर मूछों के मामले में हम पुराने ढर्रे पे चलते हुए पुरानों का अनुकरण क्यों करें?…आखिर क्यों?…क्यों?…क्यों?…

संयोग से आज अपने ‘ललित शर्मा’ जी का जन्मदिन भी है…इसलिए हे!…प्रभु..हे!…पालनहार…ललित शर्मा जी को सम्मानित करने के लिए आज से बढ़िया दिन भला और कौन सा होगा?…आज ही के दिन उन्होंने इस धरती पर पदार्पण किया..इसलिए…मेरी आपसे ये करबद्ध प्रार्थना है कि आज के दिन को ‘मूँछ दिवस’ या फिर ‘मुच्छ दिवस' के रूप में घोषित कर इसे राष्ट्रीय पर्व का दर्जा दिया जाए…क्योंकि …

जिसकी मुच्छ नहीं…उसका कुच्छ नहीं…

जिसका कुच्छ नहीं…उसकी पुच्छ नहीं …

उससे बढ़कर इस जहाँ कोई तुच्छ नहीं ..

ना मिलता उसको कभी पुष्प गुच्छ नहीं

धन्यवाद

विनीत:

सदा से आपका

राजीव तनेजा

rajivtaneja2004@gmail.com

http://hansteraho.com

+919810821361

+919213766753

+919136159706

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