हिंदी चिट्ठाकारों ने विश्‍व पुस्‍तक मेले में मचा दिया है धमाल : प्रत्‍येक पुस्‍तक का मूल्‍य सिर्फ 99 रुपये : कल यानी सोमवार 27 फरवरी को होगा 7 पुस्‍तकों का विमोचन : आप भी इस इतिहास के साक्षी बनिए

पुस्‍तक का आवरण चित्र
आप देख चुके हैं
इसे रचनात्‍मक अभिव्‍यक्ति दी है
प्रख्‍यात आवरण चित्रकार
श्री देव प्रकाश चौधरी ने
जिनका ब्‍लॉग का लिंक यह है।

भूमिका लिखी है
व्‍यंग्‍य यात्रा के सुविख्‍यात संपादक
डॉ. प्रेम जनमेजय ने
जिनके हिंदी चिट्ठे का पता यह है।

व्‍यंग्‍य लिखे हैं
कुछ कलम ने
कुछ कीबोर्ड ने
करतब दिखलाय है
कीबोर्ड के खटरागी की ऊंगलियों ने
उनके मानस के निर्देश पर
जिनका चित्र व परिचय
सबसे पीछे के  आवरण पर
प्रकाशित है।
डॉ. शेरंजंग गर्ग 

विमोचन प्रगति मैदान में सोमवार 27 फरवरी 2012 को 3.00 बजे हॉल नंबर 6, सम्‍मेलन कक्ष संख्‍या 2 में वरिष्‍ठ व्‍यंग्‍य रचनाकार-साहित्‍यकार डॉ. शेरजंग गर्ग जी के कर-कमलों से संपन्‍न होगा

और ....
सबसे महत्‍वपूर्ण जानकारी
पुस्‍तक की प्रति का मूल्‍य सिर्फ 99 रुपये है
प्रकाशक हैं
ज्‍योतिपर्व प्रकाशन 
जिनके सभी प्रकाशन
रुपये 99 केवल में ही उपलब्‍ध हैं
और पेज संख्‍या है
100 से लेकर 200 पेज तक।

खुश हो जाओ हिंदी वालों
चिट्ठाकारों ने प्रकाशन शुरू करके
पुस्‍तकें आपकी जेब की पहुंच में लाने जैसा
क्रांतिकारी कदम उठा दिया है

क्‍या अब भी आप सोचेंगे
कि पसंद आएं किताब तो खरीदें
या न खरीदें ?

22 टिप्‍पणियां:

  1. अविनाशजी, पुस्तक लोकार्पण के लिए अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं। शायद बुधवारको आपकी किताबें देखने का मौका मिले। उसदिन अपने विभाग की एक किताब के लोकार्पण के सिलसिले में दोपहर बाद वहां मेले में जाना होगा। किताब की कीमत हिंदी पाठक के लिए जरूर मायने रखती है। अच्छासाहित्य कम/उचित दाम पर मिले तो लोग जरूर खरीगकर पढ़ना चाहेंगे। पिर से बधाई।

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    1. हाल नंबर 10-11 में ज्‍योतिपर्व प्रकाशन का स्‍टाल संख्‍या एस-1/3 है। पुस्‍तक बाद में वहीं पर उपलब्‍ध होगी। आप विमोचन कार्यक्रम में शामिल होतीं तो बहुत अच्‍छा लगता लेकिन आप बाद में आकर पुस्‍तक खोज लेंगी, यह जानकर और भी अच्‍छा लगा। आपकी राय से शत प्रतिशत सहमत अनुराधा जी।

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  2. lekhak ko meri or se bahut saari shubkamnye hamari bhi 2 pustak pustak mele men hai eak meri"" "sathotari gajal men vidroh ke svar" dusari kamboj ji or meri tanka sangrha- "bhav kalash".

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    1. आपकी दी हुई जानकारी के लिए आभारी हूं भावना जी। मेरे साथ ही शुभकामनाओं के हकदार ज्‍योतिपर्व प्रकाशन भी हैं जो कि प्रत्‍येक पुस्‍तक 99 रुपये में उपलब्‍ध करा रहे हैं। हिंदी जगत में पुस्‍तकों के मूल्‍य में क्रांति लाने की मुहिम चला रहे हैं।

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  3. अच्छे साहित्य की ज्यादा कीमतें भी पाठकों को दूर रखती हैं ...
    सद्प्रयास और प्रकाशन के लिए बधाई और शुभकामनायें !

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  4. इसलिए हिंदी चिट्ठाकर-प्रकाशक द्वारा किया गया यह कार्य स्‍तुत्‍य है। आइए सब मिलकर इन्‍हें सफल बनाएं। इस सच्‍ची वाणी को सबके मन तक पहुंचाएं।

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  5. बहुत - बहुत बधाई और शुभकामनायें |

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  6. बहुत-बहुत बधाई अविनाश जी और आभार ज्योति-पर्व प्रकाशन का.

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  7. 99 रु. - इतने कम मूल्य में कोई भी पुस्तक! क्या डाक से मंगाने पर भी कोई अतिरिक्त शुल्क लगेगा?

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    1. मतलब यह समझा जाए कि डाक खर्चा अलग। उसका जिक्र ही न किया जाए, इसका मतलब इसी में शामिल समझें। अगर ऐसा नहीं होता तो अरुण जी यह अवश्‍य बतलाते कि दिल्‍ली एनसीआर भेजने का अमुक खर्च और हैदराबाद, पंजाब इत्‍यादि शहरों में और विदेशों में भेजने का कनाडा, अमेरिका, रुस इत्‍यादि के लिए इतना खर्च। अच्‍छा है कि डाक खर्चा को अलग रखा गया है। यह प्रकाशक की जीवटता का प्रतीक है, हम इसका सम्‍मान करते हैं।

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  8. badhai Avinash ji aapko bhi aur jyoti parv prakashan ko bhi.achchi pustakon ka mulya kam hoga to pathak apani pasand ki pustak jarur kharidenge .

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    1. पसंद तो पवित्रा जी, पढ़ने के बाद ही पता लगती है। हां, देखने के बाद लुक कैसा है, यह देखते ही पता लग जाता है।

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  9. अविनाश जी , गुरुदेव , बधाई स्वीकार करे. दिल से.

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    1. दिल से डायरेक्‍ट दिल तक। शुक्र है दिल से दिल तक के संचार का कोई बिल नहीं आता है।

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  10. अविनाश जी! शुक्रवार को आप दोपहर में मेले में होंगे?

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  11. अविनाश जी बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं

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