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मीडिया पर केंद्रित रचना क्रम का अगला अंक, रचनाएं आमंत्रित

मीडिया पर केंद्रित रचना क्रम का अगला अंक, रचनाएं आमंत्रित: "हिंदी की साहित्यिक पत्रिका रचना क्रम के यूं तो अभी दो ही अंक प्रकाशित हुए हैं। लेकिन इन्हीं दो अंकों के जरिए साहित्यिक पाठकों के बीच रचनाक्रम ने जो उपस्थिति बनाई है, साहित्य की विदाई के कथित दौर में संतोष का विषय है। पाठकों का रचनाक्रम को जो सहयोग मिल रहा है, वह रचनाक्रम के प्रकाशक और संपादक अशोक मिश्र की रचनाधर्मिता और संपादकीय दृष्टि को बेहतर बनाने एवं पत्रिका साहित्यिक तौर पर पाठकोपयोगी बनाने में मदद देगा।

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पत्रकारिता अब क्यों नहीं रही एक आदर्श कॅरियर का विकल्प...?

पत्रकारिता अब क्यों नहीं रही एक आदर्श कॅरियर का विकल्प...?: "अगर आप स्कूल या कॉलेज के बच्चों से उनके कॅरियर गोल को लेकर सवाल करें तो आप ये जानकर हैरान व दुखी रह जायेंगे कि कोई भी बच्चा पत्रकार नहीं बनना चाहता. कोई बच्चा ये नहीं कहेगा कि वो एक पत्रकार बनने का सपना देख रहा है. कोई छात्र ये कहने का साहस नहीं जुटा पाएगा कि वो मीडिया लाइन में आना चाहता है. अगर कोई कुछ बनना चाहता है तो पत्रकार व नेता को छोड़कर. वह इंजीनियर बनना चाहता है, वह डॉक्टर बनना चाहता है, वह बैंक में बाबू बनना चाहता है, वह आईएएस बनना चाहता है, वह शिक्षक बनना चाहता है, पर एक पत्रकार? कभी नहीं! आखिर क्या वजहें हैं इसकी?

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आओ साग बनाएं, खाएं और खिलाएं ।

आओ साग बनाएं, खाएं और खिलाएं । 

वैसे तो बासा कुछ नहीं खाते,
               सुबह का बना रात को फैंक आते।
पर जब बात आये साग की,
               तो दो-दो दिन का एडवांस बनाते।।  आओ साग बनाएं.....

फ्री के भाव मिलता है,
               जेब पर ज्‍यादा बोझ नहीं पड़ता है।
बनाते हुए जब पड़ता है रिड़कना,
               तो फ्री में कसरत हो जाये।। आओ साग बनाएं.....

मक्‍की की रोटी हो,
               तो बिन साग लगे बेसवाद।
नानी के घर जाना हो,
               तो साग जरूर मिलना चाहिए वहां।। आओ साग बनाएं.....

अगर पड़ौसी के भी बना हो,               
               तो मांग कर भी ले आते हैं साग।
शादी में भी सबसे पहले अब लोग,
               देखते साग की स्‍टॉल।। आओ साग बनाएं.....
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एलेक्सा रैंकिंग और हिंदी ब्लॉग्स

एलेक्सा रैंकिंग विश्व में वेबसाइट की रैंकिंग में सबसे बेहतर मानी जाती है। इसकी शुरुआत 1996 में हुई थी तथा इसका संचालन अमेज़न.कॉम के द्वारा किया जाता है।एलेक्सा किसी भी ब्लॉग / साईट की ना केवल विश्व रैंकिंग दिखता है बल्कि साथ ही साथ क्षेत्रीय रैंकिंग भी दिखाता है। यह रैंकिंग ना केवल इस बात पर निर्भर करती है कि किस साईट / ब्लॉग पर कितने लोगो ने विज़िट किया, बल्कि यह भी देखा जाता है कि विज़िटर / पाठक कहाँ से आया था, कितनी देर तक साईट / ब्लॉग पर रुका, कितने पृष्ठ खोले इत्यादि। लेकिन यह सर्च इंजिन बोट के हिट्स की गिनती नहीं करता है। इसके साथ-साथ रैंकिंग पर अच्छे साईट लिंक का भी प्रभाव पढता है, अर्थात आपके ब्लॉग / साईट का लिंक कितनी अच्छी रैंकिंग वाली साइट्स / ब्लॉग्स में साझा है!

साथ ही आप इसके द्वारा अपने पाठकों के प्रवाह को भी जांच सकते हैं, अर्थात किस महीने / सप्ताह / दिन में पाठकों का प्रवाह कैसा रहा।हालाँकि सप्ताह दर सप्ताह की जानकारी केवल एक लाख से नीचे की रैंकिंग वाले ब्लॉग / साईट को ही दी जाती है, इसी तरह हर दिन की जानकारी 10,000  सी नीचे की रैंकिंग वाले ब्लॉग / साईट को ही उपलब्ध कराई जाती है।

एलेक्सा के मुख्य प्रष्ट पर 3 माह की रैंकिंग दर्शाई जाती है तथा "Get Details" पर क्लिक करने पर आप इस रैंकिंग को पिछले महीने / सप्ताह / दिन इत्यादि के साथ जाँच सकते हैं। इस पृष्ठ पर रैंकिंग के साथ-साथ ब्लॉग / साईट के पाठकों का विश्व के पाठकों की तुलना में अनुपात, उनके द्वारा खोले गए पृष्ठ, हर पाठक द्वारा खोले गए पृष्ठ का प्रतिशत, कितने पाठक पहले ही पृष्ठ से वापस चले गए, पाठक कितनी देर ब्लॉग / साईट पर ठहरे तथा कितने पाठक सर्च इंजन से आये जैसे आंकड़े उपलब्ध होते हैं।इसके अलावा आप अपने ब्लॉग / साईट के आंकड़ों की दुसरे ब्लॉग / साईट के साथ तुलना भी कर सकते हैं।

उसके नीचे आपके ब्लॉग / साईट को खुलने में औसत समय तथा क्षेत्रीय रैंकिंग को दर्शाया जाता है, साथ ही आपके ब्लॉग / साईट के पाठकों के बारे में बताने की कोशिश की जाती है तथा आपके ब्लॉग / साईट को किस-किस कीवर्ड (Keyword) के द्वारा खोजा जाता है, इसकी भी जानकारी दी जाती है। एलेक्सा पर इसके अलावा और भी बहुत से बेहतरीन फीचर्स हैं, आप स्वयं भी इसकी जांच करके देखिये।




विश्व की टॉप रैंक वाली कुछ साईट हैं:


गूगलरैंक 1
फेसबुकरैंक 2
यु ट्यूबरैंक 3
याहू रैंक 4
ब्लॉगर रैंक 5
बैदू (baidu.com)रैंक 6
विकीपीडिया रैंक 7
विंडो लाइव रैंक 8
ट्विटररैंक 9
QQ.comरैंक 10
MSN.com रैंक 11
गूगल इंडिया रैंक 15
लिंकेडीन रैंक 16
अमेज़नरैंक 17
वर्डप्रेसरैंक 18


अब कोशिश करता हूँ 6 लाख तक की रैंकिंग वाले कुछ ब्लॉग्स की विश्व तथा भारतीय औसत एलेक्सा रैंकिंग (3 माह) से रु-बरु करवाने की, इनमें कुछ सामूहिक ब्लॉग्स भी शामिल हैं। (समय के साथ इसमें परिवार्तान आ सकता है)




ब्लॉग्स (विश्व रैंकिंग)(भारतीय रैंकिंग)
1.

हिन्दयुग्म

303,92832,039
2.

 नुक्कड़

314,86228,755
3.

महाजाल357,68029,677
4.

ZEAL358,33144,540
5.

देशनामा374,34638,614
6.

तस्लीम384,18740,379

7.

परिकल्पना

408,49344,606

8.जनोक्ति

424,43339,105
9.

हिंदी टेक ब्लॉग426,60341,593
10.

 नज़रिया

466,65967,124
11.

छींटें और बौछारें507,63842,542
12.

ज्ञान दर्पण519,24445,954
13.

प्रेम रस

547,60560,725
14.

क़स्‍बा 572,39851,459

इस सूचि को बनाने के लिए मैंने तक़रीबन 100-125 हिंदी ब्लॉग्स की रैंकिंग की जाँच की है। अगर भूलवश आपका ब्लॉग इसमें आने से छूट गया है तो कृपया सूचित कर दें, उसे भी शामिल कर दिया जाएगा।



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संगीता जी ने सजाई है गीता बेहद मनमोहक स्‍वरूप चर्चा का : वंदना जी खूब खुश हैं आज, कोई मिल गया

खुश तो सब हैं
कुछ अब हैं
कुछ तब होंगे
जब होगी
उनकी चर्चा

हम सदैव
रहते हैं खुश
किसी की भी
हो  चर्चा

मिलती है टिप्‍पणी
तो खुशी होती है
नहीं मिलती है
तो खुशी होती है

पसंद का
नहीं है चक्‍कर यहां
नहीं बनता है कोई
घनचक्‍कर यहां

पढ़ते हैं
पढ़ाते हैं
अच्‍छे विमर्श
सदा मन भाते हैं

संगीता जी ने सजाई है
मन सबके ही भाई है
लिंक सारे पढ़ लेना
मन आए तो
उन पर टिप्‍पणी
अवश्‍य कर देना।

कुछ कहना चाहते हैं तो यहां कहें रास्‍ता यह है
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हिंदी पत्रकार या न्यूज़ रूम में राजनीति करने वाले पत्रकार

हिंदी पत्रकार या न्यूज़ रूम में राजनीति करने वाले पत्रकार: "आज यानी 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस है। कम से कम आज के दिन ये बहस ज़रूर होनी चाहिए थी कि आज हिंदी पत्रकारिता किस मोड़ पर है। ज़रूरी नहीं कि इस विषय पर चर्चा के लिए सुनामधन्य पत्रकार अपने न्यूज़ चैनलों पर आदर्श पैकेजिंग ड्यूरेशन के तहत 90 सेकेंड की स्टोरी ही दिखाते या अधपके बालों वालों धुरंधरों को बुलाकर बौद्धिक जुगाली करते या फिर हिंदी पत्रकारिता की आड़ में अंग्रेज़ी पत्रकारिता को कम और पत्रकारों को ज़्यादो कोसते। टीवी वालों को क्या दोष दें।

बौद्धिक संपदा पर जन्मजात स्वयंसिद्ध अधिकार रखनेवाले प्रिंट के पत्रकारों ने भी डीसी, टीसी तो छोड़िए, सिंगल कॉलम भी इस दिवस की नहीं समझा। कहीं कोई चर्चा नहीं कि क्या सोचकर पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी और आज हम कर क्या रहे हैं। ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी, तकवी शकंर पिल्ले, राजेंद्र माथुर, सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन अज्ञेय की ज़माने की पत्रकारिता की कल्पना करना मूर्खता होगी।

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स्टार न्यूज़ के दीपक चौरसिया को अंग्रेजी नहीं आती!

स्टार न्यूज़ के दीपक चौरसिया को अंग्रेजी नहीं आती!: "दीपक चौरसिया को अंग्रेजी नहीं. स्टार न्यूज़ के संवाददाता मयूर पारीख को अंग्रेजी नहीं आती. स्टार न्यूज़ के प्रोड्यूसर और एडिटर साहब को अंग्रेजी नहीं आती.

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वेबकास्टर गिरीश बिल्लौरे से मोबाईल नम्बर पर सम्पर्क करें।

हर आम-ओ-खास को सूचित किया जाता है कि मशहूर पॉडकास्टर अब वेबकास्टर गिरीश बिल्लौरे इन्दौर में रास्ता भटक गए हैं। वे वहाँ बिटिया शिवानी का एडमिशन कराने गए हैं। ताऊ को ढूंढ रहे है, उनसे भी सम्पर्क नहीं हुआ है। इसलिए जो भी साथी उनकी मदद कर सकें, 94797-56905 मोबाईल नम्बर पर सम्पर्क करें।
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स्टार न्यूज़ के खिलाफ न्यूज़ चैनलों के गढ़ फिल्म सिटी में नुक्कड़ नाटक

स्टार न्यूज़ के खिलाफ न्यूज़ चैनलों के गढ़ फिल्म सिटी में नुक्कड़ नाटक: "रविवार 22 मई को स्टार न्यूज़ के दफ्तर से सामने एक नुक्कड़ नाटक हुआ था. नुक्कड़ नाटक Fight Against Corruption In Media: Justice 4 Sayema Sahar की मुहिम के तहत किया गया था. इस मुहिम का मकसद दोषियों को सजा दिलाना और सायमा सहर को इंसाफ दिलाना है. गौरतलब है कि सायमा सेहर ने स्टार न्यूज़ के मार्केटिंग हेड अविनाश पाण्डेय और गौतम शर्मा (अब इंडिया टीवी में ) पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

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17 दिन शेष है 18 वां दिन विशेष है



17 दिन शेष है  

और प्राप्त हो चुकी है अबतक 210  रचनाएँ 

शामिल हो चुके हैं 100 रचनाकार  

प्राप्त हो चुके हैं हर क्षेत्रों के 18 विशिष्ट व्यक्तियों के साक्षात्कार

और अनेकानेक शुभकामनाएं ....अनेकानेक प्यार

हमारा लक्ष्य है !

शामिल हो हर चिट्ठाकार...सबको मिले मान-सम्मान-आत्मसम्मान

और बने ब्लॉगिंग के इतिहास में एक नया कीर्तिमान !

क्या आप अभी तक शामिल नहीं हुए ?
देर किस बात की
भेज दीजिए- 
अपनी-अपनी विशिष्टता के अनुसार !
कुछ नया इस बार ! !

हमारा पता है :

( कम से कम दो रचनाएँ या किसी विशिष्ट व्यक्ति का साक्षात्कार अपने एक पासपोर्ट साईज के फोटोग्राफ के साथ संक्षिप्त परिचय भेजना न भूलें )

यहाँ किलिक करके देखिये परिकल्पना ब्लॉगोत्सव  का मंच
जिसे सजाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, 
हर कदम दृढ़ता के साथ बढाने की तैयारी है, क्योंकि- 

इस बार ब्लॉगोत्सव के इस मंच पर होगा ऐसा धमाल
की आप कहने पर हो जायेंगे मजबूर कि यार !
सचमुच हो गया कमाल !

संपादक मंडल का गठन हो गया है
निर्णायक मंडल का गठन प्रक्रिया में है
मगर अभी हम नहीं बताएँगे
क्योंकि ०१ जून के बाद आप स्वयं जान जायेंगे

खैर छोडिए.... अब ये पढ़िए
किसके मुख से फूटे हैं ये शब्द :

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अंतत: एंड्रायड हिन्दीमय हो ही गया :) हिन्दी ब्लागिंग की लाटरी

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बड़ी मुश्किल से विंडोज़ आधारित मोबाइल फ़ोन में हिन्दी की समस्या हल हुई ही थी कि बाज़ार  में एंड्रायड आधारित नए मोबाइल फ़ोन आने शुरू हो गए,  इन एंड्रायड मोबाइल ने हिन्दीभाषी ब्लागरों की दिक़्कतें फिर बढ़ा दी क्योंकि इनमें जहां एक ओर हिन्दी पढ़ने के लिए मिनी ओपेरा-5 ब्राउज़र से काम चलाना पड़ रहा था वहीं दूसरी तरफ हिन्दी में टिप्पणी करना तो संभव ही नहीं था.

पर अब वो दिन बीत गए (हालांकि लंबी-लंबी कहने में अभी काफी मेहनत है).

कुछ समय से मैं एक ऐसा मोबाइल लेने की सोच रहा था जिसमें कम से कम ये ख़ूबियों तो हों ही जैसे:- कम से कम 4 इंच का कैपेस्टिव टचस्क्रीन, WiFi व 3G, कम से कम 5MP कैमरा, उसमें एंड्रायड का नवीनतम संस्करण हो, कम से कम 16MB कार्ड की सुविधा हो, 1 GB का प्रोसेसर हो, 512 MB रैम व इतनी ही रोम, 512 MB internal memory, स्मार्ट-स्लीक व किसी अच्छे ब्रांड का हो, जिसपर हिन्दी साइट व हिन्दी मेल तो पढ़ ही सकूं….

मुझे
सोनी-एरिक्सन के एक्सपीरिया-आर्क में ये सभी ख़ूबियां तो मिली हीं, साथ ही कुछ चीज़ें तो मेरी आशा से भी अधिक मिलीं.  इसमें अंड्रायड का 2.3.2 संस्करण है. इसमें हिन्दी पढ़ने के लिए मिनी ओपेरा-5 ब्राउज़र की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसके अपने डिफ़ाल्ट ब्राउज़र में हिन्दी की सभी साइट बिना किसी हील-हुज्जत के आराम से पढ़ी जा सकती हैं लेकिन हिन्दी में टिप्पणी करना अभी भी  दूर की कौड़ी लगी क्योंकि इसमें अंग्रेज़ी के अलावा चाइनीज़ व जापानी कीबोर्ड की सुविधा तो है पर हिन्दी कीबोर्ड अभी भी नहीं है. 

हालांकि, यदि आप हिन्दी माध्यम चुनें तो सबकुछ अंग्रेज़ी के बजाय  हिन्दी में पढ़ा जा सकता है. कीबोर्ड से गूगल में raja लिखें तो यह हिंदी में ‘राजा’ शब्द वाले वाक्यों के विकल्प उपलब्ध करवा कर हिन्दी साइटें ढूंढ देता है.

हिन्दी में टिप्पणी करने के लिए इ-पंडित ब्लाग के
श्रीश बेंजवाल शर्मा का टचनागरी साफ़्टवेयर तो बस छा ही गया.
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ऊपर बाएं चित्र में एक्सपीरिया-आर्क पर टचनागरी का प्रयोग देखा जा सकता है. उसके वाद बस कापी कर टिप्पणी बाक्स में पेस्ट (यह रहा सबूत, दायां चित्र ) किया तो काम हो गया. भाई श्रीश जी का अनन्य आभार.

बस यदि यह कीबोर्ड कुछ और यूं निम्नत: व्यवस्थित कर दें कि इसे प्रयोग करते हुए स्क्रीन बार-बार ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं न करना पड़े तो बस बल्ले-बल्ले ही हो गई समझो :)
Clipboard01
(पोस्ट स्क्रिप्ट -31.5.2011)

यदि गूगल ट्रांस्लिट्रेशन या क्विलपैड जैसी साइट खोलें तो वर्चुअल कीबोर्ड एक्टीवेट नहीं होता है. लेकिन मैंने पाया कि अनूप शुक्ल जी की साइट पर पोस्ट के नीचे टिप्पणी बाक्स में टिप्पणी करने से पहले यदि " Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)" सक्षम कर दिया जाए तो वर्चुअल कीबोर्ड अपने आप ही एक्टीवेट हो जाता है और आप, 'भारत' लिखने के लिए 'bhaarat' टाइप कर हिन्दी में कनवर्ट करवा सकते हैं. इसके बाद इसे कापी कर पेस्ट करना भर बचता है.
(पोस्ट स्क्रिप्ट -1.6.2011) 
एंड्रायड मार्केट से "MultiLing keyboard"  डाउनलोड किया तो रही-सही क़सर भी पूरी हो गई. यह कीबोर्ड हिन्दी कीबोर्ड है. इसे इंस्टाल कर, किसी भी ब्लाग के टिप्पणी बाक्स में सीधे ही हिन्दी में टाइप किया जा सकता है. कापी पेस्ट की भी ज़रूरत जाती रही.

आज मैं पूरी तरह से कह सकता हूं कि  हां एंड्रायड अब पूरी तरह हिन्दी स्पोर्ट कर रहा है. हुर्रे :-))
-काजल कुमार
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एमएस वर्ड 2007 में कृतिदेव से यूनिकोड परिर्वतन का आसान तरीका

कम्‍प्‍यूटर पर हिन्‍दी में काम करने वाले बहुत से लोग अब भी कृतिदेव 10 फोंट पर काम करते हैं उसके बाद उसे ब्‍लॉग आदि के लिए आनलाईन फोंट कन्‍वर्टर से यूनिकोड में परिवर्तित करते हैं जिसमें बहुत से शब्‍द सही ढंग से रूपांतरित नहीं हो पाता और हमें एमएस वर्ड के रिप्‍लेस कमांड से उसे सुधारना होता है। इससे निजात पाने हेतु सीधे कृतिदेव 10 से एक कमांड द्वारा पूरी फाईल यूनिकोड में परिवर्तित करने हेतु मेक्रो का निर्माण किया जा चुका है। पिछले दिनों तकनीकि हिन्‍दी समूह से अनुनाद सिंह जी नें एमएस वर्ड के इस मैक्रो के पहले संस्करण के संबंध में जानकारी दी जिसे रवि भाई ने आगे बढ़ाया। रवि भाई नें पहले ही जानकारी दी है कि सिल कनवर्टर में भी इसके लिये मैक्रो है। यहॉं हम एमएस वर्ड में कृतिदेव 10 के लिए बनाए गए मैक्रो को आपके कम्‍प्‍यूटर में संस्‍थापित करने हेतु क्रमबद्ध जानकारी प्रदान कर रहे हैं -
वर्ड 2007 में व्यू – मैक्रो –  क्रिएट यहाँ मैक्रो नेम में आपको Macro2 डालना है और Edit  बटन दबाना है।  एक नया पेज खुलेगा जिसमें कर्सर  Macro2  की आरम्भिक लाइन पर जाकर रुकेगा। आपको कुछ इस प्रकार का टेक्स्ट दिखेगा-
आपको उपरोक्त टेक्स्ट  (Sub Macro2   से लेकर  End Sub तक का)  के स्थान पर  यह मैक्रो पेस्ट करना है - 
http://bit.ly/cO7i79 (इसे क्लिक करने पर एक फाईल डाउनलोड होगी उस फाईल को खोलें व उसमें दिये गये संपूर्ण टैक्‍स्‍ट  को सलेक्ट कर कापी कर लें इसे ही मैक्रो में पेस्ट करना है) पेस्ट  करने के बाद  'सेव' कर दीजिये (File --- save Normal)
अब अपने वर्ड में कोई कृतिदेव१०  डॉकुमेन्ट लोड कीजिये या कृतिदेव 10 में लिखा कोई वर्ड फाईल खोलिये जिसका  फॉन्ट बदलना है।  
फिर  वर्ड 2007 में व्यू – मैक्रो –  में जाइये। इसमें  Macro name के में Kritidev to Unicode 1 स्वत: आयेगा यहां  आपको Run  बटन दबाना है। 

देखिये आपके डॉकुमेन्ट का फॉन्ट बदल रहा होगा या बदल गया होगा। हो सकता है फोंट का आकार छोटा हो जिसे आप स्वेच्छानुसार बढ़ा सकते हैं। आफिस 2007 में क्रमिक रूप से उपरोक्तन विधि से यह बढि़या काम करता है, किन्तु कामा के स्थान पर कृति का '' अक्षर और कुछ अन्य बिन्दु परिवर्तित नहीं होते इसके लिए रवि भाई बतलाते हैं कि ‘दरअसल कृति का '' अंग्रेज़ी फ़ॉन्ट है. पूरे दस्तावेज को मंगल / एरियल यूनिकोड में बदल लें, फिर देखें.'   
जानकारी तकनीकि हिन्‍दी समूह से साभार
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अम्बिकानंद सहाय ने पत्रकारों की इज्जत बचा ली

अम्बिकानंद सहाय ने पत्रकारों की इज्जत बचा ली: "प्रभु चावला, वीर संघवी, बरखा दत्त और ऐसे ही कुछ और दलाल दोषित हो चुके दोहरे चेहरों की वजह से मीडिया की छवि भले मलीन हुई हो। लेकिन इस घनघोर और घटाटोप परिदृश्य में अंबिकानंद सहाय नाम का एक आदमी ऐसा भी निकला, जो मलीन होते मीडिया की भीड़ में हम सबके बीच रहते हुए भी बहुत अलग और बाकियों से आज कई गुना ज्यादा ऊंचा खड़ा दिखाई दे रहा है।

प्रभु चावला मीडिया में अपने आपको बहुत तुर्रमखां के रूप में पेश करते नहीं थकते थे। लेकिन रसूखदार, रंगीन और रसीले अमरसिंह के उनके सामने गें-गैं, फैं-फैं करते, लाचार, बेबस और दीन-हीन स्वरूप में करीब - करीब पूंछ हिलाते हुए नजर आते हैं। अमरसिंह धमकाते हैं,

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खबर जो हिंदी ब्‍लॉगिंग के लिए संजीवनी साबित हुई है आप भी पढ़ लीजिए

खबरें विस्‍तार से
छपीं जो अखबार में
कार्यक्रम 30 अप्रैल 2011 का
पुस्‍तक लोकार्पण और
सम्‍मान पुरस्‍कार अर्पण समारोह
हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग को दी नई ऊंचाईयां
आप भी ऊंचे आइये







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असामाजिक बनाती सुरों से दोस्ती....!



आये दिन बाज़ार में उतरने वाली नई तकनीक जीवन में क्या क्या बदलाव ला रही है यह तो हम सब समझ ही सकते हैं पर जो परिवर्तन सबसे ज्यादा नज़र आ रहा  है वो है असामाजिकता | यानि तकनीक के सीमा से ज्यादा इस्तेमाल ने कई तरह से हमारी सामाजिक सोच और साझे जीवन को प्रभावित किया है | खासकर  नई पीढ़ी  इन चीज़ों अपने जीवन में कुछ इस तरह से शामिल कर रही है कि समाज और परिवार तो दूर उन्हें  खुद  अपने  विषय में भी सोचने का समय नहीं है | पूरी  पोस्ट   यहाँ  पढ़ें ..

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एक हजार रुपये का मिलेगा एलपीजी घरेलू गैस सिलैंडर और पहचान लीजिए इस चित्र को


आपको अंदाजा तो होगा। चर्चा में भी है मामला। पर इतना महंगा हो जाएगा। इसका इल्‍म नहीं होगा। पर यह सच है कि घरेलू गैस सिलैंडर अब एक हजार रुपये का रिफिल किया जाया करेगा। जितना यह सच है, उतना सच यह भी है कि जो वस्‍तु बीते दिनों में सस्‍ती लग रही थी, वो उन दिनों में बहुत महंगी मानी गई थी और बहुत शोर मचाया गया था।
यह हाल प्रत्‍येक वस्‍तु का है। चाहे वो पेट्रोल हो, चीनी हो, चाय की पत्‍ती हो, एक कप चाय की कीमत हो, पैन हो, कलम हो, स्‍याही हो, बिजली की यूनिट हो, पानी की लिमिट हो, वैसे ऐसा भी नहीं है कि सब वस्‍तुएं महंगी ही लगती हैं। अब सस्‍ती वस्‍तुओं की सूची भी देख लीजिए। सैलरी सदा कम लगती है। सुख सदा कम लगता है। बस ये दो वस्‍तुएं ही गिना रहा हूं। बाकी आप टिप्‍पणियों में गिनवा दीजिए। सस्‍ती और महंगी दोनों।
भूल गए अब आप कि बात एलपीजी के घरेलू गैस सिलैंडर से शुरू हुई थी, जिसका मूल्‍य एक हजार रुपये हो रहा है। यह सपना नहीं, हकीकत है। पर ऐसे स्‍वप्‍नों को भी दु:स्‍वप्‍न ही कहा जाता है। वैसे महंगाई खुब खुश है। उसका विकास, देश का विकास भी है।
विकास सभी चाहते हैं। इधर टिप्‍पणियां कम हैं तो यह भी दुख का कारण है। पर इसके मूल में फेसबुक है। यह लिंक फेसबुक पर जितनी पसंद पा रहा है, टिप्‍पणियां पा रहा है। उतना यह पोस्‍ट नहीं। इससे फेसबुक तो खुश है परंतु ब्‍लॉग खुश नहीं है।
पर आपने अभी तक चित्र के बारे में नहीं बतलाया। इन दोनों चित्रों के मध्‍य 5 किलो का जो पैकेट रखा हुआ है। उसका मूल्‍य 50 वर्ष पहले क्‍या था, इसे आप बतलाइये, पूछ सकते हैं। मदद ले सकते हैं।
इसी तरह चित्र के दोनों ओर जो बैठे हुए हैं। उनके लिए भी मदद ले लेंगे। तो मुझे क्‍या पता चलेगा। इसलिए इसमें भी छूट है। पर चर्चा किस बात की हो रही है, इसमें कोई छूट नहीं है। चित्र किसने खींचा है, इसमें भी छूट नहीं है। पैकेट में क्‍या है, यूरिया है या ..... इसमें भी छूट नहीं है।
अब इसे इम्‍तहान भी मत मानिए।
पर बतला अवश्‍य दीजिए। परिणाम शीघ्र ही एक पुस्‍तक में आपके चित्र सहित प्रकाशित किए जाएंगे।
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अम्बिकानंद सहाय से अमर सिंह का डर

अम्बिकानंद सहाय से अमर सिंह का डर: "भारतीय राजनीति भगत सिंह से लेकर अमर सिंह तक की यात्रा तय कर चुका है। आज की राजनीति में व्यवसाय, सिनेमा, कॉरपोरेट दबाव समूहों और निजी हितों के घालमेल का जाल बदतर इरादों के लिए जितना बेहतर अमर सिंह बुन सकते हैं उतना शायद ही कोई राजनेता कर पाएगा। मानी हुई बात हो चली है कि अमर सिंह राजनीति में कॉरपोरेट लॉबिंग करने वालों के प्रतिनिधि हैं या कहें कि दलाल हैं। वो खुद भी मान चुके हैं कि वो एक दलाल हैं। कभी ऐसे तत्व राजनीति के बाहर ही अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल करते थे, लेकिन जबसे उन्हें ये अहसास हुआ कि वे खुद राजनीति के खिलाड़ी बन सकते हैं तो पर्दे के पीछे रहकर अभिनय करने को उन्होंने अस्वीकार करना शुरू कर दिया और सियासी रंगमंच पर अवतरित होकर अपनी प्रबंधकीय कलाओं की सड़ांध पसारने लगे।

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हिन्‍दी ब्‍लॉगर साथियों टिप्‍पणियां दो, टिप्‍पणियां नौ और टिप्‍पणियां नौ दो ग्‍यारह : फेसबुक पर हैं पाठक हजारों, सभी साथियों ब्‍लॉग पर भी पधारो

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और यहां
नौ दो ग्‍यारह

कहीं नहीं हैं बारह
देख लीजिए
जांच लीजिए
एक एक नेक पोस्‍ट

नेक मैं कह रहा हूं
आप क्‍या कहते हैं
टिप्‍पणियां क्‍यों
घट रही हैं
घटना नहीं
घटहां बन रही हैं

क्‍या कहना है आपका
विश्‍लेषण जनाब का
पढ़ नहीं रहे हैं
या नहीं भा रहे हैं
व्‍यंग्‍य

वैसे पसंद का
बटन दबा रहे हैं
फेसबुक पर वे
जिनकी ऊंगलियां
नहीं दे रही हैं दिखाई

वे भी तो हैं
पढ़ने वाले भाई
या हैं बहनें
पाठक सदा
सच्‍चे हैं गहने।

पसंद कर लेते हैं
फेसबुक पर
और टिप्‍पणी
देते हैं रहने।

देखा मुझे भी
फेसबुक पर
कर लिया पसंद
यूं तो सभी
हैं रजामंद
पर पसंद करने में
बहुत तीव्र
नहीं हैं मंद।
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नेता जी ज़िंदाबाद ! नेता जी ज़िंदाबाद !!


समय:-1980-81 के एक दिन की दोपहर
स्थान:-मुहल्लों में बसे शहर  जबलपुर का एक मुहल्ला 
                            नेता जी ज़िंदाबाद ! नेता जी ज़िंदाबाद !! ये ही आवाज़े मुहल्ले को आवाज़ों से भर रहे थे. कंजा भूरी सहित न जाने कित्ते शोहदों ने नेता जी को कंधे पर बारी बारी से ढोया.   पार्षदी का चुनाव जीतने के बाद हज़ूर मुहल्ले में पहली बार पधारे थे. यूं तो रात को भी आये , ऐसा सुना ऐसा कोई कह रहा था पर आज़ का आना उनका बिलकुल अलग तरीके का था. हर घर की देहरी पे राम जुहार करते कराते नेता जी को बाबूजी ने आशीर्वाद दिया –“बेटा, महेंद खूब तरक्की करो मुहल्ले की भी तरक्क़ी करो”
जी बाबूजी ... कह कर तपाक से बाबूजी के चरण छुए उसने .
बाजू वाले घर से ठाकुर राजू की अम्मा निकली :-“देख महेन, अब सारी नाली और कुलिया साफ़ होना चईये अब समझा तू ”
“हओ-अम्मा, जे तो ठीक है, पर तुम सब भी सुबह सफ़ाई वाले अक्कू को बोल दिया करो न माने तो बताना ”
राजू की अम्मा – ”ससुरा हमाई सुने तब न, अब तो तुम मुहल्ले के नेता बन गये हो, जो चाहोगे वो हो जायेगा”
महेन:-“अम्मा, बताओ क्या करूं.. ”
राजू की अम्मा गम्भीर होके बोली :-“ मैं कुछ नहीं मुहल्ले की नाली साफ़ करवान तुम्हारा काम समझे पार्षद हो गये हो मुंह चलाओ कि हो गया काम ”
     राजू की अम्मा की बात सुन कर मेरे बराबर खड़ा कंटर राजू एक आंख दबा के बोला:- राजू की अम्मा तो महेन को मुंह चला के नाली साफ़ करने की कह रई है बताओ पप्पू महेन कोई....? हा हा हा
        भारतीय प्रजातंत्र में नेता को आम वोटर आल-माईटी मानता है . ये सच है पर एक भय मुझे तभी से सालने लगा था कि जिस दिन जन नायक खुद को आल-माईटी मानने लगेगा उस दिन देश का क्या होगा ?
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समय:-साल 2010 के एक दिन की दोपहर
स्थान:-मुहल्लों में बसे शहर  जबलपुर का एक मुहल्ला 
                    तीस बरस बाद नेताजी बीस से पचास के हो गये हैं शरीर का भार पचास से एक सौ के ऊपर , हारते जीतते अब शायद किसी पद पर मनोनीत हुए मुहल्ले में अपनी सत्ता में पकड़ दिखाने आए. गेदे के फ़ूलों से सर-ओ-पा लदे महेंद इस बार बाबूजी को सिर्फ़ दूर से नमस्ते किया . राजू की अम्मा बोली :- कौन, बेटा महेन, का बन गये अब तुम, अरे देखो नाली साफ़ अब भी नईं होती. अरे तुम इधर तुम मूं (मुंह)चलाओ उधर नाली साफ़ .
महेन:- अरे अम्मा, अब हम भोपाल देखते हैं जे काम तुम पार्षद से कहो.
      अम्मा असमंजस से महेन की बात समझने की कोशिश कर रही थी कि महेंन आगे बढ़ गया काफ़िले के साथ. पता नहीं मुझे क्यों लग रहा है वो महेन पार्षद नहीं अर्थी से उठी चलती फ़िरती भीम काय गेंदे से लदी ... है
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फ़ैज़ और केदार जन्मशती अंतरराष्ट्रीय समारोह संपन्न

फ़ैज़ और केदार जन्मशती अंतरराष्ट्रीय समारोह संपन्न: "भिलाई । “मेरा बचपन बहुत तनहा बीता। मैं लगभग पाँच वर्ष की बच्ची थी जब अब्बू की गिरफ़्तारी हुई थी। मेरे ज़ेहन में वह मंजर आज भी ताज़ा है, मामा (माँ) के गुस्से का इज़हार, उनकी सिसकियाँ और अब्बू का उनको समझाना, मैं और मेरी बड़ी बहन सलीमा कमरे के एक कोने दुबकी हुईं, कारों के जाने की आवाज़ ये सब कहते हुये उनका गला रुँध आया। मेरे अब्बाजान यानी फ़ैज़ साहब पंजाबी थे और माँ अँग्रेज़। इस नाते अँग्रेजी मेरी मातृभाषा हुई और पंजाबी पितृभाषा। उर्दू कुछ मैंने सीखी है। पापा से हमेशा एक भीनी ख़ुशबू आती थी और मैंने कभी भी उन्हें बेतरतीब नहीं देखा। वे एक सलीक़ेमंद शायर थे। मैं शायरी नहीं करती क्योंकि फ़ैज़ के मयार तक भला कौन पहुँच सकता है।” फ़ैज़ साहब की सुपुत्री डॉ. मुनीज़ा हाश्मी (लाहौर-पाकिस्तान) ने अपना वक्तव्य देते हुए अपने बचपन की यादों से सभागार को द्रवित कर दिया। उन्होंने प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा 14-15 मई को इस्पात नगरी भिलाई में आयोजित फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ और केदारनाथ अग्रवाल जन्मशती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय समारोह के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने सभी हाज़रीन को लाहौर के फ़ैज-घर आने की दावत भी दी तथा संस्थान का शुक्रिया अदा किया। इसके पूर्व उन्होंने आयोजन का शुभारम्भ देश-विदेश के सैकड़ों वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति में मंगलदीप प्रज्ज्वलित कर एवं फ़ैज़ साहब के चित्र पर माल्यार्पण कर विधिवत उद्घाटन किया।

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द-फन और कफन


निर्णय लिया कि दफना दो। यह मलाल तो न रहेगा गोरे मन में कि काले रंग के आतंकवाद के प्रतीक को यूं ही घुलने मिलने के लिए छोड़ दिया। इसलिए सागर में द फन कर दिया। पानी में दफन करना पहली बार हुआ है। अमेरिका कई कीर्तिमान बना रहा है। इस बार का कीर्तिमान लादेन को दे दनादन दनदनाना ही नहीं बल्कि दफनाने का भी बनाया गया। गिनीज बुक वाले बुके लेकर ओबामा को तलाश रहे हैं। लेकिन ओबामा व्‍यस्‍त है। न बुक होना चाह रहा है, न बुके लेना चाह रहा है। पूरा पढ़ने के लिए क्लिक कीजिएगा

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इन्द्रधुनष


सुश्री नेहा शरद की वेब पत्रिका  
इन्द्रधुनष
पत्रिका का फ्लश वर्शन
http://indradhanushpatrika.com/indradhanush/index.html

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हिन्‍दी ब्‍लॉगरों इसे पढि़एगा पढ़ लें, तो टिप्‍पणी जरूर कीजिएगा : मामला बिगड़ते पर्यावरण का और बचपनीय क्रूरता का भी है

बचपन में बच्‍चासिर्फ रेल के पहिये ही नहींकितनी चींटियां जमीन पर चल रही हैंकितने मच्‍छर उड़ रहे हैंकितने कुत्‍ते भौंक रहे हैंकितनी मक्खियां हैंउन्‍हें मारने की कोशिश करता बचपनबचपन में क्रूरता का समावेश करता चलता है। वो गिनता तो है उन रोटियों को भी जिनसे वो अपने पेट की भूख मिटाता हैभाई बहनों को भी जिनके साथ रहता हैदोस्‍तों पड़ोसियों कोइन पर प्‍यार लुटाता हैमाता पिता कोहितैषियों को जिनसे असीम प्‍यार दुलार पाता है। देखता है उस इंसान के बारे में जो मुंह से धुंआ उगलता दिखलाई देता है। धुंआ सिर्फ धूम्रपान का ही नहीं, अपशब्‍दों की बारिश भी, जिनसे रोजाना रूबरू होता है। वहीं से सही-गलत सब सीखता बढ़ता रहता है। जबकि वो घट रहा होता है। दिन, शरीर के स्‍तर पर और वैचारिक स्‍तर पर बढ़ रहा होता है। अनुभवों के मायने में समृद्धत्‍व को प्राप्‍त हो रहा होता है। पर इस गिनती में कोई स्‍वार्थ नहीं होता। स्‍वार्थ से बचा रहे ऐसा नहीं होता।

यह अच्‍छा है तो मेरा हैमेरे भाई का हैमेरी बहन का हैमेरे मित्र का हैमेरे पिता का हैमाता का है और जो बुरा है वो तेरा हैकिसी अनजाने का  पूरा पढ़ने की जिज्ञासा पूर्ति के लिए यहां क्लिक कीजिए और जहां पहुंचें वहीं लिख आइयेगा
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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की समीक्षा जरूरी-अरविंद गौड़

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की समीक्षा जरूरी-अरविंद गौड़: "राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की स्थापना थियेटर के विकास और ट्रेनिंग देने के लिए हुई थी. लेकिन पिछले दस सालों में यहाँ से प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थी थियेटर करने की बजाये फिल्मों में चले जाते हैं. ऐसा वे इसलिए करते हैं क्योंकि थिएटर में संभावनाएं कम दिखती है. फिर फिल्म - टीवी की तरह ग्लैमर और एक्सपोजर भी नहीं. इसलिए थियेटर से काम सीख फिल्मों की तरह लोग रूख करते हैं. इसके लिए थियेटर आर्टिस्ट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इसके लिए सरकार की सांस्कृतिक नीतियाँ ज़िम्मेदार है.

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फ़ज़ल इमाम मल्लिक को ‘राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड’

खनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्रिका ‘सीमापुरी टाइम्स’ युवा लेखक व पत्रकार फ़ज़ल इमाम मल्लिक को उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड-२०११’ देने का फैसला लिया है। फ़ज़ल इमाम मल्लिक दिल्ली से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘जनसत्ता’ से जुड़े हैं। उन्होंने साहित्यिक पत्रिका ‘सनद’ और ‘ऋंखला’ का संपादन भी किया। इसके अलावा काव्य संग्रह ‘नवपल्लव’ और लघुकथा संग्रह ‘मुखौटों से परे’ का संपादन भी कर चुके हैं। दूरदर्शन के उर्दू चैनल से उन पर एक ख़ास कार्यक्रम ‘सिपाही सहाफत के’ प्रसारित भी हुआ है। सम्मान उन्हें दिल्ली के स्पीकर हॉल कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक समारोह में दिया जाएगा। समारोह जून के पहले हफ्ते में आयोजित किया गया है। अवार्ड के लिए विभिन्न क्षेत्रों से लोगो का चयन किया गया है। यह अवार्ड केंद्रीय कोयला मंत्री,भारत सरकार श्रीप्रकाश जायसवाल प्रदान करेंगे। फ़ज़ल इमाम मल्लिक के अलावा अवार्ड ग्रहण करने वाले प्रमुख लोगों में डॉ. ओ.पी.सिंह -पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य उ.प्र., डॉ.संजय महाजन- (स्वास्थ्य), सुश्री अलका लाम्बा-प्रेसिडेंट गो इंडिया संस्था- (समाज सेवा), डॉ.जगदीश गाँधी-प्रबंधक सी एम एस लखनऊ , श्री ओ.एस.यादव-प्रधानाचार्य केंद्रीय विधालय कानपूर (शिक्षा), श्री पंकज शुक्ल संपादक नई दुनिया- मुंबई , श्री चंडीदत्त शुक्ल-समाचार संपादक स्वाभिमान टाइम्स ,श्री अमलेंदु उपाध्याय-संपादक हस्तक्षेप.कॉम, सुश्री श्वेता रश्मि-प्रोडूसर महुआ न्यूज़ - (इलेक्ट्रानिक मीडिया) श्री पंकज चतुर्वेदी-संपादक नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली - (लेखन), श्री अमिताभ ठाकुर -(आईपीएस )-,श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच (तकनीक),श्री ललित गाँधी प्रेसिडेंट शातुरंजय ग्रुप , श्री सुनील सरदार संयोजक सत्य शोधक समाज (सामाजिक परिवर्तन),श्री राकेश राजपूत फिल्म अभिनेता (अभिनय),श्री एम.के.चौबे-महाप्रबंधक अदानी पॉवर प्रोजेक्ट राजस्थान - (बेस्ट मैनेजमेंट),श्री कमल कान्त तिवारी (बाल सेवा),श्री बिमलेश त्रिपाठी (साहित्य), तन्मय चतुर्वेदी-सा-रे-गा-मा-पा लिटिल चैम्प (टैलेंट हंट) शामिल है।

लखनऊ से विराज सोनी की रपट


नुक्‍कड़ परिवार की हार्दिक शुभकामनाएं। आजकल हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के सम्‍मानित होने की खबरें इफरात से आ रही हैं, जो कि निश्‍चय ही एक शुभ संकेत है।
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अन्‍नाभाई (मुन्‍नाभाई) का फेसबुक खाता खतरे में : दोबारा बनाने की हिम्‍मत नहीं है




खाता खतरे में
खाता जो फेसबुक है
नापसंद का बटन
सक्रिय करने के चक्‍कर में
फेसबुक को खतरे में
डाल दिया है।

अपने लगभग 3000 मित्रों से
अब नाता टूट रहा है
क्‍या यह किसी अशुभ का संकेत है
या कुछ शुभ होने वाला है।

मुन्‍नाभाई बना था एक दिन
फिर बना अन्‍नाभाई
अब लगता है
सिर्फ अविनाश वाचस्‍पति
ही रहेगा।

वैसे मेरा मानना है
जो होता है
सदा अच्‍छे के लिए होता है
मेरा न सही
किसी का तो अच्‍छा होगा ही
यह भी मुझे खुशी देता है।

मुझे दुख देना भगवान
यदि मुझे मिले दुख से
मिलता है किसी को सुख
तो मुझे अवश्‍य देना दुख।
नई नहीं हैं
पुरानी हैं पंक्तियां
पर सनातन हैं
मेरे संदर्भ में।

अगर मारा गया
जाल में फंस गया
तो दोबारा नहीं बनाऊंगा
फेसबुक पर नहीं फिर
मैं आऊंगा।

मुझे मेरे ब्‍लॉग पर
करते रहना संपर्क
भेजते रहना ई मेल
nukkadh@gmail.com पर
पहले avinashvachaspati@gmail.com
मेल का खाता
लबालब हुआ।

अब उससे ई मेल न जा पाती है
आ भी नहीं पाती
इसलिए ई पाती भेजें
nukkadh@gmail.com पर।


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अनिल अत्तरी दिल्ली ..इस तरह कि स्थिति से दिल्ली के सरकारी अस्तपाल निपटने में कितने सक्षम है ???




फिर लगी रोहिणी के अम्बेडकर हॉस्पिटल में आग... पी.डब्लू.डी. के इलेक्ट्रिकल विंग के पास ट्रांसफार्मर से अस्पताल को जोड़ने वाली बिजली की मैन लाइन आग लगने से पूरे अस्तपाल कि बिजली गुल है..जिसके जल्द ठीक होने के आसार नहीं है..लिहाज़ा अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल है...मरीजों को दुसरे अस्तपाल में शिफ्ट किया जा रहा है...खुद अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बिजली बहाल होने में 10 घंटे लग सकतें है...रोहिणी के इस अस्पताल में आये दिन होने वाली आग लगने कि घटनाये और चोरियां चौकाने वाली है...
रोहिणी के अम्बेकर अस्पताल में आज फिर आग लगी...इस बार पी.डब्लू.डी. के इलेक्ट्रिकल विंग के पास ट्रांसफार्मर से अस्पताल जो जोड़ने वाली बिजली कि मैन लाइन में आग लग गयी ..लिहाज़ा दोपहर से पुरे अस्पताल कि बिजली गुल है...आनन् फानन में मरीजों को दुसरे अस्पतालों में ले जाया जा रहा है...सबसे पहले उन मरीजों को ले जाया जा रहा है जिनकी हालत गंभीर है..हार्ट के पैसेंट एलेंजीपी भेजा गया है...कैट्स कि गाड़ियों से केजुअलिटी, आईसीयू के मरीजों को भगवान महावीर. डीडीयू, एलेंजेपी अस्पतालों में रेफर किया गया है..गर्भवती महिलाएं बच्चे दुसरे अस्पताल जाने के लिए अम्बुलेंस का इन्तजार कर रहे थे..नर्सरी विंग में कुल 24 बच्चे है जिनमें चार कि हालत गंभीर थी जिन्हें संजय गाँधी अस्पताल भेजा गया...कहीं ओक्सिजन सिलेंडर कि कमी थी तो कहीं वैंटिलेटर कि...मरीजों को समझ नहीं आ रहा था कि माजरा क्या है..
............यह अंडर ग्राउंड केबल इतनी जल चुकी है कि इसे जल्द बदला जाना संभव नहीं है...पी.डब्लू.डी. के इजीनियर और अस्तपाल प्रशासन ने तीन जनरेटर का इंतजाम कर ग्राउंड फ्लोर पर मरीजों शिफ्ट करना शुरू किया..अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आठ दस घंटे में बिजली बहल हो जायेगी..पी.डब्लू.डी. के इंजिनियर युद्ध स्तर पर काम में लगे है...
....इस हॉस्पिटल पहले भी इस तरह कई बार आग लग चुकी है...पिछले साल भी गर्मियों में इसी तरह केबल में आग लगी थे जिसके चलाते करीब एक सप्ताह तक हॉस्पिटल से लाईट गुल रही...लाईट न होने से पानी का संकट भी खड़ा हो गया है..खैर लाईट तो देर सवेर आ ही जायेगी लेकीन यह सवाल जरूर राह जायेगा कि आये दिन इस तरह बिजली कि वजह से आये दिन आग क्यों लग रहे है...इस तरह कि स्थिति से दिल्ली के सरकारी अस्तपाल निपटने में कितने सक्षम है इसकी पोल तो इस घटना के बाद मची अफरातफरी ने खोल ही दी है.पी.डब्लू.डी को भी आईना देखा दिया है कि उसके काम कि क्वालिटी क्या है..?
अनिल अत्री दिल्ली ........................
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श्रीमती विजया मुले को उनकी सिेनेमा पुस्‍तक पर सर्वोत्‍तम सिनेमा लेखन का राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार

श्रीमती विजया मुले
Vijaya Mulay with the late Indian prime minister Indira Gandhi
आज प्रेस सूचना ब्‍यूरो के कार्यालय में वर्ष 2010 के लिए 58वें राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कारों 2010 की घोषणा की गई है। जिसमें श्रीमती विजया मुले   (अक्‍का के नाम से प्रख्‍यात) को उनकी पुस्‍तक From Rajahs and Yogis to Gandhi and Beyond: Images of India in International Films of the Twentieth Century  (English) के लिए सिनेमा पर सर्वोत्‍तम पुस्‍तक का राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। श्रीमती विजया मुले को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। सिने जगत में उनका नाम सब जानते हैं। इसलिए मैंने सोचा कि माननीय अक्‍का को मन से बधाई दूं और अपने हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत के साथियों से भी उनका परिचय करवा दूं। अक्‍का का जन्‍मदिन 16 मई 1921है। 
Vijaya Mulay on location with the Indian musician Gangubai Hangal

विज्ञान भवन, नई दिल्‍ली में आयोजित पुरस्‍कार समारोह में महामहिम राष्‍ट्रपति उन्‍हें 75 हजार रुपये नकद और स्‍वर्ण पदक तथा प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। 

नुक्‍कड़ परिवार की श्रीमती विजया मुले को हार्दिक बधाई। 

58वें राष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह 2010 के घोषित पुरस्‍कारों के पूरे विवरण के लिए यहां पर क्लिक कीजिए।
प्रशस्ति में कहा गया है कि 
Here is a work of rigorous film scholarship which took the author to many lands and consumed many years of her life. Written in a clear lucid style, the book evokes a panoramic view of India that perhaps was through the eyes of several filmmakers of foreign origin. What adds an extra dimension to the book is the author’s narration of her own life in films even as she is engaged in telling the larger events on and off screen.
Vijaya Mulay on location - Hampi, Karnataka
एक पहेली : श्रीमती विजया मुले की सुपुत्री का नाम बतलायें, वे सिने जगत से संबद्ध हैं।
58वें राष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह 2010 के घोषित पुरस्‍कारों के पूरे विवरण के लिए यहां पर क्लिक कीजिए।
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डॉ. महेश परिमल को मध्‍यप्रदेश का साहित्य अकादमी पुरस्कार : हिन्‍दी ब्‍लॉगर को मिलेंगे 21 हजार रुपये नकद




संवेदनाओं के पंखआज का सच नामक ब्लॉग के डॉ. महेश परमार परिमल का चयन मध्‍यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा घोषित दुष्यन्त कुमार पुरस्कार के लिए किया गया है। यह पुरस्‍कार उन्‍हें उनके ललित निबंधों की किताब लिखो पाती प्यार भरी के लिए दिया जाएगा। पुरस्‍कार के रूप में उन्‍हें 21 हजार दिए जाऍंगे। साहित्य अकादमी के निदेशक प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल ने बताया कि यह पुरस्‍कार वर्ष 2008 में प्रकाशित कृति के तहत प्रदेश के लेखक की पहली कृति के रूप में दिया जाएगा।
डॉ. महेश परिमल 32 वर्षों से पत्रकारिता में हैं। देश के सभी प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में उनके आलेखों का प्रकाशन होता रहता है। हिंदी और भाषाविज्ञान में एमए श्री परिमल ने रविशंकर विश्‍व विद्यालय से हिंदी समाचारपत्रों में प्रयुक्‍त शीर्षकों का भाषिक विश्‍लेषण विषय पर पीएचडी की है।
ब्‍लॉगर की दुनिया में एक जाना- पहचाना नाम है। उनके ब्‍लॉग संवेदनाओं के पंख में करीब 900 आलेख हैं। देश के सभी समाचार पत्रों में उनके आलेखों का प्रकाशन होता रहता है। श्री परिमल ने स्क्रिप्‍ट लेखन में भी हाथ आजमाया है। धारावाहिक चाचा चौधरी के कुछ एपिसोड का लेखन उन्‍होंने मुम्‍बई में रहकर किया है। जमीन से जुड़े श्री परिमल मूलत: छत्‍तीसगढ़वासी हैं। इसलिए मातृभाषा गुजराती के अलावा छत्‍तीसगढ़ी, उडि़या, बंगला, पंजाबी भाषा की समझ रखते हैं। लिखो पाती प्‍यार भरी, उनकी पहली कृति है।

नुक्‍कड़ परिवार की हार्दिक बधाई, ब्‍लॉगर की उन्‍नति है चहुं दिशा छाई।
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