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मीडिया पर केंद्रित रचना क्रम का अगला अंक, रचनाएं आमंत्रित
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पत्रकारिता अब क्यों नहीं रही एक आदर्श कॅरियर का विकल्प...?
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आओ साग बनाएं, खाएं और खिलाएं ।
एलेक्सा रैंकिंग और हिंदी ब्लॉग्स
विश्व की टॉप रैंक वाली कुछ साईट हैं:
| गूगल | रैंक 1 |
| फेसबुक | रैंक 2 |
| यु ट्यूब | रैंक 3 |
| याहू | रैंक 4 |
| ब्लॉगर | रैंक 5 |
| बैदू (baidu.com) | रैंक 6 |
| विकीपीडिया | रैंक 7 |
| विंडो लाइव | रैंक 8 |
| ट्विटर | रैंक 9 |
| QQ.com | रैंक 10 |
| MSN.com | रैंक 11 |
| गूगल इंडिया | रैंक 15 |
| लिंकेडीन | रैंक 16 |
| अमेज़न | रैंक 17 |
| वर्डप्रेस | रैंक 18 |
| ब्लॉग्स | (विश्व रैंकिंग) | (भारतीय रैंकिंग) | |
| 1. | हिन्दयुग्म | 303,928 | 32,039 |
| 2. | नुक्कड़ | 314,862 | 28,755 |
| 3. | महाजाल | 357,680 | 29,677 |
| 4. | ZEAL | 358,331 | 44,540 |
| 5. | देशनामा | 374,346 | 38,614 |
| 6. | तस्लीम | 384,187 | 40,379 |
| 7. | परिकल्पना | 408,493 | 44,606 |
| 8. | जनोक्ति | 424,433 | 39,105 |
| 9. | हिंदी टेक ब्लॉग | 426,603 | 41,593 |
| 10. | नज़रिया | 466,659 | 67,124 |
| 11. | छींटें और बौछारें | 507,638 | 42,542 |
| 12. | ज्ञान दर्पण | 519,244 | 45,954 |
| 13. | प्रेम रस | 547,605 | 60,725 |
| 14. | क़स्बा | 572,398 | 51,459 |
संगीता जी ने सजाई है गीता बेहद मनमोहक स्वरूप चर्चा का : वंदना जी खूब खुश हैं आज, कोई मिल गया
कुछ अब हैं
कुछ तब होंगे
जब होगी
उनकी चर्चा
हम सदैव
रहते हैं खुश
किसी की भी
हो चर्चा
मिलती है टिप्पणी
तो खुशी होती है
नहीं मिलती है
तो खुशी होती है
पसंद का
नहीं है चक्कर यहां
नहीं बनता है कोई
घनचक्कर यहां
पढ़ते हैं
पढ़ाते हैं
अच्छे विमर्श
सदा मन भाते हैं
संगीता जी ने सजाई है
मन सबके ही भाई है
लिंक सारे पढ़ लेना
मन आए तो
उन पर टिप्पणी
अवश्य कर देना।
कुछ कहना चाहते हैं तो यहां कहें रास्ता यह है
हिंदी पत्रकार या न्यूज़ रूम में राजनीति करने वाले पत्रकार
बौद्धिक संपदा पर जन्मजात स्वयंसिद्ध अधिकार रखनेवाले प्रिंट के पत्रकारों ने भी डीसी, टीसी तो छोड़िए, सिंगल कॉलम भी इस दिवस की नहीं समझा। कहीं कोई चर्चा नहीं कि क्या सोचकर पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी और आज हम कर क्या रहे हैं। ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी, तकवी शकंर पिल्ले, राजेंद्र माथुर, सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन अज्ञेय की ज़माने की पत्रकारिता की कल्पना करना मूर्खता होगी।
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स्टार न्यूज़ के दीपक चौरसिया को अंग्रेजी नहीं आती!
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स्टार न्यूज़ के खिलाफ न्यूज़ चैनलों के गढ़ फिल्म सिटी में नुक्कड़ नाटक
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17 दिन शेष है 18 वां दिन विशेष है
जिसे सजाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है,
हर कदम दृढ़ता के साथ बढाने की तैयारी है, क्योंकि-
अंतत: एंड्रायड हिन्दीमय हो ही गया :) हिन्दी ब्लागिंग की लाटरी
बड़ी मुश्किल से विंडोज़ आधारित मोबाइल फ़ोन में हिन्दी की समस्या हल हुई ही थी कि बाज़ार में एंड्रायड आधारित नए मोबाइल फ़ोन आने शुरू हो गए, इन एंड्रायड मोबाइल ने हिन्दीभाषी ब्लागरों की दिक़्कतें फिर बढ़ा दी क्योंकि इनमें जहां एक ओर हिन्दी पढ़ने के लिए मिनी ओपेरा-5 ब्राउज़र से काम चलाना पड़ रहा था वहीं दूसरी तरफ हिन्दी में टिप्पणी करना तो संभव ही नहीं था. पर अब वो दिन बीत गए (हालांकि लंबी-लंबी कहने में अभी काफी मेहनत है). कुछ समय से मैं एक ऐसा मोबाइल लेने की सोच रहा था जिसमें कम से कम ये ख़ूबियों तो हों ही जैसे:- कम से कम 4 इंच का कैपेस्टिव टचस्क्रीन, WiFi व 3G, कम से कम 5MP कैमरा, उसमें एंड्रायड का नवीनतम संस्करण हो, कम से कम 16MB कार्ड की सुविधा हो, 1 GB का प्रोसेसर हो, 512 MB रैम व इतनी ही रोम, 512 MB internal memory, स्मार्ट-स्लीक व किसी अच्छे ब्रांड का हो, जिसपर हिन्दी साइट व हिन्दी मेल तो पढ़ ही सकूं…. मुझे सोनी-एरिक्सन के एक्सपीरिया-आर्क में ये सभी ख़ूबियां तो मिली हीं, साथ ही कुछ चीज़ें तो मेरी आशा से भी अधिक मिलीं. इसमें अंड्रायड का 2.3.2 संस्करण है. इसमें हिन्दी पढ़ने के लिए मिनी ओपेरा-5 ब्राउज़र की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसके अपने डिफ़ाल्ट ब्राउज़र में हिन्दी की सभी साइट बिना किसी हील-हुज्जत के आराम से पढ़ी जा सकती हैं लेकिन हिन्दी में टिप्पणी करना अभी भी दूर की कौड़ी लगी क्योंकि इसमें अंग्रेज़ी के अलावा चाइनीज़ व जापानी कीबोर्ड की सुविधा तो है पर हिन्दी कीबोर्ड अभी भी नहीं है. हालांकि, यदि आप हिन्दी माध्यम चुनें तो सबकुछ अंग्रेज़ी के बजाय हिन्दी में पढ़ा जा सकता है. कीबोर्ड से गूगल में raja लिखें तो यह हिंदी में ‘राजा’ शब्द वाले वाक्यों के विकल्प उपलब्ध करवा कर हिन्दी साइटें ढूंढ देता है. हिन्दी में टिप्पणी करने के लिए इ-पंडित ब्लाग के श्रीश बेंजवाल शर्मा का टचनागरी साफ़्टवेयर तो बस छा ही गया. |
| ऊपर बाएं चित्र में एक्सपीरिया-आर्क पर टचनागरी का प्रयोग देखा जा सकता है. उसके वाद बस कापी कर टिप्पणी बाक्स में पेस्ट (यह रहा सबूत, दायां चित्र ) किया तो काम हो गया. भाई श्रीश जी का अनन्य आभार. बस यदि यह कीबोर्ड कुछ और यूं निम्नत: व्यवस्थित कर दें कि इसे प्रयोग करते हुए स्क्रीन बार-बार ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं न करना पड़े तो बस बल्ले-बल्ले ही हो गई समझो :) (पोस्ट स्क्रिप्ट -31.5.2011) यदि गूगल ट्रांस्लिट्रेशन या क्विलपैड जैसी साइट खोलें तो वर्चुअल कीबोर्ड एक्टीवेट नहीं होता है. लेकिन मैंने पाया कि अनूप शुक्ल जी की साइट पर पोस्ट के नीचे टिप्पणी बाक्स में टिप्पणी करने से पहले यदि " Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)" सक्षम कर दिया जाए तो वर्चुअल कीबोर्ड अपने आप ही एक्टीवेट हो जाता है और आप, 'भारत' लिखने के लिए 'bhaarat' टाइप कर हिन्दी में कनवर्ट करवा सकते हैं. इसके बाद इसे कापी कर पेस्ट करना भर बचता है. (पोस्ट स्क्रिप्ट -1.6.2011) एंड्रायड मार्केट से "MultiLing keyboard" डाउनलोड किया तो रही-सही क़सर भी पूरी हो गई. यह कीबोर्ड हिन्दी कीबोर्ड है. इसे इंस्टाल कर, किसी भी ब्लाग के टिप्पणी बाक्स में सीधे ही हिन्दी में टाइप किया जा सकता है. कापी पेस्ट की भी ज़रूरत जाती रही. आज मैं पूरी तरह से कह सकता हूं कि हां एंड्रायड अब पूरी तरह हिन्दी स्पोर्ट कर रहा है. हुर्रे :-)) -काजल कुमार |
एमएस वर्ड 2007 में कृतिदेव से यूनिकोड परिर्वतन का आसान तरीका

अम्बिकानंद सहाय ने पत्रकारों की इज्जत बचा ली
प्रभु चावला मीडिया में अपने आपको बहुत तुर्रमखां के रूप में पेश करते नहीं थकते थे। लेकिन रसूखदार, रंगीन और रसीले अमरसिंह के उनके सामने गें-गैं, फैं-फैं करते, लाचार, बेबस और दीन-हीन स्वरूप में करीब - करीब पूंछ हिलाते हुए नजर आते हैं। अमरसिंह धमकाते हैं,
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खबर जो हिंदी ब्लॉगिंग के लिए संजीवनी साबित हुई है आप भी पढ़ लीजिए
छपीं जो अखबार में
कार्यक्रम 30 अप्रैल 2011 का
पुस्तक लोकार्पण और
सम्मान पुरस्कार अर्पण समारोह
हिन्दी ब्लॉगिंग को दी नई ऊंचाईयां
आप भी ऊंचे आइये
असामाजिक बनाती सुरों से दोस्ती....!
एक हजार रुपये का मिलेगा एलपीजी घरेलू गैस सिलैंडर और पहचान लीजिए इस चित्र को
यह हाल प्रत्येक वस्तु का है। चाहे वो पेट्रोल हो, चीनी हो, चाय की पत्ती हो, एक कप चाय की कीमत हो, पैन हो, कलम हो, स्याही हो, बिजली की यूनिट हो, पानी की लिमिट हो, वैसे ऐसा भी नहीं है कि सब वस्तुएं महंगी ही लगती हैं। अब सस्ती वस्तुओं की सूची भी देख लीजिए। सैलरी सदा कम लगती है। सुख सदा कम लगता है। बस ये दो वस्तुएं ही गिना रहा हूं। बाकी आप टिप्पणियों में गिनवा दीजिए। सस्ती और महंगी दोनों।
भूल गए अब आप कि बात एलपीजी के घरेलू गैस सिलैंडर से शुरू हुई थी, जिसका मूल्य एक हजार रुपये हो रहा है। यह सपना नहीं, हकीकत है। पर ऐसे स्वप्नों को भी दु:स्वप्न ही कहा जाता है। वैसे महंगाई खुब खुश है। उसका विकास, देश का विकास भी है।
विकास सभी चाहते हैं। इधर टिप्पणियां कम हैं तो यह भी दुख का कारण है। पर इसके मूल में फेसबुक है। यह लिंक फेसबुक पर जितनी पसंद पा रहा है, टिप्पणियां पा रहा है। उतना यह पोस्ट नहीं। इससे फेसबुक तो खुश है परंतु ब्लॉग खुश नहीं है।
पर आपने अभी तक चित्र के बारे में नहीं बतलाया। इन दोनों चित्रों के मध्य 5 किलो का जो पैकेट रखा हुआ है। उसका मूल्य 50 वर्ष पहले क्या था, इसे आप बतलाइये, पूछ सकते हैं। मदद ले सकते हैं।
इसी तरह चित्र के दोनों ओर जो बैठे हुए हैं। उनके लिए भी मदद ले लेंगे। तो मुझे क्या पता चलेगा। इसलिए इसमें भी छूट है। पर चर्चा किस बात की हो रही है, इसमें कोई छूट नहीं है। चित्र किसने खींचा है, इसमें भी छूट नहीं है। पैकेट में क्या है, यूरिया है या ..... इसमें भी छूट नहीं है।
अब इसे इम्तहान भी मत मानिए।
पर बतला अवश्य दीजिए। परिणाम शीघ्र ही एक पुस्तक में आपके चित्र सहित प्रकाशित किए जाएंगे।
अम्बिकानंद सहाय से अमर सिंह का डर
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हिन्दी ब्लॉगर साथियों टिप्पणियां दो, टिप्पणियां नौ और टिप्पणियां नौ दो ग्यारह : फेसबुक पर हैं पाठक हजारों, सभी साथियों ब्लॉग पर भी पधारो
दोबारा से इस
कविता पर आएं
टिप्पणियां ग्यारह
और यहां
नौ दो ग्यारह
कहीं नहीं हैं बारह
देख लीजिए
जांच लीजिए
एक एक नेक पोस्ट
नेक मैं कह रहा हूं
आप क्या कहते हैं
टिप्पणियां क्यों
घट रही हैं
घटना नहीं
घटहां बन रही हैं
क्या कहना है आपका
विश्लेषण जनाब का
पढ़ नहीं रहे हैं
या नहीं भा रहे हैं
व्यंग्य
वैसे पसंद का
बटन दबा रहे हैं
फेसबुक पर वे
जिनकी ऊंगलियां
नहीं दे रही हैं दिखाई
वे भी तो हैं
पढ़ने वाले भाई
या हैं बहनें
पाठक सदा
सच्चे हैं गहने।
पसंद कर लेते हैं
फेसबुक पर
और टिप्पणी
देते हैं रहने।
देखा मुझे भी
फेसबुक पर
कर लिया पसंद
यूं तो सभी
हैं रजामंद
पर पसंद करने में
बहुत तीव्र
नहीं हैं मंद।
नेता जी ज़िंदाबाद ! नेता जी ज़िंदाबाद !!
फ़ैज़ और केदार जन्मशती अंतरराष्ट्रीय समारोह संपन्न
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द-फन और कफन

निर्णय लिया कि दफना दो। यह मलाल तो न रहेगा गोरे मन में कि काले रंग के आतंकवाद के प्रतीक को यूं ही घुलने मिलने के लिए छोड़ दिया। इसलिए सागर में द फन कर दिया। पानी में दफन करना पहली बार हुआ है। अमेरिका कई कीर्तिमान बना रहा है। इस बार का कीर्तिमान लादेन को दे दनादन दनदनाना ही नहीं बल्कि दफनाने का भी बनाया गया। गिनीज बुक वाले बुके लेकर ओबामा को तलाश रहे हैं। लेकिन ओबामा व्यस्त है। न बुक होना चाह रहा है, न बुके लेना चाह रहा है। पूरा पढ़ने के लिए क्लिक कीजिएगा
इन्द्रधुनष
सुश्री नेहा शरद की वेब पत्रिका
इन्द्रधुनष
पत्रिका का फ्लश वर्शन
http://indradhanushpatrika.com/indradhanush/index.html
हिन्दी ब्लॉगरों इसे पढि़एगा पढ़ लें, तो टिप्पणी जरूर कीजिएगा : मामला बिगड़ते पर्यावरण का और बचपनीय क्रूरता का भी है
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की समीक्षा जरूरी-अरविंद गौड़
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फ़ज़ल इमाम मल्लिक को ‘राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड’
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्रिका ‘सीमापुरी टाइम्स’ युवा लेखक व पत्रकार फ़ज़ल इमाम मल्लिक को उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड-२०११’ देने का फैसला लिया है। फ़ज़ल इमाम मल्लिक दिल्ली से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘जनसत्ता’ से जुड़े हैं। उन्होंने साहित्यिक पत्रिका ‘सनद’ और ‘ऋंखला’ का संपादन भी किया। इसके अलावा काव्य संग्रह ‘नवपल्लव’ और लघुकथा संग्रह ‘मुखौटों से परे’ का संपादन भी कर चुके हैं। दूरदर्शन के उर्दू चैनल से उन पर एक ख़ास कार्यक्रम ‘सिपाही सहाफत के’ प्रसारित भी हुआ है। सम्मान उन्हें दिल्ली के स्पीकर हॉल कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक समारोह में दिया जाएगा। समारोह जून के पहले हफ्ते में आयोजित किया गया है। अवार्ड के लिए विभिन्न क्षेत्रों से लोगो का चयन किया गया है। यह अवार्ड केंद्रीय कोयला मंत्री,भारत सरकार श्रीप्रकाश जायसवाल प्रदान करेंगे। फ़ज़ल इमाम मल्लिक के अलावा अवार्ड ग्रहण करने वाले प्रमुख लोगों में डॉ. ओ.पी.सिंह -पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य उ.प्र., डॉ.संजय महाजन- (स्वास्थ्य), सुश्री अलका लाम्बा-प्रेसिडेंट गो इंडिया संस्था- (समाज सेवा), डॉ.जगदीश गाँधी-प्रबंधक सी एम एस लखनऊ , श्री ओ.एस.यादव-प्रधानाचार्य केंद्रीय विधालय कानपूर (शिक्षा), श्री पंकज शुक्ल संपादक नई दुनिया- मुंबई , श्री चंडीदत्त शुक्ल-समाचार संपादक स्वाभिमान टाइम्स ,श्री अमलेंदु उपाध्याय-संपादक हस्तक्षेप.कॉम, सुश्री श्वेता रश्मि-प्रोडूसर महुआ न्यूज़ - (इलेक्ट्रानिक मीडिया) श्री पंकज चतुर्वेदी-संपादक नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली - (लेखन), श्री अमिताभ ठाकुर -(आईपीएस )-,श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच (तकनीक),श्री ललित गाँधी प्रेसिडेंट शातुरंजय ग्रुप , श्री सुनील सरदार संयोजक सत्य शोधक समाज (सामाजिक परिवर्तन),श्री राकेश राजपूत फिल्म अभिनेता (अभिनय),श्री एम.के.चौबे-महाप्रबंधक अदानी पॉवर प्रोजेक्ट राजस्थान - (बेस्ट मैनेजमेंट),श्री कमल कान्त तिवारी (बाल सेवा),श्री बिमलेश त्रिपाठी (साहित्य), तन्मय चतुर्वेदी-सा-रे-गा-मा-पा लिटिल चैम्प (टैलेंट हंट) शामिल है।
लखनऊ से विराज सोनी की रपट
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अन्नाभाई (मुन्नाभाई) का फेसबुक खाता खतरे में : दोबारा बनाने की हिम्मत नहीं है
खाता खतरे में
अनिल अत्तरी दिल्ली ..इस तरह कि स्थिति से दिल्ली के सरकारी अस्तपाल निपटने में कितने सक्षम है ???



फिर लगी रोहिणी के अम्बेडकर हॉस्पिटल में आग... पी.डब्लू.डी. के इलेक्ट्रिकल विंग के पास ट्रांसफार्मर से अस्पताल को जोड़ने वाली बिजली की मैन लाइन आग लगने से पूरे अस्तपाल कि बिजली गुल है..जिसके जल्द ठीक होने के आसार नहीं है..लिहाज़ा अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल है...मरीजों को दुसरे अस्तपाल में शिफ्ट किया जा रहा है...खुद अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बिजली बहाल होने में 10 घंटे लग सकतें है...रोहिणी के इस अस्पताल में आये दिन होने वाली आग लगने कि घटनाये और चोरियां चौकाने वाली है...
रोहिणी के अम्बेकर अस्पताल में आज फिर आग लगी...इस बार पी.डब्लू.डी. के इलेक्ट्रिकल विंग के पास ट्रांसफार्मर से अस्पताल जो जोड़ने वाली बिजली कि मैन लाइन में आग लग गयी ..लिहाज़ा दोपहर से पुरे अस्पताल कि बिजली गुल है...आनन् फानन में मरीजों को दुसरे अस्पतालों में ले जाया जा रहा है...सबसे पहले उन मरीजों को ले जाया जा रहा है जिनकी हालत गंभीर है..हार्ट के पैसेंट एलेंजीपी भेजा गया है...कैट्स कि गाड़ियों से केजुअलिटी, आईसीयू के मरीजों को भगवान महावीर. डीडीयू, एलेंजेपी अस्पतालों में रेफर किया गया है..गर्भवती महिलाएं बच्चे दुसरे अस्पताल जाने के लिए अम्बुलेंस का इन्तजार कर रहे थे..नर्सरी विंग में कुल 24 बच्चे है जिनमें चार कि हालत गंभीर थी जिन्हें संजय गाँधी अस्पताल भेजा गया...कहीं ओक्सिजन सिलेंडर कि कमी थी तो कहीं वैंटिलेटर कि...मरीजों को समझ नहीं आ रहा था कि माजरा क्या है..
............यह अंडर ग्राउंड केबल इतनी जल चुकी है कि इसे जल्द बदला जाना संभव नहीं है...पी.डब्लू.डी. के इजीनियर और अस्तपाल प्रशासन ने तीन जनरेटर का इंतजाम कर ग्राउंड फ्लोर पर मरीजों शिफ्ट करना शुरू किया..अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आठ दस घंटे में बिजली बहल हो जायेगी..पी.डब्लू.डी. के इंजिनियर युद्ध स्तर पर काम में लगे है...
....इस हॉस्पिटल पहले भी इस तरह कई बार आग लग चुकी है...पिछले साल भी गर्मियों में इसी तरह केबल में आग लगी थे जिसके चलाते करीब एक सप्ताह तक हॉस्पिटल से लाईट गुल रही...लाईट न होने से पानी का संकट भी खड़ा हो गया है..खैर लाईट तो देर सवेर आ ही जायेगी लेकीन यह सवाल जरूर राह जायेगा कि आये दिन इस तरह बिजली कि वजह से आये दिन आग क्यों लग रहे है...इस तरह कि स्थिति से दिल्ली के सरकारी अस्तपाल निपटने में कितने सक्षम है इसकी पोल तो इस घटना के बाद मची अफरातफरी ने खोल ही दी है.पी.डब्लू.डी को भी आईना देखा दिया है कि उसके काम कि क्वालिटी क्या है..?
अनिल अत्री दिल्ली ........................
श्रीमती विजया मुले को उनकी सिेनेमा पुस्तक पर सर्वोत्तम सिनेमा लेखन का राष्ट्रीय पुरस्कार
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| श्रीमती विजया मुले |
![]() |
| Vijaya Mulay with the late Indian prime minister Indira Gandhi |
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| Vijaya Mulay on location with the Indian musician Gangubai Hangal |
विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित पुरस्कार समारोह में महामहिम राष्ट्रपति उन्हें 75 हजार रुपये नकद और स्वर्ण पदक तथा प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे।
नुक्कड़ परिवार की श्रीमती विजया मुले को हार्दिक बधाई।
58वें राष्ट्रीय फिल्म समारोह 2010 के घोषित पुरस्कारों के पूरे विवरण के लिए यहां पर क्लिक कीजिए।
प्रशस्ति में कहा गया है कि
Here is a work of rigorous film scholarship which took the author to many lands and consumed many years of her life. Written in a clear lucid style, the book evokes a panoramic view of India that perhaps was through the eyes of several filmmakers of foreign origin. What adds an extra dimension to the book is the author’s narration of her own life in films even as she is engaged in telling the larger events on and off screen.
| Vijaya Mulay on location - Hampi, Karnataka |
58वें राष्ट्रीय फिल्म समारोह 2010 के घोषित पुरस्कारों के पूरे विवरण के लिए यहां पर क्लिक कीजिए।
डॉ. महेश परिमल को मध्यप्रदेश का साहित्य अकादमी पुरस्कार : हिन्दी ब्लॉगर को मिलेंगे 21 हजार रुपये नकद

संवेदनाओं के पंख व आज का सच नामक ब्लॉग के डॉ. महेश परमार परिमल का चयन मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा घोषित दुष्यन्त कुमार पुरस्कार के लिए किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें उनके ललित निबंधों की किताब लिखो पाती प्यार भरी के लिए दिया जाएगा। पुरस्कार के रूप में उन्हें 21 हजार दिए जाऍंगे। साहित्य अकादमी के निदेशक प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल ने बताया कि यह पुरस्कार वर्ष 2008 में प्रकाशित कृति के तहत प्रदेश के लेखक की पहली कृति के रूप में दिया जाएगा।
















