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अरे दीवानों मुझे पहचानो...

शीघ्र प्रकाश्यशीघ्र प्रकाश्य
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मई-२०११ से प्रकाश्य

पुस्तकों के साथ मैं भी आ गई. पहचान लो मैं हूँ कौन ?
किसकी हूँ सहेली 
बूझ सको तो बूझो मैं हूँ एक पहेली 
मैं पत्रिका हूँ 
हिंदी ब्लॉग जगत की नेत्रिका हूँ 
द्रौपदी आई थी पांच पांडवों के साथ 
मैं आई हूँ दो पुस्तकों के साथ 
ब्लॉग पर काफी दिनों से हूँ 
पर प्रिंट में आई हूँ अब 
बड़ी तारीफ़ कर रहे हैं सब 
मेरा लोकार्पण हुआ है अभी-अभी 
अब मुझसे मिल सकते हैं आप सभी .....
नहीं पहचाना ?
अगर पहचान  गए हों
तो बताएं
अपने लबों को हिलाएं
फिर की बोर्ड पर उंगलियाँ नचायें
और टिपण्णी बॉक्स में
आ जाएँ
मुझे पाने के लिए निम्न संख्या पर
फोन घुमाएं :
९४१५२७२६०८


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छत्तिसगढ़िहा ब्लागरों के दल का दिल्ली में जोरदार स्वागत

संजीव तिवारी, पवन चोटिया,अल्पना देशपांडे,ललित शर्मा,सुनीता शानू, शाहनवाज सिद्धकी, बी एस पाबला, दिनेश राय दिवेदी, खुशदीप सहगल, जी के अवधिया, सतीश सक्सेना.

छत्तिसगढ़िहा ब्लागरों का दल दिल्ली पहुँच चुका है. सुबह निजामुद्दीन पहुँचने पर मित्रों द्वारा जोरदार स्वागत किया गया. आतिशबाजी के साथ धमाल बैंड पार्टी ने रंग जमा दिया. अविनाश वाचस्पति जी ने फोन पर स्वागत करते हुए ठहरने के स्थान का पता बताया. हम सभी मित्रों के आभारी है.
गर्मी के इस मौसम में  सभी की इच्छा होती है कि हिल स्टेशन पर जा कर कुछ ठण्ड का मजा लें. हम सभी भी ( बी.एस.पाबला जी, संजीव तिवारी जी, अल्पना देशपांडे जी, जी.के. अवधिया जी एवं मै) हिल स्टेशन (पहाड़गंज) पहुँच कर एक होटल में ठहर गए.

सुनीता बहन ने स्नेह पूर्वक फोन करके अपने घर आने का निमंत्रण दिया, सिर्फ यही नहीं वे होटल स्वयं लेने भी आई, पवन जी ने बहुत पहले ही दिल्ली आने पर घर आने का निमंत्रण दिया था. जिसे स्वीकार करते हुए, हम सब उनके यहाँ पहुच चुके हैं. आगे पढने के लिए यहाँ पर जाएँ.
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन आज

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन आज: "शनिवार 30 अप्रैल 2011 को हिंदी भवन, नई दिल्ली में हिंदी साहित्य निकेतन की ‘स्वर्ण जयंती’ एवं परिकल्पना समूह और नुक्कड़ डॉट कॉम के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन


नई दिल्ली। भारत के प्रमुख प्रकाशन संस्थान हिंदी साहित्य निकेतन, बिजनौर ने इस वर्ष बसंत पंचमी पर अपनी सतत यात्रा के 50 स्वर्णिम वर्ष पूरे किये। इस अवसर पर शनिवार 30 अप्रैल 2011 को नई दिल्ली के हिन्दी भवन में एक भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर बहुचर्चित ब्लॉग समूह परिकल्पना डॉट कॉम और नुक्कड़ डॉट कॉम के संयुक्त प्रयास से अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन का आयोजन भी किया जाएगा।


हिन्दी सहित्य निकेतन की नींव प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल ने सन् 1961 में वसंत पंचमी के पावन दिवस पर रखी थी. 1968 में प्रसिद्ध हास्यकवि पद्मश्री काका हाथरसी की भतीजी डा. मीना अग्रवाल से विवाह के पश्चात से अग्रवाल दम्पती मिलकर इस संस्थान को अपने श्रम से सींचते रहे. ‘हिन्दी साहित्य निकेतन’ ने 300 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया है एवं हिन्दी शोध की दिशा में एक नया आयाम स्थापित किया है. ‘शोध सन्दर्भ’ इसका एक ऐसा प्रकाशन है, जो हर शिक्षण संस्थान में होना अनिवार्य है. हिन्दी साहित्य निकेतन द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका शोध-दिशा’ देश-विदेश के पाठकों के बीच उत्तम रचना-चुनाव एवं सुन्दर प्रस्तुतिकरण के लिये जानी जाती है.

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मजदूरों के लिए क्या आजादी और क्या गुलामी!

मजदूरों के लिए क्या आजादी और क्या गुलामी!: "एक दिन बाद यानी 1 मई को देशभर में बड़ी-बड़ी सभाएं होगी, बड़े-बड़े सेमीनार आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मजदूरों के हितों की बड़ी-बड़ी योजनाएं भी बनेगी और ढ़ेर सारे लुभावने वायदे किए जाएंगे, जिन्हें सुनकर एक बार तो यही लगेगा कि मजदूरों के लिए अब कोई समस्या ही बाकी नहीं रहेगी। इन खोखली घोषणाओं पर लोग तालियां पीटकर अपने घर लौट जाएंगे, किन्तु अगले ही दिन मजदूरों को पुनः उसी माहौल से रूबरू होना पड़ेगा, फिर वही शोषण, अपमान व जिल्लत भरी गुलामी जैसा जीवन जीने के लिए अभिशप्त होना पड़ेगा, जिसे दूर करने के नेताओं ने मजदूर दिवस के दिन बड़े-बड़े दावे किए थे। वास्तविकता तो यह है कि मई दिवस अब महज औपचारिकता रह गया है।

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हिंदी ब्‍लॉगिंग में आज खुशी का दिन आया

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हिंदी ब्‍लॉगों में आज मस्‍ती का आलम है

आपके लिए
जो है सूचना
उसे पढ़ना
नहीं है मना।

उसे पढि़ए
सबको पढ़ाइये
हिंदी ब्‍लॉगिंग को
हर कंप्‍यूटर तक
जल्‍दी पहुंचाइये।

पढ़ने के लिए खबर
यहां पर क्लिक करिए
मस्‍त रहिए
और सबको
ब्‍लॉगमस्‍त करिए।
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दैनिक हिन्‍दुस्‍तान में प्रेस कांफ्रेंस की सचित्र खबर

जी हां
पेज नंबर 5 पर
सचित्र प्रकाशित खबर के लिए
यहां पर क्लिक कीजिए
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एयरटेल का 3 जी इंटरनेट डाटा कार्ड जिनके पास है अविनाश वाचस्‍पति को फोन कर लें

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दैनिक जनसंदेश टाइम्‍स कह रहा है कि दिल्‍ली में हिंदी .......

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अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी ब्‍लॉगर सम्‍मेलन से पहले दिन प्रेस क्‍लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के चित्र और सामग्री

कैमरा एक ब्‍लॉगर का
चित्र लिए दूसरे ब्‍लॉगर ने
और जिन अखबारों और पत्रिकाओं के संवाददाता किसी कारणवश नहीं आ सके हैं। वे इस सामग्री का बेधड़क उपयोग कर सकते हैं।

















प्रेस विज्ञप्ति जो जारी की गई

प्रेस विज्ञप्ति

शनिवार 30 अप्रैल 2011 को हिंदी भवन, नई दिल्ली में हिंदी साहित्य निकेतन की ‘स्वर्ण जयंती’ एवं परिकल्पना समूह और नुक्‍कड़ डॉट कॉम के संयुक्‍त तत्‍वावधान में
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन

नई दिल्‍ली। भारत के प्रमुख प्रकाशन संस्थान हिंदी साहित्य निकेतन, बिजनौर ने इस वर्ष बसंत पंचमी पर अपनी सतत यात्रा के 50 स्वर्णिम वर्ष पूरे किये। इस अवसर पर शनिवार 30 अप्रैल 2011 को नई दिल्ली के हिन्दी भवन में एक भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर बहुचर्चित ब्लॉग समूह परिकल्पना डॉट कॉम और नुक्कड़ डॉट कॉम के संयुक्त प्रयास से अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन का आयोजन भी किया जाएगा।

हिन्दी सहित्य निकेतन की नींव प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल ने सन् 1961 में वसंत पंचमी के पावन दिवस पर रखी थी. 1968 में प्रसिद्ध हास्यकवि पद्मश्री काका हाथरसी की भतीजी डा. मीना अग्रवाल से विवाह के पश्चात से अग्रवाल दम्पती मिलकर इस संस्थान को अपने श्रम से सींचते रहे. ‘हिन्दी साहित्य निकेतन’ ने 300 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया है एवं हिन्दी शोध की दिशा में एक नया आयाम स्थापित किया है. ‘शोध सन्दर्भ’ इसका एक ऐसा प्रकाशन है, जो हर शिक्षण संस्थान में होना अनिवार्य है. हिन्दी साहित्य निकेतन द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका शोध-दिशा’ देश-विदेश के पाठकों के बीच उत्तम रचना-चुनाव एवं सुन्दर प्रस्तुतिकरण के लिये जानी जाती है.

इस सुअवसर पर हिन्दी साहित्य निकेतन की ओर से यह घोषणा की गई है कि अगले वर्ष से प्रतिवर्ष संस्थान की ओर से एक चयनित ‘प्रकाशित शोध-प्रबंध’ को पुरस्कृत किया जाएगा. इसकी चयन-प्रक्रिया पूर्ण रूप से पारदर्शी होगी. सन् 2011 के पुरस्कार की राशि होगी रु. 25,000/=

हिंदी के मुख्य ब्लॉग विश्लेषक-साहित्यकार लखनऊ निवासी रवीन्द्र प्रभात और नुक्कड़ डॉट कॉम के मॉडरेटर-व्यंग्यकार दिल्ली निवासी अविनाश वाचस्पति के सहयोग से इस आयोजन का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के माध्‍यम से नुक्‍कड़ डॉट कॉम, http://bambuser.com/channel/girishmukul/broadcast/1598881 बमबजर, फेसबुक, ट्विटर, गूगल बज इत्‍यादि लोकप्रिय साइटों पर किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस सुअवसर पर देश-विदेश के 400 से अधिक हिंदी ब्लॉगर-साहित्यकार उपस्थित होंगे। आयोजन के प्रायोजकों में डायमंड बुक्‍स, दिल्‍ली का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

इस अवसर पर अविनाश वाचस्‍पति और रवीन्‍द्र प्रभात के संपादन में प्रकाशित पुस्‍तक हिंदी ब्‍लॉगिंग : अभिव्‍यक्ति की नई क्रांति, रवीन्द्र प्रभात का उपन्यास ताकि बचा रहे लोकतंत्र और परिकल्पना समूह की त्रैमासिक पत्रिका वटवृक्ष का लोकार्पण किया जा रहा है। हिंदी ब्‍लॉगिंग : अभिव्‍यक्ति की नई क्रांति पुस्‍तक की लगभग 150 प्रतियां प्रकाशन से पूर्व ही खरीदने के लिए अग्रिम बुक हो चुकी हैं, जो कि स्‍वयं एक कीर्तिमान है। परिकल्पना डॉट कॉम ब्लॉगोत्सव-२०१० के अंतर्गत हिंदी ब्लॉगिंग में प्रत्‍येक विधा और श्रेणी से एक-एक श्रेष्ठ ब्लॉगर का चयन करते हुए इक्‍यावन हिंदी ब्‍लॉगरों और नुक्कड़ डॉट कॉम हिंदी ब्लॉगिंग में अपने बल पर विशेषज्ञता हासिल करने और हिंदी ब्‍लॉगिंग के विकास में महती योगदान के फलस्‍वरूप 13 ब्लॉग प्रतिभाओं को भी पहचान कर सम्मानित कर रहा है। यह हिंदी ब्‍लॉगिंग के उन्‍नयन के लिए एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अवसर है।

आयोजन दो सत्रों में निम्नानुसार संपन्न होगा -
सायं 4 - 6 (प्रथम सत्र ) :
हिंदी साहित्य निकेतन की विकास-यात्रा: एक विशेष प्रस्तुति
अनुभव- संस्मरण- बातचीत पुस्तकों का लोकार्पण
हिंदी ब्लॉगरों का सारस्वत सम्मान
प्रथम सत्र में सान्निध्य :
• श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मुख्यमंत्री, उत्तराखंड द्वारा दीप-प्रज्‍वलन से समारोह का उद्घाटन
• डॉ. रामदरश मिश्र ( मुख्य अतिथि )
• श्री अशोक चक्रधर (अध्यक्ष)
• श्री अशोक बजाज, चेयरमैन छत्‍तीसगढ़ भंडारण निगम (विशिष्ट अतिथि )
• श्री प्रेम जनमेजय, संपादक व्‍यंग्‍ययात्रा, प्रसिद्ध व्यंग्यकार
• श्री विश्वबंधु गुप्ता, पूर्व इनकम टेक्स कमिश्नर और चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता
सायं 6 – 6.30 : चाय
सायं 6.30– 8.00 (द्वितीय सत्र) :
देश को जागरूक करने में न्यू मीडिया की भूमिका पर संगोष्ठी
LABONI Performing Arts (A theatre group of Ex-NSD-ians) द्वारा नाट्य -प्रस्तुति
द्वितीय सत्र में सान्निध्य :
• श्री प्रभाकर श्रोत्रिय (अध्यक्ष)
• श्री पुण्य प्रसून बाजपेयी (मुख्य अतिथि )
• श्री उदय प्रकाश (विशिष्ट अतिथि )
• सुश्री मनीषा कुलश्रेष्ठ
• श्री अजीत अंजुम
• श्री देवेन्द्र देवेश
8.30 से रात्रि भोज

"परिकल्पना ब्लॉग उत्सव-2010" एवं हिन्दी ब्लॉग प्रतिभा सम्मान-2011

आप सभी को विदित है कि हर ब्लॉगर की अपनी एक विशिष्‍ट पहचान है, कोई साहित्यकार है तो कोई पत्रकार, कोई समाजसेवी तो कोई संस्कृतिकर्मी, कोई कार्टूनिस्ट तो कोई कलाकार। प्रत्‍येक ब्लॉगर के सोचने का अपना एक नेक नज़रिया और विचारों को प्रस्‍तुत करने का मनमोहक अंदाज़। नियम तय नहीं हैं, फिर भी प्रेम और जिम्‍मेदारी की डोर से सभी बंधे हैं, स्‍नेह-सद्भाव है जो आपस में सभी को एक कड़ी में जोड़ता है। नि:संदेह इसकी जड़ों में सहिष्णुता की भारतीय मर्यादा है, जो वसुधैव कुटुम्‍बकम की भावना को चरितार्थ करती है। इन्हीं पावन मानवीय उद्देश्यों को ध्‍यान में रखते हुए परिकल्पना समूह के संचालक-समन्वयक रवीन्द्र प्रभात ने अपने छ: सहयोगियों क्रमश: सर्वश्री अविनाश वाचस्पति, रश्मि प्रभा, जाकिर अली रज़नीश, रणधीर सिंह सुमन, विनय प्रजापति और ललित शर्मा के साथ मिलकर अंतर्जाल पर विगत वर्ष -2010 को ब्लॉगोत्सव का आयोजन किया, जिसे "परिकल्पना ब्लॉग उत्सव-2010" नाम दिया।
इस उत्सव का नारा था - "अनेक ब्लॉग नेक हृदय"। उत्सव में अनेकानेक कालजयी रचनाएँ, विगत दो वर्षों में प्रकाशित कुछ महत्वपूर्ण ब्लॉग पोस्टें, ब्लॉग लेखन से जुड़े अनुभवों पर वरिष्ठ चिट्ठाकारों की टिप्पणियाँ, साक्षात्कार, मंतव्य आदि भव्‍यता के साथ प्रस्‍तुत की गईं।
वर्ष- 2009 में ब्लॉग पर प्रकाशित कुछ महत्वपूर्ण कवितायें, गज़लें , गीत, लघुकथाएं , व्यंग्य , रिपोर्ताज, कार्टून इत्‍यादि का चयन करते हुए प्रमुखता के साथ ब्लॉग उत्सव के दौरान प्रकाशित किए गए। महत्वपूर्ण चिट्ठाकारों की रचनाओं को स्वर देने वाले पुरुष या महिला ब्लॉगर के द्वारा प्रेषित ऑडियो/वीडियो भी प्रसारित किए गए। उत्सव के दौरान प्रकाशित प्रत्‍येक विधा से एक-एक ब्लॉगर का चयन कर, गायन प्रस्तुत करने वाले एक गायक अथवा गायिका का चयन कर तथा उत्सव के दौरान सकारात्मक सुझाव/टिप्‍पणी देने वाले श्रेष्ठ टिप्पणीकार का चयन कर उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया गया। विशेष कड़ी के रूप में ब्‍लॉगिंग विधा के जरिए हिन्दी की सेवा करने वाले कुछ सकारात्मक चिट्ठाकारों को विशेष रूप से सम्मानित किये जाने की भी योजना बनाई गई। इस आयोजन का सभी हिंदी प्रेमियों ने भरपूर खुशी के साथ स्‍वागत किया।

उत्सव 15 अप्रैल-2010 से 15 जून-2010 तक दो महीने की अवधि तक परिकल्पना पर निर्बाध रूप से चला और हिंदी ब्लॉगजगत में एक नए इतिहास के सृजन का साक्षी बना। परिकल्पना की इस पहल पर लखनऊ से प्रकाशित दैनिक जनसंदेश टाइम्स ने अपने ब्लॉगवाणी स्तंभ के अंतर्गत कहा कि "रवीन्द्र प्रभात ब्लॉग जगत में सिर्फ एक कुशल रचनाकार के ही रूप में नहीं जाने जाते हैं, उन्होंने ब्लॉगिंग के क्षेत्र में अनेक विशिष्‍ट कार्य भी किए हैं। वर्ष 2007 में उन्होंने ब्लॉगिंग में एक नया प्रयोग प्रारम्भ किया और ‘ब्लॉग विश्लेषण’ के द्वारा हिंदी ब्लॉग जगत में बिखरे अनमोल मोतियों से पाठकों को परिचित करने का बीड़ा उठाया। वर्ष 2010 में उन्‍होंने यह अनुष्‍ठान पूरी निष्ठा के साथ सम्पन्न किया और 21 कडियों में ब्लॉग जगत की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने इतिहास लेखन का मार्ग प्रशस्‍त किया।

शनिवार 30 अप्रैल 2011 को आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन इन्ही उद्देश्यों को सार्वजनिक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसका लाईव वेबकास्ट नुक्‍कड़ डॉट कॉम के मॉडरेट अविनाश वाचस्‍पति की पहल पर जबलपुर के गिरीश बिल्लौरे ’मुकुल’ और दिल्ली से पद्म सिंह के द्वारा पूरे विश्‍व में प्रसारित किया जा रहा है।

सम्मानित किये जाने वाले हिंदी ब्लॉगरों का विवरण निम्‍न है -

1. वर्ष का श्रेष्ठ नन्हा ब्लॉगर – कुमारी अक्षिता पाखी, पोर्टब्लेयर
2. वर्ष के श्रेष्ठ कार्टूनिस्ट - श्री काजल कुमार, दिल्ली
3. वर्ष की श्रेष्ठ कथा लेखिका - श्रीमती निर्मला कपिला, नांगल (पंजाब)
4. वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान कथा लेखक - डॉ. अरविन्द मिश्र, वाराणसी
5. वर्ष की श्रेष्ठ संस्मरण लेखिका - श्रीमती सरस्वती प्रसाद, पुणे
6. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक - श्री रवि रतलामी, भोपाल
7. वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृतान्त) - श्रीमती शिखा वार्ष्णेय, लंदन
8. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृतान्त) - श्री मनोज कुमार, कोलकाता
9. वर्ष के श्रेष्ठ चित्रकार - श्रीमती अल्पना देशपांडे, रायपुर
10. वर्ष के श्रेष्ठ हिन्दी प्रचारक - श्री शास्त्री जे.सी. फिलिप, कोच्ची, केरल
11. वर्ष की श्रेष्ठ कवयित्री - श्रीमती रश्मि प्रभा, पुणे
12. वर्ष के श्रेष्ठ कवि - श्री दिवि‍क रमेश, दिल्ली
13. वर्ष की श्रेष्ठ सह लेखिका - सुश्री शमा कश्यप, पुणे
14. वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार - श्री अविनाश वाचस्पति, दिल्ली
15. वर्ष की श्रेष्ठ युवा गायिका - सुश्री मालविका, बैंगलोर
16. वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक - श्री संजीव तिवारी, दुर्ग (म.प्र.)
17. वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय कवि - श्री एम. वर्मा, वाराणसी
18. वर्ष के श्रेष्ठ गजलकार - श्री दिगम्बर नासवा, दुबई
19. वर्ष के श्रेष्ठ कवि (वाचन) - श्री अनुराग शर्मा, पिट्सबर्ग अमेरिका
20. वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका - श्रीमती प्रीति मेहता, सूरत
21. वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक - श्री दीपक मशाल, लंदन
22. वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार - श्रीमती संगीता स्वरूप, दिल्ली
23. वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार - श्री हिमांशु पाण्डेय, सकलडीहा (यू.पी.)
24-25-26. वर्ष की श्रेष्ठ उदीयमान गायिका – खुशबू/अपराजिता/इशिता, पटना (संयुक्त रूप से)
27. वर्ष के श्रेष्ठ बाल साहित्यकार - श्री जाकिर अली 'रजनीश', लखनऊ
28. वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक) - श्री ललित शर्मा, रायपुर
29. वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (गायन) - श्री राजेन्द्र स्वर्णकार, बीकानेर, राजस्थान
30-31. वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार - डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक', खटीमा एवं आचार्य संजीव वर्मा सलिल, भोपाल (संयुक्त रूप से)
32. वर्ष की श्रेष्ठ देशभक्ति पोस्ट - कारगिल के शहीदों के प्रति (श्री पवन चंदन)
33. वर्ष की श्रेष्ठ व्यंग्य पोस्ट - झोलाछाप डॉक्टर (श्री राजीव तनेजा)
34. वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि - श्री ओम आर्य, सीतामढ़ी बिहार
35. वर्ष के श्रेष्ठ विचारक - श्री जी.के. अवधिया, रायपुर
36. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक - श्री गिरीश पंकज, रायपुर
37. वर्ष की श्रेष्ठ महिला चिन्तक - श्रीमती नीलम प्रभा, पटना
38. वर्ष के श्रेष्ठ सहयोगी - श्री रणधीर सिंह सुमन, बाराबंकी
39. वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (पुरूष) – डॉ. सुभाष राय, लखनऊ (उ0प्र0)
40. वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (महिला) - श्रीमती संगीता पुरी, धनबाद
41. वर्ष के श्रेष्ठ तकनीकी ब्लॉगर - श्री विनय प्रजापति, अहमदाबाद
42. वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लॉगर - श्री खुशदीप सहगल, दिल्ली
43. वर्ष के श्रेष्ठ नवोदित ब्लॉगर - श्री राम त्यागी, शिकागो अमेरिका
44. वर्ष के श्रेष्ठ युवा पत्रकार - श्री मुकेश चन्द्र, दिल्ली
45. वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लॉगर - श्री ज्ञानदत्त पांडेय, इलाहाबाद
46. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग शुभचिंतक - श्री सुमन सिन्हा, पटना
47. वर्ष की श्रेष्ठ महिला ब्लॉगर - श्रीमती स्वप्न मंजूषा 'अदा', अटोरियो कनाडा
48. वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉगर - श्री समीर लाल 'समीर', टोरंटो कनाडा
49. वर्ष की श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट - भविष्य का यथार्थ (लेखक - जिशान हैदर जैदी)
50. वर्ष की श्रेष्ठ प्रस्तुति - कैप्टन मृगांक नंदन एण्ड टीम, पुणे
51. वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (हिन्दी चिट्ठाकारी विषयक पोस्ट) – श्री प्रमोद ताम्बट, भोपाल

हिन्दी ब्लॉग प्रतिभा सम्मान-2011 के अंतर्गत 13 हिंदी ब्लॉगरों के नाम तय किये गए, जिन्हें हिंदी ब्लॉगिंग में दिए जा रहे विशेष योगदान के निमित्‍त सम्‍मानित किया जाएगा : -

(१) श्री श्रीश शर्मा (ई-पंडित), तकनीकी विशेषज्ञ, यमुनानगर (हरियाणा)
(२) श्री कनिष्क कश्यप, संचालक ब्लॉगप्रहरी, दिल्ली
(३) श्री शाहनवाज़ सिद्दीकी, तकनीकी संपादक, हमारीवाणी, दिल्ली
(४) श्री जय कुमार झा, सामाजिक जन चेतना को ब्लॉगिंग से जोड़ने वाले ब्लॉगर, दिल्ली
(५) श्री सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी, महात्मा गांधी हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा
(६) श्री अजय कुमार झा, मीडिया चर्चा से रूबरू कराने वाले ब्लॉगर, दिल्ली
(७) श्री रविन्द्र पुंज, तकनीकी विशेषज्ञ, यमुनानगर (हरियाणा)
(८) श्री रतन सिंह शेखावत, तकनीकी विशेषज्ञ, फरीदाबाद (हरियाणा )
(९) श्री गिरीश बिल्लौरे 'मुकुल', वेबकास्ट एवं पॉडकास्टर विशेषज्ञ, जबलपुर
(१०)श्री पद्म सिंह, तकनीकी विशेषज्ञ, दिल्ली
(११) सुश्री गीताश्री, नारी विषयक लेखिका, दि‍ल्ली
(१२) श्री बी. एस. पाबला, ब्लॉग संरक्षक, भिलाई (म.प्र.)
(१३) श्री अरविन्द श्रीवास्तव, समालोचना, मधेपुरा (बिहार)

उल्लेखनीय है कि हिन्दी ब्लॉग जगत में इनके योगदान को चिन्हित करने के लिए हिन्दी साहित्य निकेतन, नुक्कड़ डॉट कॉम और परिकल्पना डॉट कॉम की ओर से यह वृहद् सम्मान योजना प्रारंभ की गयी है।
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नुक्‍कड़डॉटकॉम : एक परिचय
हिंदी चिट्ठाकारिता में कई बड़े नाम है, किन्तु आत्मीयता की दृष्टि से देखा जाए तो अविनाश वाचस्पति का नाम सबसे ऊपर और सबके मन के भीतर दिखाई देता है, जिन्होंने 17 सितंबर 2007 को हिंदी के विश्‍वभर के सुपरिचित साहित्यकारों और पत्रकारों के विचारों का एक सामूहिक गुलदस्‍ता सजाया और नाम दिया नुक्कड़। नुक्कड़ यानी मोहल्ले का वह सार्वजनिक स्थल जहां सब चलते-फिरते अपने-परायों से विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। छोटी-छोटी चाहतों, अपनी बातों को लेकर पारस्परिक सौहार्द का वातावरण बनाते हैं, ताकि समाज को नकारात्मक प्रवृतियों से बचाकर सार्थक रचा जा सके। इस सामुदायिक ब्लॉग को लाने के पीछे, उनका यही आशय रहा होगा कि हमारे चारों ओर मौजूद नैसर्गिक सौन्दर्य का भरपूर लाभ सबको उठाने के अवसर प्रदान किए जाएं।
उजाला और अन्धेरा जीवन के दो पहलू हैं, जीवन के लिए दोनों अनिवार्य भी हैं क्योंकि सापेक्षता का यह संसार प्रकाश और छाया की रचना है। ऐसे में आप अपने विचारों को बुराई की ओर प्रवृत्‍त होने देंगे तो आप स्वयं कलुषित हो जायेंगे। अविनाश वाचस्पति मानते हैं कि "प्रत्येक वस्तु में केवल अच्छाई को ही देखने से आप सौन्दर्य के गुण को खुद के भीतर समाहित करने में सफल हो जायेंगे।"

इन्हीं उद्देश्यों को लेकर हिंदी और ब्‍लॉगहित में श्री अविनाश वाचस्पति ने हिंदी ब्लॉगजगत में नुक्कड़ रूपी सार्वजनिक चौपाल का बीजारोपण किया और देखते-देखते महज चार वर्षों में ९६ लेखकों के साथ लगभग ढाई हजार पोस्‍टें लिख डालीं। यह अपने-आप में एक कीर्तिमान है। इस ब्लॉग के ४५६ प्रशंसक हैं और इस पर प्रतिदिन ५०० से ६०० आगंतुकों का आना-जाना बना रहता है। इस वर्ष से इस समूह ने नई सम्मान योजना शुरू की है "हिंदी ब्लॉग प्रतिभा सम्मान"। जिसके अंतर्गत इस वर्ष ३० अप्रैल को हिंदी भवन दिल्ली में हिंदी ब्लॉगिंग में विशिष्टता हासिल करने वाले १३ ब्लॉगरों को सम्मानित किया जाएगा।
हाल ही में फेसबुक पर अविनाश वाचस्‍पति मुन्‍नाभाई से अन्‍नाभाई बन गए हैं। ‘हिंदी ब्‍लॉगिंग : अभिव्‍यक्ति की नई क्रांति’ पुस्‍तक इनका ताजा उपक्रम है, जिसमें इनके दो मुख्‍य सहयोगी हैं, लखनऊ के साहित्‍यकार और परिकल्‍पना समूह के मॉडरेटर रवीन्‍द्र प्रभात और दूसरे हिंदी साहित्‍य निकेतन, बिजनौर के डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल।
हिंदी ब्‍लॉगिंग पर पहली पुस्‍तक के प्रकाशन का श्रेय हिंदी साहित्‍य निकेतन को गया है और इसे अमली जामा पहचाने का दुष्‍कर कार्य अविनाश जी ने ही रवीन्‍द्र प्रभात के साथ मिलकर इस सुखद अंजाम तक पहुंचाया है। इनके बारे में यह कहना बिल्‍कुल उचित है कि वे जो कहते-बोलते हैं, वो सब कविता और व्‍यंग्‍य का मिला जुला स्‍वरूप ही होता है। मतलब उनकी रग रग में व्‍यंग्‍य और स्‍वस्‍थ हास्‍य परिमार्जित होता रहता है। E mail : nukkadh@gmail.com




अविनाश वाचस्‍पति : एक परिचय

हाल ही में फेसबुक पर अविनाश वाचस्‍पति मुन्‍नाभाई से अन्‍नाभाई बन गए हैं। ‘हिंदी ब्‍लॉगिंग : अभिव्‍यक्ति की नई क्रांति’ पुस्‍तक इनका ताजा उपक्रम है, जिसमें इनके दो मुख्‍य सहयोगी हैं, लखनऊ के साहित्‍यकार और परिकल्‍पना समूह के मॉडरेटर रवीन्‍द्र प्रभात और दूसरे हिंदी साहित्‍य निकेतन, बिजनौर के डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल।
प्रख्‍यात हिन्‍दी व्‍यंग्‍यकार और साहित्‍यकार-ब्‍लॉगर अविनाश वाचस्‍पति को सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मान से दिसम्‍बर 2010 में सम्‍मानित किया। अंतर्जाल पर हिन्‍दी के लिए किया गया उनका कार्य किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे सामूहिक वेबसाइट नुक्‍कड़ (www.nukkadh.com) के मॉडरेटर के रूप में प्रख्‍यात हैं। इसके अतिरिक्‍त उनके ब्‍लॉग पिताजी, बगीची, झकाझक टाइम्‍स, तेताला, मैं आपसे मिलना चाहता हूं और अविनाश वाचस्‍पति साइबर संसार में अपनी विशिष्‍ट पहचान रखते हैं। उन्‍हें देश भर में नेशनल और इंटरनेशनल ब्‍लॉगर सम्‍मेलन आयोजन कराने का श्रेय दिया जाता है। मुंबई, दिल्‍ली, जयपुर, आगरा इत्‍यादि शहरों में कराए गए उनके आयोजन अविस्‍मरणीय और हिन्‍दी के प्रचार/प्रसार में सहायक बने हैं। इंटरनेट के आभासी लोगों को वास्‍तविक जीवन में जोड़ने का पुनीत कार्य इन्‍हीं के द्वारा किया गया है। हिन्‍दी के उनके निस्‍वार्थ सेवाभाव के कारण विश्‍वभर में उनके करोड़ों प्रशंसक मौजूद हैं।
भारतीय जन संचार संस्थान से ‘संचार परिचय’, तथा ‘हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम’ में प्रशिक्षण लिया है। व्यंग्य, कविता एवं फ़िल्म लेखन उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। इनकी रचनाएं सैंकड़ों पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। जिनमें नवभारत टाइम्‍स, हिन्‍दुस्‍तान, जनसत्‍ता, भास्‍कर, नई दुनिया, राष्‍ट्रीय सहारा, अमर उजाला, जनसंदेश टाइम्‍स, जनवाणी, सन्‍मार्ग, हरिभूमि, अहा जिंदगी, स्‍क्रीनवर्ल्‍ड, हिंदी मिलाप, डीएलए, साप्‍ताहिक हिन्‍दुस्‍तान, व्‍यंग्‍ययात्रा, आई नैक्‍स्‍ट, गगनांचल इत्‍यादि और जयपुर की अहा जिंदगी मासिक उल्‍लेखनीय हैं। सोपानस्‍टेप मासिक और डीएलए दैनिक में नियमित रूप से व्‍यंग्‍य स्‍तंभ लिख रहे हैं। वर्ष 2008, 2009 और वर्ष 2010 में यमुनानगर, हरियाणा में आयोजित हरियाणा अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोहों में प्रकाशित फिल्‍मोत्‍सव समाचार के तकनीकी निदेशक रहे हैं।
हरियाणवी फ़ीचर फ़िल्मों ‘गुलाबो’, ‘छोटी साली’ और ‘ज़र, जोरू और ज़मीन’ में प्रचार और जन-संपर्क तथा नेत्रदान पर बनी हिंदी टेली फ़िल्म ‘ज्योति संकल्प’ में सहायक निर्देशन किया है। राष्ट्रभाषा नव-साहित्यकार परिषद और हरियाणवी फ़िल्म विकास परिषद के संस्थापकों में से एक। सामयिक साहित्यकार संगठन, दिल्ली तथा साहित्य कला भारती, दिल्ली में उपाध्यक्ष। केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद के आजीवन सदस्‍य। ‘साहित्यालंकार‘ , ‘साहित्य दीप‘ उपाधियों और राष्ट्रीय हिंदी सेवी सहस्त्राब्दी सम्मान‘ तथा ‘कविता शिल्‍पी पुरस्‍कार’ से सम्मानित। ‘शहर में हैं सभी अंधे‘ स्‍वरचित काव्‍य रचनाओं का संकलन हिन्‍दी अकादमी, दिल्‍ली के सौजन्‍य से प्रकाशित हुआ। काव्य संकलन ‘तेताला‘ तथा‘नवें दशक के प्रगतिशील कवि’ कविता संकलन का संपादन किया है।
उन्‍हें वर्ष 2009 के लिए हास्‍य-व्‍यंग्‍य श्रेणी में ‘संवाद सम्‍मान’ भी दिया गया है। ‘हिंदी साहित्‍य निकेतन परिकल्‍पना सम्‍मान’ के अंतर्गत 2010 में वर्ष के ‘श्रेष्‍ठ व्‍यंग्‍यकार सम्‍मान’ कल उन्‍हें हिंदी भवन में प्रदान किया जा रहा है। E mail : nukkadh@gmail.com

कल मैं हिंदी ब्‍लॉग जगत के हित संधान के लिए पधार रही हूं। आपसे इल्‍तजा है कि आप मेरा उत्‍साह बढ़ायें और मुझे घर अवश्‍य ले जायें।
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पूर्णिमा

कहने को तो पूर्णिमा बाजपेई इस कहानी की नायिका है, पर र्मैं उसे नायिका कैसे मान सकती हूं।मुझे तो हर दो की गिनती के बाद तीसरी लड़्की पूर्णिमाही नजर हीआती है।पूर्णिमा पूर्णिमा न होकर अनुराधा,योगदा,सलेमा,भाग्यश्रीया उपासना जो भी होती और बाजपेयी,न होकर वर्मा,सिंह,देका राभा,रेड्डी जो भी होती तो क्या उसकी जिन्दगी की किताब किसी और रंग से लिखी जाती।पर एक घटना को कहानी का रुप देने के लिये मैं उस बच्ची का नाम पूर्णिमा रख लेती हूं।

हांपूर्णिमा मेरी बहिन थी,प्यार से उसे हम पुनिया कहते थे।सामान्य बुद्धि की बच्चीऔर भाई-बहिनोंजैसी उच्च शिक्षा तो न ले सकी,पर घरेलू कार्यों और व्यवहार में हम सबकोमात देती थी।विषयोंकी सैद्धांतिक जानकारी देतीमैं उसे विग्यान और गणित के सूत्र तो रटाती रही,,अंग्रेजी व्याकरण के टेंसों ों में उलझाये रही पर जीवन को जीने के दो चार गुण सरल भाशा में न समझा पाई।जो कुछ उसके पास था हम बड़े उसेजान ही न पायेे,अपने बड़्प्पन का लोहा ही मनवाते रहेऔर बात -बात में उसे बुद्धू करार देकर उसकी क्षमताओं को नजर अन्दाज करते रहे ।वह जैसी थी,हम उसे स्वीकर नहीं कर पाये और छैने हथोड़ा लेकर,दूसरों के जिन्दगी से उदाहरण ले -लेकर उसे मूरत की तरह गड़्ने की कोशिश में लगे रहे ।हर वक्त की आलोचनाओऔर् उपेक्षाओं के कारण बालमन इतना कुन्द हो गया कि विवाह के पश्चात उसेजो थोडी बहुत अवांछित् स्वतंत्रता मिली ेउसे वह स्वर्गिक सुख मान बैठी।सही गलत समझने की शक्ति तो उसने कहींउठाकर रख दी थी।चमकते बर्तनो में चेहरे की चमक् ढुंढती मेरी पुनिया अपना दर्द सीने में दबाये ,सिर बांधेपडी रही,सब कुछ सहती रही,पर मुख पर मुस्कराहट का मुखौटाा ओढे रही।
जब तक उसने स्थितियों को समझना शुरु किया ,बात हाथ से निकल चुकी थी।मां के परिवार मेंउसकी आलोचना के मूल मेंउसका हित होता था,पर यहां उसकी सिधाई का शोषण शुरु हो गया था।पति के रुप मेंउसे ऐसा दरिन्दा मिला जौसे न मरने देता था न जीने ।उसकी भावनाओं को ब्लैक मेल किया जा रहा था।न जाने कितनी लिखित तहरीर ठीक जो उसने प्यार के आगोश में लेपुनिया सेे लिखबा ली थी।
भोली बच्ची उस नाटकबाज के ढोंग को प्यार समझती रही,उसपर अपना सब कुछ लुटाती रही।और वह लुटेरा अपना मतलब साध बहुत जल्द उसे दूध में पडी मक्खी की तरह निकाल चुका था।तब उसके सिर बांधे पड़े रहने का औचित्य मेरी समझ से बाहर था। हर बार मां-बापु से कहती-इतने बैभव में भे पुनिया पनप क्यों नहीं रही है?" अब लगता है बचपना तो उस समय में कर रही थी,जो पुनिय के सुख को घर के पर्दों,सोफों,साड़ियों की गिनती और जेवरों की चमक में तलाश रही थी। जब तक असलियत जान पाई,बहुत देर हो चुकी थी।मेरी बच्ची जैसी बहिन एक दरिन्दे के हाथों की कठपुतली बन चुकी थी।

योजना के अनुसार जब वह दरिन्दा ढील छोड-ता और पुनिया उसकी मांगों को लिये हमसे मिलती तो हम््पुनिया की कुशलता एक दो वाक्यों में पूछ अपने कर्तव्य की इतिश्री मान बैठते थे-पुनिया तू कैसी है,तेरा सल्लू कैसा है,राजा बेटा कैसा है? बस और हमारे प्रशनोंके उत्तर मेंवह सिर्फ मुसकरा देती थी।पीडा से भरी उस मुस्कराहट को हमने बहुत हल्के ढंग से लिया था।मां ने जब भी अपनी इस संतति को लेअपने चिंता जताई तो सभी ने यह कहकर उनका मुंह बन्द कर दिया,"अरे थोडी बहुत ऊंच नीच तो हर लड़्की के साथ लगी रहती है।हर लड़्की को को थोड़े बहुत दबाबों का सामना तो करना पड_ता है।"जब -जब् उससे मिलना होता ,मुलाकात नितांत औपचारिक हुआ करती थी।न वह अपना मन खोलती और हम अपनी व्यस्तताओं के घेरे मेंकेवल सामाजिकता का निर्वाह भारत कर देते थे ।जीवन की उंच -नीच और संघर्षों से डरती बच्ची इतना चुपा गई थीकि कभी अपने को किसी के आगे खोलना उसने मुनासिब नही।समझा।कह भी लेती तो हम क्या तीर मार लेते ।उसकी जिन्दगी के किस-किस मौड़ पर हाथ लगा लेते ।नितांत गोपनीय क्षणोंों कादमन वह किस् -किस को सुनाती।क्या सबसे यह कहतीकि पेश मुझसे अपना सुख लूट्मुझे खोखला कर रहा है।मेरी मर्यादा की उसकी निगाह में कोइ कीमत नहीं है,मैं उसके हाथों क खिलौना भारत हूंजिससे जब चाहता है खेलता है और जब चाहता है पटक देता है।हां,उस भूखे भेड़िये ने संतति को अपने कब्जे में कर उसे े पागल करार दे दिया था।पुनिया की लिखित तहरीरें अब उस दरिन्दें के काम आ रही थी।
इन तर्कों के आधार पर उसे े पगली बता तलाक लेने की योजना बना ली।पहला कदम पुनिया को उसके मां-बप के घर पटकना था।संतति छीन ली गई,ढेरों आरोप लगाये गयेऔर बहुत कम बोलने बाली पुनिया को कोर्ट -कचहरी में ला खडा किया गया।बूढे मां-बाप सीमित साधनों में इस जंग के मोहरे बन गयेऔर पुनिया इतनी थुक्क्म -फजीहत के बाद भी इक टूटी आशा लिये रहीशायद मेरा पति, मेरा देवतामुझे अपने घर के एक कोने मेंपडा रहने देगा,जिससे मे री जिन्दगी गुजर जायेगी।पर कहां हो पाया ये सब?इस लम्बी लडाई में सब अपना- अपना हित देख ते रहे।सम्बन्धी अपनी सुरक्षा के लिये चिंतित थे,सबको लग रहा था कहीं यह आफत हम पर न आजाये।एक दो जो हिम्मत जुटा कर खडे थे,ढेरो6 आलोचनाओं का शिकार होकर बार-बार गिरते मनोबल के साथ दूसरी पंक्ति में मिलने को तैयार हो जाते थे।किस मुशकिल से संभली थी सारी स्थितियां।

अथक प्रयासों के बाद पुनिया के हाथ ्केबल इस जंजाल से मुक्ति लगी थी।उसे खुश होना चाहिये था,पर इतनाकुन्द मन और थका शरीर लिये उससे खुश भी नहीं हुआ गया।जिस दिन सम्बन्धों के टुटने के समाचार पर सरकारी स्टाम्प लगी,पुनिया को अतीत रह -रह याद आया था।पुनिया ने बिस्तर पकड लिया था। हम उसे तन का कष्ट मान डाक्टरोतक दौडते रहे,नये-नये खिलोनों से उसका मन बहलाते रहे,पर वह तो जैसे बिल्कुल चुपा गयी थी।कभी बाजार भी जाती तो अपनी टूटी ग्रहस्थीके अंगो-उपांगों की साज-सज्जा की मांग धीमे स्वर मे रखतीऔर हम बडेउसका तुरंत विरोध कर -वहां सब खत्म हो चुका है,अब उस विशय में कुछ मत सोचो-कह कर उसे मौन कर देते थे।पर क्या निर्देश देकर आन्दोलित मन में ठहराब लाया जा सका?अन्दर ही अन्दर घुलतीपुनिया एक दिं न बिना कुछ्कहे बीमारी की आड मेंहम सबको छोड् गयी,सबको मुक्त कर गयी।कितने चिंतित रहा करते थे हम उसके भविश्य के लिये,इसका क्या होगा कैसे होगा,पर उसने हमें कुछ भी कहने-सुनने के लिये मौका नहींदिया।जब तक रही,एक कठपुतली की तरह जिन्दा रही।कहा तो खालिया,जागो तो जाग गई सो जाओ तो सो गयी-सब कुछ रिमोट वत करती रही।

अब उसका बचपन रह-रह याद आता है।सिर मेंदूसरे बच्चे के द्वारा कंकड मारे जाने पर बहते खून को अपनी फ्राक में चुपाती पुनिया बडे होने तक अपनी इस प्रव्रति को भूली नहीं।जो भी दुख मिला उसे स्वयम मेंचिपा पीती गई।कभी लगता था स्थितियां इसी के कारण बिगड रही हैं,पर वह कभीमूल में थी ही नहीं।जो जो उसने चाहा,उसके लिये संघर्ष चाहिये था।आसुरी शक्तियों से संघर्ष तो विरले ही ले पाते हैंफिर उसने तो कभी अपनी छिपी शक्तियों को पहचाना ही नहीं।

क्यों किया पुनिया तुने ऐसा?एक बार तो उठ कर खडी हो जाती,कहींएक व्यक्ति केजीवन से हटने से सब कुछ्समाप्त हो जाता है?अपना मनोबल ऊंचा रखतीपुनिया,तो तुझे वह सब मिलता जिसकी तू हक्दार थी।तूने एक कदम पीछे हताया तो दुनिया ने तुझे सौ धक्के और दिये। मेरा मन बार-बार धिक्कारता है,क्यों मैंपुनिया में आत्मविश्वास नहीं जगा पाई?मेरी पुनिया तो चली गई,पर अब कोशिश है कोइ और बच्ची पुनिया सा जीवन बिताने पर मजबूर न हो।बिगड्ती स्थितियों मेंनियति को दोशी न ठहरा कर हाथ पैर चलाये जायें,सम्भव है कुछ प्राप्त हो जायेऔर प्राप्ति न भी हो तो कम से यह संतोश तो रहे कि हमने कोशिश तो की थी।पुनिया:मेरा भी वादा है तुझसे कि मैंअब किसी बच्ची को पुनिया बनने से रोकने की कोशिश करूगीं।यही मेरी श्रद्धांजलि होगी तेरे लिये।
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प्रेस कान्फ़्रेंस

 प्रेस कान्फ़्रेंस का हिस्सा बनिए.....अविनाश वाचस्पति जी के साथ...

http://bambuser.com/channel/avinashvachaspati/broadcast/1615305
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चैनल और अखबार वाले ‘धौनी’ का नाम भी सही नहीं लिखते?

चैनल और अखबार वाले ‘धौनी’ का नाम भी सही नहीं लिखते?: "देश के गिनती के अखबारों को छोड़कर लगभग सभी समाचार पत्र-पत्रिकाएं और और चौबीसो घंटे चलने वाले समाचार चैनल टीम इंडिया के कप्तान महेंद्रसिंह धौनी का नाम गलत लिखते हैं। दैनिक हिंदुस्तान महेंद्र सिंह धौनी का सही नाम लिखने वाला देश का एक अन्य अखबार बन गया है। इसके पहले दैनिक जागरण और प्रभात खबर ने महेंद्र सिंह धौनी का सही नाम लिखने का निर्णय किया था। संभव है सही नाम लिखने वालों में देश के कुछ और अखबार और पत्रिकाएं शामिल हों लेकिन अन्य पत्र-पत्रिकाएं सही नाम लिखना कब सिखेंगे? किसी भी नाम को गलत लिखना कहां तक सही है? क्या गलत लिखने को सही कहा जा सकता है?

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दिल्ली ब्लागर्स मीट : प्रेस कान्फ़्रेंस लाइव जबलपुर एवम इंदौर से

गिरीश बिल्लोरे मुकुल द्वारा जबलपुर से सुनने के लिये चटका लगाएं
                                  "लाइव" पर
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             इंदौर से अर्चना चावजी
                    
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प्रभासाक्षी ने बतला रहा है कि हिन्‍दी ब्‍लॉगर ........... दिल्‍ली में हिन्‍दी भवन में .......

प्रभासाक्षी

उपर क्लिक करें और पढ़-जान लें
चौंसठ हिन्‍दी ब्‍लॉगर एक साथ हिन्‍दी में सम्‍मान
मान लीजिए सच है बिल्‍कुल
हिन्‍दी भवन में  आकर
अपनी आंखों से देख लीजिए
आपको बतला रहे हैं
बालेन्‍दु शर्मा दाधीच 




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हिंदी ब्‍लॉगिंग में यह क्‍या हो रहा है ?

प्राय: दूसरों का विश्लेषण करना और उनके व्यक्तित्व को श्रेणियों में वर्गीकृत करना सरल होता है . अपने आप को सच्ची ईमानदारी के साथ उसी विश्लेषण के प्रकाश में देखना प्राय: कठिन मालूम पड़ता है , ऐसा मैंने कई बार महसूस किया है . उसी के विपरीत जब आप समूह को आयामित करने की दिशा आगे कदम बढ़ाते हैं तो आपके  कदमों के समानांतर हजारों-लाखों कदम अपने आप आगे बढ़ने लगते हैं , इसी को कहते हैं सामूहिक शक्ति . इसी सामूहिक शक्ति को ब्लॉग से जोड़कर हिंदी साहित्य निकेतन,परिकल्पना समूह और नुक्कड़ डॉट कॉम ने कल शनिवार 30 अप्रैल को एक बड़े आयोजन को मूर्त रूप देने हेतु संयुक्त रूप से अपने  कदम बढाएं और इसकी चर्चा सर्वत्र हो रही है , इसकी एक बानगी आप यहाँ देखिये :

आज तो मेरी ही चर्चा है चहुं ओर

दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण में आज दिनांक २९.०४.२०११ को प्रकाशित पीयूष पांडे का विस्तृत विवेचन हिंदी ब्लॉग सम्मलेन के बहाने 
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टिक ! टॉक !……टिक ! टॉक !……टिक ! टॉक !……

टिक ! टॉक !……टिक ! टॉक !……टिक ! टॉक !……
उलटी गिनती शुरू हो चुकी है…..
हिंदी ब्लागिंग और साहित्य के सफर में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव आने में अब चंद घंटे शेष हैं…. जहाँ दिल्ली ने दूर दूर से आने वाले मेहमानों के लिए पलक पाँवड़े बिछा रखे हैं वहीँ आने मेहमानों के दिल भी उछाह और उल्लास से लबरेज़ हो रहे हैं…. कुछ सवारियाँ चल चुकी हैं कुछ प्रयाण के लिए तैयार हैं….
इधर रवीन्द्र प्रभात जी की परिकल्पना, गिरिराज शरण अग्रवाल जी के संकल्प,  अविनाश वाचस्पति जी की प्रतिबद्धता और  नुक्कड़ समूह की अथक परिश्रम  ने से दिल्ली के हिंदी भवन हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार और ब्लागर्स के मिलन के लिए शिद्दत से तैयार और बेकरार है….
इसे कुछ दिन पहले हिंदी साहित्य और ब्लागिंग को लेकर हुए मंथन के धनात्मक प्रभाव का नमूना मानिए जब अंतरजाल, ब्लागिंग और हिंदी साहित्य एक ही मंच पर एक साथ सह अस्तित्व की परिकल्पना के साथ उपस्थिति दर्ज करा रहे होंगे.  यह समारोह अपने आप में अनूठा समारोह होगा जहाँ अकादमिक साहित्य और अंतर्जालीय अभिव्यक्ति के परस्पर हिंदी हित में एकजुट होने की नयी संभावनाएँ तलाशेगा…
इस समारोह में दूर दूर से सशरीर उपस्थित हो रहे तमाम ब्लागर और साहित्यकारों के अतिरिक्त जबलपुर से पधार रहे  स्वनामधन्य पॉडकास्टर श्री गिरीश जी बिल्लोरे द्वारा  अंतरजाल पर समारोह के जीवंत प्रसारण के माध्यम से देश विदेश से सैकड़ों ब्लागर समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाले हैं…
नई दिल्ली आई टी ओ के पास 11 दीन दयाल मार्ग पर हिंदी भवन के सभागार में दिनांक 30 अप्रैल को हिंदी साहित्यकारों एवं हिंदी ब्लागर्स का एक मंच पर उपस्थित होना निश्चित रूप से हिंदी के हित में एक ऐतिहासिक पड़ाव होगा…
दिल्ली और आसपास रहने वाले ब्लागर्स  के लिए तमाम ऐसे मित्रों से मिलने का स्वर्णिम अवसर होगा जिनकी आभासी छवि अपने दिलों में संजोये उन्हें पढते सुनते रहे हैं…
हम दिल्ली और एन सी आर वाले सभी ब्लॉगर और साहित्यकारों की तरफ से  बाहर से आने वाले सभी ब्लागर्स का हार्दिक स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि यह समारोह अपने आप में एक अनुपम और अविस्मरणीय छवि हमारे आपके दिलों में छोड़ जाएगा…
हम स्वागत करते हैं सभी आगंतुकों का… 
दिल्ली के बाहर से आने वाले मेहमानों को अवगत कराना चाहूँगा कि हिंदी भवन नयी दिल्ली स्टेशन से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर आई टी ओ के समीप स्थित है… यह तिलक ब्रिज रेलवे स्टेशन से पैदल दूरी पर है… फिर भी किसी प्रकार की समस्या अथवा द्विविधा की स्थिति में निम्न फोन नंबरों पर संपर्क करें…
अविनाश वाचस्पति- 9868166586
पद्म सिंह  -9716973262
रवीन्द्र प्रभात –09415272608

हिंदी ब्लॉगिंग पर दो पुस्तकें विशेष रूप से इस समारोह की शोभा होंगी जिनका विमोचन इस समारोह की विशेष उपलब्धि होगी… यह अपने आप में शायद पहली किताब होगी जिसकी लगभग 150 से अधिक प्रतियाँ प्रकाशित होने से पूर्व बिक चुकी हैं….

हम पुनःसभी आगंतुकों का स्वागत करते हैं … 


मुदित हुआ मन आँगन मधुमित पवन हुई है
सुनने को पदचाप हृदय गति थमी हुई है
स्वागत करते हैं हम सब दिल खोल आपका
राहों राहों अपलक आँखें जमी हुई हैं

आते हैं वो जिनसे ख्वाबों में मिलते थे
जिनसे पुष्प ह्रदय में नित नूतन खिलते थे
जिनके आभासी स्वरुप दिल में बसते थे
जिनसे दिल की कहते थे रोते हँसते थे….

पावन बेला मित्र मिलन की आ पहुंची है
आशाओं को पंख मिले,    छाती हुलसी है
स्वागत है स्वीकारो अब आतिथ्य हमारा
भूलो हँस कर जो कुछ कमी बची रहती है

…… आपका पद्म सिंह 9716973262
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दिल्ली जाने वाली सवारियाँ चल पड़ी है---ललित शर्मा

सुबह हो चुकी है,दिल्ली जाने वाली सवारियाँ चल पड़ी है। मित्रों से मिलने की खूशी में रात नींद कम ही आई। मिलते हैं कल सुबह दिल्ली में। जहाँ सजेगी महफ़िल दीवानों की, दिलवालों की। हम भी दिल ही लाए हैं आपके लिए। नकली नहीं, असली धड़कता हुआ दिल। जरा कान लगाएगें तो स्पंदन सुनाई देगा।
 अब चलते हैं और मिलते हैं ब्रेक के बाद सुबह निजामुद्दीन के नुक्कड़ पर, जहाँ होंगे पवन-चंदन जी, अजय झा जी, राजीव तनेजा जी, पद्म प्रतापसिंह, खुशदीप सहगल और भी जाने माने ब्लॉगर मित्र।
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हिंदी ब्लॉगिंग में ही नहीं संभवत: हिंदी साहित्य की पहली घटना


आपके सहयोग से आप स्‍वयं एक नए कीर्तिमान की ओर अग्रसर हैं, यह हिंदी ब्लॉगिंग में ही नहीं, हिंदी साहित्य में भी पहली घटना है कि प्रकाशन में जाने से पूर्व ही एक हिंदी किताब की १५० प्रतियां बिक गयी हैं.....बुकिंग का यह क्रम लगातार जारी है............. पढ़ने में नए पैदा होते  इस रुझान  से अब आप देखते रहिए, पाठकों का ही भला होता रहेगा ... जल्दी कीजिए एक और सुनहरा ऑफर आपके समक्ष है ....

मैं बड़ी हूँ पहले आऊंगी ......................मैं छोटी हूँ बाद में गाऊंगी
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फ़िर न कहना कि जादू नहीं दिखाया -- ललित शर्मा

घड़ी की टिक-टिक के साथ वह घड़ी भी समीप आ रही है जब परिकल्पना साकार होगी, जब ब्लॉगोत्सव महाकुंभ दिल्ली में ब्लॉगर आभासी दुनिया से बाहर निकल कर आपस में स्नेह भाव से भेंट करेंगे। छतीसगढ से दिल्ली जाने वाला स्पेसयान लांचिग प्लेटफ़ार्म पर तैनात कर दिया गया है। मुख्य पायलट बी एस पाबला जी ने को-पायलट जी के अवधिया के साथ स्पेसयान लांच करने की सभी प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली है, उल्टी गिनती चालु है, दिल्ली पहुंचने वाले यात्री अपनी सीट संभाल लें, फ़िर न कहना कि जादू नहीं दिखाया।

ब्लॉगर मिलन का अपुर्व आनंद गुंगे के गुड़ जैसा है। हमारा स्पेस शटल लैंड करेगा पवन चंदन जी की चौखट पे। वहीं से आगे का कार्यक्रम तय किया जाएगा। चौखट के लिए स्पेसयान रायपुर से चलेगा जिसमें हम, अल्पना देशपाण्डे जी, जी के अवधिया जी सवार होगें। उसके पश्चात दुर्ग से संजीव तिवारी जी सवार होगें। भाई अशोक बजाज जी अपने लाल बत्ती वाले यान में पहुंचगें। दिल्ली बहुत दूर है उनके लिए, जिन्होने अपने दिल के दरवाजे बंद कर रखे हैं। दिल्ली के लिए दिल के दरवाजे खूले रखना आवश्यक है।  आगे पढने के यहाँ पर क्लिक करें।

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पहचानो भई पहचानो : हम तीनों को पहचानो :कहां हैं हिंदी ब्‍लॉगर


मृदुभाषी हंसमुख

धनी हैं खुशमिजाजी के

कौन,

हम तो रहेंगे मौन

आप ही बतलायेंगे

हिंदी भवन कहां है

क्‍यों चर्चा में है

इन दिनों हिंदी ब्‍लॉगरों में

लगने वाला है महामेला

हिंदी ब्‍लॉगरों का


होने वाला है लोकार्पण

पुस्‍तक का

पुस्‍तक जो पहली है

नहीं पहेली है

हिंदी ब्‍लॉगिंग

अभिव्‍यक्ति की नई क्रांति

नाम है जिसका

सिखाएगी ब्‍लॉगिंग


पहले इस बात पर आते हैं

शनिवार 30 अप्रैल 2011 को

जब आयेंगे

तब मिलना चाहेंगे

उनसे जिनकी फोटो है


कार्यक्रम तो खूब सारे हैं

हिंदी साहित्‍य निकेतन

परिकल्‍पना समूह

नुक्‍कड़ डॉट कॉम

और डायमंड बुक्‍स

मिलेंगे ब्‍लॉगरों को पुरस्‍कार

खूब सारे ब्‍लॉगर होंगे

खूब सारी चर्चा होगी


देश से तो आयेंगे

विदेश से भी आयेंगे

इन्‍हें नहीं पहचान पाये

तो और किसको पहचानेंगे।


फोटो किसने खींची है

और मैं कौन हूं

ब्‍लॉग कौन सा मेरा है

जो बतलाएगा

सच्‍चा मित्र मेरा है।

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बाबाओं को भगवान बनाता हिंदी मीडिया !!

बाबाओं को भगवान बनाता हिंदी मीडिया !!: "अगर आप प्राइम टाइम पर खबर देखने बैठते हैं तो जाहिर है कि देश और दुनिया की गंभीर विषयों पर खबर के साथ चर्चा के अभिलाषी होते हैं मगर हाय रे हमारी हिंदी मीडिया जो वक्त बेवक्त या तो यह साबित करती है कि हिंदी के मीडिया की औकात क्या है या फिर हिंदी के पाठक और दर्शक को बताती और जताती रहती है कि जो दिखा रहा हूँ वही तुम्हारी औकात है.

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व्यंग्य पर मेरी 100 वी पोस्ट

मित्रों,
आज मेरे ब्लॉग "व्यंग्य" पर मैंने 100 वी पोस्ट लगाई है..... अनशन हो तो ऐसा हो....... आपकी प्रतिक्रिया आलोचना समालोचना की दरकार है।


प्रमोद ताम्बट
भोपाल
http://vyangya.blog.co.in/
http://www.vyangyalok.blogspot.com/
http://www.facebook.com/profile.php?id=1102162444
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हिंदी ब्‍लॉगरों : दिन तीन बाकी हैं : उसके बाद ताक धिना धिन

29अप्रैल 2011 को आयोजित हो रही है प्रेस कांफ्रेंस
उसके बाद ताक धिना धिन
बंटेंगे पुरस्‍कार हिंदी भवन में
देखेगा हिंदी विश्‍व सारा
हिंदी ब्‍लॉग जगत में
फैलेगा खूब उजियारा

करें प्रयोग चिट्ठा या चिट्ठाकार
बतलायें साथी
प्रेस कांफ्रेंस में
वे सभी आमंत्रित हैं
जो समाचार पत्र अथवा चैनल से हैं


स्‍थान, समय और तिथि की
पूरी जानकारी और
निमंत्रण के लिए संपर्क करें।


ताक धिना धिन
भई ताकधिनाधिन
ताक धिना ........



















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क्या जुआ हैं आज पुरस्कार

दो बरस पहले एक अलबेले नवेले पुरस्कार के साथ भारी भरकम राशि की घोषणा की गई। वोटिंग भी हुई। वोटों का डिब्बा लबालब भर गया। लगा कि पुरस्कार देने ही होंगे, पचास हजार कम नहीं होते। सो आनन फानन में रद्द कर दिए गए। पचास हजार का लाभ हो गया, पचास हजार देने नहीं पड़े, पूरे एक लाख की कमाई। सच है कि हिंदी ब्लॉगिंग में भरपूर कमाई है।  न देने का हल्ला मचने पर खूब प्रतिक्रियाएं आने लगीं और अलबेले पुरस्कार प्रदायक ने मौका ताड़ते ही कि मेरी पोस्ट, टिप्पणी व्यवस्था में अव्यवस्था फैल रही है, चिल्लाते हुए पुरस्कार निरस्त कर दिए। मतलब पब्लिसिटी भी ले ली और कानी कौड़ी का भी खर्च नहीं। मुफ्त के आम, गुठली भी मिलीं बिना दाम।

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खत्म हुई जद्दोजहद : स्वर्ग सिधार गये कालीचरण प्रेमी




भारतीय समाज का यह अजीब सच है। कल, रविवार 24 अप्रैल, 2011 की सुबह 07बजकर 40मिनट पर कर्नाटक के पुट्टपर्णी में हर प्रकार से सेवित परमपूज्य सत्य साईं बाबा ने शरीर त्यागा और इधर, उनके ठीक 18 घंटे बाद, रात 01बजकर 40मिनट पर उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद में ब्लड कैंसर से पीड़ित डाक-कर्मी कालीचरण प्रेमी अपने विभाग से अनुमोदित होकर आने वाली मेडिकल सहायता राशि की फाइल का इन्तजार करते-करते स्वर्ग सिधार गये। गाजियाबाद में हिण्डन नदी के तटवर्ती मोक्षधाम श्मशान घाट में आज 25 अप्रैल, 2011 को सुबह लगभग 11बजे अग्नि को समर्पित उनका शरीर पंचतत्त्व में विलीन हो गया। उनकी अन्तिम यात्रा में नगर के अनेक डाक-कर्मियों के अलावा सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ॰ कुँअर बेचैन, वरिष्ठ उपन्यासकार राकेश भारती, व्यंग्यकार सुभाष चन्दर, कथा-सागर के संपादक सुरंजन, कथाकार ओमप्रकाश कश्यप, महेश सक्सेना, सुरेन्द्र अरोड़ा, सुरेन्द्र गुप्ता, बलराम अग्रवाल आदि अनेक लेखक व पत्रकार शामिल थे। रुड़की से अविराम के संपादक उमेश महादोषी, इन्दौर से उपन्यासकार नन्दलाल भारती व कथाकार सुरेश शर्मा, दिल्ली से लघुकथा डॉट कॉम के सम्पादक व वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर काम्बोज हिमांशु, नुक्कड़ व अनेक हिंदी ब्लॉग्स के सम्पादक अविनाश वाचस्पति, सेतु साहित्य के सम्पादक सुभाष नीरव व अनेक साहित्यकारों ने कालीचरण प्रेमी के देहांत पर शोक जताया है तथा अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए हैं। ईश्वर श्री कालीचरण प्रेमी की पवित्र आत्मा को शांति प्रदान करे व शोक-संतप्त परिवार को यह वज्रपात सहने की शक्ति प्रदान करे।



साथीगण : बलराम अग्रवाल, सुभाष नीरव, रामेश्वर काम्बोज हिमांशु, ओमप्रकाश कश्यप, सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा, सुभाष चन्दर, महेश सक्सेना, अविनाश वाचस्पति, सुरेश यादव, नन्दलाल भारती, सुरेश शर्मा, एवं अन्य साहित्यिक मित्र
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बुधवार 28 अप्रैल को रवीन्‍द्र प्रभात जी एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण घोषणा करने वाले हैं : हिंदी ब्‍लॉगरों टकटकी बांधे रखिएगा


ध्‍यान रहे
खुल न जाए
क्‍या ?
अरे वही टकटकी
जरा सी निगाह हटी
और पोस्‍ट पब्लिश हुई।

इसलिए नजर मत घुमाइयेगा
क्‍योंकि रवीन्‍द्र जी जो बतलायेंगे
आप पूरा घूम जायेंगे
पूरा घूम जायें
परंतु नजर मत घुमाइयेगा
नजरें जो घूम गईं तो ...

इतिहास में नाम कैसे शामिल होगा
अब हिंदी ब्‍लॉगरों को एक
महामौका दिया जा रहा है
लेकिन मौके की मरम्‍मत
करेंगे प्रभात जी
चाहें करें रात को
अथवा प्रभात को।

पहले ब्‍लॉग खोलें
फिर मेल भेजें
मैं क्‍यूं बतला रहा हूं
चुप हो जाता हूं
रवीन्‍द्र भाई आ रहे हैं
टकटकी बांधे रखिएगा
देखिए खुल न जाए
अरे वही ....

रहस्‍य यह घना है
इसलिए ही बुना है
रहस्‍य खुलना नहीं चाहिए
वे आपको बतलायेंगे
कि आप इतिहास में
कैसे समाविष्‍ट हो पायेंगे
इस बार धन भी नहीं लिया जायेगा
बस आप अपने मन की बतलाइयेगा
जल्‍दी से रेल पकड़कर
न पकड़ पायें तो लटककर

हिंदी साहित्‍य निकेतन, बिजनौर
चले आइयेगा
इतिहास आपसे ही लिखवायेंगे
आपका नाम आपसे ही जुड़वायेंगे
यह सब रवीन्‍द्र प्रभात जी ही बतलायेंगे।

आपसे ही इतिहास लिखवायेंगे
रवीन्‍द्र प्रभात जी बतलायेंगे।

मैं तो कयास लगा रहा हूं
यूं ही गुनगुना रहा हूं
आप पोस्‍टें सीरीयस पढ़ पढ़कर
बोर हो चुके हैं
इसलिए रहस्‍य की बोरी
एक और खुलवा रहा हूं
जब बोरी खुले
आप मौजूद रहिएगा
फिर मत कहिएगा

मोदक सारे बंट गए।
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"मेरा आमन्त्रण भी स्वीकार करें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


आमन्त्रण 

"परिकल्पना" से साभार!

आप भी आईये और अपने परिजनों को भी साथ लाईये

हिंदी चिट्ठाकारों का महासम्मलेन 


सम्मानित चिट्ठाकार वन्धुओं,

     जैसा की आप सभी को विदित है की आगामी ३० अप्रैल को हिंदी भवन, विष्णु दिगंबर मार्ग, नयी दिल्ली में हिंदी ब्लॉग जगत का वहु प्रतीक्षित परिकल्पना सम्मान-२०१० का महत्वपूर्ण आयोजन है,साथ ही इस अवसर पर  हिंदी चिट्ठाकारिता से संदर्भित  एक वृहद् और वहु आयामी पुस्तक (हिंदी ब्लॉगिंग : अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति)का लोकार्पण भी सुनिश्चित है, परिकल्पना समूह की नयी त्रैमासिक पत्रिका वटवृक्ष तथा  मेरा नया उपन्यास ताकि बचा रहे लोकतंत्र का भी लोकार्पण होना है .......पहली बार इस महा आयोजन में समाज के प्रत्येक क्षेत्र के विशिष्ट अतिथियों का समागम हो रहा है .....

परिकल्पना परिवार की और से यह खुला आमंत्रण हिंदी के समस्त चिट्ठाकारों के लिए है...किन्तु दिल्ली के आसपास के ब्लॉगर गण के लिए विशेष है क्योंकि दिन है शनिवार और दूसरे दिन भी अवकाश , इसलिए कोई बहाना नहीं ....आप भी आईये और अपने परिजनों को भी साथ लाईये .....आप आयेंगे तो आयोजन से जुड़े समस्त सदस्यों का  उत्साह वर्द्धन होगा !  

कार्यक्रम से संवंधित विशेष जानकारी निम्नवत है :

इस कार्यक्रम में विमर्श,परिचर्चाएँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र होंगे। पूरे कार्यक्रम का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के माध्यम से पूरे विश्व में किया जाएगा। आप इस कार्यक्रम का आनंद अपने इंटरनेट भी उस दिन ले पायेंगे। जिसकी रिकार्डिंग बाद में भी नेट पर ही मौजूद रहेगी। इंटरनेट पर उपस्थिति को भी आपकी मौजूदगी माना जायेगा। पर यह गिनती दिल्‍ली-एनसीआर और देश से बाहर वालों के लिए ही लागू होगी।  कार्यक्रम का विवरण निम्नवत हैः
दिन व समयःशनिवार 30 अप्रैल 2011, दोपहर 3 बजे से रात्रि‍ 8.30 बजे तक।
रात्रि‍ 8 .30 बजे भोजन।
स्थानःहिंदी भवन , विष्‍णु दिगम्‍बर मार्ग, नई दिल्ली-110002

हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान-२०१०


उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर हिन्दी ब्लॉगिंग के उत्‍थान में अविस्मरणीय योगदान हेतु उपस्थित 51 ब्लॉगरों को मोमेंटो, सम्मान पत्र, पुस्तकें, शॉल और एक निश्चित धनराशि के साथ सम्मानित करने की योजना है।

सम्मानित किये जाने वाले ब्लॉगरों का विवरण -

1.         वर्ष का श्रेष्ठ नन्हा ब्लॉगर - अक्षिता पाखी, पोर्टब्लेयर
2.         वर्ष के श्रेष्ठ कार्टूनिस्ट - श्री काजल कुमार, दिल्ली
3.         वर्ष की श्रेष्ठ कथा लेखिका - श्रीमती निर्मला कपिला, नांगल (पंजाब)
4.         वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान कथा लेखक - डॉ. अरविन्द मिश्र, वाराणसी
5.         वर्ष की श्रेष्ठ संस्मरण लेखिका - श्रीमती सरस्वती प्रसाद, पुणे
6.         वर्ष के श्रेष्ठ लेखक - श्री रवि रतलामी, भोपाल
7.         वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृतान्त) - श्रीमती शिखा वार्ष्णेय, लंदन
8.         वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृतान्त) - श्री मनोज कुमार, कोलकाता
9.         वर्ष के श्रेष्ठ चित्रकार - श्रीमती अल्पना देशपांडे, रायपुर
10.       वर्ष के श्रेष्ठ हिन्दी प्रचारक - श्री शास्त्री जे.सी. फिलिप, कोच्ची, केरल 
11.       वर्ष की श्रेष्ठ कवयित्री - श्रीमती रश्मि प्रभा, पुणे
12.       वर्ष के श्रेष्ठ कवि - श्री दिवि‍क रमेश, दिल्ली
13.       वर्ष की श्रेष्ठ सह लेखिका - सुश्री शमा कश्यप, पुणे
14.       वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार - श्री अविनाश वाचस्पति, दिल्ली
15.       वर्ष की श्रेष्ठ युवा गायिका - सुश्री मालविका, बैंगलोर
16.       वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक - श्री संजीव तिवारी, दुर्ग (म. प्र. )
17.       वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय कवि - श्री एम. वर्मा, वाराणसी
18.       वर्ष के श्रेष्ठ गजलकार - श्री दिगम्बर नासवा, दुबई
19.       वर्ष के श्रेष्ठ कवि (वाचन) - श्री अनुराग शर्मा, पिट्सबर्ग अमेरिका
20.       वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका - श्रीमती प्रीति मेहता, सूरत
21.       वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक - श्री दीपक मशाल, लंदन
22.       वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार - श्रीमती संगीता स्वरूप, दिल्ली
23.       वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार - श्री हिमांशु पाण्डेय, सकलडीहा (यू.पी.)
24-25-26.  वर्ष की श्रेष्ठ उदीयमान गायिका – खुशबू/अपराजिता/इशिता, पटना (संयुक्त रूप से)
27.       वर्ष के श्रेष्ठ बाल साहित्यकार - श्री जाकिर अली 'रजनीश', लखनऊ
28.       वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार  (आंचलिक) - श्री ललित शर्मा, रायपुर
29.       वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (गायन) - श्री राजेन्द्र स्वर्णकार, बीकानेर, राजस्थान
30-31.  वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार - डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक', खटीमा एवं आचार्य संजीव वर्मा सलिल,       भोपाल (संयुक्त रूप से)
32.       वर्ष की श्रेष्ठ देशभक्ति पोस्ट - कारगिल के शहीदों के प्रति ( श्री पवन चंदन)
33.       वर्ष की श्रेष्ठ व्यंग्य पोस्ट - झोलाछाप डॉक्टर (श्री राजीव तनेजा)
34.       वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि - श्री ओम आर्य, सीतामढ़ी बिहार
35.       वर्ष के श्रेष्ठ विचारक - श्री जी.के. अवधिया, रायपुर
36.       वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक - श्री गिरीश पंकज, रायपुर
37.       वर्ष की श्रेष्ठ महिला चिन्तक - श्रीमती नीलम प्रभा, पटना 
38.       वर्ष के श्रेष्ठ सहयोगी - श्री रणधीर सिंह सुमन, बाराबंकी
39.       वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (पुरूष) – डॉ. सुभाष राय, लखनऊ  (उ0प्र0)
40.       वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (महिला) - श्रीमती संगीता पुरी, धनबाद
41.       वर्ष के श्रेष्ठ तकनीकी ब्लॉगर - श्री विनय प्रजापति, अहमदाबाद
42.       वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लॉगर - श्री खुशदीप सहगल, दिल्ली
43.       वर्ष के श्रेष्ठ नवोदित ब्लॉगर - श्री राम त्यागी, शिकागो अमेरिका
44.       वर्ष के श्रेष्ठ युवा पत्रकार - श्री मुकेश चन्द्र, दिल्ली
45.       वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लॉगर - श्री ज्ञानदत्त पांडेय, इलाहाबाद
46.       वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग शुभचिंतक - श्री सुमन सिन्हा, पटना
47.       वर्ष की श्रेष्ठ महिला ब्लॉगर - श्रीमती स्वप्न मंजूषा 'अदा', अटोरियो कनाडा
48.       वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉगर - श्री समीर लाल 'समीर', टोरंटो कनाडा
49.       वर्ष की श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट - भविष्य का यथार्थ (लेखक - जिशान हैदर जैदी)
50.       वर्ष की श्रेष्ठ प्रस्तुति - कैप्टन मृगांक नंदन एण्ड टीम, पुणे
51.       वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (हिन्दी चिट्ठाकारी विषयक पोस्ट) - श्री प्रमोद ताम्बट, भोपाल 


हिन्‍दी ब्‍लॉग प्रतिभा सम्‍मान-२०११

इसके अंतर्गत ग्यारह ब्लॉगरों के नाम तय किये गए हैं , जिन्हें हिंदी ब्लॉगिंग में 
दिए जा रहे विशेष योगदान के लिए हिन्‍दी ब्‍लॉग प्रतिभा सम्‍मान प्रदान किया जायेगा : -

(१)     श्री श्रीश शर्मा (ई-पंडित), तकनीकी विशेषज्ञ, यमुनानगर  (हरियाणा)
(२)   श्री कनिष्क कश्यप, संचालक ब्लॉगप्रहरी, दिल्ली 
(३)   श्री शाहनवाज़ सिद्दिकी, तकनीकी संपादक, हमारीवाणी, दिल्ली
(४)   श्री जय कुमार झा, सामाजिक जन चेतना को ब्लॉगिंग से जोड़ने वाले ब्लॉगर, दिल्ली
(५)   श्री सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी, महात्मा गांधी हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा
(६)   श्री अजय कुमार झा, मीडिया चर्चा से रूबरू कराने वाले ब्लॉगर, दिल्ली
(७)   श्री रविन्द्र पुंज, तकनीकी विशेषज्ञ, यमुनानगर (हरियाणा)
(८)   श्री रतन सिंह शेखावत, तकनीकी विशेषज्ञ, फरीदाबाद (हरियाणा )
(९)   श्री गिरीश बिल्लौरे 'मुकुल', वेबकास्ट एवं पॉडकास्‍ट विशेषज्ञ, जबलपुर
(१०) श्री पद्म सिंह, तकनीकी विशेषज्ञ, दिल्ली
(११) सुश्री गीताश्री, नारी विषयक लेखिका, दि‍ल्ली

हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में इनके योगदान को चिन्हित करने के लिए हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन और नुक्‍कड़ डॉट कॉम की ओर से हिन्‍दी ब्‍लॉग प्रतिभा सम्‍मान आरंभ किया गया है।
हिन्‍दी ब्लॉग की दुनिया के हस्ताक्षरों से मिलने और कार्यक्रमों का आनंद उठाने के लिए आपका स्‍वागत है 
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